रील के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति रद्द

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जयपुर, 19 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक एवं इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के पद पर बृजेश दीक्षित की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड के अध्यक्ष व भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव को नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ करने के निर्देश देते हुए चयन प्रक्रिया में राज्य के मुख्य सचिव को भी शामिल करने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश पुरुषोत्तम नारायण शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि रील में राज्य सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है और यह केन्द्र व राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है। रीको का प्रबंध निदेशक पार्ट टाइम निदेशक होने के नाते रील का चैयरमेन है और रीको का संचालन राज्य सरकार करती है। ऐसे में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता हो कि चयन प्रक्रिया में मुख्य सचिव को शामिल किया गया हो।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि राज्य सरकार के साथ संयुक्त उपक्रम होने के बावजूद रील के प्रबंध निदेशक की चयन प्रक्रिया में मुख्य सचिव को शामिल नहीं किया। राज्य का उपक्रम होने के नाते चयन प्रक्रिया में सीएस का शामिल होना आवश्यक है। ऐसे में बृजेश दीक्षित की चयन प्रक्रिया अवैध है। इसके अलावा जब चयन प्रक्रिया निर्धारित हो तो दूसरे तरीके अपनाकर चयन नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को अवैध घोषित किया जाए। वहीं केन्द्र सरकार व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरडी रस्तोगी व अन्य ने कहा कि रील राज्य की परिभाषा में नहीं आती है। ऐसे में याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के बजाए केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर करनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता चयन प्रक्रिया में शामिल रहा है और याचिका भी देरी से पेश हुई है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने रील के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को रद्द कर दिया है।

द्रव्यवती नदी में सीधे ही अनट्रीटेड वाटर छोड़ा जा रहा,

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न्याय मित्र की रिपोर्टः अवैध पंपिंग से हो रही खेती

जयपुर, 19 फ़रवरी (हि.स.)। शहर की द्रव्यवती नदी के संरक्षण से जुडे मामले में नियुक्त न्यायमित्रों ने अदालती आदेश की पालना में हाईकोर्ट में अपनी निरीक्षण रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा गया कि गत 7 और 8 फरवरी को द्रव्यवती नदी पर बने एसटीपी प्लांट और रिवर फ्रंट सहित अन्य जगहों का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण में पता चला की विश्वकर्मा औद्योगिक एरिया, बनीपार्क आर्मी एरिया, विद्याधर नगर, सुशीलपुरा, रीको एसटीपी तरुछाया नगर, रेलवे ब्रिज फन किंगडम के पास, ग्रासफील्ड श्याम नगर के पास, आतिश मार्केट, बम्बाला पुलिया, मानसरोवर, नारायणा अस्पताल प्रताप नगर व राणा सांगा मार्ग पर अनट्रीटेड वाटर को सीधे ही द्रव्यवती में छोड़ा जा रहा है। वहीं गोनेर में अवैध तौर पर पंपिंग कर खेती की जा रही है। कई जगह पर रिवर फ्रंट का अवैध तरीके से उपयोग किया जा रहा है। वहां पर सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। वहीं एसटीपी प्लांट व रिवर फ्रंट पर संसाधनों की कमी है। एसटीपी प्लांट पर सफाई की व्यवस्था नहीं है। वहीं द्रव्यवती के प्लांट के सबस्टैंडर्ड होने के चलते चंदलाई बांध का पानी भी प्रभावित हो रहा है।

इसके जवाब में जेडीए ने कहा कि सुशीलपुरा पर जयपुर नगर निगम की सीवरेज लाइन, जो देहलावास एसटीपी के लिए है, वहां से सरप्लस फ्लो सीधा ही द्रव्यवती में डायवर्ट हो रहा है। वहीं अन्य जगहों पर भी कई नालों से भी अनट्रीटेड सीवरेज नगर निगम नदी में छोड़ रहा है। इसके अलावा विश्वकर्मा, सुदर्शनपुरा और सीतापुरा सहित सांगानेर सांगानेर औद्योगिक क्षेत्र से केमिकल वाला कचरा सीधे द्रव्यवती नदी में छोड़ा जा रहा है। जेडीए, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण की कार्रवाई कर रहा है। जेडीए ने जिम्मेदारों को नोटिस जारी करने व दोषी इंडस्ट्रियल यूनिट्स को सील करने की कार्रवाई भी की है। अदालत में मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी। गौरतलब है कि पीएन मैंदोला ने द्रव्यवती नदी में अतिक्रमण व अवैध निर्माण को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी थी। इसमें कहा था कि इस नदी को प्रदूषित कर दिया है और इससे वास्तविक स्वरूप नष्ट हो रहा है। इसलिए इसे मूल स्वरूप में लाया जाए।

