उप्र विधानसभा में उठा कांग्रेस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का मुद्दा

लखनऊ, 18 फरवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को प्रदेश भर में मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठा।संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा प्रदेश में सबकुछ ठीक है। ऐसी क्या जरूरत पड़ी धरना प्रदर्शन करने की। कांग्रेस की नेता यहां जो चाहती हैं, बोल लेती हैं। मुझे समझ में नहीं आता कि ऐसी क्या परिस्थिति बनी जो प्रदर्शन करने की जरूरत पड़ गयी।

दरअसल कांग्रेस की नेता विधान मंडल दल आराधना मिश्रा मोना ने सदन में पीठ का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि कांग्रेस जन मंगलवार को शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। मैं और मेरे साथी को विधानसभा आने नहीं दिया गया। लाठीचार्ज किया गया। कांग्रेस जनों को दो दिन से हाउस अरेस्ट किया। लोकतंत्र में हम लोग अपनी बात भी नहीं रख सकते।

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि यह सरकार अधिनायकवादी व्यवस्था की ओर आगे बढ़ रही है। राजनारायण से लेकर कई बड़े नेताओं के साथ हमने धरना – प्रदर्शन किया था। हम लोग विधानसभा गेट तक आते थे। अब तो यह सरकार हजरतगंज में ही रोक देती है। हाउस अरेस्ट कर दिया जा रहा है। यह कैसा लोकतंत्र है।

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मैं 1980 से यहां आ रहा हूँ। ज्यादा समय विपक्ष में था। हम भी प्रदर्शन करते थे। पुलिस लाठीचार्ज करती थी। प्रताड़ना करती थी। अपनी बात करूं तो मेरे ऊपर गलत हत्या का मुकदमा लिख दिया गया। 12 वर्ष तक मुकदमा चला। इसी सदन में संसदीय कार्य मंत्री मेरी ओर इशारा करते हुए कहते थे दो कत्ली बैठे हैं। किसी को शांतिपूर्ण धरना देने से कहां रोका गया है। हालांकि दोनों पक्ष की बात सदन में आने के बाद इस मुद्दे को अग्राह्य कर दिया गया।

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के जमीन अधिग्रहण के लिए कमेटी बनी

मुरादाबाद, 18 फरवरी (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के जमीन अधिग्रहण के लिए कमेटी का चयन कर लिया गया है। मामले में जमीन अधिग्रहण के लिए नियुक्त अधिकारी मुरादाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय ने बताया कि अभी जमीन अधिग्रहण के लिए डीपीआर बनकर एनएचएआई से नहीं आई है। डीपीआर में जमीन के स्थान निर्धारित हो जाएंगे। इसी आधार पर अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए डीपीआर बनाने का काम अंतिम चरण में है। कागजी कार्रवाई के बाद अधिग्रहण का काम शुरू हो जाएगा। एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे से संबंधित गांवों में भूमि क्रय विक्रय के साथ लैंड यूज चेंज पर रोक लगाने के लिए गजट जारी किया है। धारा 3-ए के तहत गाटा खसरा की सूची तैयार की जा रही है।

वहीं एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण करने के लिए गजट जारी किया गया है। जमीन के गाटा संख्या को चिन्हित करने का काम चल रहा है। जमीन के सीमांकन काम जिले में नियुक्त अधिग्रहण के अधिकारी करेंगे। एक्सप्रेसवे का निर्माण होने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा। यह एक्सप्रेसवे मुरादाबाद के 60 गांवों से होकर गुजरेगा। इसमें ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र के सर्वाधिक 26 गांव शामिल किए गए हैं।

एनएचएआई, मुरादाबाद जोन के पीडी अरविंद कुमार ने बताया कि शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस के लिए गजट जारी किया गया है। अधिकारिक रूप से जमीन अधिग्रहण का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा। उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार अपने जोन में दायित्व को पूरा किया जा रहा है।

उप्र बनेगा ईको टूरिज्म हब, दूरदर्शी नीतियों के साथ बढ़ रहे आगे :जयवीर

सरकार ने 10 ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन के लिए मांगे प्रस्ताव

