शिक्षा, स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकता, यह सबको सुलभ होना चाहिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का कथन

लखनऊ, 18 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शिक्षा और स्वास्थ्य को मूलभूत आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह सबके लिए सुलभ होना चाहिए। यह व्यवसाय नहीं हो सकते।

डॉ. भागवत ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शोधार्थी छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम में कहा कि पश्चिम के लोगों ने शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया। हमारी शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी थोपी, जिससे उन्हें काम करने के लिए ‘काले अंग्रेज’ मिल जाएं। अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा है उसको ठीक करना ही होगा।

उन्होंने कहा कि संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है। मैं और मेरा परिवार ही सबकुछ है, यह न सोच कर पूरे देश के लिए सोचना होगा। संघ समाज की एकता और गुणवत्ता की चिंता करता है। संघ को समझना है तो संघ में आकर कर देखिये। संघ को पढ़ कर नहीं समझा जा सकता है। संघ को सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाला एक ही काम करना है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए।

सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। सत्यपरक बातें सामने आनी चाहिए। अज्ञानता से भारत को हम समझ ही नहीं पाएंगे। उन्होंने शोधार्थियों छात्रों से कहा कि जो भी शोध करें उसे उत्कृष्ट रूप से, प्रामाणिकता पूर्वक, तन-मन-धन से, निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर बहुत दुष्प्रचार होता है। शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए।

वैश्वीकरण के विषय पर उन्होंने कहा कि यह कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं है। आज वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है। हम वसुधैव कुटुंबकम् की बात करते हैं। यानी पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन संयमित होना चाहिए, उपभोगवादी नहीं। संयम और त्याग का जीवन हमारे संस्कृति आत्मबोध में है। पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया। उन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने, उन्हें मिटा दो। यही काम आज अमेरिका, चीन कर रहे हैं, लेकिन आज दुनिया भर की समस्याओं के प्रश्नों का उत्तर भारत के पास है। विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा। दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो।

उन्होंने कहा कि धर्म का शाश्वत स्वरूप सदैव प्रासंगिक है। सृष्टि जिन नियमों से चलती है, वह धर्म है। धूल का एक भी कण धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता है। धर्म सबको सुख पहुंचाता है। हमारी सभी बातों में धर्म लागू है। आचरण धर्म, देश, काल के अनुसार बदलता रहता है। धर्म बताता है कि हमें अकेले नहीं सबके साथ जीना है।

पर्यावरण संरक्षण पर संघ प्रमुख ने कहा कि पर्यावरण के प्रति हम लोगों को मित्र भाव से जीवन को जीना चाहिए। पेड़ लगाना, पानी बचाना, एकल प्लास्टिक का प्रयोग न करना जैसे कार्य पर्यावरण संरक्षण में सहायक हो सकते हैं। हमें आधुनिक तकनीक का भी पर्यावरण संरक्षण में उपयोग करना चाहिए।————

‘चैतन्य महाप्रभु के अनन्य भक्त के रूप में आया हूं’

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मायापुर धाम में बोले अमित शाह,

कोलकाता, 18 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के पवित्र मायापुर धाम में श्रील भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद की 152वीं जयंती समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सहभागिता करते हुए कहा कि वह यहां चैतन्य महाप्रभु के अनन्य भक्त के रूप में उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मायापुर की पावन भूमि पर आकर चेतना जागृत हुई है और यह उनके लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण है।

