महाराष्ट्र में मुस्लिम का पांच फीसदी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण खत्म

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मुंबई, 18 फरवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने मुसलिम समुदाय का पांच फीसदी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण खत्म करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के इस निर्णय पर विपक्ष ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। पिछली कांग्रेस-राकांपा सरकार ने मराठों को 16 परसेंट और मुसलमानों को पांच परसेंट कोटा देने के लिए एक ऑर्डिनेंस जारी किया था।

उल्लेखनीय है कि 2014 में जब कांग्रेस-राकांपा सरकार ने मुसलिम समाज को पांच फीसदी और मराठा समाज को १६ फीसदी आरक्षण दिए जाने का अध्यादेश जारी किया था। लेकिन मराठा आरक्षण कानूनी चुनौतियों की वजह से अदालत ने खत्म कर दिया था। इसी तरह मुसलिम आरक्षण को बॉम्बे उच्च अदालत में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था और अदालत ने कहा था कि धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता लेकिन इस अध्यादेश के जारी होने के 12 साल बाद देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने मुस्लिम समाज को नौकरी और शिक्षा में दिया जाने वाला पांच फीसदी आरक्षण खत्म कर दिया है। नए शासनादेश में कहा गया है कि सरकार ने 2014 के पहले के फैसलों और सर्कुलर को रद्द कर दिया है और स्पेशल बैकवर्ड कैटेगरी में मुसलमानों को जाति और नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट जारी करना बंद कर दिया है।

विपक्ष ने इस कदम की आलोचना की है, और सरकार के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “हम इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं। 2014 में शिक्षा और नौकरी के लिए घोषित 5 फीसदी रिज़र्वेशन के बारे में पॉज़िटिव कदम उठाने के बजाय, सरकार ने बस पुराने प्रोसेस को खत्म कर दिया है। हाई कोर्ट के अंतरिम स्टे और ऑर्डिनेंस के पुराने हो जाने का हवाला देते हुए, सरकार ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर गहरा आघात किया है।”

महाराष्ट्र एमआईएम अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार का फैसला मुसलमानों के लिए “रमज़ान का तोहफ़ा” है। उन्होंने कहा, “हालांकि, हम फिर भी अपने लडक़े-लड़कियों से कहेंगे कि वे पढ़ाई न छोड़ें। अगर इंडिया पढ़ेगा, तो इंडिया तरक्की करेगा।” इम्तियाज जलील ने यह भी कहा कि मुसलिम समाज के मौलना मौलवी चुनाव के समय कुकुरमुत्ते की तरह उग आते हैं और अमुक पार्टी को वोट दो की अपील करते हैं। इन सभी मौलवी-मौलानाओं को अब मुसलिम समाज का नेतृत्व कर समाज को फिर से आरक्षण दिलाना चाहिए।

ट्रांसजेंडर और समलैंगिक जोड़े को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की अनुमति

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–हाईकोर्ट का पुलिस सुरक्षा देने का आदेश

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रांसजेंडर और एक अन्य व्यक्ति के बीच लिव-इन रिलेशनशिप को संरक्षण प्रदान करते हुए, उनके परिवार वालों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उनके जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संविधान के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को सर्वोपरि बताते हुए, पुलिस को जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का भी आदेश दिया है।

