बायोपोल केमिकल्स के निवेशकों को झटका, पहले दिन ही नुकसान में रहे

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नई दिल्ली, 13 फ़रवरी (हि.स.)। बायोकेमिकल और पॉलीइलेक्ट्रोलाइट केमिकल्स की मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करने वाली कंपनी बायोपोल केमिकल्स के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में मामूली बढ़त के साथ एंट्री की। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 108 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 2.70 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 111 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण थोड़ी देर में ही यह शेयर 105.45 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर पहुंच गया। हालांकि बाद में खरीदारी होने की वजह से इसने लोअर सर्किट को ब्रेक कर दिया। इसके बावजूद पूरे दिन के कारोबार के बाद कंपनी के शेयर 105.50 रुपये के स्तर पर बंद हुए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को 2.31 प्रतिशत का नुकसान हो गया।

बायोपोल केमिकल्स का 31.26 करोड़ रुपये का आईपीओ छह से दस फरवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 22.33 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 21.05 गुना सब्सक्राइब हुआ था। वहीं नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 24.49 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 20.80 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 28,94,400 नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी इंडस्ट्रियल प्लॉट खरीदने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 2.96 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 4.33 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को छह करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी तेजी आई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 17.43 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 49.15 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 48.97 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। इस अवधि में कंपनी के कर्ज में लगातार बढ़ोतरी होती रही। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 3.58 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 7.69 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 14.92 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 1.29 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 5.62 करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 11.63 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 4.43 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 6.53 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 8.99 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।

धर्म व समुदाय के खिलाफ भड़काने वाली सामग्री पर रोकः मुरुगन

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केंद्न के जी टीवी चैनलों को सख्त निर्देश

नई दिल्ली, 13 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को केबल टेलिविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट , 1995 के तहत बनाए गए प्रोग्राम कोड और विज्ञापन कोड का सख्ती से पालन करना होगा। इन नियमों के अनुसार, किसी धर्म, समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ या मानहानि कारक सामग्री का प्रसारण प्रतिबंधित है।

राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा के प्रश्न के उत्तर में एल मुरुगन ने कहा कि 2021 में लागू केबल टेलिविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 के तहत शिकायतों के निवारण के लिए तीनस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। पहले स्तर पर प्रसारक स्वयं शिकायत देखता है, दूसरे स्तर पर उसकी स्व-नियामक संस्था और तीसरे स्तर पर केंद्र सरकार की निगरानी व्यवस्था कार्रवाई करती है।

नियमों के उल्लंघन पर सरकार एडवाइजरी, चेतावनी, माफी स्क्रोल चलाने का आदेश, ऑफ-एयर आदेश या अनुमति रद्द करने जैसी कार्रवाई कर सकती है।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 144 कार्रवाइयां की गईं। इनमें 35 एडवाइजरी, 50 चेतावनियां, 54 माफी स्क्रोल आदेश, 3 ऑफ-एयर आदेश, 1 अनुमति रद्द और 1 डिस्क्लेमर आदेश शामिल हैं।

गांधी युग की पत्रकारिता सांस्कृतिक ,भविष्य की पत्रकारिता :रामबहादुर राय

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नई दिल्ली, 13 फरवरी (हि.स.)। आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने शुक्रवार को कहा कि गांधी युग की पत्रकारिता केवल राजनीतिक पत्रकारिता नहीं है बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और भविष्य की पत्रकारिता भी है ।

रामबहादुर राय ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ पुस्तक लोकार्पण एवं चर्चा कार्यक्रम के दौरान कही। इस पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर हैं। यह पुस्तक तीन मुख्य भागों में विभाजित है, जो भारतीय पत्रकारिता के क्रमिक विकास को दर्शाती है। इसमें पहली सदी: 1780-1880, तिलक युग: 1881-1920 और गांधी युग: 1921-1948 शामिल हैं।

