हालैंड से वाराणसी पहुंचे प्रवासी परिवार को अपने पूर्वजों के गांव की तलाश

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– 1909 के अभिलेखों के सहारे चौबेपुर क्षेत्र में खोज, थाने में दिया प्रार्थना पत्र

वाराणसी, 23 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के चौबेपुर क्षेत्र में हालैंड से आया एक प्रवासी परिवार अपने पूर्वजों के गांव और रिश्तेदारों की तलाश में भटक रहा है। वर्ष 1909 के पुराने अभिलेखों के आधार पर भारत पहुंचे इस परिवार को अब तक अपने पुरखों के गांव का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। खोज में सफलता न मिलने पर परिवार ने सहयोग की उम्मीद में चौबेपुर थाने में प्रार्थना पत्र भी सौंपा है।

परिवार के मुखिया वेद प्रकाश विजय ने ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को बताया कि उनके दादा दुक्खी को वर्ष 1909 में अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता (कोलकाता) से सूरीनाम ले जाया गया था। उनके दादा की शादी मंगनी मनराज से हुई थी, जबकि दादी जहाज पर कार्य करती थीं। परिवार को हाल में मिले पुराने अभिलेखों में उनके दादा का पता “बनारस, थाना चौबेपुर, ग्राम बाबड़पुर” दर्ज है। इसी दस्तावेज के आधार पर वे अपनी पत्नी चंद्रावती और बेटियों शिवानी व पूजा के साथ चौबेपुर पहुंचे हैं।

परिवार ने चौबेपुर क्षेत्र में बाबड़पुर गांव की व्यापक खोज की। इसके अलावा चोलापुर, एयरपोर्ट क्षेत्र तथा आसपास के कई गांवों में भी जानकारी जुटाई, लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी। मंगलवार को परिवार ने बहरामपुर, छितमपुर, बाबतपुर नियार समेत कई गांवों में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बुजुर्गों से मुलाकात कर जानकारी ली। बावजूद इसके, बाबड़पुर नामक गांव का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल सका।

वेद प्रकाश विजय का मानना है कि समय के साथ गांव का नाम बदल गया होगा या वह किसी अन्य गांव में विलीन हो गया हो। परिवार ने बताया कि बुधवार को वे जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से मिलकर प्रशासनिक सहयोग की मांग करेंगे और जब तक पूर्वजों की जड़ों का पता नहीं चल जाता, तब तक तलाश जारी रखेंगे।

इस दौरान परिवार ने प्रवासी भारतीयों के संघर्ष और पीड़ा पर आधारित एक भावनात्मक गीत भी प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग भावविभोर हो उठे। अपने पूर्वजों से जुड़ने की यह कोशिश स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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