मामला मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र से जुड़ा है। दोनों याची बालिग हैं और उन्होंने स्वेच्छा से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला लिया है। याचियों का कहना था कि परिवार से ही उनकी जान-माल को खतरा है। स्थानीय पुलिस से सुरक्षा की मांग की, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की शरण ली।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है और परिवार या समाज इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018) मामले का हवाला दिया, जिसमें समलैंगिक सम्बंधों को मान्यता देते हुए आईपीसी की धारा 377 समाप्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सम्बंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन नहीं करते। साथ ही, अकांक्षा बनाम यूपी राज्य (2025) मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने पुष्टि की कि शादी न होने या शादी न कर पाने की स्थिति में भी जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया-‘एक बार जब कोई बालिग व्यक्ति अपना जीवन साथी चुन लेता है, तो परिवार या किसी अन्य को उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है। राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन स्वतंत्रता की रक्षा करे।’ कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर याचिकाकर्ताओं के शांतिपूर्ण जीवन में कोई बाधा आती है, तो वे पुलिस कमिश्नर या एसएसपी से सम्पर्क करें। पुलिस तुरंत सुरक्षा प्रदान करेगी। अगर दस्तावेजी सबूत न हों, तो पुलिस ऑसिफिकेशन टेस्ट या अन्य कानूनी प्रक्रिया अपनाकर उम्र सत्यापित कर सकती है। हालांकि, अगर कोई अपराध दर्ज नहीं है, तो पुलिस जबरन कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

ट्रांसजेंडरों से मेडिकल टेस्ट कराने की मांग सम्बंधित प्राधिकारी नहीं कर सकते: हाईकोर्ट

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–जिलाधिकारी के जारी प्रमाणपत्र ही उनकी पहचान का निर्णायक प्रमाण

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि पासपोर्ट में संशोधन के लिए ट्रांसजेंडरों से मेडिकल टेस्ट कराने की मांग सम्बंधित प्राधिकारी नहीं कर सकते। जिलाधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र ही उनकी पहचान का निर्णायक प्रमाण है।

संसद ने ऐसे लोगों के सामाजिक बहिष्कार के कारण विशेष कानून बनाया है, इसके लागू होने के बाद अब वह भी गरिमा और समान अधिकारों के हकदार हैं। उन्हें अपनी पहचान छिपाने की आवश्यकता नहीं है, जो उनके जन्मजात व्यक्तित्व के विपरीत है। कुशल आर गोयल की याचिका निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।

याची ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत जिलाधिकारी से प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। इसमें उसकी पहचान पुरुष के रूप में है, इसके बावजूद पासपोर्ट अधिकारी ने मेडिकल टेस्ट कराने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा, प्राप्त आवेदन के साथ चिकित्सा अधीक्षक या मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर और व्यक्तिगत संतोष के बाद जिलाधिकारियों को लिंग परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी करना आवश्यक है। याची को पासपोर्ट प्राधिकारी के समक्ष कोई अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। उसकी पहचान और लिंग के प्रमाण के लिए केवल जिलाधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र पर कार्य करना चाहिए।

इस प्रकरण से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची का जन्म महिला के रूप में हुआ था, लेकिन बाद में माता-पिता ने पहचान लिया कि वह ट्रांसजेंडर हैं। याची ने 2019 के अधिनियम के तहत जिलाधिकारी से प्रमाण पत्र प्राप्त किया, इसमें उसकी पहचान पुरुष के रूप में दर्ज है। उसने सभी औपचारिकताओं को पूरा किया था, इसके बावजूद 23 जून 2025 को पासपोर्ट अधिकारियों ने निर्देश दिया कि वह उनके पैनल के किसी क्लीनिक में पुनः चिकित्सा परीक्षण कराए। कोर्ट ने कहा, विवादित आदेश विशेष अधिनियम के तहत जारी प्रमाण पत्र का उल्लंघन है।

अधिनियम में स्पष्ट है कि कोई भी प्रतिष्ठान रोजगार, भर्ती, पदोन्नति और अन्य सम्बंधित मामलों में ट्रांसजेंडर से भेदभाव नहीं करेगा। प्रतिवादियों की तरफ से कहा गया था कि मांग अनुचित नहीं है। याची को जन्म प्रमाण पत्र में अपना नाम और लिंग बदलना होगा ताकि पासपोर्ट में आवश्यक संशोधन किया जा सके। कोर्ट ने कहा, आपत्तियां बिना ठोस कानूनी आधार हैं। विशेष अधिनियम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया था। वह अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण ऐसे शरीर में पैदा हुए थे जो उनकी पहचान के अनुरूप नहीं थे।