प्राकृतिक धरोहरों के पेशेवर प्रबंधन के लिए इच्छुक करें 27 तक आवेदन

लखनऊ, 18 फरवरी (हि.स.)। प्रदेश के हरित पर्यटन को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (यूपीईटीडीबी) ने राज्य के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन और देखरेख के लिए इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों एवं अनुभवी एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। बोर्ड के इस कदम से न केवल प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दीर्घकालिक निवेश, गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित मॉडल को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘चयनित एजेंसियों को ईको-टूरिज्म परियोजनाओं का संचालन प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में यह अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकेगी। यह निर्णय प्रदेश में जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन विकास के लिए एक सुदृढ़ एवं संस्थागत ढांचा तैयार करेगा, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित संरक्षण सुनिश्चित होगा।’

10 प्रमुख स्थलों के संचालन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित

उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने राज्य में ईको टूरिज्म को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अयोध्या की उधेला झील, ललितपुर के बदरौन स्थित करकरावल जलप्रपात, बाराबंकी की बघर झील, बलिया के मैरीटार गांव, सीतापुर की अज्जेपुर झील, महाराजगंज के देवदह स्थल, कुशीनगर की रामपुर सोहरौना झील, चित्रकूट के रामनगर, जालौन के पचनदा तथा बांदा जनपद की तहसील नरैनी में कालिंजर किले के समीप पर्यटन सुविधा केंद्र सहित कुल 10 स्थलों पर विकसित ईको टूरिज्म परियोजनाओं के संचालन एवं देखरेख के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) पर विकसित होंगी।

कब तक करें आवेदन?

इच्छुक आवेदकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं पात्रता मानदंडों के अनुरूप अपने प्रस्ताव निर्धारित समयावधि के भीतर प्रस्तुत करने होंगे। विस्तृत विवरण, शर्तें एवं आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://upecoboard.up.gov.in/en/tenders पर उपलब्ध है। आवेदन की अंतिम तारीख 27 फरवरी 2026 है।

दूरदर्शी सोच के साथ आगे बढ़ रहे

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और सांस्कृतिक धरोहर की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। ईको टूरिज्म के क्षेत्र में हमारे पास अपार संभावनाएं हैं, उन्हें व्यवस्थित और पेशेवर प्रबंधन के माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास है। उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा 10 प्रमुख स्थलों के संचालन हेतु प्रस्ताव आमंत्रित करना इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। हमारा उद्देश्य केवल पर्यटन विकास नहीं, बल्कि जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन का एक सशक्त मॉडल विकसित करना है। यह पहल प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश आधुनिक सुविधाओं का विकास सुनिश्चित करेगी।’

पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर डिजिटल रूप देगी योगी सरकार

–मूल संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा पांडुलिपि का अधिकार, डिजिटल प्रकाशन से विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगी सरकार

गोरखपुर, 18 फ़रवरी (हि.स.)। वर्तमान और भावी पीढियां विरासत पर गर्व की अनुभूति कर सकें, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। इसी क्रम में भारत सरकार की भारत की समृद्ध ज्ञान परम्परा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ी पहल की है।

पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहित करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

विरासत के संरक्षण को चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत हर जिले में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ी पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। यूपी के लिए यह अभियान और भी विशेष है। कारण, उत्तर प्रदेश को प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि माना जाता है।

गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर के अनुसार ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से यह ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी।

रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब जिला स्तर पर इन ग्रंथों को चिन्हित करने और उनके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से सम्पर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां, सम्बंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेगी।

वेस्टयूपी में हाईकोर्ट बेंच  की मांग को धार देते आंदोलनकारी

अशोक मधुप

पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक बेंच स्थापित करने की मांग एक बहुत पुराना और लगातार जारी रहने वाला आंदोलन है। लगभग  70 साल पुरानी यह  मांग केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की एक गहरी पुकार है। इस आंदोलन के कामयाब न होने की खास बात यह रही कि  आंदोलनरत वकील आदोलन से जनता को नही जोड़ सके।  अब पश्चिम उत्तर प्रदेश के वकीलों अपनी गलती समझ गए। उन्होंने रणनीति में बदलाव किया है। वह इससे पश्चिम उततर प्रदेश की जनता को जोड़ने में लग गए हैं। जनता को  बैंच बनने के फायदें बता रहे हैं।  अन्य जनप्रतिनिधियों का  समर्थन  ले रहे हैं। केंद्र सरकार और विधि मंत्रालय को उनसे समर्थन पत्र लिखवा रहे हैं।

