उच्च न्यायालय में हिंदी और अंग्रेजी में द्विभाषी आदेश जारी करने की मांग

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नैनीताल, 29 दिसंबर (हि.स.)। उत्तराखंड के नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायिक आदेशों और निर्णयों को आम नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता जगदीश चंद्र जोशी ने न्यायालय में एक औपचारिक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर हिंदी एवं अंग्रेजी में द्विभाषी आदेश और निर्णय जारी करने और इसके लिए पृथक अनुवाद इकाई के गठन की मांग की है। अंग्रेजी भाषा को हटाने के बजाय हिंदी अनुवाद के माध्यम से उसे पूरक बनाने पर केंद्रित यह पहल राज्य के बहुसंख्यक हिंदीभाषी नागरिकों के लिए न्याय तक वास्तविक और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने से जुड़ी मानी जा रही है।

प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां अधिकांश नागरिक हिंदी अथवा उससे जुड़ी भाषाओं कुमाउनी, गढ़वाली और जौनसारी में सहज हैं, वहां केवल अंग्रेजी में न्यायालयी आदेश जारी होना आम लोगों के लिए व्यावहारिक कठिनाई पैदा करता है। न्यायिक आदेशों और निर्णयों को समझना केवल पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े अधिकारों, दायित्वों और न्यायालय के निर्देशों की स्पष्ट समझ भी आवश्यक है,जो हिंदी अनुवाद उपलब्ध होने से अधिक प्रभावी हो सकती है। संवैधानिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अंतर्गत न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।

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