राय ने इस पुस्तक के दूसरे खंड का उल्लेख करते हुए कहा, “अगर हम गांधी युग की पत्रकारिता को समझ लें तो आज की पत्रकारिता की गिरावट अकेली गिरावट नहीं है बल्कि पूरी व्यवस्थागत गिरावट है जिसमें राजनीति भी शामिल है, समाज भी शामिल है, संस्कृति भी शामिल है और कारोबार भी शामिल है ।”

उन्होंने कहा, “हमें यह स्वीकार करना होगा कि पत्रकारिता में गिरावट कोई स्वतंत्र घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने में आई गिरावट का प्रतिबिंब है।”

उन्होंने कहा कि श्री अरबिंदो द्वारा 1909-10 में ‘वन्दे मातरम्’ के माध्यम से दी गई परिभाषा आज भी प्रासंगिक है, जो पत्रकारिता को जनहित और समस्या समाधान के एक सशक्त औजार के रूप में परिभाषित करती है।

प्रभात खबर के प्रधान संपादक अंकित शुक्ल ने राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश की अनुपस्थिति में उनका वक्तव्य पढ़ते कहा कि ​यह ग्रंथ केवल मीडिया जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास, राजनीति और संस्कृति के जिज्ञासुओं के लिए भी एक अनमोल धरोहर है। यह पुस्तक भ्रम दूर करने और पत्रकारिता के छात्रों व विश्लेषकों को सही दिशा दिखाने में सक्षम है। यह हमारी समझ को विस्तार देने वाला एक अनिवार्य दस्तावेज है, जो हमें यह संदेश देता है कि तकनीक के साथ-साथ विचारों की मर्यादा को भी बचाना होगा।

अंकित शुक्ल ने कहा कि यह पुस्तक न केवल भ्रमित व्यक्तियों को सही मार्ग दिखाएगी, बल्कि वर्तमान में अपने पथ से विचलित होती पत्रकारिता को भी उसके आदर्शों और मूल स्वरूप की ओर वापस ले जाएगी।

विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि आज संपादकों के सामने जो चुनौतियां हैं, उनके मूल कारणों की पड़ताल जरूरी है। आज के दौर में जिस ‘मिशनरी’ संपादक की हम बात करते हैं, वह एक आदर्श मात्र रह गया है। आज के व्यावसायिक ढांचे में वैसा संपादक मिलना बहुत मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि मेरा आप सभी से आग्रह है कि सबसे पहले हमें ‘मिशनरी विजन’ रखने वाले संपादकों की खोज करनी चाहिए। एक बार जब ऐसे समर्पित संपादक मिल जाएं, तभी हम आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं।

लेखक श्रीधर ने कहा कि पत्रकारिता का उद्भव मात्र स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसका वास्तविक ध्येय सामाजिक चेतना जागृत करना और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाना रहा। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी पत्रकारिता की जरूरत है जहां अलग-अलग विचारों का आदर हो। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विचारों में मतभेद होना ठीक है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।

अनंत विजय ने कहा कि इस पुस्तक का अध्ययन न केवल पत्रकार छात्रों को अपनी ज्ञान-संपदा से परिचित कराएगा, बल्कि उस ‘छपे हुए शब्दों’ के महत्व को भी समझाएगा जिसने जनमानस के बीच संवाद का एक अनौपचारिक और सशक्त आधार तैयार किया है।

व्योमेश शुक्ला ने कहा कि हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां ‘संपादक’ नामक संस्था का प्रभाव धुंधला पड़ता जा रहा है। यह पुस्तक संपादक की गरिमा और उसकी प्रासंगिकता को पुनर्स्थापित करने की एक सार्थक कोशिश भी है।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार अनंत विजय, विभागाध्यक्ष (कलानिधि) के प्रो. (डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़, नागरिक प्रचारिणी के अध्यक्ष, लेखक एवम रंगकर्मी व्योमेश शुक्ला, वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के प्रो. कृपाशंकर चौबे सहित अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता रामबहादुर राय ने की और प्रास्ताविक एवं संचालन प्रो कृपाशंकर चौबे ने किया।

सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन विकसित भारत की यात्रा के महत्वपूर्ण मील का पत्थर : प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली, 13 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का नया भवन ‘सेवा तीर्थ’ और केंद्रीय सचिवालय के ‘कर्तव्य भवन 1 एवं 2’ विकसित भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। उन्होंने कहा कि ये नए भवन नागरिक-केंद्रित शासन तथा राष्ट्रीय प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ तथा केंद्रीय सचिवालय की इमारतों ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये भवन भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने कहा, “सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन 1 और 2 विकसित भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। ये नागरिक-केंद्रित प्रशासन और राष्ट्र की प्रगति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।” उन्होंने इस अवसर पर सेवा तीर्थ स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश एक नए इतिहास का निर्माण देख रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि विक्रम संवत 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष, विजया एकादशी, माघ 24 और शक संवत 1947 के इस पावन अवसर, जिसे वर्तमान कैलेंडर के अनुसार 13 फरवरी के रूप में जाना जाता है, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का विशेष महत्व है और इस दिन लिया गया संकल्प विजय दिलाता है। विकसित भारत के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश करना शुभ संकेत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक से देश के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, किंतु ये भवन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के रूप में निर्मित किए गए थे। उन्होंने कहा कि 1905 के बंगाल विभाजन के समय कोलकाता ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया था, जिसके बाद 1911 में अंग्रेजों ने राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया और औपनिवेशिक सोच के अनुरूप इन भवनों का निर्माण कराया।

उन्होंने कहा कि रायसीना हिल्स का चयन इस उद्देश्य से किया गया था कि ये भवन अन्य सभी इमारतों से ऊपर और प्रभावशाली दिखें। इसके विपरीत सेवा तीर्थ परिसर जमीन से जुड़ा हुआ है और यह जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक है। यहां लिए जाने वाले निर्णय किसी सम्राट की इच्छा नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के पहले क्वार्टर के पूर्ण होने के साथ यह आवश्यक है कि विकसित भारत की झलक केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और भवनों में भी दिखाई दे। नई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बीच पुरानी इमारतें अपर्याप्त हो रही थीं। उन्होंने बताया कि करीब 100 वर्ष पुरानी इमारतों में स्थान की कमी और संरचनात्मक सीमाएं थीं तथा वे भीतर से जर्जर हो रही थीं।

उन्होंने कहा कि आज भी केंद्र सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 से अधिक स्थानों से संचालित हो रहे थे, जिन पर प्रतिवर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये किराये के रूप में व्यय होते थे। प्रतिदिन हजारों कर्मचारियों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में अतिरिक्त लॉजिस्टिक खर्च होता था। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के निर्माण से इन खर्चों में कमी आएगी, समय की बचत होगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पुराने भवन देश के इतिहास का अमर हिस्सा हैं और उन्हें ‘युगे युगेन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी देश की विरासत से प्रेरणा ले सके। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री आवास की सड़क का नाम पहले रेस कोर्स रोड था, जिसे बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया। राष्ट्रपति भवन तक जाने वाली सड़क, जिसे पहले राजपथ कहा जाता था, उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया गया। शहीद सैनिकों के सम्मान में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और पुलिस बलों के सम्मान में पुलिस स्मारक का निर्माण भी इसी सोच का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान स्थापित करने का प्रयास है। नए संसद भवन के निर्माण के बाद पुराने भवन को ‘संविधान सदन’ की पहचान दी गई। मुगल गार्डन का नाम ‘अमृत उद्यान’ किया गया।

उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ केवल एक नाम नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है। “सेवा परमो धर्मः” की भावना ही शासन की आत्मा है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक निर्णय को 140 करोड़ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लें।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम यहां अधिकार दिखाने नहीं आए हैं, हम यहां जिम्मेदारी निभाने आए हैं।” उन्होंने कहा कि जब शासन सेवाभाव से चलता है तो परिणाम असाधारण होते हैं और इसी भावना से करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं तथा देश की अर्थव्यवस्था ने नई गति प्राप्त की है।

उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारों की भव्य इमारत कर्तव्य की नींव पर ही खड़ी होती है। विकसित भारत 2047 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्र का संकल्प है और सेवा तीर्थ तथा कर्तव्य भवन इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

शंकराचार्य मामले पर मुख्यमंत्री योगी ने सपा को घेरते हुए कहा- कानून सबके लिए बराबर

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लखनऊ, 13 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर आए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश उपद्रव प्रदेश नहीं उत्सव प्रदेश के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2030 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था देश की नंबर एक की अर्थव्यवस्था बनेगी। मुख्यमंत्री माघ मेले में शंकराचार्य विवाद पर भी खुलकर बोले और कहा कि कानून सबके लिए बराबर है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल अभिभाषण पर आए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी काे अपराधियों और माफियाओं को बढ़ावा देने वाली पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि सपा प्रदेश में शंकराचार्य विवाद, एसआईआर, लोकमाता अहिल्याबाई के मुद्दे पर समाज को बिगाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा ने प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद को अनावश्यक तूल दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य मामले पर कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठों का उल्लेख किया; चारों वेदों के मंत्रों को पढ़ते हुए इनकी मर्यादा को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के लिए पात्र होना चाहिए और वैदिक परंपराओं के अनुसार उसकी मान्यता होनी चाहिए। सनातन धर्म में शंकराचार्य पद सर्वोच्च है इसलिए मर्यादा का पालन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी ने सवाल किया कि अगर वे शंकराचार्य थे तो समाजवादी पार्टी की सरकार में उन पर लाठीचार्ज क्याें किया गया था और एफआईआर दर्ज कराई गई। अब सपा के लोग नैतिकता की बात करते हैं। एक जिम्मेदार व्यक्ति कभी भी अमर्यादित आचरण नहीं कर सकता है। हम कानून का पालन करना जानते हैं और करवाना भी जानते हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेले में श्रद्धालुओं के जीवन से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

मुख्यमंत्री योगी ने राज्यपाल के अभिभाषण के समय समाजवादी पार्टी के सदस्यों द्वारा हंगामा करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्यपाल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख हैं। उनके आने का कार्यक्रम, अभिभाषण सब पहले से तय था। कार्यमंत्रणा की बेठक में भी चर्चा हुई थी। इसके बावजूद मुख्य विपक्षी दल का आचरण न केवल संवैधानिक प्रमुख बल्कि मातृशक्ति का अपमान करने वाला रहा।

वंदे मातरम का विरोध करने वालों को देश में रहने का हक नहीं

मुख्यमंत्री योगी ने सदन में कहा कि सपा-कांग्रेस के लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं। वंदे मातरम का विरोध करने वालों को भारत में रहने का कोई हक नहीं है। ऐसे लोगों को वहीं जाना चाहिए जहां पर वंदे मातरम का विरोध होता है। कांग्रेस और सपा को भी चाहिए कि वे वंदेमातरम का विरोध न करें और जो विरोध करे उसे कान पकड़ कर धक्का देकर बाहर कर देना चाहिए। कांग्रेस और सपा को इस बात की घोषणा करनी चाहिए।

12 हजार एकड़ में बन रहा देश का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट

मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए सदन में कहा कि देश के सर्वाधिक एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में है। नोएडा में देश का सबसे बड़ा जेवर एयरपोर्ट बन रहा है, जो 12 हजार एकड़ में फैला हुआ है और यहां पांच रनवे बन रहे हैं। आज यूपी की पहचान एक्सप्रेस वे और एयरपोर्ट से हो रही है।