हाईकोर्ट ने बीएचयू की प्रोफेसर चयन प्रक्रिया रद्द की

नई समिति गठित करने का आदेश

प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कला संकाय के नृत्य विभाग में प्रोफेसर पद पर हुई चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है।

खंडपीठ ने 16 फरवरी 2026 को सुनाए अपने फैसले में कहा कि चयन समिति का गठन विश्वविद्यालय नियमों के विपरीत था और विशेषज्ञों की नियुक्ति में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अदालत ने सम्बंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति भी निरस्त कर दी।

मामला डॉ. दीपांविता सिंह रॉय की याचिका से जुड़ा है, जो कथक की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कार्यकारी परिषद के अभाव में कुलपति ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर चयन समिति बनाई, जबकि यह मामला नियमित प्रमोशन का था और इसे आपात स्थिति नहीं माना जा सकता।

याचिका में यह भी कहा गया कि चयन समिति में शामिल दो विशेषज्ञ भरतनाट्यम पृष्ठभूमि की थीं, जबकि पद कथक विशेषज्ञ के लिए था। एक अन्य सदस्य के पास प्रोफेसर स्तर की आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी नहीं थी। साथ ही, एक अभ्यर्थी पर बाहरी विशेषज्ञों की सूची तैयार करने में भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए हितों के टकराव की बात उठाई गई।

विश्वविद्यालय ने दलील दी कि नियुक्ति “नृत्य विभाग” के लिए थी, किसी एक विधा के लिए नहीं। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रमोशन आपातकालीन मामला नहीं होता और चयन समिति में उसी विषय के विशेषज्ञ होना अनिवार्य है।

अदालत ने कुलपति को दो महीने के भीतर नई चयन समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें केवल कथक विशेषज्ञ शामिल होंगे और सम्बंधित अभ्यर्थियों को समिति गठन प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

जिनेवा वार्ता बेनतीजा: रूस–यूक्रेन शांति बातचीत में नहीं निकला ठोस हल

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जिनेवा, 18 फरवरी (हि.स.)। जिनेवा में अमेरिका की मध्यस्थता से हुई रूस–यूक्रेन शांति वार्ता का ताजा दौर बिना किसी बड़े नतीजे के खत्म हो गया। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष अगले सप्ताह अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश करने वाला है, ऐसे में इस वार्ता से उम्मीदें थीं, लेकिन प्रगति सीमित रही।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने जेनेवा में बातचीत के बाद कहा कि सबसे जटिल मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन सकी। उनके मुताबिक कुछ प्रारंभिक आधार जरूर तैयार हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों की स्थितियां अभी अलग-अलग हैं और बातचीत “आसान नहीं” रही।

जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वी यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले इलाकों की स्थिति और जापोरिजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र का भविष्य सबसे विवादित मुद्दों में शामिल हैं। यह परमाणु संयंत्र फिलहाल मॉस्को के नियंत्रण में है।

वार्ता का दूसरा दिन महज दो घंटे में समाप्त हो गया, जिसे सीमित प्रगति का संकेत माना जा रहा है। इससे यह भी साफ हुआ कि किसी व्यापक समझौते तक पहुंचना अभी दूर की बात है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले दावा कर चुके हैं कि वे सत्ता में आते ही पहले दिन युद्ध खत्म कराने की कोशिश करेंगे। हालांकि जमीनी हालात और कूटनीतिक मतभेद फिलहाल समाधान को जटिल बनाए हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और परमाणु सुविधाओं जैसे मुद्दों पर स्पष्ट सहमति नहीं बनती, तब तक किसी निर्णायक शांति समझौते की संभावना कम ही रहेगी।

हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘द वार्डरोब’ का पोस्टर आया सामने

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24 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी

अभिनेता रजनीश दुग्गल एक बार फिर डर के साए में दर्शकों का मनोरंजन करने को तैयार हैं। सुपरनैचुरल फिल्म ‘1920’ से पहचान बनाने वाले रजनीश इससे पहले ‘सांसें’ और ‘फिर’ जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। अब उनकी नई हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘द वार्डरोब’ चर्चा में है, जिसका पोस्टर और रिलीज तारीख जारी कर दी गई है। फिल्म का निर्देशन सौरभ चौबे ने किया है, जबकि निर्माण ज्योति राज गावली के बैनर तले हुआ है।

जारी पोस्टर में एक दरवाजे के पीछे छिपी डरावनी शक्ल वाली लड़की की झलक दिखाई गई है, जो फिल्म के रहस्य और भय का संकेत देती है। पोस्टर ने दर्शकों के बीच उत्सुकता और रोमांच बढ़ा दिया है। निर्माताओं का दावा है कि फिल्म में अलौकिक घटनाओं और मनोवैज्ञानिक डर का संयोजन देखने को मिलेगा।

फिल्म में रजनीश के साथ अभिनेत्री दिव्या अग्रवाल मुख्य भूमिका में नजर आएंगी, जो बिग बॉस ओटीटी की पहली विजेता रह चुकी हैं। ‘द वार्डरोब’ 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अलौकिक हॉरर-थ्रिलर शैली की यह फिल्म दर्शकों को रोमांच और डर का नया अनुभव देने का दावा कर रही है।

रमजान का चांद नजर आया, 19 फरवरी को पहला रोजा

नई दिल्ली, 18 फ़रवरी (हि.स.)। रमज़ान-उल-मुबारक महीने का चांद आज बुधवार को दिखाई देने का ऐलान किया गया है। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाके में सुबह से ही मौसम खराब होने की वजह से चांद को लेकर पहले से ही असंमजस की स्थिति थी और चांद निकलने की सूचना नहीं मिली है। इस बीच देश के कई भागों में चांद नजर आने की सूचना मिली। इसके बाद जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने चांद निकलने का ऐलान करते हुए कहा है कि कल 19 फरवरी 2026 को रमजान का पहला रोजा रखा जाएगा।

जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम सैयद शाबान बुखारी ने मीडिया को बताया है कि दिल्ली में मौसम खराब होने की वजह से किसी भी स्थान से चांद नजर आने की कोई सूचना नहीं मिली थी लेकिन मरकजी रुयत-ए-हिलाल कमेटी की जामा मस्जिद में मगरिब की नमाज के बाद आयोजित की गई मीटिंग में देश के कई राज्यों असम, बिहार , झारखंड और पंजाब आदि में चांद निकलने की पुष्टि होने के बाद आज जामा मस्जिद से देश के मुसलमानों से 19 फरवरी 2026 को रमजान का पहला रोजा रखने की अपील की गई है। उन्होंने देशवासियों को रमजान की मुबारकबाद भी दी है। दिल्ली की एक और शाही मस्जिद फतेहपुरी के शाही इमाम डॉ. मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने भी रमजान के चांद की पुष्टि करते हुए मुसलमानों से 19 फरवरी को पहला रोजा रखने की पील की है ।

वहीं, रुएत-ए-हिलाल कमेटी, इमारत -ए-शरीया-हिंद के सचिव मौलाना नजीबुल्लाह कासमी ने बताया कि बुध को नमाज़-ए-मग़रिब के बाद इमारत-ए-शरीया-हिंद की रूयत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक, मौलाना अख़लाक़ क़ासमी साहब, नायब सद्र जमीअत उलमा-ए-हिंद दिल्ली प्रदेश तथा सद्र दीनी तालीमी बोर्ड, दिल्ली प्रदेश की अध्यक्षता में इमारत-ए-शरीया-हिंद के कार्यालय, 1 बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित हुई।

चांद देखने का प्रबंध किया गया लेकिन दिल्ली में आसमान बादलों से ढका होने के कारण चांद नज़र नहीं आया। देश के विभिन्न स्थानों से चांद दिखने की प्रमाणित सूचनाएं प्राप्त हुईं।