कार्यक्रम में इस्कॉन नामहट्टा के अध्यक्ष पूज्य गौरांग प्रेम स्वामी जी महाराज, गौड़ीय वैष्णव संघ के अध्यक्ष पूज्य भक्ति वेदांत जनार्दन स्वामी जी महाराज, सारस्वत गौड़ीय वैष्णव संघ के सचिव पूज्य भक्ति वैभव नारायण स्वामी महाराज सहित अनेक संत उपस्थित रहे। शाह के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य भी मौजूद थे।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए शाह ने बताया कि आज का दिन और स्थान दोनों ही पवित्र हैं। एक ओर श्री चैतन्य महाप्रभु की लीला भूमि मायापुर है, वहीं दूसरी ओर भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद की 152वीं जयंती का अवसर है, जो मणिकांचन योग जैसा शुभ संयोग है। उन्होंने चैतन्य महाप्रभु, प्रभु नित्यानंद, अद्वैताचार्य, गदाधर और श्रीवास को नमन करते हुए अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि श्रील भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर प्रभुपाद और श्रील भक्ति वेदांत प्रभुपाद ने चैतन्य महाप्रभु द्वारा आरंभ किए गए भक्ति आंदोलन को न केवल आगे बढ़ाया बल्कि आधुनिकता से जोड़कर विश्वभर में आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। शाह ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भक्ति सिद्धांत प्रभुपाद ने अपने जीवनकाल में एक अरब बार श्रीकृष्ण नाम जप का संकल्प लेकर उसे पूर्ण किया, जो विश्व के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि भक्ति सिद्धांत प्रभुपाद ने धर्म को रूढ़ियों से बाहर निकालने का साहस दिखाया और आधुनिकता को धर्म का साथी बताया। प्रिंटिंग प्रेस को ‘बृहत मृदंग’ नाम देकर उन्होंने यह स्थापित किया कि पुस्तकें सात सागर पार जाकर भी भक्ति का प्रचार कर सकती हैं। उन्होंने जातिगत बंधनों को तोड़ते हुए जन्म से ब्राह्मण न होने वालों को भी यज्ञोपवीत देकर उन्हें ब्राह्मण बनने का अधिकार प्रदान किया और ‘युक्त वैराग्य’ की नई व्याख्या प्रस्तुत की।

शाह ने कहा कि सच्चा गुरु वही है जो स्वयं को सेवक मानता है और शिष्य को ऊंचा उठाता है। उन्होंने भक्ति सिद्धांत प्रभुपाद को सच्चे गुरु के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार किए गए शिष्य भक्ति वेदांत प्रभुपाद ने इस्कॉन आंदोलन को वैश्विक स्तर पर विस्तार दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज सनातन धर्म का संदेश पूरी दुनिया में पहुंच रहा है।

उन्होंने इस्कॉन की सेवा गतिविधियों की भी सराहना की और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय सबसे पहले इस्कॉन का प्रसाद वितरण शिविर दिखाई देता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, निःशुल्क भोजन वितरण और भारतीय उत्सवों को युवाओं तक पहुंचाने में इस्कॉन की भूमिका उल्लेखनीय है। शाह ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में भ्रमण के दौरान उन्हें हर भाषा में गीता की पुस्तक मिली, जो इस्कॉन के माध्यम से प्रकाशित हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के राष्ट्राध्यक्षों को गीता भेंट करते हैं, क्योंकि यह समग्र विश्व कल्याण का संदेश देती है। शाह ने मायापुर में बन रहे आध्यात्मिक केंद्र को विश्व के लिए आशा का केंद्र बताते हुए विश्वास जताया कि यह स्थान युगों तक भक्ति मार्ग का प्रकाश फैलाता रहेगा।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भगवान नरसिंह से भारत के कल्याण की प्रार्थना की और कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ सनातन का संदेश विश्वभर में पहुंचाने में देश सफल होगा। कार्यक्रम के लिए गौड़ीय मठ का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने भक्तों के साथ ‘हरे कृष्ण’ का उच्चारण कर अपना संबोधन समाप्त किया।——-

मनोहर लाल ने एआई इंपैक्ट समिट में विद्युत मंत्रालय के मंडप का उद्घाटन किया

नई दिल्‍ली, 18 फरवरी (हि.स)। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को राजधानी नई दिल्‍ली के भारत मंडपम में एआई इंपैक्‍ट समिट में विद्युत मंत्रालय के मंडप का उद्घाटन किया। मंडप में दिखाया गया है कि डिजिटल प्रौद्योगिकियां किस प्रकार उत्पादन, पारेषण और वितरण प्रणालियों को नया आकार दे रही हैं।

विद्युत मंत्रालय के मुताबिक यह मंडप ‘मेगावाट से मेगाबाइट तक: भारत के विद्युत इको-सिस्टम का रूपांतरण’ विषय के तहत विद्युत क्षेत्र का एक दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह मंडप बुनियादी ढांचे की विश्वसनीयता को मजबूत करने, दक्षता में सुधार करने और विद्युत क्षेत्र में सतत विकास को समर्थन देने के लिए अत्याधुनिक एआई प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने पर मंत्रालय के ध्यानाकर्षण को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने एआई इंपैक्‍ट समिट में दिल्ली मेट्रो रेल निगम द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी दौरा किया। डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. विकास कुमार ने उन्हें डीएमआरसी द्वारा एआई के क्षेत्र में की गई पहलों के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर डीएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कि एआई की मदद से ग्राहकों की शिकायतों और यात्रियों से सम्बंधित समस्याओं का तेजी से समाधान संभव हो सकेगा। ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई), पैंटोग्राफ-ओएचई इंटरैक्शन, व्हील ग्राइंडिंग, रोलिंग स्टॉक सबसिस्टम और सिग्नलिंग की निगरानी सहित रखरखाव के क्षेत्र में एआई का उपयोग किया जा रहा है।