खेल स्टेडियम बन रहे हैं, खिलाड़ियाें काे नाैकरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार आगामी सालों में होने वाले कॉमनवेल्थ और ओलंपिक खेलों को देखते हुए प्रदेश के खिलाड़ियों को तैयार करने का काम किया जा रहा है। स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय बन चुका है और निजी खेल एकेडमियों को भी आर्थिक मदद दी जा रही है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार एशियाड और ओलंपिक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दे रही है। खेलों के लिए प्रदेश सरकार के पास बजट की कमी नहीं है। हम खेलो इंडिया के साथ इसे जोड़ते हैं और आगे बढ़ाते हैं। प्रदेश में ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय और मंडल मुख्यालय तक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने पर काम किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर, सामाजिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को नौकरियां दी हैं। बीते नौ साल में नौ लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं जिनमें से एक लाख 75 हजार महिलाओं की संख्या है। इसके साथ ही पुलिस भर्ती में भी महिलाओं को बड़ी संख्या में मौका दिया गया है। पीएसी की तीन महिला वाहनियां बनाई है और तीन अभी और बनाई जाएंगी। पुलिस और पीएसी में वर्ष 2017 से पहले के मुकाबले तीन गुना महिला कर्मियों की नियुक्तियां की गई हैं।

नौ साल में हमने कोई टैक्स नहीं लगाया

विपक्ष दलों को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के बारे में हर कोई अच्छा सोचता है। 2017 के पहले यूपी को लोग गलत निगाहों से देखते थे। आज यूपी की अर्थव्यवस्था 36 लाख करोड़ हो गई है। हमने टैक्स चोरी को रोका है। टैक्स चोरी रोकना भ्रष्टाचार पर सरकार का प्रहार है। बीते नौ साल में जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है फिर भी हमने वित्तीय अनुशासन कायम रखा है।

नसीमुद्दीन के सपा में जाने से बीजेपी पर नहीं होगा कोई असर : पाठक

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प्रयागराज, 13 फ़रवरी (हि.स.)। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने की अटकलों पर शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचे उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने से बीजेपी पर कोई असर नहीं होगा।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दावा किया है कि 2027 में बीजेपी फिर से प्रचंड बहुमत से सत्ता में आएगी। कांग्रेस और सपा पर उत्तर प्रदेश के लोगों को ठगने का आरोप लगाया। सपा को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बताते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि आम जनता से सपा को कोई लेना-देना नहीं है। सपा के शासन में रहते उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था चौपट हो गई थी। प्रदेश में अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है। भाजपा के राज में गुंडे माफिया या तो प्रदेश छोड़ चुके हैं या फिर जेल में हैं।

ब्रजेश पाठक ने कांग्रेस के मनरेगा बचाओ यात्रा प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को दिग्भ्रमित हो चुकी है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेतिहर मजदूरों के हक में यह कानून लाया है। कांग्रेस पार्टी को मजदूरों की चिंता नहीं है, बल्कि अपनी गड़बड़ियों की चिंता है,क्योंकि नए कानून से कांग्रेस की गड़बड़ियों का पर्दाफ़ाश हो चुका है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि नए कानून के तहत गाँव के मजदूर को काम नहीं मिला तो ग्राम पंचायत को पेनाल्टी देनी होगी। यह कानून मजदूरों के लिए वरदान साबित होने जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने वंदे मातरम् गीत पर आपत्ति जताने वालों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम् गीत को आजादी के दीवानों ने हंसते हुए गाया था, आजादी के दीवानों ने हंसते हुए वंदे मातरम् गीत गाकर फांसी के फंदे को चूम लिया था। आपत्ति करने वाले तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हर भारतवासी वंदे मातरम् गीत को गाना चाहता है।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक प्रयागराज शुक्रवार दोपहर बाद पहुंचे और भाजपा कार्यसमिति के सदस्य दारागंज निवासी जयवर्धन त्रिपाठी के आवास पर पहुंचे और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र मिश्रा उर्फ नगरहा के तिलक नगर अल्लापुर आवास भी गए । वहां से उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के स्टैनली रोड स्थित सभागार में एक स्थानीय समाचार पत्र के आयोजित रजत जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए।

उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का याेगी करेंगे शिलान्यास

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नोएडा, 13 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला 21 फरवरी को रखी जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव इसका शिलान्यास करेंगे। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुवल रूप से शामिल होगे।

यमुना विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि यमुना सिटी में एचसीएल और फॉक्सकॉन के संयुक्त उपक्रम मैसर्स इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सेमीकंडक्टर यूनिट लगाएगी। कंपनी को सेक्टर-28 में 48 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इस यूनिट का शिलान्यास 21 फरवरी को सेक्टर-28 में होगा। यूनिट की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव रखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास समारोह को वर्चुअल रूप से संबोधित कर सकते हैं। समारोह को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा संबंधी तमाम व्यवस्थाओं पर काम शुरू हो गया है। कंपनी यमुना सिटी में 3706.15 करोड़ का निवेश करेगी। इससे करीब चार हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। यह कंपनी 2,40,000 यूनिट स्माल पैनल ड्राइवर आईसी, डिस्प्ले इंटीग्रेटेड सर्किट का निर्माण करेगी। इसके लिए प्रतिदिन 19 हजार केवीए बिजली की जरूरत पड़ेगी। 2000 एमएलडी पानी प्रतिदिन लगेगा। इस समारोह को लेकर अफसरों को जानकारी दे दी गई है। हालांकि, अभी आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है।

यह इकाई के लगने से भारत की सेमीकंडक्टर के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। वाहन, कंप्यूटर, लैपटॉप, सेलफोन आदि में सेमीकंडेक्टर सबसे अहम पार्ट है। इसकी कमी से मोटर मार्केट में दिक्कत हो रही है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर का उत्पादन होगा। सेमीकंडक्टर एक सिलिकॉन चिप होती है। इनका इस्तेमाल कंप्यूटर, सेलफोन, गैजेट, वाहनों, माइक्रोवेव ओवन आदि में होता है। ये किसी उत्पाद को नियंत्रित करने के साथ मेमोरी फंक्शन को ऑपरेट करती है। कंप्यूटर, सेलफोन, गैजेट्स, वाहनों की मांग बढ़ने पर सेमीकंडक्टर की मांग भी बढ़ जाती है। रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते सेमीकंडक्टर मांग के अनुरूप नहीं मिल पा रहे हैं। देश में कार की वेटिंग बढ़ने का एक कारण यह भी बताया जाता है।

उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर इकाई लगाने के लिए कंपनी को शत प्रतिशत एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार कंपनी को 75 प्रतिशत लैंड सब्सिडी, 100 करोड़ कैपिटल सब्सिडी, रिसर्च एंड डवलपमेंट के लिए दो करोड़, 10 वर्ष के लिए पीएफ सहित अन्य लाभ मिलता है। भारत सरकार से लाभ पाने के लिए भी छूट मिलती है। सेमीकंडक्टर के लिए अब तक कुल पांच कंपनियां आवेदन कर चुकी हैं । सेक्टर-28 में पहली इकाई को जमीन भी मिल चुकी है। इसके अलावा टार्क कंपनी ने 125 एकड़ और भारत सेमी सिस्टम, कीन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड 50-50 एकड़, एडिटेक सेमीकंडक्टर को 100 एकड़ में अपनी यूनिट स्थापित करने का निवेश प्रस्ताव रखा है। इन इकाइयों को सेक्टर-10 में जगह दी जाएगी। हालांकि, इन कंपनियों को फिलहाल मंजूरी का इंतजार है।