 1948 में, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ स्थापित की गई थी, लेकिन पश्चिमी यूपी को इससे कोई राहत नहीं मिली, क्योंकि लखनऊ भी इस क्षेत्र से काफी दूर था। वैसे  1955 की विधि आयोग की सिफारिशों ने इस आंदोलन को एक नई दिशा दी। आयोग ने सिफारिश की थी कि उच्च न्यायालय की बेंच उन क्षेत्रों में स्थापित की जानी चाहिए, जहाँ से दूरी अधिक है। साल 1955 में तत्कालीन मुख्यमंत्री संपूर्णानंद ने मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की सिफारिश की ।  वर्ष 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार ने केंद्र को खंडपीठ स्थापित किए जाने का प्रस्ताव भेजा । जनता पार्टी के शासन में राम नरेश यादव की सरकार ने भी इस मांग पर मुहर लगाई और पश्च‍िमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने के प्रस्ताव को कर उसे केंद्र सरकार को भेजा। बनारसीदास सरकार एवं बाद में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में भी एक प्रस्ताव पारित कर हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को संस्तुति प्रदान की गईं । प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया।

1970 और 1980 के दशक में, यह आंदोलन और भी जोर पकड़ने लगा।  पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकीलों ने हड़तालों और विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। किसान नेता चौधरी चरणसिंह, मुलायम सिंह यादव और अजित सिंह जैसे नेताओं ने भी इस मांग को अपना समर्थन दिया। इससे यह मांग  राजनीतिक मुद्दा बन  जरूर बन गई किंतु नेताओं की इच्छा शक्ति के अभाव में  और इलाहाबाद के वकीलों के दबाव में कभी पूरी नही हुई। आज भी, पश्चिमी यूपी के कई संगठन और बार एसोसिएशन इस मुद्दे पर नियमित रूप से आंदोलन करते रहते हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और मथुरा से इलाहाबाद की दूरी 500 से 700 किलोमीटर है। इस लंबी दूरी के कारण मुवक्किलों और वकीलों को अत्यधिक समय, धन और ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। गरीबी और संसाधनों की कमी वाले लोगों के लिए यह एक बड़ा बोझ बन जाता है। इलाहाबाद में एक मुकदमे के लिए जाने का मतलब है, न केवल यात्रा का खर्च, बल्कि वहाँ रहने और खाने का भी खर्च। इसके अलावा, वकीलों की फीस भी अधिक होती है। यह सब मिलकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए न्याय को बहुत महंगा बना देता है। एक बात और इलाहाबाद की जगह यदि पश्चिम उत्तर प्रदेश को लखनऊ  खंडपीठ से संबद्ध कर दिया जाता, तब भी दूरी दौ सौ किलोमीटर के आसपास कम हो जाती। लखनऊ पश्चिम  उत्तर प्रदेश के नजदीक पड़ता है किंतु  ऐसा भी  नही किया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पहले से ही मुकदमों का भारी बोझ है। पश्चिमी यूपी से आने वाले मामलों की बड़ी संख्या के कारण, न्याय में और अधिक देरी होती है। एक बेंच की स्थापना से मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा। इससे न्यायपालिका पर दबाव कम होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश एक आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसे अक्सर “भारत का चीनी का कटोरा” कहा जाता एक हाईकोर्ट बेंच की स्थापना से इस क्षेत्र की न्यायिक और राजनीतिक पहचान मजबूत होगी, और यह एक आत्मनिर्भर केंद्र बन सकेगा।