निसान ने भारत में लॉन्च की ऑल-न्यू ग्रेवाइट

शुरुआती कीमत 5.65 लाख रुपये

नई दिल्‍ली, 18 फरवरी (हि.स)। जापान की वाहन विनिर्माता कंपनी निसान मोटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एनएमआईपीएल) ने मंगलवार को भारत में अपनी नई कार ‘ग्रैवाइट’ लॉन्‍च की। इसकी शुरुआती कीमत 5.65 लाख रुपये से 8.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है।

निसान मोटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ वत्स ने कहा कि ऑल-न्यू निसान ग्रेवाइट भारतीय परिवारों की विविधता, व्यापकता एवं महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित है। कंपनी 2026 में ब्रांड के पुनरुत्थान के लिए कई नए वहान पेश करने और बिक्री ढांचे को मजबूत करने की तैयारी में है।कंपनी फिलहाल देश में केवल एक मॉडल ‘मैग्नाइट’ बेचती है। सौरभ वत्स ने बताया कि कंपनी ने अपना दूसरा मॉडल सात सीट वाली कार ‘ग्रैवाइट’ पेश की है। ‘ग्रैवाइट’ की (एक्स शोरूम) कीमत 5.65 लाख रुपये से 8.49 लाख रुपये के बीच है। उन्‍होंने कहा कि करीब 12 महीनों के भीतर हम तीन नए वाहन पेश करने जा रहे हैं। इसलिए यह पुनरुत्थान का वर्ष होगा, जो मुख्य रूप से स्पोर्ट यूटिलिटी वाहनों पर आधारित उत्पाद श्रृंखला पर टिका होगा।

वत्स ने बताया कि ‘मैग्नाइट’ देश में कंपनी के उत्पाद खंड में अहम भूमिका निभाती रहेगी। उन्‍होंने कहा कि कंपनी की योजना वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक बिक्री केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 250 करने की है। फिलहाल देशभर में कंपनी के लगभग 160 डीलर हैं। वत्स ने कहा कि भविष्य में निर्यात हमारे बुनियादी एवं मजबूत स्तंभों में से एक बना रहेगा…वित्त वर्ष 2026-27 में हम भारत से एक लाख इकाई निर्यात का आंकड़ा पार कर जाएंगे। उन्होंने बताया कि ‘ग्रैवाइट’ के अलावा कंपनी इस वर्ष के दौरान एक ‘टेकटन स्पोर्ट’ यूटिलिटी वाहन और सात सीट वाले मध्यम श्रेणी का स्पोर्ट यूटिलिटी वाहन भी लाने की योजना बना रही है।

प्रल्हाद जोशी ने कहा-देश की गैर जीवाश्म बिजली क्षमता 272 गीगावाट के पार

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-भारत-ब्रिटेन ने विजन 2035 के तहत अपतटीय पवन कार्यबल का शुभारंभ किया

नई दिल्‍ली, 18 फरवरी (हि.स)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को कहा कि भारत की गैर-जीवाश्म आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता 272 गीगावाट से ज्‍यादा हो गई है। इसमें 141 गीगावाट सौर तथा 55 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक भारत और ब्रिटेन ने आज भारत-यूके अपतटीय पवन कार्यबल लॉन्च किया। इसका मकसद विजन 2035 के तहत अपनी बड़ी स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी के हिस्से के तौर पर अपतटीय पवन विकास में सहयोग को तेज करना है। इस अवसर पर ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून भी मौजूद थीं।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल की शुरुआत के मौके पर यह जानकारी दी। इस अवसर पर प्रल्हाद जोशी ने कहा कि अपतटीय पवन ऊर्जा देश के स्वच्छ, आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य का मजबूत स्तंभ बन सकती है। कार्यबल की औपचारिक शुरुआत के मौके पर जोशी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 35 गीगावाट से अधिक सौर तथा 4.61 गीगावाट पवन क्षमता जोड़ी है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल किया। यह उपलब्धिक निर्धारित लक्ष्य से पांच वर्ष पहले हासिल की गई। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट नीति, संस्थागत समन्वय तथा निवेशकों और उद्योग के भरोसे को दर्शाते हैं। यह उपलब्धि वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा तथा 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मंत्री ने कहा कि आज भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता 272 गीगावाट से अधिक है जिसमें सौर से 141 गीगावाट और पवन से 55 गीगावाट है…। हमारी व्यापकता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत दो साल से कम समय में करीब 30 लाख परिवारों को ‘रूफटॉप सोलर’ की सुविधा मिली। इसके अलावा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना के तहत 21 लाख पंपों का सौरकरण किया गया है।