इन सूचनाओं के आधार पर कमेटी ने घोषणा की कि गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026 को रमज़ानुल मुबारक 1447 हिजरी की पहली तारीख़ होगी।

इसके साथ अपील की गई कि अहले ईमान आज रात तरावीह आदि का प्रबंध करें।मरकजी चांद कमेटी फिरंगी महली के सद्र और इमाम ईदगाह लखनऊ मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी ऐलान किया है कि रमजान का चांद नजर आ गया है और कल 19 फरवरी को रमजान का पहला रोजा रखा जाएगा। इमारत शरीया बिहार-उड़ीसा ने भी चांद निकलने की पुष्टि करते हुए मुसलमानों से 19 फरवरी 2026 को रमजान की पहली तारीख को रोजा रखने की अपील की है।

उधर,

शाही इमाम पंजाब मौलाना उस्मान लुधियानवी ने भी एक वीडियो पैगाम में कहा है कि पंजाब के कई भागों में रमजान के चांद निकलने की पुष्टि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो बयान में कहा है कि कल 19 फरवरी को रमजान की पहली तारीख है और पहला रोजा रखा जाएगा।

गलगोटिया विश्वविद्यालय ने माफी मांगी

कहा- अति उत्साह में प्रतिनिधि ने दी गलत जानकारी

नई दिल्ली, 18 फरवरी (हि.स.)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में ‘रोबोटिक डॉग’ विवाद में फंसने के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए अपने प्रतिनिधि पर सारा ठीकरा फोड़ दिया है। विश्वविद्यालय ने पारदर्शिता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इस घटना के लिए माफी भी मांगी है। साथ ही कहा कि आयोजकों की भावनाओं का आदर करते हुए हमने भारत मंडपम में मिला स्थान भी खाली कर दिया है।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौर ने बुधवार को एक बयान में कहा कि एक संस्थान के तौर पर गलत दावा करना हमारी कोई मंशा नहीं थी। हम पूरी तरह से शैक्षणिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी से अपने काम का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की एक प्रतिनिधि ने पवेलियन में गलत जानकारी थी। उसे प्रोडक्ट के तकनीकी उद्भव की जानकारी नहीं थी। अति उत्साह में उसने कैमरे के समक्ष इस तरह के दावे कर दिए जो की तथ्यात्मक रूप से गलत थे। हालांकि वे मीडिया से बातचीत करने के लिए विश्विद्यालय की ओर से अधिकृत नहीं थीं।

दरअसल, एक ‘रोबोटिक डॉग’ को अपना बताकर विश्विद्यालय की प्रतिनिधि ने मीडिया से बातचीत की थी। हालांकि बाद में यह सामने आया था कि वह ‘रोबोटिक डॉग’ असल में चीनी कंपनी का है। इसके बाद विवाद काफी बढ़ गया यहां तक की कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इसको लेकर सरकार पर निशाना साधा।

उल्लेखनीय है कि विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय में संचार की एक प्राध्यापक ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में ओरियन नामक एक ‘रोबोटिक डॉग’ को दिखाते हुए कहा था कि इसे गलगोटिया विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस ने विकसित किया है।———–

खांसी से होगी फेफड़ों की जांच, एआई तकनीक ‘स्वासा’ दे रही नई उम्मीद

नई दिल्ली, 18 फ़रवरी (हि.स.)। अब खांसी की आवाज से आसानी से फेफड़ों की जांच हो सकेगी। अखिल भारतीय आय़ुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से चलने वाली स्वासा एप का ट्रायल चल रहा है।

एम्स ने स्वासा एआई एप को 460 मरीजों पर जांच के बाद अस्थमा की जांच के लिए हरी झंडी दे दी है। इस एप पर बस मरीज को अपनी खांसी रिकॉर्ड करनी होती है और यह 8 मिनट में रिपोर्ट देता है। भारत मंडपम में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में स्वासा को इनोवेशन केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है।

