होली पर लालकुआं-राजकोट के बीच साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन, 1 मार्च से चलेगी

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बरेली, 10 फरवरी (हि.स.) । होली पर्व पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने लालकुआं-राजकोट के बीच साप्ताहिक होली विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है।

पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के अनुसार 05045-05046 लालकुआं-राजकोट-लालकुआं साप्ताहिक होली स्पेशल का संचालन मार्च माह में पांच फेरों के लिए किया जाएगा।

05045 लालकुआं-राजकोट होली विशेष ट्रेन 1 मार्च से 29 मार्च 2026 तक प्रत्येक रविवार को लालकुआं से दोपहर 12:35 बजे प्रस्थान करेगी। ट्रेन किच्छा, बहेड़ी, भोजीपुरा, इज्जतनगर, बरेली सिटी और बरेली जंक्शन होते हुए बदायूं, कासगंज, हाथरस सिटी, मथुरा, भरतपुर, जयपुर, जोधपुर, मेहसाणा, सुरेन्द्रनगर व वांकानेर मार्ग से गुजरते हुए अगले दिन शाम 6:10 बजे राजकोट पहुंचेगी।

वापसी में 05046 राजकोट-लालकुआं होली विशेष 2 मार्च से 30 मार्च 2026 तक प्रत्येक सोमवार को राजकोट से रात 10:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन वांकानेर, सुरेन्द्रनगर, मेहसाणा, जोधपुर, जयपुर, भरतपुर, मथुरा, कासगंज, बदायूं, बरेली जंक्शन, इज्जतनगर, भोजीपुरा, बहेड़ी व किच्छा स्टेशनों पर ठहराव लेते हुए तीसरे दिन सुबह 5:15 बजे लालकुआं पहुंचेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार होली के दौरान उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इस स्पेशल ट्रेन से बड़ी राहत मिलेगी। लंबी दूरी की ट्रेनों में बढ़ती वेटिंग को देखते हुए यह संचालन किया जा रहा है।

इस विशेष गाड़ी में कुल 20 कोच लगाए जाएंगे। इनमें एसएलआरडी के 2, शयनयान श्रेणी के 11, वातानुकूलित तृतीय श्रेणी के 2, वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी का 1 तथा सामान्य द्वितीय श्रेणी के 4 कोच शामिल रहेंगे।

इज्जतनगर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक संजीव शर्मा ने बताया कि यात्रियों की सुविधा और त्योहार के दौरान सुगम यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए यह विशेष ट्रेन चलाई जा रही है। यात्रियों से अग्रिम आरक्षण कराने की अपील की गई है।

धार्मिक स्थलों में भक्तों के लिए सुरक्षा और संसाधन मुहैया कराए-मानवाधिकार आयोग

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जयपुर, 10 फ़रवरी (हि.स.)। राज्य मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि धार्मिक स्थलों पर लाखों की संख्या में आने वालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इनकी अनदेखी से ही पूर्व में विभिन्न मंदिरों और दरगाहों में अव्यवस्थाओं के चलते, भगदड़ जैसी दुखद घटनाओं में दर्शनार्थियों ने अपनी जान खोयी है और कई घायल भी हुए हैं। ऐसे में देवस्थान विभाग और मुख्य धार्मिक स्थलों से संचालक मंडलों से आयोग अपेक्षा करता है कि वे धार्मिक स्थलों में उचित संसाधन सुनिश्चित करें। आयोग अध्यक्ष जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने यह आदेश प्रकरण में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए दिए। आयोग ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर पीने के पानी, छाया, बैठने के लिए स्थान, वृद्ध, बीमार और महिलाओं के लिए अलग पंक्ति के साथ ही सुलभ दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही आयोग ने देवस्थान आयुक्त को कहा है कि वे धार्मिक स्थलों में इन सुविधाओं को लेकर आयोग में रिपोर्ट पेश करें। आयोग ने मामले में प्रदेश में प्रमुख मंदिरों के प्रबंधकों के साथ ही सभी संभागीय आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किए हैं।