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शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद

शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद, सेंसेक्स 283 अंक उछला

नई दिल्‍ली, 18 फरवरी (हि.स)। मजबूत वैश्विक रुझान के बीच हफ्ते के तीसरे दिन बुधवार को शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान पर बंद हुआ। बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 283.29 अंक यानी 0.34 फीसदी उछल कर 83,734.25 के स्‍तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला निफ्टी 93.95 अंक यानी 0.37 फीसदी की बढ़कर 25,819.35 पर बंद हुआ।

कारोबार के अंत में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) बढ़कर 471.89 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में 470.11 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 19 शेयरों में बढ़त रही। वहीं, निफ्टी के 50 शेयरों में से 31 शेयरों में बढ़त रही। इसमें शामिल टाटा स्टील के शेयरों में 2.90 फीसदी की सबसे ज्यादा की तेजी रही। इसके अलावा आईटीसी, एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 1.18 फीसदी से लेकर 2.21 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, आज कारोबार में मेटल, बैंकिंग और एफएमसीजी शेयर्स में बढ़त रही। वहीं, आईटी शेयर्स में गिरावट रही।

उल्‍लेखनीय है कि एक दिन पहले मंगलवार को बीएसई का सेंसेक्स 173.81 अंक यानी 0.21 फीसदी उछल कर 83,450.96 के स्‍तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 42.65 अंक यानी 0.17 फीसदी चढ़कर 25,725.40 के स्‍तर पर बंद हुआ था।

एप्सटीन फाइल्स : यही है शक्तिशाली पुरुष ‘भेड़ियों ‘ की हक़ीक़त                                                                     

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−निर्मल रानी 

इन दिनों एप्सटीन फ़ाइल्स का भूत अमेरिका से लेकर भारत तक सड़कों पर नाच रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के क़ानून के अन्तर्गत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हस्ताक्षर के बाद ही अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा यह फ़ाइल्स जारी की गई हैं। इस आदेश के तहत अमेरिकी न्याय विभाग को एपस्टीन से जुड़े सभी अनक्लासिफ़ाइड रिकॉर्ड्स, दस्तावेज़, कम्युनिकेशन्स और जांच सामग्री सार्वजनिक करने का निर्देश प्राप्त है। हालाँकि यह क़ानून 2025 में कांग्रेस के दोनों सदनों (हाउस और सीनेट) से लगभग सर्वसम्मति से पास हुआ था, और राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 नवंबर 2025 को इस पर हस्ताक्षर किए थे। इसी क़ानून के तहत  अमेरिकी न्याय विभाग ने समय-समय पर  फ़ाइल्सजारी की। परन्तु इन फ़ाइल्स का बड़ा हिस्सा गत 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया। इसमें 3.5 मिलियन से ज़्यादा पृष्ठ , 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 फ़ोटो शामिल थे। एप्सटीन फ़ाइल्सके इसी ख़ुलासे के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। दुनिया के जाने माने लोगों के चेहरे से नक़ाब हटने लगी। इन फ़ाइल्स के सार्वजनिक होने के बाद एप्सटीन के यौन अपराधों, ट्रैफ़िकिंग नेटवर्क और शक्तिशाली व्यक्तियों के साथ उनके संबंधों की गहराई उजागर हुई। 

