होम विदेश नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिक−दिव्यांग पर्वतारोही हरि बुद्ध ने रचा इतिहास

नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिक−दिव्यांग पर्वतारोही हरि बुद्ध ने रचा इतिहास

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सात महाद्वीपों की ऊंची चोटियों पर फहराया देश का झंडा

काठमांडू, 12 जनवरी (हि.स.)। नेपाल के रोल्पा जिले के मिरुल गांव में 46 वर्ष पहले जन्मे हरि बुद्ध मगर आज साहस और जिजीविषा का प्रतीक बन चुके हैं। पूर्व गोरखा सैनिक मगर ने अंटार्कटिका स्थित माउंट विंसन (4,892 मीटर) पर तीन दिन की कठिन चढ़ाई पूरी कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने 06 जनवरी को शिखर पर पहुंचकर अपने लक्ष्य को पूरा किया।

माउंट विंसन के शिखर पर नेपाल का झंडा फहराने के बाद उन्होंने उस क्षण को जादुई बताया। उन्होंने कहा, “जहां तक नजर जाती थी, बर्फ ही बर्फ थी। वह अनुभव स्वर्ग जैसा था।” मगर 06 जनवरी की रात 10 बजे अपने नेपाली पर्वतारोहण दल के साथी अभिरल राय, मिंगमा शेरपा और जांगबू शेरपा के साथ माउंट विंसन के शिखर पर पहुंचे। वे अंटार्कटिका के यूनियन ग्लेशियर बेस कैंप से रवाना हुए थे। इस कैंप पर 24 घंटे दिन रहता है।

मगर ने दोनों घुटनों के ऊपर से पैर कटने के बावजूद सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बनने का कीर्तिमान बनाया है। इस दौरान उन्होंने माइनस-25 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को भी सहन किया। उन्होंने कहा, “अपनी क्षमताओं को पहचानकर हम हर दिन अपने सपनों के एवरेस्ट पर चढ़ सकते हैं। मैं इस बात का जीवंत प्रमाण हूं कि कड़ी मेहनत सफलता दिलाती है।”

मगर ने वर्ष 2010 में अफगानिस्तान में ब्रिटिश सेना के साथ सेवा के दौरान आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद अपने दोनों पैर खो दिए थे। इसके बाद उन्होंने कई वर्षों तक शारीरिक और मानसिक रूप से कड़ा प्रशिक्षण लेकर इस रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि की तैयारी की। अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगता को कभी भी महत्वाकांक्षाओं की सीमा नहीं बनना चाहिए।

माउंट विंसन की चढ़ाई के दौरान की कठिनाइयों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि तेज हवाओं और अत्यधिक ठंड ने उन्हें अपनी सीमाओं तक पहुंचा दिया। मेरी उंगलियां जम गई थीं और चेहरे पर ठंड से जलन हो रही थी। कई बार मुझे खुद पर संदेह हुआ।

उन्होंने बताया कि अडिग आत्मविश्वास ने ही उन्हें इन परिस्थितियों से उबारा। युद्धकालीन अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हर कार्य में चुनौतियां होती हैं, लेकिन स्वयं पर विश्वास और अथक प्रयास से सफलता संभव है।

उन्होंने कहा, “ मुझे विश्वास है कि इससे नेपाल का गौरव भी बढ़ेगा। इस यात्रा में साथ देने वाले सभी लोगों का मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।” मगर ने अपनी ‘सेवन समिट्स’ यात्रा की शुरुआत 13 अगस्त 2019 को फ्रांस के मों ब्लां (4,809 मीटर) से की। इसके बाद उन्होंने 08 जनवरी 2020 को तंजानिया के किलिमंजारो (5,895 मीटर) और 19 मई 2023 को माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर चढ़ाई की।

मगर ने 28 जून 2024 को उत्तरी अमेरिका के डेनाली (6,190 मीटर), 22 फरवरी 2025 को दक्षिण अमेरिका के अकोंकागुआ (6,961 मीटर) और न्यू गिनी के पंकक जया (4,884 मीटर) को फतह किया। अंत में इस साल छह जनवरी को अंटार्कटिका के माउंट विंसन पर चढ़कर मिशन पूरा किया। उन्होंने यह उपलब्धि विश्वभर के दिव्यांग समुदाय को समर्पित करते हुए कहा कि यह सगरमाथा की धरती से साहस और दृढ़ता का शक्तिशाली संदेश है।

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