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विशाखापत्तनम में बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास शुरू

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‘मिलन विलेज’ का उद्घाटन

– हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को बढ़ावा देना है अभ्यास का मकसद

नई दिल्ली, 16 फरवरी (हि.स.)। भारतीय नौसेना का बहुराष्ट्रीय अभ्यास ‘मिलन’ सिटी ऑफ डेस्टिनी विशाखापत्तनम में शुरू हो गया है, जो 25 फरवरी तक चलेगा। पूर्वी नौसेना कमान ने इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा लेने वाली नौसेनाओं के लिए ‘मिलन विलेज’ बसाया है, जिसका उद्घाटन फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने किया। इस समुद्री अभ्यास का मकसद हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

नौसेना के मुताबिक ‘मिलन विलेज’ को पिछले अनुभवों को देखते हुए बनाया गया है, जहां इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा लेने आये 70 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों और नौसेना के लोगों को दोस्ती और भाईचारे का माहौल मिलेगा। यह ‘मिलन विलेज’ विभिन्न देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक लेन-देन के लिए एक हब के तौर पर काम करेगा, जिससे व्यावसायिक दायरे से आगे बढ़कर जुड़ाव मुमकिन होता है। यहां अलग-अलग तरह की भारतीय विरासत और परंपरा की एक गहरी और गहरी झलक दिखेगी। यहां स्थानीय कलाकारों के पारंपरिक लोक नृत्य और भारत की जीवंत कलात्मक विरासत को दिखाने वाले कल्चरल ग्रुप होंगे।

‘मिलन विलेज’ में नौसेना के यादगार सामान, हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम प्रोडक्ट्स के कई तरह के स्टॉल लगाए गए हैं। इसके अलावा गांव में आने वाले लोगों को भारत के अलग-अलग तरह के क्षेत्रीय स्वाद और जायके मिलेंगे। पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने बताया कि ‘मिलन विलेज’ भाईचारे और कल्चरल जुड़ाव की भावना को दिखाता है, जिससे व्यावसायिक उद्देश्य पूरे होंगे। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम में नौसेना की ओर से किए जा रहे कई तरह के कार्यों और कार्यक्रमों की भी यहां शुरुआत होगी। इस दौरान समुद्री अभ्यास ‘मिलन’, इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और नौसेना प्रमुखों के कॉन्क्लेव के साथ-साथ भारत के ऐतिहासिक समुद्री मेलजोल का एक अहम हिस्सा बनेगी।

नौसेना के कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास ‘मिलन’ दुनिया भर की नौसेनाओं को एक साथ लाएगा, ताकि इंटरऑपरेबिलिटी, समुद्री डोमेन अवेयरनेस और कलेक्टिव रिस्पॉन्स क्षमताओं को मजबूत किया जा सके। अभ्यास के बंदरगाह और समुद्री चरण में एंटी-सबमरीन वारफेयर, एयर डिफेंस, सर्च एंड रेस्क्यू और कोऑपरेटिव सिक्योरिटी मिशन जैसे मुश्किल समुद्री ऑपरेशन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे फ्री, ओपन, इनक्लूसिव और रूल्स-बेस्ड समुद्रों के लिए एक साझा कमिटमेंट को मजबूत किया जाएगा। यह आपसी सांस्कृतिक लेन-देन, दोस्ती के पुल बनाने और समुद्री साझेदारी बनाने के लिए हिस्सा लेने वाली नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।———-

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