नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की गुरुवार को हुई बैठक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का प्रस्ताव संविधान के अनुरूप है और यह मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने कहा कि संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार है और यह उसका विशेषाधिकार है। इसमें लोकतंत्र या संघीय ढांचे का कोई उल्लंघन नहीं है।
बैठक के बाद संसद के बाहर जेपीसी के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने पत्रकारों को जानकारी दी कि बैठक में सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। पूर्व न्यायमूर्ति बीआर गवई ने बैठक में आकर सदस्यों द्वारा संवैधानिक वैधता से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा सभी दलों को राष्ट्रीय हित में एकजुट होकर इस पर काम करना चाहिए, ताकि विश्व के सामने देश की एकता प्रदर्शित हो सके। उन्होंने कहा कि यदि इन चुनावी सुधारों को लागू किया जाता है तो पूरे देश को इसका लाभ मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि एक राष्ट्र एक चुनाव के तहत देश में लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात की गई है। 2 सितंबर 2023 को एक कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी का अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप दी और एक देश एक चुनाव कराने का समर्थन किया। इसके बाद इस विधेयक को 17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया। विधेयक को 19 दिसंबर 2024 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया।
कुक स्ट्रेट पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग तैराक बने
भोपाल, 12 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के गौरव, पद्मश्री से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया ने गुरुवार को विश्व की सबसे कठिन समुद्री तैराकियों में से एक न्यूजीलैंड के कुक स्ट्रेट (Cook Strait) को सफलतापूर्वक पार कर इतिहास रच दिया है। वे इस चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग तैराक बन गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया 18 जनवरी 2026 से न्यूज़ीलैंड में इस अभियान की तैयारी कर रहे थे और लगातार ठंडे पानी में कठिन अभ्यास व अक्लिमेटाइजेशन कर रहे थे। गत 28 जनवरी को उनका पहला प्रयास खराब मौसम के कारण रोकना पड़ा था। उन्होंने हार नहीं मानी और पुनः तैयारी कर निर्धारित आज 12 फरवरी को अदम्य साहस और आत्मविश्वास के साथ चुनौती स्वीकार की। तैराकी के दौरान उन्हें अत्यंत ठंडे पानी, तेज़ समुद्री धाराओं और प्रतिकूल मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने दृढ़ संकल्प के बल पर लक्ष्य हासिल किया। 70 प्रतिशत दिव्यांग और व्हीलचेयर बाउंड होने के बावजूद उनकी यह उपलब्धि अदम्य इच्छाशक्ति और संघर्ष की मिसाल बन गई है।
लोहिया ने सोशल मीडिया पर उक्त जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आज अत्यंत हर्ष और गर्व के साथ आप सभी को सूचित कर रहा हूँ कि मैंने विश्व की सबसे कठिन समुद्री तैराकियों में से एक न्यूजीलैंड का कुक स्ट्रेट (Cook Strait) 12 फरवरी, 2026 को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। उन्होंने सुबह 10:00 बजे अत्यंत ठंडे पानी, तेज धाराएँ और प्रतिकूल मौसम में अपनी तैराकी शुरू की। इन सभी चुनौतियों के बावजूद एक महीने की कठिन कोल्ड वॉटर प्रैक्टिस और अक्लिमेटाइजेशन के बाद दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ मैंने यह ऐतिहासिक तैराकी पूरी की। मुझे गर्व है कि मैं एशिया का पहला दिव्यांग तैराक बन गया हूँ, जिसने कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार किया।
उन्होंने आगे कहा कि मैं 70 फीसदी दिव्यांग और व्हीलचेयर बाउंड हूँ। यदि मैं यह कर सकता हूँ, तो कोई भी अपने जीवन की किसी भी चुनौती को पार कर सकता है। असंभव कुछ भी नहीं, केवल संकल्प, साहस और निरंतर प्रयास चाहिए। तैराक लोहिया ने अपनी सफलता का श्रेय न्यूजीलैंड के अपने तैराक साथियों, पायलट फिलिप्स तथा सहयोगी मुजीब खान को दिया, जिन्होंने पूरे प्रशिक्षण और प्रयास के दौरान उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और पूरे भारत की विजय है। यह विजय संदेश देती है कि संकल्प, साहस और निरंतर प्रयास से कोई भी असंभव लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।——————
नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रुपरेखा में भारत के अनुकूल हुए कुछ परिवर्तनों के बारे में कहा कि यह दोनों देशों के बीच बनी ‘साझा समझ’ के अनुरुप है। यह बदलाव दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य को ही दर्शाते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में कहा कि पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार पर एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य 7 फरवरी को जारी किया गया था। यह संयुक्त वक्तव्य ही मुख्य ढांचा है और मामले में हमारी आपसी समझ का आधार है। अब दोनों पक्ष इस ढांचे को लागू करने और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने, “अमेरिकी ‘फैक्ट शीट’ में किए गए संशोधन संयुक्त वक्तव्य में निहित साझा समझ को दर्शाते हैं।”
उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने अपने पहले जारी ‘तथ्य पत्र’ में बदलाव करते हुए भारत को दालों के निर्यात का बिन्दु हटा दिया है। साथ ही भारत के 500 अरब डॉलर के माल आयात के संदर्भ में ‘प्रतिबद्धता’ शब्द को हटा कर उसके स्थान पर ‘इरादा’ कर दिया है।
भारत में दाल खरीद का मुद्दा संवेदनशील है और बड़ी मात्रा में अमेरिकी माल की खरीदारी पर प्रतिबद्धता को लेकर विपक्ष केन्द्र सरकार की आलोचना कर रहा था।
नई दिल्ली, 12 फरवरी (हि.स.)। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और नए लेबर कोड को लेकर उपजा विवाद अब सड़कों पर उतर आया है। विपक्षी दलों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न किसान संगठनों की ओर से गुरुवार को बुलाए गए ‘भारत बंद’ का असर देश के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह समझौता भारतीय कृषि और स्थानीय व्यापार के हितों के खिलाफ है।
विपक्षी दलों और किसान संगठनों की केन्द्र सरकार से श्रम कोड, बिजली बिल-2025, बीज बिल और वीबी-जी-राम-जी एक्ट, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, न्यूनतम वेतन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की वापसी सहित अन्य मांगे शामिल हैं।
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, परिवहन और सरकारी सेवाओं पर दिखने की संभावना है। दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने भी किसानों की मांगों के समर्थन और स्थानीय व्यापारिक मुद्दों को लेकर ‘दिल्ली बाजार बंद’ का समर्थन किया है।
केंद्र सरकार की कुछ हालिया नीतियों और प्रस्तावित बिलों के खिलाफविपक्षी दलों ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस और अन्य विपक्ष के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर जनहित की आवाज बुलंद करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में आकर भारतीय किसानों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। देश के सम्मान से खिलवाड़ किया है। देश उन्हें माफ नहीं करेगा।
विपक्षी सांसदों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में जनविरोधी प्रावधानों का विरोध किया और कहा कि वे अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनके लिए भारत का हित सर्वोपरि हैं। अखिल भारतीय बंद का आह्वान करने वाले किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए, क्योंकि व्यापार समझौते जनता के हित में होने चाहिए, न कि दबाव बनाने के लिए।
इसी बीच नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जनसभा आयोजित की गई। ऑल इंडिया किसान यूनियन (एआईकेएस) के महासचिव विजू कृष्णन, सेंट्रल इंडियन ट्रेड यूनियन(सीआईटीयू) के अध्यक्ष सुदीप दत्ता और अन्य नेता उपस्थित थे।
वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अनुसार त्रिपुरा में कई स्थानों पर रेल और सड़क परिवहन ठप है। बड़ी संख्या में दुकानें और प्रतिष्ठान बंद हैं। हड़ताली कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और लोगों से आम हड़ताल के समर्थन में खड़े होने का आह्वान कर रहे हैं ।
यही स्थिति छत्तीसगढ़ के कोरबा और तेलंगाना के सिंगारेनी में भी है।
नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में जेल में बंद बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले के शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 16 फरवरी को करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर आपत्ति जताई और कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी गई थी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके पहले 5 फरवरी को उच्च न्यायालय ने राजपाल यादव को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा था जिसके बाद राजपाल यादव ने जेल में सरेंडर कर दिया था।
राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, जून 2024 में उच्च न्यायालय ने सजा को निलंबित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं, इसलिए उनकी सजा निलंबित की जाती है।
दरअसल, कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में दोषी करार देने के बाद राजपाल यादव पर 1.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस जुर्माना लगाया था। दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में यह सजा सुनाई गई थी।
शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने अप्रैल, 2010 में फिल्म अता पता लापता पूरी करने के लिए कंपनी से मदद मांगी थी। 30 मई, 2010 में दोनों के बीच करार हुआ और उन्होंने राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ का लोन दे दिया। करार के मुताबिक राजपाल को ब्याज सहित 8 करोड़ लौटाने थे। लेकिन वह पहली बार ये रकम नहीं लौटा सके। उसके बाद दोनों के बीच तीन बार करार का रिनिवल हुआ। 9 अगस्त, 2012 को वह अंतिम करार में आरोपी राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपए लौट आने की सहमति भी थी। राजपाल यादव की कंपनी यह भी पैसा देने में नाकाम रही।
अपने बचाव में राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधार नहीं लिया था। राजपाल यादव के मुताबिक मुरली प्रोजेक्ट की कंपनी में पैसा निवेश किया था। लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया था।
लखनऊ, 12 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछडा वर्ग (ओबीसी ) का आरक्षण निर्धारित करने के लिए एक अलग से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाएगा। प्रदेश सरकार की ओर से इस आशय का हलफनामा हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के समय दिया गया है। यह आयोग ओबीसी का आरक्षण निर्धारित करने के लिए सर्वे कर अपनी रिपोर्ट देगा। उसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण लागू होगा और फिर पंचायत चुनाव होंगे।
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की कोर्ट ने की। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी ) को आरक्षण को लेकर चल रही सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया गया है कि ओबीसी आयोग का गठन किया जाएगा, जाे पूरी तरह से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया पर केंद्रित हाेकर काम करेगा।
आयाेग के गठन की वजह यह है कि जनहित याचिका में कहा गया था कि तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब वर्तमान ओबीसी आयोग काे समर्पित ओबीसी आयोग की तरह काम करने का कानूनी अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि अगर तीन साल कार्यकाल वाला ओबीसी आयोग अस्तित्व में होता तो अलग से आयोग का गठन करने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन तीन साल वाले आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में खत्म हो चुका है और सरकार ने एक साल के लिए कार्यकाल बढ़ा दिया है लेकिन संवैधानिक स्थिति यह है कि इस बढे़ हुए कार्यकाल में वर्तमान आयोग ओबीसी के आरक्षण के लिए सर्वे आदि नहीं कर सकता है। इसलिए सरकार की ओर से इस काम के लिए नए ओबीसी आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग पूरे प्रदेश में ओबीसी का रैपिड सर्वे करेगा और इसकी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग की आबादी के अनुसार सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। इसके बाद ही पंचायत चुनाव होंगे।