आयोग ने रामदेवरा, श्रीनाथजी, सांवरिया सेठ, खाटू श्याम जी, मेहंदीपुर बालाजी, गोविन्द देवजी, सालासर बालाजी, बेणेश्वर धाम, चौथ माता, मोती डूंगरी, एकेश्वर, गलता, गोवर्धन जी, जोधपुर का रामदेवरा, पाल के बालाजी, संतोषी माता, रातानाडा गणेश मंदिर और अजमेर दरगाह के साथ ही किलों में स्थित माताजी के मंदिर साल में कई बार मेले भरते हैं। जिसके लाखों की संख्या में भक्त आते हैं। असंख्य जनसमूह के एकत्र होने पर भगदड जैसी घटनाएं भी हुई हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन धार्मिक स्थलों में जरूरी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी वहां के संचालन मंडल की है। ऐसे में यहां पर्याप्त व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही आयोग ने मामले की सुनवाई 12 मार्च को तय की है।

परीक्षा परिणाम में देरी के आधार पर नहीं किया जा सकता नियुक्ति से वंचित-हाईकोर्ट

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जयपुर, 10 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने जूनियर इंजीनियर भर्ती-2020 से जुडे मामले में कहा है कि विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा परिणाम और अंक तालिका देरी से जारी करने के आधार पर पात्र अभ्यर्थी को चयन से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने मामले में एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से पेश अपील को खारिज कर दिया है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिए। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर गत 2 फरवरी का अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में व्यावहारिक और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, विशेषकर तब जबकि कोविड-2019 जैसे असाधारण हालात हों।

मामले से जुडे अधिवक्ता एमएफ बेग ने बताया कि कर्मचारी चयन बोर्ड ने सार्वजनिक निर्माण विभाग में जूनियर सिविल इंजीनियर के 276 पदों पर साल 2020 में भर्ती निकाली थी। भर्ती विज्ञापन में शर्त थी कि अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय में इंजीनियरिंग या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। वहीं संबंधित पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते परीक्षा से पहले वे योग्यता पूरी कर लें। एकलपीठ में याचिकाकर्ता रहे लोकेश कुमार ने भर्ती परीक्षा में शामिल होकर मेरिट में स्थान प्राप्त किया, लेकिन उसके यह कहते हुए नियुक्ति नहीं दी गई कि उसका परिणाम बाद में घोषित हुआ है। इसे चुनौती देते हुए एकलपीठ के समक्ष कहा गया कि उसने बीटेक का आठवां सेमेस्टर साल 2019 में ही पास कर लिया था, लेकिन प्रथम सेमेस्टर का एक बैक पेपर शेष था। वहीं कोविड के हालातों को देखते हुए आरटीयू ने अगस्त और सितंबर 2021 में निर्णय लिया कि जिनकी परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं हैं, उन्हें पास मानते हुए अगले सेमेस्टर में भेजा जाएगा। ऐसे में याचिकाकर्ता को भी बैक पेपर में पास मान लिया गया, लेकिन डिग्री का संपूर्ण परिणाम अक्टूबर, 2021 में आया और अंकतालिका दिसंबर, 2021 में जारी की गई। इसके आधार पर अपीलार्थी बोर्ड ने कट ऑफ तारीख 12 सितंबर, 2021 के लिए पात्र नहीं माना। एकलपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए उसे मेरिट के आधार पर नियुक्ति देने को कहा। इस आदेश के खिलाफ चयन बोर्ड में खंडपीठ में अपील की। जिसे अब अदालत ने खारिज कर दिया।

दिहाड़ी मजदूर की महीने की आय की गणना 26 नहीं 30 दिनों की मानी जानी चाहिए- हाईकोर्ट