न्याय बने विकास की कसौटी

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सामाजिक न्याय का विश्व दिवस (20 फरवरी) पर विशेष

– योगेश कुमार गोयल

किसी भी समाज की सच्ची प्रगति उसकी ऊंची इमारतों या तेज आर्थिक वृद्धि से नहीं बल्कि इस बात से मापी जानी चाहिए कि वह अपने सबसे कमजोर, वंचित और हाशिए पर खड़े नागरिकों को कितना न्यायपूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान करता है। 20 फरवरी को मनाया जाने वाला सामाजिक न्याय का विश्व दिवस मानव सभ्यता की उस मूल चेतना का प्रतीक है, जिसके बिना न तो शांति संभव है और न ही टिकाऊ विकास। इस दिवस की स्थापना इसलिए की गई थी ताकि गरीबी, बेरोजगारी, सामाजिक बहिष्कार, असमानता और भेदभाव जैसी जटिल वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए देशों के बीच साझा प्रतिबद्धता को मजबूती मिल सके।

वर्ष 2026 में सामाजिक न्याय का विश्व दिवस की थीम है ‘समावेशन को सशक्त बनाना: सामाजिक न्याय के लिए अंतर को पाटना’। यह थीम स्पष्ट करती है कि असमानताओं को कम करने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि विकास की प्रक्रिया में समाज के हर वर्ग की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो। समावेशन का अर्थ केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाना नहीं बल्कि निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में उन लोगों की आवाज को स्थान देना है, जो अब तक हाशिए पर रहे हैं। जब तक नीतियां केवल केंद्रों में बनती रहेंगी और उनका प्रभाव जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचेगा, तब तक सामाजिक न्याय एक अधूरा लक्ष्य बना रहेगा।

यह दिवस विशेष प्रासंगिकता रखता है क्योंकि आज की दुनिया एक गहरे संक्रमणकाल से गुजर रही है। वैश्वीकरण, तकनीकी प्रगति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक तनावों ने आर्थिक व सामाजिक ढ़ांचों को तेजी से बदला है। इन बदलावों का लाभ जहां कुछ सीमित वर्गों तक सिमट गया है, वहीं बड़ी आबादी, विशेषकर गरीब, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, महिलाएं, प्रवासी, दिव्यांगजन और अल्पसंख्यक समुदाय और अधिक असुरक्षित होती जा रही है। ऐसे समय में सामाजिक न्याय केवल नैतिक आदर्श नहीं, नीति और शासन की अनिवार्य प्राथमिकता बन चुका है।

सामाजिक न्याय की अवधारणा अवसरों, संसाधनों और अधिकारों के निष्पक्ष वितरण से जुड़ी है। इसका मतलब यह नहीं कि सभी को समान परिणाम मिले बल्कि यह है कि सभी को समान अवसर उपलब्ध हों। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और कानूनी सुरक्षा तक समान पहुंच इसके मूल स्तंभ हैं। जब किसी व्यक्ति का भविष्य उसकी जाति, लिंग, धर्म, जन्म स्थान या आर्थिक स्थिति से तय होने लगे, तब यह स्पष्ट संकेत होता है कि समाज में न्याय का संतुलन बिगड़ चुका है। आज वैश्विक स्तर पर असमानताओं की खाई लगातार चौड़ी हो रही है। एक ओर अत्यधिक संपन्न वर्ग है, जिसके पास संसाधनों और अवसरों की प्रचुरता है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों लोग बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बेरोजगारी, असुरक्षित रोजगार और कम वेतन ने विशेष रूप से युवाओं के सामने गंभीर संकट खड़े कर दिए हैं। इसी संदर्भ में सम्मानजनक कार्य और मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता सामने आती है। पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, बेरोजगारी सहायता और खाद्य सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं केवल कल्याणकारी योजनाएं नहीं बल्कि सामाजिक स्थिरता और भरोसे की आधारशिला हैं।