                    ग़ौरतलब है कि जेफ़री एप्सटीन, एक अमीर फ़ाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी है। इसने अनेक नाबालिग़ लड़कियों और युवा महिलाओं का शोषण किया, और इन फ़ाइल्समें राजनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक हस्तियों के कई नाम सामने आए। इन ख़ुलासों के बाद कई प्रमुख व्यक्तियों का भविष्य व जीवन प्रभावित हुआ। कई लोगों को इस्तीफ़े देने पड़े तो कई के विरुद्ध जांच बिठाई गयी। आपना नाम आने पर कई लोग शर्मिंदगी से जहाँ मुंह छुपाते घूम रहे हैं यहाँ तक कि इस नेटवर्क में नाम आने के बाद कई लोग भूमिगत हो चुके हैं और मीडिया से मुंह छुपाते फिर रहे हैं। वहीं भारत में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी जैसे ‘विशिष्ट ‘ भी हैं जो एप्सटीन फ़ाइल्स के ख़ुलासे के अनुसार तो जेफ़री एपस्टीन से 14 बार मिले परन्तु वे स्वयं एपस्टीन से 8 सालों में केवल 3-4 बार की मुलाक़ात को ही स्वीकार करते हैं। इसके बावजूद वह इस सवाल से बच नहीं पा रहे कि 13 -14 बार या 3-4 बार नहीं बल्कि यदि एक सज़ायाफ़्ता बदनाम यौन अपराधी से हरदीप पुरी एक बार भी मिले तो उस मुलाक़ात की वजह क्या थी ? जो व्यक्ति ख़ुद स्वीकार कर चुका है कि वह कम उम्र की बच्चियों से सैक्स करने का आदी था ऐसे ‘भेड़िया मानसिकता ‘ वाले व्यक्ति से मुलाक़ात क्यों की गयी ? किसके कहने पर या किसके लिये की गयी ? बहरहाल उम्मीद की जा रही है कि अभी दुनिया के और भी अनेकानेक ‘सफ़ेदपोश भेड़ियों ‘ के नाम सामने आएंगे और इस्तीफ़ों की भी झड़ी लग सकती है। 

               दुनिया में आये दिन घटित होने वाली तमाम घटनाएं ऐसी हैं जो पितृ सत्ता या पुरुष प्रधान समाज का बार बार एहसास कराती हैं। परन्तु इस घटना में तो जेफ़री एप्सटीन पर 2019 में न्यूयॉर्क में संघीय अदालत ने उसपर सेक्स ट्रैफ़िकिंग ऑफ़ माइनर्स के आरोप लगाए, जिसमें दर्जनों नाबालिग़ लड़कियों यहाँ तक कि 14 साल से भी कम उम्र की  कुछ बच्चियों का यौन शोषण शामिल था। यह उसकी स्वीकारोक्ति थी कि उसने नाबालिग़ लड़कियों से यौन संबंध बनाये व अवैध काम किए। इसलिये इस विश्वव्यापी नेटवर्क से पर्दा उठने के बाद अब यह सवाल भी उठने लगा है कि दुनिया के धनाढ्य और शक्तिशाली लोगों की नज़र में महिलाओं, ख़ासकर छोटी बच्चियों का क्या स्थान है ? महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने का ढोंग रचने वाला सफ़ेद पोश पुरुष प्रधान समाज जो कभी महिलाओं को आधी आबादी कहकर ख़ुश करता है तो कभी बच्चियों को ‘कंजक ‘ व देवी के रूप में पूजता भी है उन्हीं बच्चियों को अपने पैसे व सत्ता के बल पर अपनी हवस का निशाना बनाने वाले लोग नाबालिग़ लड़कियों और युवा महिलाओं का शारीरिक शोषण भी करते हैं ?

                   निश्चित रूप से एपस्टीन फ़ाइल्स पितृसत्ता की एक गहरी तस्वीर पेश करती हैं, जहां धनाढ्य पुरुष विश्वव्यापी नेटवर्क बनाते हैं और एक दूसरे से जानकारी साझा करते हैं और महिलाओं को परिधि पर रखते हैं। वास्तव में ‘आधी आबादी ‘ को प्रायः सहयोगी,या यौन सुख प्रदान करने वाली के रूप में ही देखा जाता है न कि समान भागीदार के रूप में। ख़ासकर ग़रीब परिवारों की छोटी बच्चियों को तो कमज़ोर और आसानी से नियंत्रित करने योग्य माना जाता था। एप्सटीन के नेटवर्क में शामिल कुछ पुरुषों ने कथित तौर पर इन लड़कियों को “उपहार” के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे व्यापारिक या राजनीतिक लाभ मिलते थे। यह दर्शाता है कि शक्तिशाली लोगों की नज़र में, महिलाएं और लड़कियां अक्सर सत्ता और प्रभाव बनाए रखने का साधन बन जाती है न कि कोई सम्मानजनक मानव। महिलाओं को केवल “प्रजनन उपकरण” के रूप में देखना भी पितृसत्ता की ही एक गहरी साज़िश है।                               इसलिये  एप्सटीन फ़ाइल्स से प्राप्त हो रहे ब्यौरों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि एप्सटीन जैसे मामलों में जहाँ कुछ शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा छोटी मासूम बच्चियों को मात्र अपनी यौन संतुष्टि के लिये या अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सौदेबाज़ी के साधन के रूप में अथवा किसी ‘विशिष्ट ‘ व्यक्ति को ब्लैकमेल करने की ग़रज़ से इस्तेमाल किया गया।यह एक ऐसी व्यवस्थित समस्या है जहां धन, सत्ता के बल पर और जवाबदेही की कमी से ऐसी संस्कृति पनपती है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैश्विक अपराध नेटवर्क का हिस्सा है, जहां महिलाओं और लड़कियों का वस्तुकरण नस्लवाद और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।  हालांकि, FBI की जांच में ट्रैफ़िकिंग रिंग के लिए पर्याप्त सबूत भले ही नहीं मिले परन्तु पीड़ितों की गवाहियां बताती हैं कि यह शोषण अत्यंत व्यापक था। ये फ़ाइल्स यह भी दिखाती है कि सत्ता के शीर्ष पर मिसोगिनी (स्त्री-द्वेष) और यौन हिंसा कैसे सामान्यीकृत हो जाती है। यह एक ऐसी विकृत पुरुष प्रधान व्यवस्था का प्रतिबिंब भी है जहां पीड़ितों को न्याय मिलना मुश्किल रहता है। एप्सटीन फ़ाइल्स ऐसे ही शक्तिशाली पुरुष ‘भेड़ियों ‘ की हक़ीक़त को उजागर करती है।

