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 दिल्ली स्टेशन भगदड़ मामले में जवाब न देने पर रेलवे को हाईकोर्ट की फटकार

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नई दिल्ली, 07 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल प्रयागराज कुंभ के समय 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के मामले पर अभी तक जवाब दाखिल नहीं करने पर रेलवे प्रशासन को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक साल बीतने के बावजूद रेलवे प्रशासन ने इस पर जवाब दाखिल नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि आप कोर्ट को हल्के में मत लीजिए। आप चाहते है कि हम कोई गंभीर कदम उठायें। बाद में कोर्ट ने रेलवे प्रशासन को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी, 2025 को रेलवे को नोटिस जारी करके कहा था कि आप अधिकतम यात्रियों और प्लेटफार्म टिकट की बिक्री तय करने पर विचार करें। कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया था कि वे ऐसे भगदड़ से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराएं। सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा था कि इसे एक प्रतिकूल तरीके से नहीं लिया जाए, रेलवे नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है।

सुनवाई के दौरान एसजी ने कहा था कि हादसे के दिन अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो गई थी। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिया था कि याचिका में उठाए गए सवालों पर रेलवे उच्च स्तर पर विचार करेगा। तब कोर्ट ने कहा था कि याचिका केवल हालिया भगदड़ से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि रेलवे कंपार्टमेंट के अंदर यात्रियों की अधिकतम संख्या और प्लेटफार्म टिकट के कानूनी प्रावधानों से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने कहा था कि अगर कानूनी प्रावधानों को लागू किया गया होता तो शायद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ की नौबत नहीं आती।

यह याचिका लॉ छात्रों के एक समूह अर्थ विधि ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील आदित्य त्रिवेदी और शुभि पास्टर ने कहा था कि रेलवे प्रशासन ने रेलवे एक्ट की धारा 57 और 147 का उल्लंघन किया है। धारा 57 में कहा गया है कि रेलवे प्रशासन को हर रेलवे कंपार्टमेंट में यात्रियों की अधिकतम संख्या तय करनी होगी। धारा 147 के तहत किसी व्यक्ति के पास यात्री टिकट नहीं होने की स्थिति में प्लेटफार्म टिकट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। याचिका में कहा गया है कि प्रयागराज कुंभ के लिए रेलवे को इन नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

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