भारत में सामाजिक न्याय का विचार गहरे संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा है। संविधान की प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की गारंटी देती है जबकि मौलिक अधिकार और राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत असमानताओं को कम करने और कल्याणकारी राज्य की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। स्वतंत्रता के बाद से आरक्षण नीति, सामाजिक कल्याण योजनाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य में सार्वजनिक निवेश तथा कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बावजूद इसके, क्षेत्रीय असमानताएं, शहरी-ग्रामीण विभाजन, डिजिटल डिवाइड और लैंगिक विषमता जैसी चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं।

सामाजिक न्याय का विश्व दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि क्या हमारी नीतियां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही हैं, क्या शिक्षा और रोजगार के अवसर वास्तव में समान हैं और क्या विकास का लाभ संतुलित रूप से बंट रहा है? यह दिवस यह भी याद दिलाता है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई किसी एक देश या सरकार की नहीं बल्कि वैश्विक सहयोग और सामूहिक प्रयास की मांग करती है। सामाजिक न्याय का विश्व दिवस 2026 इस सत्य को दोहराता है कि सच्ची प्रगति तभी संभव है, जब कोई भी पीछे न छूटे। समावेशन और सशक्तिकरण केवल शब्द नहीं बल्कि रोजमर्रा के निर्णयों, नीतियों और सामाजिक व्यवहारों में उतारने योग्य जिम्मेदारी हैं। जब हर व्यक्ति को समान गरिमा, अवसर और सुरक्षा मिलती है, तभी न्याय कागजों से निकलकर जीवन की वास्तविकता बनता है और एक अधिक मानवीय, समावेशी तथा न्यायपूर्ण विश्व का निर्माण संभव हो पाता है।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

गहरे संदेश देती ‘कंजक: द गर्ल विदाउट अ नेम’

विवेक शुक्ला

हिंदुओं के लिए नवरात्रि सिर्फ़ त्योहार नहीं, एक गहरी भावना है जो हमारी संस्कृति में बसी हुई है। साल में दो बार मनाया जाने वाला यह त्योहार अष्टमी या नवमी पर कंजक या कन्या पूजन के साथ खत्म होता है। इस दिन घर में नौ छोटी लड़कियों और एक लड़के (जिसे अक्सर लोंकड़ा कहते हैं) को बुलाया जाता है और उन्हें मां दुर्गा का जीवंत रूप मानकर पूजा जाता है। उन्हें पूढ़ी, हलवा, चना खिलाया जाता है, उपहार दिए जाते हैं और उनके पैर छुए जाते हैं। यह रस्म शुद्धता, भक्ति और स्त्री शक्ति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

यह रस्म बहुत पवित्र और प्यारी है, लेकिन इसमें कुछ सामाजिक बारीकियां और रोज़मर्रा की मुश्किलें भी छिपी हैं। इन्हीं बातों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है फिल्म ‘कंजक: द गर्ल विदाउट अ नेम’ में। यह फिल्म सच्चिदानंद जोशी की कहानी पर आधारित है। राहुल यादव ने इसे बहुत संवेदनशीलता से निर्देशित किया है। यह हाल ही में रिलीज़ हुई एक छोटी लेकिन गहरी छाप छोड़ने वाली कहानी है, जो दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय घर में दुर्गा पूजा के दौरान घटित होती है।

पूजा से पहले का हंगामा

कहानी की मुख्य किरदार हैं एक सम्मानित और धार्मिक महिला, जिन्हें सब प्यार से ‘आंटी’ कहते हैं। मालविका जोशी ने इस रोल को बहुत शिद्दत से निभाया है। आंटी कन्या पूजन की हर छोटी-बड़ी तैयारी पूरी लगन से कर रही हैं लेकिन सुबह होते ही सब उल्टा-पुल्टा हो जाता है। घर की मदद करने वाली मीना नहीं आती। प्लेटें, चढ़ावा, यहां तक कि पूजा की दरी भी गायब हो जाती है। घर वाले बेचैन और चिढ़े हुए हैं।