 निर्मल रानी                                                                       

इतिहास में 19 फरवरी :स्वराज व रणनीति के शिल्पी छत्रपति शिवाजी की जन्म

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साल 1630 में शिवनेरी किला में जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने “हिंदवी स्वराज” का सपना देखा और उसे साकार करने की दिशा में संगठित प्रयास किए। उनकी माता जिजाबाई ने उनमें धर्म, नीति और प्रजा-कल्याण के संस्कार डाले, जबकि गुरु दादोजी कोंडदेव ने प्रशासन और युद्धकला का प्रशिक्षण दिया।

शिवाजी महाराज ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति को प्रभावी ढंग से अपनाकर बड़ी-बड़ी सेनाओं को चकमा दिया। पहाड़ी किलों का रणनीतिक उपयोग, तेज आक्रमण और त्वरित वापसी उनकी पहचान बनी। अफजल खान पर उनकी निर्णायक विजय और मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के साथ उनका संघर्ष उनके साहस और कूटनीति को दर्शाता है।

उन्होंने सुव्यवस्थित राजस्व प्रणाली, सक्षम नौसेना और किलों के सुदृढ़ नेटवर्क का विकास किया। किसानों और महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक सहिष्णुता और स्थानीय भाषा-प्रशासन को बढ़ावा देना उनकी शासन-नीति के प्रमुख स्तंभ थे। 1674 में उनका राज्याभिषेक मराठा शक्ति के उत्थान का प्रतीक बना। शिवाजी महाराज आज भी राष्ट्रनिर्माण, स्वाभिमान और जनकल्याणकारी नेतृत्व के आदर्श के रूप में स्मरण किए जाते हैं।

महत्वपूर्ण घटनाक्रम

1389 – दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुग़लक़ द्वितीय की हत्या हुई।

1570 – फ्रांसीसी सेना की मदद से एंजाऊ के ड्यूक ने दक्षिणी नीदरलैंड पर हमला किया।

1618 – वेनिस शांति संधि के तहत वेनिस और आस्ट्रेलिया का युद्ध समाप्त हुआ।

1630 – शिवाजी का जन्म जुन्नेर में हुआ।

1674 – ब्रिटिश फौजें डच युद्ध से हट गईं।

1719 – मुगल शासक फर्रुख सियर की हत्या।

1807 – तुर्की के साथ युद्ध में रूस को मदद देने ब्रिटिश सैनिक पहुँचे।

1891 – अमृत बाजार पत्रिका का प्रकाशन दैनिक के रूप में हुआ।

1915 – गोपाल कृष्ण गोखले का निधन।

1942 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उत्तरी ऑस्ट्रेलियाई शहर डार्विन पर जापानी लड़ाकू विमानों के हमले में 243 लोग मारे गए।

1959 – साइप्रस की स्वतंत्रता के बारे में यूनान, तुर्की और ब्रिटेन के बीच एक समझौता हुआ।

