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मोबाइल के युग में मातृशक्ति संभाले नई पीढ़ी की कमान : शेखावत

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जोधपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। मोबाइल के युग में मातृशक्ति संभाले नई पीढ़ी की कमान : शेखावत

रविवार को श्री करणी कथा के पावन प्रसंग पर व्यास पीठ को नमन करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि जब भी भारत की सभ्यता की रक्षा की बात आती है तो हम बप्पा रावल, महाराणा राज सिंह, राव चंद्रसेन, दुर्गादास राठौड़, छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रसाल बुंदेला जैसे महापुरुषों का स्मरण करते हैं। इन वीरों को गढ़ने वाली वह मातृशक्ति थी, जिसने पालने में झुलाते समय ही देश और धर्म के लिए मर मिटने के संस्कार दिए थे। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियां दोहराई, “इला न देणी आपणी, हालरिये हुलराय, पूत सिखावे पालणे, मरण बड़ाई माय” (अपनी मातृभूमि को कभी शत्रुओं के हाथ में न जाने दे, और यदि आवश्यक हो तो इसके लिए मर मिटना ही सबसे बड़ी वीरता है)। शेखावत ने कहा कि रानी पद्मिनी और हजारों वीरांगनाओं ने जौहर की अग्नि में खुद को इसलिए होम कर दिया, ताकि हमारी संस्कृति के मान बिंदु गाय, गंगा, गौरी, गीता और गायत्री, अक्षुण्ण रहें। उन्होंने कहा कि आज संस्कारों की लोरी से ही सनातन संस्कृति सुरक्षित रहेगी।

आधुनिक दौर और वैचारिक प्रदूषण की चुनौती

शेखावत ने कहा कि पिछले 200 सालों से भारत की सभ्यता को पतित और विद्रूप करने के प्रयास हुए। तलवार के दम पर जो नहीं हो सका, वह अब वैचारिक आक्रमण के जरिए करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि आज यह मोबाइल और डब्बे (गैजेट्स) का जमाना है। तलवारों के आक्रमण से तो हम बच गए, लेकिन इस वैचारिक प्रदूषण से बचने के लिए परिवार और विशेषकर माता बहनों को संभाल करने की जरूरत है।

नई पीढ़ी को संस्कारित करने का संकल्प

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि आज भारत की सभ्यता और सनातन मान बिंदुओं का सम्मान पूरी दुनिया में पुनर्स्थापित हो रहा है। इस पुनर्जागरण के दौर में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना है। सैकड़ों पीढ़ियां इस संस्कृति को बचाने के लिए खप गईं। यदि हमने अपनी पीढ़ी को संस्कारित नहीं किया, तो यह समय ‘डामाडोल’ (अस्थिर) हो सकता है। शेखावत ने कहा कि आज जो माताएं अपने बच्चों को संस्कारित कर तैयार करेंगी, उन्हें वही पुण्य लाभ और यश प्राप्त होगा जो महारानी पद्मावती को जौहर के माध्यम से प्राप्त हुआ था।

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