आंटी की घबराहट बढ़ती जाती है। उनकी यह परेशानी एक गहरी सच्चाई दिखाती है।औरतों पर ही अक्सर संस्कृति और धर्म की रस्मों को पूरी तरह निभाने का बोझ पड़ता है। रस्म की पवित्रता खतरे में लगती है और घर का माहौल तनाव से भर जाता है। फिल्म इन घरेलू बातों को बहुत सच्चाई से दिखाती है—छोटी-छोटी चिढ़, पीढ़ियों का फर्क, और नीचे-नीचे छिपी भक्ति—बिना ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर। जो शुरू में घरेलू हंगामे जैसी हल्की-फुल्की कॉमेडी लगती है, वो धीरे-धीरे बहुत गहरी सोच वाली बात बन जाती है।

अचानक आई वो रहस्यमयी दीदी

जब तनाव चरम पर पहुंचता है, तभी एक युवती जिसे सिर्फ़ ‘दीदी’ कहा जाता है, अचानक आ पहुंचती है—और ठीक नौ लड़कियों के साथ। उसका आना ऐसा लगता है जैसे भगवान ने खुद भेजा हो। वो शांत और आत्मविश्वास से भरी हुई है। वो गायब चीज़ें ढूँढ निकालती है, सबको बैठाती है, बच्चों से प्यार से बात करती है और आंटी को ढाढ़स बंधाती है। एक पल में सब बदल जाता है। घर जो तनाव से भरा था, अब गर्मजोशी और सुखद माहौल से भर जाता है। लड़कियां हंसती-खेलती हैं, गाती हैं और पूजा में खुशी-खुशी हिस्सा लेती हैं। दीदी की शांत कार्यक्षमता और संयम से रस्म सिर्फ़ रस्म नहीं रह जाती, बल्कि सच्ची भक्ति और एकता का रूप ले लेती है।

ये लड़की (सवलीन कौर) घर की मालकिन आंटी से बात करते हुए एक कड़वी सच्चाई कह देती है—हमने अपनी नदियों को बहुत गंदा कर दिया है। उसकी बात उत्सव की खुशी में चुभ जाती है। खासकर दिल्ली में, जहां कंजक के बाद लोग यमुना किनारे जाकर बचे-खुचे प्रसाद को बहा देते हैं—और यही नदी को और गंदा करते हैं।

यह पल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या बिना ज़िम्मेदारी वाली रस्म सच में भगवान की इज़्ज़त करती है?

एक आध्यात्मिक मोड़

पूजा खत्म होने पर माहौल गंभीर हो जाता

है। कबीर का भजन धीरे-धीरे बजता है:

“मोको

कहाँ ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।”

यह भजन फिल्म के मुख्य संदेश को

रेखांकित करता है। बिना ज्यादा खुलासा किए, कहानी

में दीदी की असलियत का एक दमदार ट्विस्ट आता है। यह ट्विस्ट कहानी को घरेलू सच्चाई

से आध्यात्मिक प्रतीक तक ले जाता है। यह बताता है कि भगवान सिर्फ़ बड़ी-बड़ी

रस्मों या दूर की मूर्तियों में नहीं,

बल्कि

इंसानी रिश्तों, दया और सच्ची श्रद्धा

में बसता है। ‘बिना नाम वाली लड़की’ एक प्रतीक बन जाती है—उस पवित्रता की, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

क्लाइमेक्स ड्रामेटिक नहीं, बल्कि सोचने वाला है। फिल्म खत्म होने के बाद भी दिमाग में घूमती रहती है।

रस्म से परे भक्ति

सच्चिदानंद जोशी की कहानी सामाजिक टिप्पणी के लिए जानी जाती है और फिल्म ने उसे अच्छे से अपनाया है। यह समावेशिता, औरतों की संस्कृति बचाने की भूमिका, और जाति-वर्ग-धर्म की दीवारों को तोड़ने की बात करती है। यह सवाल उठाती है कि क्या सिर्फ़ यांत्रिक रस्में करने से भक्ति बची रहती है, या असली भक्ति तो सहानुभूति और खुले दिल में है।

राहुल यादव का निर्देशन हास्य, कोमलता और दर्शन के बीच संतुलन बनाए रखता है। गति तेज़ है, एक्टिंग स्वाभाविक है और कहानी बिना बनावटी के है। मालविका जोशी ने आंटी के घबराहट से आश्चर्य तक के सफर को खूबसूरती से निभाया है। बच्चे भी बहुत सहज और मासूम लगते हैं।