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जयपुर, 10 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना के मुआवजे से जुडे मामले में कहा कि दिहाड़ी मजदूर की महीने की आय 26 दिनों के बजाय 30 दिनों की मानी जानी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने अफसरों को 26 दिनों के बजाय 30 दिनों की मजदूरी की गणना करने का निर्देश दिया है, जिससे संबंधित पक्षकारों को सही मुआवजा मिल सके। वहीं अदालत ने आदेश की कॉपी केन्द्र सरकार के श्रम मंत्रालय सचिव, श्रम विभाग व राज्य सरकार को भी भेजने का निर्देश दिया है, ताकि वे दिहाड़ी मजदूरों को महीने में 26 दिन के बजाय 30 दिन की न्यूनतम मजदूरी देने के अपने नोटिफिकेशन को बदलने के लिए कदम उठाए। जस्टिस अनूप कुमार यह आदेश लक्ष्मण कुमावत की अपील को मंजूर करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि प्रार्थी मुआवजे के तौर पर 33040 रुपए की अतिरिक्त राशि और प्राप्त करने का हकदार है। ऐसे में मामले से जुडे संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया जाता है कि वे मजदूरी की पुन: गणना कर बढ़ी हुई राशि दो महीने में प्रार्थी को याचिका दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करें।

अपील में अधिवक्ता राहुल सिंह ने कहा कि अपीलार्थी 27 अगस्त, 2020 को मोटरसाइकिल से जा रहा था। इतने में दूसरी तरफ से वाहन ने आकर उसे टक्कर मार दी। जिससे उसके गंभीर चोटें आई। इस पर अपीलार्थी की ओर से स्थानीय एमएसीटी कोर्ट में मुआवजे के लिए परिवाद पेश किया गया। जिस पर फैसला देते हुए अधिकरण ने मुआवजे की गणना के लिए न्यूनतम मजदूरी की गणना 26 दिनों से की। जबकि दैनिक मजदूर को माह में 30 दिन काम करने वाला माना जाता है। इसलिए मुआवजे की गणना तीस दिन मजदूरी के आधार पर किया जाए। जिसका विरोध करते हुए बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि श्रम मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मजदूर माह में 26 दिन ही काम करते हैं। ऐसे में अधिकरण ने अपने आदेश में कोई गलती नहीं की है। इसलिए अपील को खारिज किया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मजदूरी की गणना तीस दिन के आधार पर करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- पता लगाएं कि क्या बच्चों के लापता होने के पीछे कोई राष्ट्रव्यापी नेटवर्क है

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नई दिल्ली, 10 फरवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो ये पता लगाएं कि देश के विभिन्न हिस्से में बच्चों की गुमशुदगी के पीछे जो नेटवर्क है, वो देशभर में फैला है या राज्य स्तरीय समूह ही शामिल हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या बच्चों की गुमशुदगी में कोई पैटर्न है या नहीं। इसके लिए केंद्र राज्यों से आंकड़े जुटाए।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कुछ राज्यों ने गुमशुदा बच्चों का आंकड़ा उपलब्ध कराया है, लेकिन करीब एक दर्जन राज्यों ने कोई आंकड़ा नहीं दिया है। भाटी ने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी निष्कर्ष पर तभी पहुंच सकती है, जब उसके पास सभी आंकड़े मौजूद हों। उच्चतम न्यायालय ने भाटी को सलाह दी कि वे उन बच्चों का इंटरव्यू करें जिन्हें छुड़ाया गया है ताकि ये पता लग सके कि उनकी गुमशुदगी के पीछे कौन हैं।

उच्चतम न्यायालय ने उन राज्यों को फटकार लगाई जिन्होंने कोई आंकड़ा नहीं दिया था। कोर्ट ने कहा कि उन राज्यों पर कार्रवाई की जा सकती है जो आंकड़े नहीं दे रहे हैं। इस पर वरिष्ठ वकील अपर्णा भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहलकदमी की है और इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए कि सभी राज्य सरकारें आंकड़े उपलब्ध कराएं।