जयपुर, 12 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर के न्यायिक कर्मचारी के मामले में कहा है कि उसके अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश रद्द किया जा चुका है तो उसे उस अवधि का पूरा वेतन दिया जाए। अदालत ने माना की ऐसी स्थिति में नो वर्क-नो पे का प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने तीन में में याचिकाकर्ता को चार साल का वेतन और अन्य परिलाभ देने देने को कहा है। जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने यह आदेश केसी जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता सुनील समदडिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता अलवर जिला अदालत में मुंसरिम के पद पर कार्यरत था। याचिकाकर्ता को जून, 2006 में कई सालों पुराने आधारों का हवाला देते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। इसे याचिकाकर्ता ने अपीलीय अधिकारी के समक्ष चुनौती दी। इस दौरान जुलाई, 2010 में उसने सेवानिवृत्ति की उम्र पूरी कर ली। याचिका में कहा गया कि 18 अगस्त, 2014 को अपीलीय अधिकारी ने उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को बिना आधारों का मानते हुए रद्द कर दिया। विभाग ने अपने स्तर पर आदेश जारी कर उसे अनिवार्य सेवानिवृत्त कर काम करने से रोका था। ऐसे में उसे इस जून, 2006 से जुलाई, 2010 तक की अवधि का बकाया वेतन दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इन चार सालों ने याचिकाकर्ता ने अपने पद का कोई सरकारी काम नहीं किया था। ऐसे में उसे इस अवधि का वेतन नहीं दिया जा सकता। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को इन चार सालों की अवधि के वेतन का हकदार मानते हुए तीन माह में बकाया भुगतान करने को कहा है।
नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से संक्रमित दो मरीजों में से एक मरीज की मौत हो गई है। देश में इस साल निपाह वायरस से यह पहली मौत है। गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि 11 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल से रिपोर्ट किए गए निपाह संक्रमण के दो पॉजिटिव मामलों में से एक नर्स, जो गंभीर रूप से बीमार थीं और अस्पताल में गहन चिकित्सा देखभाल के तहत भर्ती थीं। 25 साल की महिला नर्स का बुधवार को उपचार के दौरान हृदयगति रुकने से निधन हो गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार उन्हें आईसीयू में विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग के आवश्यक प्रोटोकॉल के तहत संपर्क में आए लोगों की निगरानी और अन्य एहतियाती कदम जारी हैं। दोनों संक्रमित नर्सिंग स्टाफ नॉर्थ 24 परगना जिले के बारासात के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। इनमें एक पुरुष नर्स और एक महिला नर्स शामिल थीं। पुरुष नर्स इलाज के दौरान ठीक हो गया लेकिन महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई।
उल्लेखनीय है कि निपाह एक ऐसा इन्फेक्शन है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों से फैलता है। पश्चिम बंगाल में खजूर के पेड़ से जो रस निकाला जाता है, उसे काफी लोग पीते हैं। ये रस अक्सर चमगादड़ों के संपर्क में आते हैं और वहीं से ये वायरस फैलता है।
भारतीय कथा-साहित्य में उज्जैन का राजा विक्रमादित्य बड़ा लोकप्रिय रहा है। उसके प्रसंग को लेकर हजारों कहानियाँ देश की विविध भाषाओं में प्रचलित हैं। उसके नवरत्नों की कथा भी सर्वविदित है, परंतु आश्चर्य की बात है कि ऐसे लोक प्रसिद्ध राजा के विषय में कथा-कहानियों के अतिरिक्त कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। विदेशी इतिहासकार उसे केवल कल्पित राजा मानते हैं। भारतीय इतिहासकारों के मन में अवश्य उसे ऐतिहासिक महापुरुष मानने का मोह बना हुआ है। उन्होंने इसकी वास्तविकता को सिद्ध करने के लिए अनेक प्रकार के अन्वेषण अनुसंधान भी किए, फिर भी निश्चित रूप से उसके अस्तित्व को सिद्ध नहीं कर पाए हैं।
विक्रम की नगरी उज्जैन में महाकाल का सुप्रसिद्ध मन्दिर है। देश के अन्य किसी भाग में महाकाल का कोई मंदिर नहीं है। अतः निश्चय ही यह प्रश्न उपस्थित होता है कि यह ‘महाकाल’ कौन देवता हैं, जिसका केवल देशभर में एक मंदिर है। सामान्यतया ‘महाकाल’ शिव का पर्याय मान लिया गया है और उज्जैन के ‘महाकाल’ के मंदिर को शिव का मंदिर माना जाता है। परंतु प्रश्न यह है कि शिव के अन्य मंदिर ‘महाकाल’ के मंदिर क्यों नहीं कहलाते? हमारे विचार से विक्रमादित्य, उज्जयिनी, नव-रत्न और महाकाल इन चारों शब्दों के निर्वचन से इसके वास्तविक अर्थ पर कुछ प्रकाश पड़ सकता है और सुप्रसिद्ध कथा की गुत्थी सुलझ सकती है।
भारतीय ज्योतिष विद्वान यह जानते हैं कि उज्जैन का सूर्योदय काल देशभर के पंचांगों के लिए प्रामाणिक उदयकाल माना जाता रहा है। भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार दक्षिण में लंका, भारत के मध्य में उज्जैन और (संभवतः वर्तमान) रोहतक नगरों के मध्य से जाने वाली देशांतर रेखा का सूर्योदय काल प्रामाणिक सूर्योदय काल हैं, परिवर्तित ज्योतिष ग्रंथों में उसका नाम ‘लंकोदय’ काल रहा है। लंकोदय की देशांतर रेखा से पूर्व में तथा पिश्चम में स्थित स्थानों के सूर्योदय का काल ज्ञात करने की विधियाँ निर्धारित की हुई हैं। इस प्रकार उज्जयिनी का सूर्योदय काल देशभर के लिए प्रामाणिक सूर्योदय काल था और आधुनिक भाषा में उसे भारत का ‘स्टैण्डर्ड टाइम’ कहा जा सकता है।