‘कंजक: द गर्ल विदाउट अ नेम’ सिर्फ़ त्योहार वाली शॉर्ट फिल्म नहीं है। यह एक कोमल याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति कठोर रस्मों में नहीं, बल्कि इंसानियत में है। आजकल जब त्योहार दिखावा बन जाते हैं, यह फिल्म हमें भक्ति का असली मतलब फिर से याद दिलाती है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम भगवान को कहाँ ढूँढते हैं। शायद वो दूर नहीं, हमारे बगल में ही है—बिना नाम का, अनदेखा, लेकिन बहुत असली। अपने शांत और सादे अंदाज़ में यह फिल्म भारतीय परंपरा, सामाजिक सोच और सार्थक कहानी का बेहतरीन मिश्रण है। जो भारतीय संस्कृति, सामाजिक मुद्दों और अच्छी कहानी पसंद करते हैं, उनके लिए यह फिल्म ज़रूर देखने लायक है—दिल को छूने वाली और लंबे समय तक याद रहने वाली।

(लेखक, जाने-माने पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

कराची में सिलेंडर विस्फोट से इमारत ढही,मलबे में दबकर 16 लोगों की मौत

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कराची, 19 फ़रवरी (हि.स.)। पाकिस्तान के कराची के रिहाइशी इलाके में गुरुवार तड़के एक इमारत में सिलेंडर विस्फोट के कारण 16 लोगों की मौत हो गई। धमाके के कारण इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इसके मलबे में दबकर लोगों की मौत हुई। कई घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

जियो न्यूज के मुताबिक कराची के सोल्जर बाजार के गुल राणा कॉलोनी इलाका स्थित एक इमारत में गुरुवार तड़के करीब सवा चार बजे सिलेंडर विस्फोट हो गया। इस हादसे में 16 लोगों की जान चली गई।यह धमाका गैस सिलेंडर लीक होने की वजह से हुआ। हादसे के बाद राहत कर्मियों ने मलबे से कई लोगों को निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। हादसे में छह महिलाएं और चार बच्चों समेत कुल 16 लोगों की जान गई है जबकि 14 लोग घायल हैं।

राजगीर भ्रमण पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू

पर्यटन विकास का किया अवलोकन

बिहारशरीफ 19 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को बिहार में राजगीर स्थित ग्लास ब्रिज, नेचर सफारी तथा जू सफारी परिसर का भ्रमण किया। उनके आगमन से राजगीर की सुरम्य वादियों और हरित प्राकृतिक वातावरण में विशेष उत्साह का माहौल देखा गया।

भ्रमण के दौरान मंत्री ने यहां की मनोहारी प्राकृतिक छटा, सुव्यवस्थित पर्यटन व्यवस्था तथा जैव-विविधता संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजगीर ऐसा पर्यटन स्थल है जहां प्रकृति, रोमांच और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से सफारी प्रबंधन की प्रशंसा करते हुए कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए पर्यटन को विकसित करना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, जिसे यहां प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। यह पहल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी पैदा कर रही है।

निरीक्षण के क्रम में मंत्री ने वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं, इको-टूरिज्म गतिविधियों, पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रमों और आधुनिक पर्यटक प्रबंधन प्रणाली की जानकारी ली। इस दौरान जू सफारी के निदेशक राम सुन्दर एम ने उन्हें परिसर की संचालन व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध तथा संरक्षण रणनीतियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजगीर का यह मॉडल देश के अन्य पर्यटन स्थलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।

टी-20 विश्व कप: वेस्टइंडीज ने इटली को हराया, सुपर-8 में प्रवेश

कोलकाता, 19 फरवरी (हि.स.)। आईसीसी टी-20 विश्व कप 2026 में वेस्टइंडीज ने अपने अंतिम ग्रुप मुकाबले में इटली को 42 रन से हराकर सुपर-8 में अजेय रहते हुए प्रवेश किया। ईडन गार्डन्स में खेले गए इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 165/6 का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया और जवाब में इटली की टीम को 18 ओवर में 123 रन पर समेट दिया।

तेज गेंदबाज शमार जोसेफ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके, जबकि मैथ्यू फोर्डे ने तीन सफलताएं हासिल कीं।

होप की कप्तानी पारी

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही। ओपनर ब्रेंडन किंग पारी की सातवीं गेंद पर आउट हो गए, जबकि शिमरॉन हेटमायर भी केवल एक रन बनाकर पवेलियन लौट गए। पावरप्ले के अंत तक टीम का स्कोर 48/2 था।