1963 – सोवियत संघ क्यूबा से अपने काफी सैनिक हटाने के बारे में सहमत हुआ।

1986 – देश में पहली बार कम्प्यूटरी कृत रेलवे आरक्षण टिकट की शुरुआत हुयी।

1989 – लेबनान में गृहयुद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से मुस्लिम और ईसाई नेता अरब लीग से बातचीत करने कुवैत गए।

1991 – प्रदर्शनकारियों ने रोमानिया के राष्ट्रपति इयान इलूफू के इस्तीफ़े की मांग की।

1993 – हैतो के पास समुद्र में 1500 यात्रियों सहित एक जहाज़ डूबा।

1997 – चीनी राजनीति के शिखर पुरुष देंग थ्याओं फिंग का निधन।

1999 – डेनमार्क के वैज्ञानिक डॉक्टर लेन वेस्टरगार्ड ने वाशिंगटन में प्रकाश की गति धीमी करने में सफलता पाई।

2001 – ब्राजील की जेलों में दंगे, 8 मरे, 7000 लोगों को क़ैदियों ने बंधक बनाया, तालिबान लादेन के प्रत्यर्पण को तैयार।

2000 – तुवालू संयुक्त राष्ट्र का 189वां सदस्य बना।

2003 – इंडोनेशिया की संसद ने जून 2004 में होने वाले आम चुनाव में हर पार्टी को 30 फीसदी टिकट महिला उम्मीदवार को देने संबंधी व्यवस्था दी।

2003 – संयुक्त अरब अमीरात ने दाऊद के भाई इक़बाल शेख़ व उसके सहयोगी एजाज पठान को भारत को सौंपा।

2004 – कीटनाशकों और औद्योगिक रसायनों पर प्रतिबंध लगाने वाली स्टॉकहोम संधि का विश्व के 50 से ज़्यादा देशों द्वारा अनुमोदन।

2006 – पाकिस्तान ने हत्फ द्वितीय (अब्दाली) मिसाइल का परीक्षण किया।

2007 – भारत-बांग्लादेश में आतंकवाद का मुकाबला करने पर सहमति बनी।

2007 – गाड़ी नंबर 9001 अप अटारी स्पेशल समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट के बाद लगी आग में 68 यात्री मारे गए।

2008 – संस्कृत कवि स्वामी श्रीरामभद्राचार्य को उनके महांकाव्य श्री भार्वराधवीयम के लिए वाचस्पति सम्मान प्रदान किया गया।

2008 – पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को करारी शिकस्त मिली।

2008 – फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा के राष्ट्रपति का पद तथा सैन्य प्रमुख का पद छोड़ा।

2009 – केन्द्र सरकार ने उस विधेयक को समाप्त करने का निर्णय किया जिसमें 47 उत्कृष्ट शैक्षिक संस्थानों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने की व्यवस्था की गई थी।

2012 – मैक्सिको के न्यूवो लियोन के जेल दंगे में 44 लोग मारे गये।

जन्म

1473 – निकोलस कॉपरनिकस – प्रसिद्ध यूरोपिय खगोलशास्त्री व गणितज्ञ थे।

1630 – छत्रपति शिवाजी महाराज – महानतम मराठा शासक और गुरिल्ला युद्ध के जन्म दाता।

1717 – डेविड गैरिक – अंग्रेज़ अभिनेता तथा मंच संचालक थे।

1892 – इंदिरा राजे – बड़ौदा की राजकुमारी थीं।

1898 – गोकुलभाई भट्ट – राजस्थान के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा समाज सेवक।

1900 – बलवंतराय मेहता – भारतीय राजनीतिज्ञ और गुजरात के दूसरे मुख्यमंत्री थे।

1922 – बेअंत सिंह – पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।

1925 – राम वी. सुतार – भारत के सुप्रसिद्ध शिल्पकार हैं।

1930 – के. विश्वनाथ – दक्षिण भारतीय फ़िल्म निर्देशक हैं।

1960 – राजीव कुमार – भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।

1964 – सोनू वालिया – फिल्म अभिनेत्री

निधन

1895 – मुंशी नवलकिशोर – हिन्दी के जाने माने प्रकाशक।

1915 – गोपाल कृष्ण गोखले – स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक

1956 – नरेन्द्र देव – भारत के प्रसिद्ध विद्वान, समाजवादी, विचारक, शिक्षाशास्त्री और देशभक्त।

1978 – पंकज मलिक – बांग्ला और हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और अभिनेता।

1992 – नारायण श्रीधर बेन्द्रे – प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे।

1999 – ख़ुमार बाराबंकवी – भारतीय शायर थे। उनका वास्तविक नाम मोहम्मद हैदर ख़ान था।