वर्तमान में भी यह आंदोलन जारी है, हालाँकि इसने कई बार धीमी गति पकड़ी है। 1981 से  वकीलों के संगठन नियमित रूप से प्रत्येक शनिवार को हड़ताल करते हैं, वे धरने देते रहतें हैं, और ज्ञापन सौंपते हैं। हालांकि, इस आंदोलन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आंदोलन के सामने सबसे बडी चुनौती है कि  किसी भी राजनीतिक दल ने इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से नहीं लिया है। केंद्र और राज्य सरकारें इस मांग को टालती रही हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वकील इस मांग का विरोध करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि एक बेंच की स्थापना से उनका काम और आय प्रभावित होगी। सरकार का तर्क है कि एक बेंच की स्थापना से प्रशासनिक जटिलताएँ बढ़ेंगी और यह एक आर्थिक बोझ होगा। इसके अलावा, सरकार अक्सर इस मुद्दे को भविष्य के लिए टाल देती है। एक मजबूत और एकीकृत नेतृत्व की कमी ने इस आंदोलन को कमजोर किया है। अलग-अलग संगठन अपने-अपने तरीके से आंदोलन चला रहे हैं, जिससे एकता नहीं बन पाती।

 हाल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच स्थापना के लिए सांसद अरुण गोविल मुखर हो गए हैं। सांसद ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लगभग छह करोड़ आबादी को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में उच्च न्यायालय की चार बेंच हैं। मध्य प्रदेश में दो बेंच हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश इतना बड़े होने के बाद भी यहां उच्च न्यायालय की एक पीठ है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए न्याय प्राप्त करना मुश्किल है। सांसद ने कहा कि यहां बेंच मिलने से कम समय में न्याय मिलेगा और धन की भी बचत होगी।एक हाईकोर्ट बेंच की स्थापना से न केवल पश्चिमी यूपी के लोगों को न्याय तक पहुँचने में आसानी होगी, बल्कि यह पूरे राज्य की न्याय प्रणाली को मजबूत करेगा। यह आवश्यक है कि सरकार, न्यायपालिका और सभी हितधारक मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालें।

पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में बॉम्बे हाईकोर्ट की एक नई पीठ ओर राज्य में चौथी हाईकोर्ट बेंच के गठन की अधि‍सूचना एक अगस्त को जैसे ही  जारी हुई यूपी के मेरठ में सरगर्मियां बढ़ गईं। “पश्च‍िम उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच केंद्रीय संघर्ष समिति‍” ने तुरंत वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पश्च‍िमी यूपी के 22 जिलों के बार अध्यक्षों और महामंत्री के साथ बैठक की. समिति के पदाधिकारियों ने सरकार से सवाल किया कि जब कोल्हापुर में बॉम्बे हाईकोर्ट की चौथी बेंच खुल सकती है तो यूपी के मेरठ में हाईकोर्ट की तीसरी बेंच क्यों नहीं स्थापित हो सकती? मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर पश्चिमी यूपी के वकीलों ने चार अगस्त को हड़ताल कर प्रदर्शन किया। मुरादाबाद की सांसद कुंवरानी रूचिवीरा  ने भी संसद में हाल ही में पचिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बैंच बनाने की मांग कर चुकी हैं। चांदपुर क्षेत्र के विधायक स्वामी ओमवेश  ने भी विधान सभा में ये ही मांग की है। कमोबेश  पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधि ये मांग कर चुके हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बैंच की स्थापना का आंदोलन  पिछले  लगभग 70 साल से जारी है। कब तक जारी रहेगा,  यह भी नही कहा जा सकता। इतना जरूर कहा जा सकता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आंदोलनकारी वकील  अब जनता को पश्चिम में हाईकोर्ट की बैंच बनने के फायदे बताकर जनता और जनप्रतिनिधियों को आंदोलन से जोड़ने में लगे हैं। उनका समर्थन ले रहे हैं। आंदोलन को नया रूप दे रहे हैं। आंदोलन को नया तेवर  देने में लगें हैं।

 अशोक मधुप

(लेखक वरिष्ठ  पत्रकार हैं)

37 राज्यसभा सीटों के द्विवार्षिक चुनाव की अधिसूचना 26 फरवरी को

16 मार्च को होगा मतदान

नई दिल्ली, 18 फरवरी (हि.स.)। भारत निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटें के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा कर दी है। सभी सीटों के लिए 26 फरवरी को अधिसूचना जारी की जाएगी और 16 मार्च को मतदान होगा। इसी दिन नतीजे की भी घोषणा की जाएगी।