इसके बाद कप्तान शाई होप ने जिम्मेदारी संभाली और रोस्टन चेज के साथ 64 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। चेज 24 रन बनाकर आउट हुए। होप ने मात्र 28 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 46 गेंदों में 75 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें छह चौके और चार छक्के शामिल रहे।

अंतिम ओवरों में शेरफेन रदरफोर्ड (24* रन, 15 गेंद) और मैथ्यू फोर्डे (16 रन, 8 गेंद) ने 14 गेंदों में 28 रन जोड़कर टीम को 165/6 तक पहुंचाया।

इटली की लड़खड़ाती पारी

166 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इटली की शुरुआत बेहद खराब रही। जस्टिन मोस्का 2 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि एंथनी मोस्का 19 रन (एक चौका, दो छक्के) बनाकर चलते बने। पावरप्ले के अंत तक टीम 37/3 के स्कोर पर संघर्ष कर रही थी।

जेजे स्मट्स (24 रन) और बेन मनेन्ती (26 रन) ने कुछ देर पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। ग्रांट स्टीवर्ट ने 12 रन बनाए, पर टीम बड़ा साझेदारी नहीं बना सकी।

जोसेफ-फोर्डे की घातक गेंदबाजी

शमार जोसेफ ने 4 ओवर में 30 रन देकर चार विकेट लेकर इटली की कमर तोड़ दी। मैथ्यू फोर्डे ने 3/25 के आंकड़े दर्ज किए, जबकि गुडाकेश मोती ने दो और अकील हुसैन ने एक विकेट लिया।

इटली की पूरी टीम 18 ओवर में 123 रन पर सिमट गई और वेस्टइंडीज ने 42 रन से जीत दर्ज कर सुपर-8 में दमदार एंट्री की।

संक्षिप्त स्कोर:

वेस्टइंडीज 165/6 (20 ओवर) — शाई होप 75, रोस्टन चेज 24, शेरफेन रदरफोर्ड 24*; क्रिशन कालुगमागे 2/24, बेन मनेन्ती 2/37।

इटली 123 ऑलआउट (18 ओवर) — बेन मनेन्ती 26, जेजे स्मट्स 24; शमार जोसेफ 4/30, मैथ्यू फोर्डे 3/25, गुडाकेश मोती 2/24।

वेस्टइंडीज 42 रन से विजयी।

जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए 500-500 एकड़ भूमि प्रस्तावित

यमुना एक्सप्रेस-वे

-यीडा ने शासन को भेजी सूचना, सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी का प्रस्ताव

-दोनों सेक्टर मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होंगे विकसित

-प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण को लेकर तैयारी पूरी

लखनऊ, 19 फरवरी (हि.स.)। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के विकास को लेकर औपचारिक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। 18 फरवरी को जारी पत्र में प्राधिकरण ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में इन दोनों प्रस्तावित सिटीज के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह ने बताया कि इन दोनों सिटी को लेकर भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित योजना तैयार कर ली गई है।

पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आधिकारिक प्रस्तावित जापान और सिंगापुर यात्रा के संदर्भ में प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत जापान सिटी और सिंगापुर सिटी हेतु क्षेत्र चिन्हित कर सूचना उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई थी।

इसी क्रम में प्राधिकरण ने सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 को इन परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित किया है। प्राधिकरण की महायोजना के अंतर्गत सेक्टर-7 और सेक्टर-5ए मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नियोजित है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग न्यूनतम 70 प्रतिशत निर्धारित है। इसके साथ ही आवासीय उपयोग अधिकतम 12 प्रतिशत, वाणिज्यिक उपयोग अधिकतम 13 प्रतिशत तथा संस्थागत सुविधाएं न्यूनतम 5 प्रतिशत तक निर्धारित हैं। पत्र में कहा गया है कि इन सेक्टरों को एक इंटीग्रेटेड औद्योगिक सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है।

जापानी सिटी के लिए सेक्टर-5ए ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ क्षेत्र प्रस्तावित है। इसी प्रकार सिंगापुर सिटी के लिए सेक्टर-7, ग्रेटर नोएडा में 500 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। दोनों ही परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। इन सेक्टरों का विकास ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड पर किए जाने का प्रस्ताव है।