बांग्लादेश में नई सरकार, भारत को क्या दरकार

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-डॉ. प्रभात ओझा

बांग्लादेश में चुनाव नतीजों से साफ हो गया कि वहां बीएनपी की सरकार होगी और तारिक रहमान देश के नये प्रधानमंत्री होंगे। किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में यह सहज ही है कि आंतरिक और बाह्य राजनीतिक ताकतें चुनाव परिणाम को सकारात्मक ढंग से लें। बांग्लादेश के लिए भी यह परंपरा मान्य होनी चाहिए, हालांकि इसको लेकर कुछ संशय चुनाव के साथ ही शुरू हो चुके हैं। इसे समझने के लिए दो बिंदुओं पर विचार करना होगा। पहला यह कि चुनाव प्रक्रिया पर देश के अंदर से ही सवाल उठाये गये हैं। दूसरा बिंदु पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में आश्रय लेना है। यह स्थिति सामान्य नहीं कही जा सकती कि पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी बांग्लादेश में बैन कर दी गई। फिर जिन्होंने चुनाव में हिस्सा लिया, वे ही निर्वाचन प्रक्रिया से ही संतुष्ट नहीं हैं। भारत के लिए तो यह निर्वाचन इसलिए मायने रखता है कि प्रधानमंत्री के रूप में जो नेता उसके अनुकूल रहीं, उन्हें बांग्लादेश से निर्वासित होकर आना पड़ा। बात इतनी ही होती तो चिंता न होती। उन्हें शरण देने के पहले से ही बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल रहा है।

फिलहाल तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत पर पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी। उन्होंने इसे रहमान के नेतृत्व पर बांग्लादेश की जनता का भरोसा बताया। मोदी ने खुद भरोसा दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। उन्होंने दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए तारिक रहमान के साथ काम करने के लिए उत्सुकता जताई।

स्वाभाविक कि एक बड़े लोकतांत्रिक देश और पड़ोसी होने के नाते भारत यह रुख अपनाये। इसके विपरीत हाल के घटनाक्रम आगे की राह आसान नहीं होने के ही संकेत देते हैं। भारत के राजनयिक पड़ोस में हो रहे चुनाव के दौरान जमात-ए-इस्लामी के प्रदर्शन पर नजर रखे हुए थे। भारत का मानना रहा है कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रभाव में रहती है। जमात इस चुनाव में अपने को सत्ता हासिल करने के करीब मानकर चल रहा था। उसने 11 दलों के साथ गठबंधन बनाया था। स्वाभाविक है कि ये छोटे दल हैं और पूरी तरह से जमात की ही पकड़ में रहे हैं। जमात ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने भारत विरोधी रुख को छिपाया भी नहीं। अब हार के बाद उसकी हताशा चुनाव प्रक्रिया पर सवाल के रूप में सामने आई है। यहीं नहीं, साल 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाने के लिए आंदोलन करने वाली नेशनल सिटीजन्स पार्टी ने भी चुनाव नतीजों में हेरफेर के आरोप लगाये हैं।

सच है कि बांग्लादेश में अति कट्टरपंथियों की हार खुद अपने लोगों और भारत के अनुकूल है। जिस तरह के हालात से बांग्लादेश गुजरा है, नई सरकार को स्थिति सामान्य करने में समय लगेगा। शेख हसीना के देश से बाहर आ जाने के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बना माहौल भारत के खिलाफ ही रहा। हालात यह हो चले थे कि हिन्दू नागरिकों की लींचिंग के दौरान हत्या तक हुई। यह वही क्षेत्र है, पूर्वी पाकिस्तान के रूप में जहां लोकतांत्रिक आंदोलन को भारत ने न सिर्फ समर्थन दिया बल्कि बांग्लादेश के उदय में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। बांग्लादेश के नायक शेख मुजीब की हत्या के बाद से भारत को अपने इस पड़ोसी के साथ रिश्तों को लेकर सजग रहना पड़ा है। सुरक्षा सहयोग, विदेश नीति और आर्थिक साझेदारी के बूते भारत ने इसे सम्भाले रखा।

यह भी देखना होगा कि जिस पाकिस्तान से निकल कर बांग्लादेश अस्तित्व में आया, शेख हसीना के दौर में वहां पाकिस्तान की दाल नहीं गली। पाकिस्तान अब बांग्लादेश में भारत विरोधी रुख बने रहने की उम्मीद ही नहीं, कोशिश भी करेगा। शेख हसीना के हटने के बाद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में उसे अपने मकसद में कामयाबी मिलती दिखी। यूनुस पाकिस्तान के साथ रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से चल रहे थे।

