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एसिड अटैक से जुड़े मामलों का हर साल का विस्तृत ब्यौरा दें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशः सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने तेजाब के हमले से संबंधित मामलों में दोषियों के लिए असाधारण सजा का प्रावधान करने की वकालत की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कानून में बदलाव कर पर विचार करने को कहा ताकि ऐसे मामलों से दहेज हत्या के मामलों की तरह सख्ती से निपटा जा सके।

उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे एसिड अटैक से जुड़े मामलों का हर साल का विस्तृत ब्यौरा दें। इस रिपोर्ट में कोर्ट में केसों की स्थिति और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए किए जा रहे उपायों का जिक्र होना चाहिए। इसके पहले 04 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब हमले से संबंधित मामलों की धीमी ट्रायल पर चिंता जताते हुए सभी हाई कोर्ट से तेजाब के हमले से संबंधित मामलों का स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया था कि इससे जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट गठित किए जाएं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह इस संबंध में कानून में संशोधन करने पर विचार करें ताकि तेजाब से पीड़ित लोगों को राइट आफ पर्संस विद डिसेबिलिटी एक्ट के तहत दिव्यांग की परिभाषा में शामिल किया जा सके। याचिका एसिड हमले से पीड़ित शाहीन मलिक ने दायर किया है ।

पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से संपर्क करने को कहा है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को एक चार्ट बनाने का भी निर्देश दिया जिसमें पीड़ितों या उनके परिवार के सदस्यों द्वारा मुआवजा मांगने का समय और इसे प्राप्त करने का दिन शामिल करने को कहा गया है। याचिका में मांग की गई है कि एसिड अटैक के पीड़ितों को दिव्यांग की तरह का दर्जा दिया जाए ताकि उसे दूसरी सुविधाएं मिल सकें।

एसिड अटैक के मामले में उच्चतम न्यायालय में एक और याचिका पहले से लंबित है। याचिका मुंबई के एनजीओ एसिड सर्वाइवर्स साहस फाउंडेशन ने दायर की है। याचिका में 2023 के लक्ष्मी बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि एसिड अटैक पीड़ित को सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि संबंधित राज्य सरकार द्वारा देखभाल और पुनर्वास लागत के रुप में न्यूनतम तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

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