2010 – निर्मल पांडे – फिल्म अभिनेता।

2017 – अल्तमस कबीर – भारत के भूतपूर्व 39वें मुख्य न्यायाधीश थे।

2019 – नामवर सिंह – हिन्दी के प्रसिद्ध कवि और प्रमुख समकालीन आलोचक।

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अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का किया अनावरण

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गांधीनगर, 18 फ़रवरी (हि.स.)।गांधीनगर के सेक्टर-21 स्थित महाराष्ट्र भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज की यह प्रतिमा वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को साहस, रणनीति और ‘स्वराज’ के संकल्प की निरंतर प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की शौर्यगाथा और सुशासन के आदर्श आज भी समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।

उन्होंने शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश का बड़ा हिस्सा गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब मात्र 16 वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज ने रायरेश्वर महादेव मंदिर में ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना का संकल्प लिया था। माता जीजाबाई के संस्कार और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने स्वतंत्रता और स्वाभिमान की नई राह दिखाई।

अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने मंदिरों की रक्षा और पुनर्स्थापना का जो मार्ग दिखाया, उसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और सोमनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों का विकास किया गया है, जिससे सनातन परंपरा को मजबूती मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि शिवाजी महाराज ने स्वभाषा को महत्व देते हुए प्रशासन में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया और भारतीय नौसेना की नींव रखने का कार्य किया।

उन्होंने राष्ट्रीय शायर झवेरचंद मेघाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में शिवाजी महाराज की वीरता का वर्णन आज भी बच्चों और युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाता है।

मूर्तिकार की कला की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज की घोड़े पर अग्रसर होती हुई यह प्रतिमा अत्यंत जीवंत और भव्य है, जो गांधीनगर की शोभा बढ़ाने के साथ आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी।

इस मौके पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक जगदीश विश्वकर्मा, गांधीनगर महापौर मीराबेन पटेल, विधायक रीताबेन पटेल, डिप्टी मेयर नटुजी ठाकोर, स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन गौरांग व्यास, गांधीनगर कलेक्टर मेहुल दवे, जिला पुलिस अधीक्षक रवि तेजा वासम शेट्टी, सोनलबेन शाह, महाराष्ट्र भवन के मैनेजिंग ट्रस्टी सुधीर रघुनाथ विचारे सहित महाराष्ट्र समाज के अनेक लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

20 हजार वर्ग मीटर में फैली अवैध कॉलोनी पर चला बुलडोजर

बागपत, 18 फ़रवरी (हि.स.)। उप्र के

बागपत जिले में अनाधिकृत कालोनियों पर प्राधिकरण का बुलडोजर जारी है। मंगलवार देर शाम तक प्राधिकरण ने 20 हजार वर्ग मीटर में फैली अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया। अपील की गई है कि कोई भी व्यक्ति अनाधिकृत अवैध कॉलोनी में मकान न बनाए।

बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण के जेई अजीत कुमार ने मंगलवार देर शाम बताया कि बागपत द्वारा उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के अंतर्गत अनधिकृत कॉलोनियों के विरुद्ध सख्त प्रवर्तन कार्यवाही की गई है। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा बड़ौत क्षेत्र में विकसित की जा रही दो अनधिकृत कॉलोनियों का ध्वस्तीकरण किया है।

जिसमे मोहित तोमर व रोहित तोमर पुत्रगण श्री संजय तोमर, राहुल व वरुण पुत्रगण वीरेंद्र तोमर आदि, राज पैलेस के सामने बड़ौत पर लगभग 10000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अनधिकृत कॉलोनी पर कारवाई की गई है। मोहित कुमार पुत्र श्यामलाल निवासी, गोविंद गार्डन के पीछे बड़ौत पर लगभग 10000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अनधिकृत कॉलोनी को भी ध्वस्त किया गया है।

उक्त दोनों कॉलोनियाँ बिना ले-आउट स्वीकृति एवं बिना विकास अनुमति के विकसित की जा रही थीं, जो कि अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है। बताया कि जनहित एवं सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उक्त अनधिकृत प्लॉटिंग/निर्माण को ध्वस्त किया गया।

प्राधिकरण की अपील

प्राधिकरण के जेई अजीत कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूमि/प्लॉट का क्रय करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित ले-आउट एवं मानचित्र विकास प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृत है,या नही। अन्यथा ऐसे अनधिकृत निर्माण/प्लॉटिंग के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर कार्यवाही की जाएगी।