आयोग ने बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी। आयोग का कहना है कि इन सभी राज्यसभा सदस्यों का साल का कार्यकाल अप्रैल माह में समाप्त होने जा रहा है। इन 37 सीटों में महाराष्ट्र की सात, ओडिशा की चार, तमिलनाडु की छह, पश्चिम बंगाल की पांच, असम की तीन, बिहार की पांच, छत्तीसगढ़ की दो, हरियाणा की दो, हिमाचल प्रदेश की एक सीट और तेलंगाना की दो सीट शामिल हैं।

महाराष्ट्र : डॉ. भगवत किशनराव कराड, डॉ. (श्रीमती) फौजिया तहसीन अहमद खान, प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी, शरदचंद्र गोविंदराव पवार, धैर्यशील मोहन पाटिल, रजनी अशोकराव पाटिल, रामदास बांदु आठवले।

ओडिशा : ममता मोहंता, मुजिबुल्ला खान, सुजीत कुमार, निरंजन बिशी।

तमिलनाडु: एन.आर. एलंगो, पी. सेल्वारासु, एम. थम्बिदुरई, तिरुचि शिवा, डॉ. कनिमोझी एनवीएन सोमु, जी.के. वासन।

पश्चिम बंगाल : साकेत गोखले, रीताब्रत बनर्जी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य, मौसाम नूर (05.01.2026 से रिक्त), सुभ्रत बक्शी।

असम : रामेश्वर तेली, भुवनेश्वर कलिता, अजीत कुमार भुइयां।

बिहार : अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, हरिवंश नारायण सिंह।

छत्तीसगढ़ : कवि तेजपाल सिंह तुलसी, फूलो देवी नेताम।

हरियाणा : किरण चौधरी, राम चंदर जांगड़ा।

हिमाचल प्रदेश : इंदु बाला गोस्वामी।

तेलंगाना : डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, के.आर. सुरेश रेड्डी।

एआई समिट में भाग लेने पहुंचे पेड्रो सांचेज, जयंत चौधरी ने किया स्वागत

नई दिल्ली, 18 फरवरी (हि.स.)। स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत पहुंच गए। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। उनका स्वागत जयंत चौधरी ने किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति सांचेज की यह यात्रा भारत और स्पेन के बीच संस्कृति, पर्यटन और एआई के संयुक्त द्विपक्षीय वर्ष के चल रहे आयोजनों को और गति देगी।

प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा- जय हो!

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मुंबई, 18 फरवरी (हि.स.)। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुलाकात की। मुंबई के लोक भवन में मंगलवार को वार्ता और संवादताता सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एक ही कार में दिखे। इस दौरान दोनों नेताओं ने दोस्ताना बातचीत की। राष्ट्रपति मैक्रों ने मंगलवार देररात कार में प्रधानमंत्री मोदी के साथ यात्रा का फोटो एक्स पर साझा किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लिखा, ”जय हो!”

उल्लेखनीय है कि भारत और फ्रांस ने मंगलवार को अपने रिश्तों को एक और नई ऐतिहासिक ऊंचाई दी है। दोनों देशों ने अपनी दोस्ती को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में बदल दिया है। मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी और मैक्रों के बीच हुई बैठक में रक्षा, तकनीक, स्टार्टअप, जरूरी खनिज, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कई बड़े एलान हुए।

राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र में कई अहम फैसले हुए। कर्नाटक के वेमागल में ‘एच125 हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन’ का उद्घाटन हुआ। यह भारत में निजी क्षेत्र की पहली हेलीकॉप्टर फैक्टरी होगी। इसे टाटा और एयरबस मिलकर चलाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएंगे जो माउंट एवरेस्ट तक उड़ान भर सकेगा। दोनों देशों ने तय किया है कि अब हर साल विदेशमंत्रियों के बीच बातचीत होगी। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क’ शुरू किया गया। तकनीक और अन्यक्षेत्र में सहयोग के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस की दोस्ती की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने पिछले साल की अपनी फ्रांस यात्रा को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मार्सिले शहर का जिक्र किया, जहां प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने अपनी बहादुरी दिखाई थी। उन्होंने वीर सावरकर को भी याद किया, जिन्होंने इसी शहर में अंग्रेजों की कैद से बचने के लिए समुद्र में छलांग लगाई थी।