ईसा पूर्व के ज्योतिषी संभवतया इसी को महाकाल कहते थे। विविध शास्त्रीय तथ्यों को देव रूप में स्वीकार करने की हमारे यहां परम्परा रही है। इसी परम्परा के अंतर्गत महाकाल (स्टैण्डर्ड टाइम) को देव रूप में दिया गया और उसके मंदिर की स्थापना उज्जयिनी में की गयी। उज्जयिनी को क्यों चुना गया, यह भी एक ज्वलंत प्रश्न है। जब एक ही देशांतर रेखा देश के इतने लंबे-चौड़े भाग से निकलती है, तो उज्जैन ही को क्यों महत्त्व दिया जाए, उत्तर यह है कि उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है, जहां तक उत्तरायण सूर्य आता है और पुनः लौटकर मकर रेखा तक दक्षिणगामी होता है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण भारतीय ज्योतिर्विदों ने उज्जयिनी को महाकाल की नगरी माना।
विक्रमादित्य शब्द में दो खंड हैं विक्रम-आदित्य। आजकल विक्रम का अर्थ सामान्यतया ‘पराक्रम’ समझा जाता है ओर आदित्य का ‘सूर्य’। इस प्रकार विक्रमादित्य का अर्थ शक्ति का सूर्य किया जाता है। परंतु विक्रम शब्द में क्रम धातु है, जिसका अर्थ है चलना। इसी से बना हुआ दूसरा शब्द ‘संक्रम’ है, जो सूर्य की गति के विषय में सर्वविदित है। सूर्य का संक्रम, संक्रमण और संस्कृति आधुनिक ज्योतिषियों के लिए अपरिचित शब्द नहीं है।
उज्जैन की व्युत्पत्ति इस समय उज्जयिनी में मानी जाती है। उज्जैन के प्राकृत नाम ‘उज्जैणी’ या ‘उज्जैन नगरी’ थे, जो स्पष्टतः संस्कृत ‘उदयिनी’ एवं ‘उदयन नगरी’ से व्युत्पन्न प्रतीत होते हैं। पुनः संस्कृतिकरण की यह प्रक्रिया ‘कथा कथा सरित्सागर’ आदि में बहुत अधिक पायी जाती है। उज्जैन वास्तव में विक्रमादित्य के उदय की नगरी थी। भारतीय कथा साहित्य का सुप्रसिद्ध उदयन भी सूर्य का ही अन्य नाम है, जिसका विवेचन आगे किया जायेगा।
इस प्रकार विक्रमादित्य महाकाल तथा उज्जयिनी की व्युत्पत्ति पर विचार करने से यही ज्ञात होता है कि विक्रमादित्य नाम का वास्तविक राजा नहीं था। वह दक्षिणगामी सूर्य का ही कल्पित नाम है और उसे राजा का स्वरूप दे दिया गया है। उसे राजा मानने पर उसकी राजधानी उयिनी अथवा उजैणी (बाद में उज्जयिनी) कल्पित की गयी और उसी नगरी का समय संपूर्ण देश के लिए प्रमाणिक समय होने के कारण ‘महाकाल’ कहलाया। इतने विवेचन के बाद नवरत्नों की कल्पना भी स्पष्ट हो जाती है जो निःसंदेह नव ग्रह हैं।
एक नियत स्थान तक आगे बढ़कर वापस मूल स्थान तक पहुंचना सिंह विक्रांत कहलाता है। सिंह का स्वभाव शिकार करने के लिए कुछ दूर तक वन में आगे बढ़कर पुनः लौटने की क्रिया के लिये ‘सिंह विक्रांत’ या ‘सिंह विक्रमण’ शब्द प्रसिद्ध हुआ। कर्क राशि तक उत्तर दिशा में चलकर पुनः दक्षिण की ओर विक्रमण करने वाला सूर्य ‘सिंह विक्रमी’ हुआ। यही ‘सिंह’ राशि व्युत्पत्ति है। सूर्य 31 दिन तक कर्क राशि पर रहकर 32 वें दिन सिंह राशि पर पहुंचता है। यही सिंहासन बत्तीसी का रहस्य है। सूर्य सिंह राशि का स्वामी माना जाता है। कर्क तक आगे बढ़कर वह वापस लौटता है और अपने घर की राशि तक आकर वहां आसीन होता है। सूर्य की उत्तर दक्षिण यात्राएं नीचे स्पष्ट की जा रही हैं:-
सिंह के बाद सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है (संभवतः प्राचीन भारतीय राशि विभाजन खगोल का नहीं भूमंडल का था। भूमि के जिस भाग पर सूर्य राशियाँ सीधी पड़ती थीं, वही राशि विशेष खंड का था। ‘राशि’ शुद्ध संभवतः ‘रश्मि’ के प्राकृत रूप ‘रस्सियां’, ‘रश्शि’ का पुनः संस्कृत रूप है। सतरंगी किरणों के कारण ‘सप्ताश्व’ सूर्य का रूपक भी इस ‘रश्मि’ शब्द से स्पष्ट होता है।)
उत्तर भारत के ईसा पूर्व कालीन आयों की दृष्टि से वह प्रदेश कुमारी कन्याओं का प्रदेश था। भारत का यह दक्षिण भू-भाग (अर्थात 16 अक्षांश से 8 अक्षांश का भू-भाग) कुमारी कन्याओं का प्रदेश माना जाता था। उस प्रदेश पर सीधी किरणें फेंकने वाला सूर्य कन्यार्क कहलाता था। कन्याओं के उस देश की स्मृति के रूप में आज भी कुमारी अन्नीप का दर्शनीय कन्याकुमारी का मन्दिर जगत् प्रसिद्ध है।