ड्राइविंग लाइसेंस के रिनिवल में आ रही कढ़िनाइयों के समाधान हो

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भाजपा MLC विजय बहादुर पाठक सदन में उठाया मुद्दा

आज विधान परिषद में नियम 110 के अन्तर्गत ड्राइविंग लाइसेंस के रिनिवल में आ रही कढ़िनाइयो के समाधान कराए जाने का विषय उठाया , जिस पर मा.सभापति सरकार को प्रभावी कार्यवाही के लिए भेज दिया

परिवहन व्यवस्था में सुधार और आमजन को कैसे सहूलियत मिल सके इसलिए इसको लेकर सरकार नित नये सुधार कर रही है। परिवहन कार्यालय आम जनता के लिए पुरानी धाराणाओ के विपरित पब्लिक फैन्डीली हो इस ओर प्रयास हो रहा है। किन्तु ड्राविंग लाइसेंस के निन्यूअल को लेकर लोगो को दुसवारियों का सामना करना पड रहा है। डेटा ब्लाक होने के वजह से रिन्यूअल में डी डुप्लीकेशन के लिए मूल आरटीओं के यहां जाना पड रहा है। सबसे अधिक इस समस्या से सीनियर सीटीजन परेशान है। वास्तव में लोगो की सुविधा के लिए की गई यह सुविधा परेशानी बढ़ा रही है। डी.एल. में पता परिवर्तन होने पर उसमे डेटा दोनो जगहो का जुड जाता है। ऐसे में रिन्यूअल प्रक्रिया के दौरान ये दोनो पते परेशानी का सबब बन रहे है, ऐसे में एक डेटा हटने के बाद ही रिन्यूअल की बाकी प्रक्रिया पूरी हो पायेगी। इसके लिए आवेदक को मूल जिले में जाना पड रहा है। जबकि नियम के अनुसार पता परिवर्तित होने पर रिन्यूअल दोनो जगहो से कराया जा सकता है। वैसे रिन्यूअल के इस प्रक्रिया में आ रही इन समस्याओं को निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारी जुटे हुये है NIC PORTAL के दिक्कतो को लेकर विभागीय स्तर पर एक समिति बनाकर दूर करने का प्रयास हो रहे है। किन्तु इसमे होने वाले विलम्ब के कारण आम आदमी परेशान है। त्वरित समाधान चहता है।

अतः लोक महत्व एवं जनहित के इस तत्कालिक विषय ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल में आने वाली कठिनाईयो के समाधान विषय पर चर्चा/ प्रभावी कार्यवाही की मांग करता हूँ।

उप्र के कार्यालयों -शैक्षणिक संस्थानों को तम्बाकू मुक्त कराएं घोषित

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मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की घोषणा

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य स्तरीय समन्वय समिति की हुई बैठक

लखनऊ, 19 फ़रवरी (हि.स.)। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध एवं व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 (COTPA-2003) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में तम्बाकू के विरुद्ध विशेष जागरूकता अभियान संचालित किया जाए। प्राथमिक विद्यालय स्तर पर भी तम्बाकू से सम्बंधित जागरूकता विषय को पाठ्यक्रम अथवा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सम्मिलित किया जाए, ताकि बच्चों में प्रारम्भिक स्तर से ही तम्बाकू के दुष्प्रभावों के प्रति सजगता विकसित हो सके।

उन्होंने सभी सरकारी कार्यालयों को तम्बाकू मुक्त घोषित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता प्रदान करते समय “तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान” दिशा निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य किए जाने पर बल दिया। युवाओं में तम्बाकू उपयोग की प्रवृत्ति को रोकने के उद्देश्य से तम्बाकू उत्पादों से जुड़े ग्लैमर को समाप्त करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान शैक्षणिक संस्थानों में चलाए जाने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि सभी चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रत्येक उपलब्ध अवसर पर तम्बाकू सेवन न करने सम्बंधी संक्षिप्त सलाह अवश्य दें तथा स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता वृद्धि के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में तम्बाकू निषेध केंद्र की स्थापना भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाए।

इसके अतिरिक्त, तम्बाकू विक्रेता लाइसेंसिंग (टीवीएल) व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने तथा तम्बाकू विक्रेताओं की दो दुकानों के मध्य न्यूनतम 500 मीटर की दूरी निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त रौशन जैकब सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।