इस अवसर पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को 2026 में फ्रांस की अध्यक्षता वाले 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। मैक्रों ने कहा कि शिखर सम्मेलन से पहले भारत और फ्रांस के बीच अंतरराष्ट्रीय एजेंडा पर समझौता करने के लिए अस्थायी बैठक होनी चाहिए। भारत अगले ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा और फ्रांस जी-7 समूह की मेजबानी करेगा। इसी के मद्देनजर फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के युवाओं के लिए नवाचार पर काम करने का अवसर बनाया जाना चाहिए।

इसके अलावा, मैक्रों ने अनुसंधान, छात्र आदान-प्रदान और व्यापार के क्षेत्र में नई दिल्ली और पेरिस के बीच प्रभावी साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, यही वह बात है जो मैं प्रधानमंत्री मोदी के कथनों में जोड़ना चाहता था। प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गेटवे ऑफ इंडिया पर इंडिया–फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 की आधिकारिक शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना है।

वहीं, कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित 6वें भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षासंवाद में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत, फ्रांस की रणनीतिक स्वायत्तता और मजबूत यूरोपीय रक्षा नीति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुआ भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौता दोनों पक्षों के सहयोग को और मजबूत करेगा। भारत इस ढांचे का उपयोग द्विपक्षीय और व्यापक यूरोपीय स्तर पर क्षेत्रीय स्थिरता और संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाने के लिए करना चाहता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया। इसे भारत और फ्रांस की गहरी दोस्ती और मजबूत रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया गया।

प्रधानमंत्री ने की फिनलैंड के पीएम व स्पेन के राष्ट्रपति से द्विपक्षीय वार्ता

परस्पर संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर

नई दिल्ली, 18 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन से इतर स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज से द्विपक्षीय वार्ता की। इस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और स्पेन के बीच सहयोग को अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने आए स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज से प्रधानमंत्री मोदी ने इस समिट से इतर यहां द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने के लिए कई मुद्दों पर व्यापक बातचीत की।

उन्होंने कहा कि बैठक में दोनों नेताओं के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, नवाचार, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन पर क्रियान्वयन, और शिक्षा जैसे तमाम मुद्दों पर विस्तृत बातचीत हुई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेन के राष्ट्रपति सांचेज को भारत-यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को मजबूती देने के लिए उनका लगातार सहयोग देने के लिए सराहना की।

उल्लेखनीय है कि स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विश्व के चौथे शिखर सम्मेलन में भाग लेने आज सुबह भारत पहुंचे हैं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने हवाई अड्डे पर उनकी स्वागत किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के पीएम से की द्विपक्षीय बातचीत, आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली, 18 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और फिनलैंड के बीच सहयोग को अधिक प्रगाढ़ बनाने पर व्यापक चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में स्थिरता, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अनुसंधान और नैतिक नवाचार जैसे प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस बैठक में इस बात पर मुख्य ध्यान रहा कि भारतीय मेधा कैसे दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत कर सकती है।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एआई क्षेत्र में उभरते नवाचार केंद्र के रूप में फिनलैंड के प्रयासों की सराहना की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने जिम्मेदार और प्रतिभा-आधारित एआई को बढ़ावा देने, साथ ही सतत भविष्य के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम समाधानों के उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री ने गूगल सीईओ सुंदर पिचाई से की मुलाकात

नई दिल्ली, 18 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से इतर गूगल एवं अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई से यहां हैदराबाद हाउस में बुधवार को मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और गूगल द्वारा भारतीय छात्रों एवं पेशेवरों के साथ मिलकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट में लिखा कि उन्हें सुंदर पिचाई से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि बातचीत में भारत के एआई क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और गूगल के साथ मिलकर प्रतिभाशाली छात्रों एवं पेशेवरों को जोड़ने के तरीकों पर विचार-विमर्श हुआ।

उल्लेखनीय है कि 16 फरवरी से शुरू हुआ यह शिखर सम्मेलन अपनी तरह का दुनिया का चौथा शिखर सम्मेलन है।