देखना होगा कि अब जबकि बीएनपी सत्ता में होगी, चीन के साथ ही पाकिस्तान के साथ वह अपने रिश्ते कैसा रखती है। भारत ने तो शेख हसीना को शरण देने के साथ बीएनपी से भी रिश्ते सुधारने की कोशिश की है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बीमार होने पर चिंता जताना और उनके निधन के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर का उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने को खास माना जा सकता है। खुद खालिदा जिया के शासनकाल में भारत का उनके देश के साथ रिश्ते को बहुत अच्छा नहीं, तो खराब भी नहीं कह सकते। तारिक रहमान उन्हीं के बेटे हैं, युवा हैं, अभी पिछले साल के अंत में ही लंबे समय बाद स्वतः निर्वासन की स्थिति से लौटे हैं। उम्मीद की जाती है कि वे भारत से अपने देश के रिश्तों को बदलती दुनिया के हिसाब से देखेंगे। हमेशा की तरह भारत तो बेहतर रिश्ते ही चाहेगा।

-डॉ. प्रभात ओझा

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

महाशिवरात्रि पर्व के लिए पशुपतिनाथ में जुटने लगे भारत के नागा संन्यासी

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काठमांडू, 13 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि पर्व के नजदीक आते ही पड़ोसी देश भारत के विभिन्न हिस्सों से नागा संन्यासियों का काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में आने का सिलसिला शुरू हो गया है।

नागा बाबाओं के एक समूह ने शुक्रवार को पारंपरिक शोभायात्रा के साथ पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में गेट नंबर 1 से प्रवेश किया है। इन सभी नागा संन्यासियों का स्वागत पशुपति क्षेत्र विकास कोष के पदाधिकारियों ने किया।

योगियों के चार संप्रदायों सन्यासी, वैष्णव, नानक और उदासी में नागा बाबा सन्यासी परंपरा से संबंधित होते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर इन चारों संप्रदायों के साधु-संतों का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल पशुपतिनाथ मंदिर में एकत्र होना एक प्राचीन परंपरा है। पर्व के निकट आने के साथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए सुचारु व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महाशिवरात्रि को ध्यान में रखते हुए तैयारियों और प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। इस वर्ष 15 लाख श्रद्धालुओं के पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन करने की संभावना है। मंदिर प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि 14 फरवरी को देर रात 1 बजे से ही मंदिर के चारों कपाट खोल दिए जायेंगे, जो 15 फरवरी मध्यरात तक दर्शन के लिए खुले रहेंगे।

काठमांडू लौटने पर पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह का समर्थकों ने किया भव्य स्वागत

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काठमांडू, 13 फरवरी (हि.स.)। झापा से लौटे पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर भव्य स्वागत किया गया। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए समर्थकों ने पूर्व राजा का स्वागत किया। पूर्व राजा के स्वागत की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने हवाई अड्डा परिसर में निषेधाज्ञा जारी की थी।

आज सुबह से ही उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। हालांकि, पुलिस ने पूर्व राजा के स्वागत के लिए जुटी भीड़ पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया। भीड़ में कई लोग राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए थे। राजा के समर्थक अभियंता दुर्गा प्रसाईं भी पूर्व राजा के स्वागत के लिए पहुंचे थे। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी आम लोगों से स्वागत में उपस्थित होने की अपील की थी, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेता हवाई अड्डे पर नजर नहीं आए। पूर्व राजा ने कार के सनरूफ से समर्थकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

समर्थकों की भीड़ पूर्व राजा के साथ उनके निर्मल निवास तक गई और राजसंस्था के समर्थन में नारेबाजी भी की। हालांकि, पिछले वर्ष पोखरा से पूर्व राजा के आगमन पर जैसी भीड़ देखी गई थी, वैसी इस बार नजर नहीं आई।