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लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस

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नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर सदन के संचालन में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। इस पर 116 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि इस पर तृणमूल कांग्रेस के किसी भी सांसद का हस्ताक्षर नहीं है। हस्ताक्षर करने वाले 116 सांसदों में राहुल गांधी का भी नाम नहीं है।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने पत्रकारों को बताया कि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत दिया गया है। नोटिस पर 116 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), द्रविण मुनेत्र कड़गम (द्रमुक), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य शामिल हैं। हालांकि गोगोई ने इस नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के हस्ताक्षर नहीं होने से जुड़े सवाल पर चुप्पी साध ली।

नोटिस में कहा गया है कि लोकसभा स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोक रहे हैं। अनुच्छेद 94(सी) के तहत नोटिस दिया गया है क्योंकि स्पीकर खुलेआम पक्षपात कर रहे हैं। इसके साथ ही विपक्ष के आठ सांसदों को मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया है; उन्हें केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किया जा रहा है।नोटिस में लिखा गया है कि कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति ही नहीं दी गई, जबकि यह उनका मौलिक अधिकार है।नियमों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद प्रस्ताव पेश करने और इस पर चर्चा के लिए तारीख तय की जाती है, जो नोटिस की तिथि से कम से कम 14 दिन बाद होती है। आमतौर पर प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिनों के भीतर बहस और मतदान होता है। जब प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।

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