वहां से दक्षिण की ओर बढ़ता हुआ सूर्य जब विषुवत् रेखा पर पहुंच जाता है और वहां उसकी किरणें सीधी पड़ती हैं, वह तुला राशि पर पहुंचा हुआ माना जाता है। ‘तुला’ नाम बहुत सार्थक है। विषुवत् रेखा पर जब सूर्य पहुंच जाता है और तो भूमंडल का उत्तर और दक्षिण का भाग बिल्कुल बराबर तुला हुआ होता है। यही तुला शब्द की सार्थकता है, उसके बाद आगे बढ़कर सूर्य जब वृश्चिक राशि पर पहुंचता है, तो उज्जयिनी पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें उतनी ही वक्र होती हैं, जितना बिच्छू का डंक होता है। उससे आगे बढ़ने पर उज्जैन पर पड़ने वाली किरणें और भी अधिक वक्र हो जाती हैं और धनुष के समान दिखायी पड़ती हैं। यह ‘धनु’ का अर्थ है। उसके बाद समुद्र के मध्यगत मकर राशि तक पहुंच कर सूर्य का पुनः उत्तरायण प्रारंभ होता है। मकर का स्वभाव अगाध जल में पहुंच कर पुनः स्थल की और लौटने का है, यही ‘मकर’ राशि की सार्थकता है। वहां से संक्रमण करता हुआ सूर्व सर्वप्रथम जिस स्थल भाग के निकट आता है, वह स्थल भाग किसी समय सम्भवतः घड़े को घोण जैसा था और इसलिए ‘कुम्भघोण’ नाम से प्रसिद्ध है, जहां का स्थल भाग घड़े के घोण जैसा है। कुम्भ राशि का ‘कुम्भघोण’ संभवतः कोई द्वीप था, जो अगाध समुद्र में लुप्त हो गया है।
उससे उत्तर में बढ़ने पर अगाध समुद्र है, जिसमें प्राणी के नाम पर केवल मीनों का निवास है। अतः वह मीन राशि का प्रदेश कहलाया। वहां से आगे संक्रमण करके सूर्य लंकोदय की प्रसिद्ध नगरी लंका तक पहुंचता है और उससे वह ‘वृशस्थ’ कहलाया। वहीं, भारतीय कथाओं में ‘वत्सराज (वृष) उदय’ नाम से चित्रित हुआ है। वत्सराज ने नागवन में अपनी प्रेयसी को प्राप्त किया था। यह नागवन वर्तमान मैसूर के पास का प्रदेश है, जहां के वनों में हाथियों की बहुलता है। यही सूर्य मिथुन राशि का स्वामी बनता है। उदय के नागवन में पत्नी से मिलन (मिथुन) की कथा सूर्य के मिथुन राशि पर आने की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है। मिथुन के बाद सूर्य उदयिनी पति बन जाता है और अपनी प्रेयसी के नगर उज्ययिनी पहुंच कर ‘कर्कस्थ’ होता है। कर्क का स्वभाव स्थल से जल की ओर जाने का होने के कारण वह वापस जल की ओर दक्षिणगामी होता है।
सूर्य के अयन से संबंधित ज्योतिष शास्त्र की यह घटना भारतीय साहित्य में एक रोचक कथा का रूप धारण कर चुकी थी और वृद्धजनों के मुख से यत्र-तत्र सुनी जाती थी, जिसका संकेत कालिदास ने किया हैः- ‘प्राप्यावन्तीमुदुयन कथा को विदग्रामवृान।’ विदेशी दूत मेगस्थनीज ने भी सूर्य की इस कथा का श्रवण भारत के वृद्ध नागरिकों से किया था और उसका वर्णन उद्धरण इस प्रकार है :-
‘हरकुले (स) सौरसेन लोगों का इष्टदेव है। उसके दो प्रसिद्ध नगर हैं, एक मथुरा और दूसरा क्लिसबुरा जिसके पास ऐबोन्नी नदी बहती है। हरकुले (स) की पुत्री पांड्या का राज्य दक्षिण में पाण्डय प्रदेश में है। हरकुले दायोनीस (स) से 15 पीढ़ी बाद हुआ। शिव (शिवी) लोग अपने को हरकुल का वंशज मानते हैं। ‘एज ऑफ नन्दाज एण्ड मौर्याज’ ग्रंथ के पृष्ठ 101 पर श्री नीलकण्ठ शास्त्री ने इस उद्धारण की व्याख्या करने की कोशिश की है और मदुरा को मथुरा तथा ऐबोत्री को ‘यमुना’ माना है।
यह व्याख्या भ्रामक है। ‘मथुरा ‘ वास्तव में दक्षिण की ‘मदुरा’ नगरी है: जहां कन्याओं के प्रदेश के पाण्डय राज्य की इतिहास प्रसिद्ध राजधानी रही है। क्लिसबुरा और ऐबोनी की व्याख्या में ग्रीक के अनुवादक भूल कर बैठे हैं। क्लिसबुरा वास्तव में क्षिप्रा का ग्रीक रूप है और ऐबोन्नी ‘अवन्ती’ का शुद्ध अर्थ यह है कि दूसरी राजधानी ऐबोत्री है, जिसके पास बिलसबा नदी बहती है। हरकुले (स) ‘हरिकुल’ (सूर्यवंश) का ग्रीक रूप है और दायोनीस (स) ‘दिनेश’ का। हरकुले और दद्योनीस से ध्वनि साम्य होने के कारण मेगस्थनीज ने ये रूप स्वीकृत किये। सिकन्दर से लोहा लेने वाले ‘शिवि’ लोग सूर्यवंशी थे। यह कथा सरित्सागर से स्पष्ट है। अतः शैववाद की कल्पना व्यर्थ है। सौरसेन भी ‘शूरसेन’ से संबद्ध नहीं, सूर्योपासक (सौरसेन) हैं। इस प्रकार मेगस्थनीज के उद्धरण का स्पष्ट अर्थ यह है कि हरिकुलों की दो राजधानियाँ हैं। एक मदुरा और दूसरी क्षिप्रा के किनारे अवन्ती में। मदुरा में पांडय रानी का राज्य है। वह दिनेश से पन्द्रह पीढ़ी बाद हुई। शिविलोग भी हरिकुल के ही हैं।
मेगस्थनीज ने जिस कथा को सुना था, उसकी घटना इतिहास सम्मत भी है और प्रतीकात्मक भी। सूर्य उज्जयिनी में कर्कस्थ होता है और मदुरा में कन्या राशि पर।