फिल्म मेकर्स ‘घूसखोर पंडत’ का नाम बदलने को तैयार

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हाई कोर्ट को दी जानकारी

नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। नेटफ्लिक्स ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि निर्माता फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का नाम बदलने को तैयार हैं। नेटफ्लिक्स की इस सूचना के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि अब इस याचिका पर कोई आदेश देने की जरूरत नहीं है।

सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स की ओर से पेश वकील ने कहा कि फिल्म के निर्माता इस फिल्म का नाम बदलने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रमोशन से संबंधित सामग्री सभी प्लेटफॉर्म से पहले ही हटा ली गई है। उसके बाद कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि अब इस याचिका में कोई आदेश देने की जरूरत नहीं है।

दिल्ली उच्च न्यायालय में इस याचिका के दायर होने के बाद फिल्म के निर्माता नीरज पांडेय ने इस फिल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटाने का फैसला किया था। अपने एक्स हैंडल से नीरज पांडेय ने कहा था कि फिलहाल वे इस फिल्म से जुड़ी प्रचार सामग्री हटा रहे हैं।

नीरज पांडेय ने कहा है कि ये फिल्म एक फिक्शन है और इसका मकसद केवल मनोरंजन है। इस फिल्म के नाम से कुछ लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है इसलिए वे फिलहाल फिल्म से जुड़ी प्रचार सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटा रहे हैं। नीरज पांडेय की इस घोषणा को याचिकाकर्ता और उनके वकील विनीत जिंदल ने इसे बड़ी जीत बताया था।

ये याचिका वकील विनीत जिंदल के जरिये महेंद्र चतुर्वेदी ने दायर की थी। याचिकाकर्ता महेंद्र चतुर्वेदी ने खुद को आचार्य बताया है और अध्ययन, अध्यापन और भारतीय कला, दर्शन और आध्यात्म का पुजारी बताया है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि वो पंडत को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़ने पर आहत हैं। याचिका में कहा गया था कि इस फिल्म के जरिये ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।

याचिका में कहा गया था कि ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स इंडिया ने इस फिल्म का प्रमोशन किया है और इसे प्रमोट करने वाली सामग्री का वितरण किया है। इस फिल्म के जरिये पंडत को भ्रष्ट और घूसखोर बताना अनैतिक और भ्रष्ट आचरण है। याचिका में कहा गया था कि भारतीय समाज और उसकी परंपरा में ऐतिहासिक तौर पर पंडत का मतलब विद्वान, नैतिक, धार्मिक और आध्यात्म से जुड़ा हुआ माना जाता है लेकिन फिल्म में एक समुदाय का मान-मर्दन किया गया है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का घोर उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबको अधिकार है लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी सीमा है जो हेट स्पीच और मानहानि या सामाजिक सौहार्द्र को खराब करने वाला न हो। याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफार्म पर स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने वालों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। इसी नाकामी की वजह से व्यावसायिक लाभ के लिए सनसनी फैलाने वाले कंटेट परोसे जा रहे हैं।