एम्स के सेंटर फॉर कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने बुधवार को जानकारी दी कि यह एक एआई आधारित एप्लिकेशन है जो फोन पर चलाया जा सकता है। इसे एक प्राइवेट कंपनी ने ही बनाया है लेकिन इसकी एफिकेसी की जांच एम्स नई दिल्ली में की गई है।

डॉ. साल्वे ने कहा, ‘एआई स्वासा को एम्स में गोल्ड स्टेंडर्ड स्पाइरोमेट्री के अगेंस्ट चेक किया गया था और यह मॉडरेट स्तर तक कारगर साबित हुआ है। एम्स में आए 460 मरीजों पर हुए इस एप की जांच में पाया गया कि यह प्राइमरी और सेकेंडरी लेवल पर बीमारी का पता लगाने के लिए बेहतर है। यह एप आपके द्वारा दी गई जानकारी और खांसने की आवाज का विशलेषण करके बता देता है कि मरीज को अस्थमा या सीओपीडी है या नहीं है।

स्वासा कैसे करता है काम

नई तकनीक के तहत एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता मोबाइल फोन लेकर दूर-दराज़ गांवों में जाता है, मरीज का पंजीकरण करता है और उसे फोन के पास खांसने के लिए कहता है। मोबाइल का माइक्रोफोन खांसी की आवाज रिकॉर्ड करता है और सॉफ्टवेयर तुरंत उसका विश्लेषण करता है। कुछ ही मिनटों में पता चल जाता है कि फेफड़े सामान्य हैं या उनमें क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या अस्थमा जैसी बीमारी के संकेत हैं।

इस एआई आधारित टूल की सटीकता सामान्य और असामान्य मामलों को पहचानने में लगभग 90 प्रतिशत है। वहीं, खास तौर पर सीपोपीडी और अस्थमा जैसी बीमारियों की पहचान में इसकी सटीकता 82 से 87 प्रतिशत के बीच है।

यह तकनीक फिलहाल निजी अस्पतालों में इस्तेमाल की जा रही है। एम्स के सहयोग से उत्तराखंड और हरियाणा के बल्लभगढ़ में इसके पायलट प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। आगे इसे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में भी व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है।

भारत में सांस संबंधी बीमारियां बड़ी स्वास्थ्य समस्या हैं और अक्सर गंभीर होने तक पता नहीं चल पातीं। ऐसे में स्वासा जैसी एआई तकनीक समय रहते जांच को आसान और सस्ता बना सकती है। एक साधारण खांसी को जांच के मजबूत संकेत में बदलकर यह तकनीक दूर-दराज़ इलाकों तक तेज और किफायती स्क्रीनिंग पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान और कजाखस्तान के प्रधानमंत्रियों से की मुलाकात

एआई और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली, 18 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को एआई इम्पैक्ट समिट के इतर भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और कजाखस्तान के प्रधानमंत्री ओलझास बेक्टेनोव से मुलाकात की। इस दौरान भारत ने भूटान के साथ ऊर्जा, कनेक्टिविटी, एआई और विकास साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई। वहीं कजाखस्तान के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और उभरती प्रौद्योगिकी समेत व्यापक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों बैठकों में एआई और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के साथ बैठक में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। यह समीक्षा नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की भूटान यात्रा के बाद हुई प्रगति पर आधारित रही। तोबगे ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना में भारत के समर्थन के लिए आभार जताया।(

दोनों नेताओं ने ऊर्जा, कनेक्टिविटी और विकास साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्ष एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। इसमें अनुभव साझा करना और संयुक्त समाधान विकसित करना शामिल है। भारत और भूटान के संबंध पारंपरिक मित्रता और विश्वास पर आधारित हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कजाखस्तान के प्रधानमंत्री ओलझास बेक्टेनोव से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने एआई इम्पैक्ट समिट में उनकी भागीदारी की सराहना की। इसे दोनों देशों की तकनीक के उपयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया गया। बैठक में दोनों नेताओं ने राजनीतिक, व्यापार, रक्षा और सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की। ऊर्जा, कनेक्टिविटी और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने पर भी जोर दिया गया