परन्तु अब यह प्रश्न उपस्थित होता है कि विक्रमादित्य की इस कहानी के माध्यम से ज्योतिष के विषय स्पष्ट करने का प्रयास भारत के कवि वर्ग ने क्यों किया। पतंजलि के ‘महाभाग्य’ और सोमदेव के ‘कथा-कथा सरित्सागर’ आदि ग्रंथों को देखने से इस विषय पर कुछ प्रकाश पड़ता है। भारतीय शिक्षा शास्त्रियों में किसी समय बहुत बड़ा विवाद रहा है। एक वर्ग वैयाकरणों का था जो यह मानते थे कि विद्यार्थी को सर्वप्रथम व्याकरण का अध्यापन कराया जाये तथा ज्ञान-विज्ञान की भाषा को नियन्त्रित रखा जाये और उसमें अन्तर न होने दिया जाए, इस प्रकार के व्याकरणों के प्रयत्न के फलस्वरूप ‘संस्कृत नामक’ अमरवाणी का जन्म हुआ जो लगभग अढ़ाई हजार वर्षों तक भारत के ज्ञान-विज्ञान की भाषा रही है और जिसमें विविध शास्त्रों का प्रणयन होता रहा। पतंजलि के अनुसार परिवर्तनशील भाषा की गड़बड़ से घबरा कर देवताओं के इन्द्र से प्रार्थना की कि भाषा को नियन्त्रित किया जाये और इन्द्र ने सर्वप्रथम व्याकरण बनाकर उसका अनुशासन कर दिया।
दूसरा वर्ग ऐसे लोगों का था जो भाषा को नियमों से बांधने के पक्ष में नहीं थे, उनका कहना था कि रूक्ष भाषा और नीरस गद्य खंडों में व्याकरण बनाने की आवश्यकता नहीं है। विषय का प्रतिपादन मन्य और मनाइर स्थात्मक पद्यवद्ध गति में किया जाना चाहिये जिससे पाठक का विषय का ज्ञान भी हो जाये तथा अध्ययन में उसकी रूचि भी बनी रहे।
खेद की बात है कि नौरंजकतावादी शिक्षा शास्त्रियों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि कथा का मनोरंजक अंश पढ़ते समय पाठकों का मन केवल उसके रंजक अंश में ही लीन रहता है और वह अन्योक्ति के रूप में व्यक्त किये हुए ज्ञान को समझ ही नहीं पाता था। ‘बृहत्कथा’ में संभवतः ज्योतिष, भूगोल, इतिहास आदि अनेक विषयों का मनोहर कथाओं का समावेश किया गया था, परन्तु परवर्ती पाठकों के लिये वह मनोहर कथा मात्र रह गई। वत्सराज उदयन, विक्रमादित्य आदि की कथा सर्वप्रथम बृहत्कथा में लिखी गयी थी और उनके द्वारा ज्योतिष के तथ्यों का प्रतिपादन किया गया था।
ऐसा लगता है कि बृहत्कथा के काल का ज्योतिष शास्त्र बहुत बढ़ा-चढ़ा था। उसके बाद एक बहुत लम्बा समय भारतीय ज्योतिष के पतन का आया, जिस काल का कोई ग्रंथ इस समय विद्यमान नहीं है। इसीलिए ‘स्टैण्डर्ड टाइम’ के अर्थों में किसी प्रयुक्त होने वाले ‘महाकाल’ शब्द का प्रयोग वर्तमान युग में प्राप्त किसी ज्योतिष शास्त्र के ग्रंथ में नहीं मिलता। यद्यपि उज्जैन का उदयकाल ही उन सबमें भी प्रमुख उदयकाल माना गया है। ‘स्टॅण्डर्ड टाइम’ के अर्थों में जिस समय महाकाल शब्द का प्रयोग होता था, उस समय के ज्योतिषशास्त्र के विषय में बहुत अधिक अन्वेषण की आवश्यकता है। ‘कथा सरित्सागर’ और ‘बृहत्कथा मंजरी’ आदि की कहानियों के आधार पर ज्योतिष शास्त्र, भूगोल, इतिहास आदि के अनेक तथ्यों का शोध किया जा सकता है।
आशा है विद्वान लोग इस दिशा में कार्य करेंगे और भारतीय ज्योतिष के उस विस्मृत ‘महाकाल’ को पुनः प्रकाश में लायेंगे। इस प्रकार के अन्वेषण से यह भी सिद्ध हो पायेगा कि संस्कृत राशि-नामावली शुद्ध भारतीय है, ग्रीक शब्दावली का अनुवाद नहीं। वास्तव में ग्रीक नामावली ही अनुवाद है। यह भी विदित होगा
कि भारतीय कथाओं की बहुत-सी नामावलियां वास्तव में परिभाषित शब्दों की बोधक हैं। इससे हमारे सांस्कृतिक समृद्धि का उद्घघाटन भी होगा
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-राजशेखर व्यास
(लेखक, दूरदर्शन और आकाशवाणी के अतिरिक्त महानिदेशक रह चुके हैं।)
– बाजार की कमजोरी से निवेशकों के 2.69 लाख करोड़ रुपये डूबे
नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। कमजोर ग्लोबल संकेतों और आईटी सेक्टर के शेयरों में हुई जबरदस्त बिकवाली के कारण घरेलू शेयर बाजार आज गिरावट का शिकार हो गया। आज के कारोबार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई थी। बाजार खुलने के बाद दिन के पहले सत्र में खरीदारों ने कई बार लिवाली का जोर बनाने की कोशिश भी की लेकिन बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि बाजार की स्थिति में सुधार नहीं हो सका। पूरे दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स 0.66 प्रतिशत और निफ्टी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए।