चुनाव से पहले युवाओं के खाते में 15 सौ रुपये देगी ममता सरकार

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कोलकाता, 10 फरवरी (हि.स.)।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंतरिम बजट में घोषित ‘युवसाथी’ योजना को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यह योजना अब एक अप्रैल से लागू करेगी। इसके तहत राज्य के 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 15 सौ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले यह योजना 15 अगस्त से शुरू करने का निर्णय लिया गया था लेकिन नया आर्थिक वर्ष एक अप्रैल से शुरू होता है इसलिए उसी दिन से योजना लागू करने का फैसला किया गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इस योजना का लाभ उन्हीं युवाओं को मिलेगा, जिन्होंने माध्यमिक या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की है और जो वर्तमान में बेरोजगार हैं। यह भत्ता अधिकतम पांच वर्षों तक दिया जाएगा। हालांकि, जैसे ही किसी लाभार्थी को नौकरी मिल जाएगी, उसी समय से भत्ता बंद हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो युवा किसी अन्य सरकारी भत्ता योजना का लाभ ले रहे हैं, वे इस योजना के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, ऐक्यश्री, मेधाश्री या स्मार्ट कार्ड जैसी छात्रवृत्तियों का लाभ लेने वाले युवाओं को युवसाथी योजना से वंचित नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आवेदन प्रक्रिया को लेकर बताया कि युवसाथी योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय की कमी और आवेदन की सही तरीके से जांच सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रत्यक्ष आवेदन की व्यवस्था की है, ताकि कोई भी योग्य व्यक्ति वंचित न रह जाए। इसके लिए राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। ये शिविर 15 फरवरी से 26 फरवरी तक चलेंगे और रोज़ाना सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक खुले रहेंगे। छुट्टी के दिनों में शिविर बंद रहेंगे। आवेदन करने वाले सभी लोगों को रसीद दी जाएगी और बाद में इन आवेदनों को डिजिटाइज किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ये शिविर दुआरे सरकार की तर्ज पर आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक शिविर में अलग-अलग विभाग मौजूद रहेंगे। युवसाथी योजना से जुड़े आवेदनों के लिए युवा और खेल विभाग जिम्मेदारी संभालेगा। इसके साथ ही भूमिहीन खेत मजदूरों के लिए साल में दो बार दो हजार रुपये की सहायता देने वाली योजना के लिए कृषि विभाग मौजूद रहेगा। वहीं, लघु सिंचाई और बिजली विभाग भी शिविरों में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। योजना से संबंधित जानकारी देने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन भी प्रकाशित किए जाएंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यवासियों को रमजान और होली की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य में सभी त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में युवसाथी योजना की घोषणा पहले ही कर दी गई थी, लेकिन इसकी शुरुआत की तारीख स्पष्ट नहीं की गई थी। अब सरकार ने यह तय कर लिया है कि 01 अप्रैल से माध्यमिक उत्तीर्ण बेरोजगार युवा युवसाथी भत्ता योजना का लाभ लेना शुरू कर सकेंगे और उन्हें हर महीने 15 सौ रुपये की सहायता दी जाएगी।

लोकसभा में जारी गतिरोध थमा

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शशि थरूर ने बजट चर्चा में उठाए अमेरिकी व्यापार समझौते और बेरोजगारी पर सवाल

नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जारी गतिरोध समाप्त होने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में आम बजट 2026 पर चर्चा की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने सरकारी खर्च में कमी और कर राजस्व संग्रह में ठहराव की आलोचना की।

केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से निर्वाचित शशि थरूर ने किसानों को दी जाने वाली पीएम किसान सम्मान निधि (पीएमकेवाई) की राशि बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार को दो हजार रुपये की आर्थिक मदद को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा को बदल कर बनाए गए वीबी जी राम जी कानून पर भी सवाल उठाए।

थरूर ने कहा कि शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। स्मार्ट सिटी योजना की घोषणा के बाद समय-सीमा बार-बार बढ़ती रही, लेकिन जमीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए और कहा कि भारत का व्यापार फायदा 45 अरब डॉलर है, लेकिन हमने यह डील कर ली कि अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेंगे। यह निश्चित क्रय प्रतिबद्धता भारत के हित में नहीं है और दीर्घकाल में नुकसानदायक साबित होगी।

उन्होंने कहा कि वाणिज्य और विदेश मंत्री को इस समझौते की टाइमलाइन और अन्य सवालों के जवाब देने चाहिए। ग़ालिब के एक मशहूर शेर का हवाला देते हुए थरूर ने कहा, ‘हमें मालूम है जन्नत की हकीकत मगर दिल बहलाने के लिए गालिब खयाल अच्छा है।’

उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल स्लोगन से नहीं बनेगा बल्कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की डिलीवरी से बनेगा। यही हमारा कर्तव्य है।

पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे झूठ नहीं बोलेंगे, मुझे उन पर भरोसाः राहुल गांधी

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नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की कथित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशक पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को दावा किया कि किताब बिक्री के लिए उपलब्ध है।

राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने मोबाइल में जनरल नरवणे का 15 दिसंबर 2023 का पोस्ट दिखाया। उन्होंने कहा कि यह जनरल नरवणे का एक्स पोस्ट है जिसमें उन्होंने लिखा था, ”नमस्ते दोस्तों। मेरी किताब अब उपलब्ध है। बस इस लिंक का अनुसरण करें। आनंदपूर्वक पढ़ें। जय हिंद।’

राहुल ने कहा, ”सवाल यह है कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर पेंग्विन प्रकाशन, लेकिन मुझे पूर्व सेनाध्यक्ष पर भरोसा है, वह झूठ नहीं बोलेंगे।”

उन्होंने कहा कि किताब में किए गए कुछ उल्लेख सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं, इसलिए विवाद खड़ा किया जा रहा है। अब यह तय करना होगा कि सच्चाई कौन बता रहा है। प्रकाशक या पूर्व सेनाध्यक्ष।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जनरल नरवणे ने किताब में जो बातें लिखी हैं, वे सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असहज हैं और इसी वजह से इस पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को कहा था कि जनरल नरवणे की किताब अभी तक पब्लिश नहीं हुई है और इसकी कोई भी कॉपी, प्रिंट या डिजिटल, पब्लिश, बांटी, बेची या पब्लिक के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।

राहुल गांधी ने जिस पोस्ट का जिक्र किया था उसे जनरल नरवणे ने 15 दिसंबर 2023 को एक्स पर साझा किया था। इसमें उन्होंने पेंगुइन इंडिया के एक एक्स पोस्ट का स्क्रीनशॉट लगाया था। उसमें पेंगुइन प्रकाशन ने ई-कॉमर्स साइट अमेजन का लिंक साझा करते हुए लिखा था, ”जैसे ही हम विजयदिवस की तैयारी कर रहे हैं। आइए अपने देश के नायकों का सम्मान करें। शुरुआत करते हैं मनोज नरवणे से, जो भारत के 28वें थलसेनाध्यक्ष रहे और दशकों तक देश के लिए लड़े। उनकी कहानी जानने के लिए अभी फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी, प्री ऑर्डर करें।”

एक दिन पहले यानी सोमवार को दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया था कि सोशल मीडिया और समाचार मंचों पर यह जानकारी सामने आई कि किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की प्री-प्रिंट कॉपी प्रसारित हो रही है। जांच में पाया गया कि पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा तैयार की गई किताब की पीडीएफ कॉपी कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध है और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किताब का कवर भी बिक्री के लिए प्रदर्शित किया गया है। प्रकाशन की अनुमति अभी संबंधित अधिकारियों से प्राप्त नहीं हुई है। इस कथित लीक और प्रकाशन नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए स्पेशल सेल में मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।

रिजिजू ने कांग्रेस की महिला सांसदों पर लोकसभा स्पीकर को धमकाने का लगाया आरोप

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नई दिल्ली, 10 फरवरी (हि.स.)। संसद के बजट सत्र में लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में जाकर उन्हें ‘धमकाने’ की कोशिश की।

रिजिजू ने संसद भवन परिसर में मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के सदस्य सत्तापक्ष की बेंच की ओर आ गए। उन्होंने न केवल मर्यादा का उल्लंघन किया, बल्कि उस बेंच को भी पार कर दिया जहां प्रधानमंत्री बैठते हैं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों को नियंत्रित करना पड़ा ताकि कोई झड़प न हो। राजग की महिला सांसद इस बर्ताव से बेहद नाराज हैं।

रिजिजू ने कहा कि भाजपा की महिला सांसदों ने कांग्रेस की महिला सांसदों के ‘अनुचित व्यवहार’ को लेकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।