आज दिनभर के कारोबार के दौरान आईटी सेक्टर जबरदस्त बिकवाली का शिकार हो गया। आईटी कंपनी के शेयरों में आई जोरदार गिरावट के कारण निफ्टी का आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत टूट कर बंद हुआ। आईटी सेक्टर में 23 मार्च 2020 के बाद 6 साल की सबसे बड़ी इंट्रा-डे गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह ऑयल एंड गैस, मीडिया और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में भी लगातार बिकवाली होती रही। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, हेल्थ केयर, मेटल, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज और टेक इंडेक्स भी कमजोरी के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, कंज्यूमर ड्यूरेबल और कैपिटल गुड्स सेक्टर के शेयरों में आज खरीदारी होती रही। ब्रॉडर मार्केट में भी आज आमतौर पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसके कारण बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.47 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। इसी तरह स्मॉलकैप इंडेक्स ने 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ आज के कारोबार का अंत किया।
आज शेयर बाजार में आई कमजोरी के कारण स्टॉक मार्केट के निवेशकों की संपत्ति में ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी हो गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन आज के कारोबार के बाद घट कर 472.30 लाख करोड़ रुपये (अनंतिम) हो गया। जबकि पिछले कारोबारी दिन यानी बुधवार को इनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 474.99 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह निवेशकों को आज के कारोबार से करीब 2.69 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया।
आज दिनभर के कारोबार में बीएसई में 4,368 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हुई। इनमें 1,680 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,527 शेयरों में गिरावट का रुख रहा, वहीं 161 शेयर बिना किसी उतार-चढ़ाव के बंद हुए। एनएसई में आज 2,911 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हुई। इनमें से 1,002 शेयर मुनाफा कमा कर हरे निशान में और 1,909 शेयर नुकसान उठा कर लाल निशान में बंद हुए। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में से 13 शेयर बढ़त के साथ और 17 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। जबकि निफ्टी में शामिल 50 शेयरों में से 21 शेयर हरे निशान में और 29 शेयर लाल निशान में बंद हुए।
बीएसई का सेंसेक्स आज 265.21 अंक की कमजोरी के साथ 83,968.43 अंक के स्तर पर खुला। कारोबार की शुरुआत होते ही खरीदारी का सपोर्ट मिलने से कुछ ही देर में यह सूचकांक उछल कर 84,061.62 अंक तक पहुंच गया। इसके बाद बाजार में बिकवाली शुरू हो गई। लगातार हो रही बिकवाली के कारण शाम 3 बजे के थोड़ी देर पहले सेंसेक्स 716.97 अंक टूटकर 83,516.67 अंक के स्तर तक गिर गया। इसके बाद खरीदारों ने लिवाली का जोर बनाने की कोशिश की, जिससे इस सूचकांक की स्थिति में कुछ सुधार भी हुआ। पूरे दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स निचले स्तर से 150 अंक से अधिक रिकवर कर 558.72 अंक की कमजोरी के साथ 83,674.92 अंक के स्तर पर बंद हुआ।
सेंसेक्स की तरह एनएसई के निफ्टी ने आज 47.15 अंक फिसल कर 25,906.70 अंक के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। बाजार खुलने के तुरंत बाद बिकवाली शुरू हो जाने के कारण इस सूचकांक की कमजोरी बढ़ती चली गई। हालांकि खरीदार बीच-बीच में लिवाली का जोर बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन पूरे दिन बाजार पर बिकवालों का ही कब्जा बना रहा। लगातार हो रही बिकवाली के कारण यह सूचकांक शाम 3 बजे के करीब 201.45 अंक लुढ़क कर 25,742.40 अंक के स्तर तक गिर गया। अंत में इंट्रा-डे सेटलमेंट के कारण हुई खरीदारी के सपोर्ट से निफ्टी दिन के निचले स्तर से लगभग 55 अंक की रिकवरी कर 146.65 अंक की कमजोरी के साथ 25,807.20 अंक के स्तर पर बंद हुआ।
आज दिनभर के कारोबार के दौरान स्टॉक मार्केट के दिग्गज शेयरों में से बजाज फाइनेंस 3.11 प्रतिशत, श्रीराम फाइनेंस 2.46 प्रतिशत, आयशर मोटर्स 2.21 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 1.70 प्रतिशत और ट्रेंट लिमिटेड 1.58 प्रतिशत की मजबूती के साथ आज के टॉप 5 गेनर्स की सूची में शामिल हुए। दूसरी ओर, टेक महिंद्रा 5.98 प्रतिशत, इंफोसिस 5.84 प्रतिशत, टीसीएस 5.49 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजी 4.87 प्रतिशत और विप्रो 4.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ आज के टॉप 5 लूजर्स की सूची में शामिल हुए।