राज्यसभा में हंगामा-नारेबाजी, कांग्रेस ने किया वॉकआउट

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नई दिल्ली, 09 फ़रवरी (हि.स.)।

राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी को न बोलने देने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल शुरू होते ही दोपहर 12 बजे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह मुद्दा उठाया। उत्तरप्रदेश से भाजपा सांसद डा. के लक्ष्मण के सवाल और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के जवाब के समय राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे व अन्य सांसदों ने विरोध शुरू किया।

प्रश्रकाल के दौरान कांग्रेस सांसदों ने मांग की कि राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने दिया जाए। इस पर सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वह दूसरे सदन में हुई घटनाओं पर चर्चा न करें।

इस पर

खड़गे ने कहा कि वह संविधान से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं और संसद दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — से मिलकर बनी है। उन्होंने कहा कि निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि सभापति ने इस मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीं दी और कहा कि खड़गे द्वारा कही गई कोई भी बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी।

इसके बाद प्रश्नकाल की कार्यवाही हंगामे के बीच जारी रही। खड़गे और अन्य विपक्षी नेता बोलने की मांग करते रहे। जब सभापति नहीं माने, तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और सत्तारूढ़ भाजपा पर महिला सांसदों के अपमान का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर विपक्षी दलों के सांसद नारे बाजी करते रहे। कुछ देर तक नारेबाजी के बाद विपक्षी सांसदों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। कांग्रेस के वॉकआउट के बाद सदन की कार्यवाही चलती रही। वहीं, लोकसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित किए जाने के बाद अपराह्न 2 बजे ही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई थी।

बस्तर की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति और विरासत है : अमित शाह

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जगदलपुर, 09 फ़रवरी (हि.स.)। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बस्तर जैसी समृद्ध संस्कृति और कला विश्व के किसी भी अन्य जनजातीय क्षेत्र में देखने को नहीं मिलती। बस्तर की पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति और विरासत है।

केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने बस्तर को भारत की संस्कृति का आभूषण बताते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां की संस्कृति और परंपराओं को नए प्राण देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस दौरान बस्तर पंडुम 2026 के सभी विजेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम 2026 में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेता कलाकारों को राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने और सहभोज करने का अवसर भी मिलेगा।

शाह ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग के 07 जिले के 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों के 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन्हीं लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से राज्य की सरकार द्वारा किया जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सलियों के डर से सहमा रहता था, आज उसी बस्तर में 55 हजार लोगों ने खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधी जैसी 12 विधाओं में यहां की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुंचे। उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद नहीं बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति और विरासत ही हो सकती है।

अमित शाह ने कहा कि आज हमारा बस्तर पूरे देश के सामने एक बेहतरीन ब्रांड के रूप में उभर कर चमक रहा है। कई ऐसे स्कूल हैं जो 40 साल से बंद थे, छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हे फिर से खोल दिया है। शाह ने कहा कि अगले 5 वर्षों में सभी आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर सबसे विकसित बनेगा, नई पर्यटन गतिविधियां बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगी। सभी बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल और स्कूल शुरू किए जाएंगे, साथ ही हायर सेकेंडरी स्कूल और कॉलेज भी बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हर गांव में पोस्ट ऑफिस खुल रहे हैं, मोबाइल टावर लग रहे हैं और गांव को जोड़ने वाली सड़कें भी बहुत अच्छी तरीके से बन रही हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कई गांव ऐसे हैं जहां चार दशक के बाद हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होते ही एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी कई नई टूरिज्म की विधाएं विकसित होने लगेंगी और देखते-देखते हम बस्तर को बहुत आगे बढ़ाएंगे। शाह ने कहा कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र और ऑटो गिग क्षेत्र बस रहा है जिससे आदिवासी युवा भाइयों बहनों को रोजगार मिलेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 3500 करोड़ रुपये से रावघाट जगदलपुर रेल परियोजना का काम शुरू हो गया है। नदी जोड़ो परियोजना को भी हम आगे बढ़ा रहे हैं और 90,000 से अधिक युवाओं को विभिन्न व्यवसायों का परीक्षण देने का काम भी आगे बढ़ रहा हैं। 36 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी पर एक नई सिंचाई योजना भी लाई जाएगी जिससे 120 मेगावाट बिजली भी मिलेगी।

तेल का आयात उपभोक्ताओं और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होगा : विदेश सचिव

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नई दिल्ली, 09 फरवरी (हि.स.)। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को कहा कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमारे प्रयास राष्ट्रीय हितों पर निर्भर करेंगे। उन्होंने कहा कि हम भारतीय उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराने की नीति का अनुसरण करते हैं।

विदेश सचिव ने सोमवार को एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में रूस से कच्चा तेल आयात किए जाने के मामले में पूछे गए प्रश्नों पर विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि देश की तेल कंपनियां बाजार की परिस्थिति एवं तेल की उपलब्धता, मूल्य, आपूर्ति प्रणाली और जोखिम आदि का आकलन कर आवश्यक फैसला करेंगी। तेल कहां से हासिल किया जाए इसका फैसला तेल कंपनियां करेंगी, जो बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ कई पेचिदा मुद्दे जुड़े हैं, तेल कंपनियां जिनका ध्यान रखेंगी।

उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की जो रूपरेखा तय पाई गई है, उस संबंध में अमेरिकी प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि भारत रूस के साथ कच्चे तेल का आयात बंद कर देगा। भारत सरकार की ओर से अभी इस संबंध में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी धमकी दी है कि भारत ने यदि भविष्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से कच्चे तेल का आयात किया तो उस पर दंडात्मक टैरिफ फिर से लगा दिया जाएगा।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आगे कहा कि भारत तेल और गैस क्षेत्र में मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है। भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है तथा हम ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता को बहुत महत्व देते हैं। देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए 80-85 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। आयात पर होने वाले खर्चे का मुद्दा भी इससे संबंधित है। इसीलिए हमारा फैसला भारत के उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करने पर भी केंद्रीत है।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल का माहौल है तथा अनेक देश इससे प्रभावित हैं और हम ऊर्जा बाजार में मूल्य और आपूर्ति में स्थिरता चाहते हैं। इस संबंध में भारत की भूमिका बहुत अनुकूल रही है। हमारा लक्ष्य है कि हमें उचित मूल्य पर पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध हो, जो विश्वसनीय है टिकाउ हो।

उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा के संबंध में किसी एक देश या स्रोत पर निर्भर नहीं है तथा वह अनेक देशों से इसका आयात करता है। आयात स्रोतों की विविधता बाजार के हालात के अनुरूप होती है। हमारे पास आपूर्ति के जितने अधिक स्रोत होंगे, हमारे लिए उतनी ही बेहतर स्थिति होगी।

पश्चिम बंगाल के डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर भाजपा का वार

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कहा- ममता बनर्जी पूरे देश को कर रहीं भ्रमित

नई दिल्ली, 09 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जनता को गुमराह करने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के खिलाफ भ्रामक दलीलें पेश कीं थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका लगा। पात्रा के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित हिंसा के मामलों पर चुनाव आयोग की याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह आश्वासन देना होगा कि राज्य में हिंसा नहीं होने दी जाएगी।

सोमवार को पत्रकार वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने बंगाल में अपनी भाषणों से हिंसा को आगे बढ़ाने की कोशिश की। लोगों को एसआईआर के खिलाफ भड़काकर सड़क पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। ये सारी बातें सुप्रीम कोर्ट में दायर पेटीशन से भी उजागर होता है।यही नहीं, जो जिले में ब्लॉक्स होते हैं, उसमें कई ब्लॉक्स में तृणमूल के गुंडों और विधायकों द्वारा प्रोयोजित दंगे किए गए।

सांसद संबित पात्रा ने कहा,

“अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि 8505 ग्रुप-बी अधिकारी कल शाम 5 बजे तक अपने-अपने डीसी (जिला कलेक्टर) या ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) के पास चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करें। पिछले कई महीनों से ममता बनर्जी ने एक तरह का असहयोग आंदोलन चलाने का पक्का फैसला कर रखा था। न तो वह एसआईआर के लिए अपने अधिकारियों को सहयोग दे रही थीं और न ही उन्हें ड्यूटी पर तैनात कर रही थीं।

आज सुप्रीम कोर्ट ने यह बात ममता बनर्जी को बिल्कुल साफ कर दी है। यह एक तरह से ममता बनर्जी की जिद का अंत है। माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई को स्वीकार कर लिया है। सफाई यह थी कि बंगाल सरकार अधिकारी उपलब्ध नहीं करा रही थी, जिसके कारण माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स को वे काम करने पड़ रहे थे जो उनके लिए निर्धारित नहीं थे।”

उन्होंने कहा,

“जब हिंसा हुई, तो बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आपत्ति प्रपत्रों को ब्लॉक कार्यालय के सामने जला दिया गया। इसके लिए तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता जिम्मेदार थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है, तो ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) के लिए उसकी जांच करना एक वैधानिक कर्तव्य है। चाहे आपत्ति दर्ज कराने वाला व्यक्ति उनके सामने उपस्थित हो या न हो, जो दस्तावेज उनके पास आया है, उस पर कार्रवाई किए बिना ईआरओ के पास कोई विकल्प नहीं है।

आज सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र को एक बड़ी जीत मिली है, और ममता बनर्जी जो पीड़ित होने का कार्ड खेल रही थीं, वह अब उनके हाथ से वो कार्ड निकल चुका है।”

संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलों के दौरान ममता बनर्जी ने ऐसा प्रस्तुत किया जैसे बंगाल में अत्याचार हो रहे हों, और उनके शब्द आपत्तिजनक थे। पात्रा ने कहा कि ममता ने यहां तक कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के हाथों में खून है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया कि एसआईआर किसी भी हाल में रोका नहीं जाएगा। यदि किसी को किसी मुद्दे पर स्पष्टीकरण चाहिए, तो सुप्रीम कोर्ट उसकी व्याख्या देगा।

सुप्रीम काेर्ट में केंद्र ने कहा- सोनम वांगचुक स्वस्थ,मिल रहा अच्छा इलाज

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नई दिल्ली, 09 फरवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने साेमवार काे जानकारी दी कि लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिल्कुल ठीक है और उन्हें एम्स जोधपुर से उपलब्ध बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराया जा रहा है। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को करने का आदेश दिया।

आज जैसे ही सुनवाई शुरु हुई जस्टिस अरविंद कुमार ने एएसजी से पूछा कि क्या कोर्ट के आग्रह पर सोनम वांगचुक की हिरासत जारी रखने पर कोई विचार किया गया है। तब केएम नटराज ने कहा कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है। सोनम वांगचुक को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। इस पर सोनम वांगचुक के वकील ने कहा कि उनकी तबीयत को देखते हुए हिरासत पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। तब कोर्ट ने नटराज से कहा कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है। डॉक्टर भी ऐसा ही बता रहे हैं, उनका इलाज किया जा रहा है। हमने पिछली सुनवाई में सलाह दी थी कि हिरासत जारी रखने पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। तब नटराज ने कहा कि वे बिल्कुल ठीक हैं और एम्स जयपुर में लद्दाख से ज्यादा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं हैं।

इसके पहले 4 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा था कि उसे सोनम वांगचुक की खराब होती जा रही तबीयत को ध्यान में रखते हुए उनकी हिरासत जारी रखने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को इस संबंध में निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करने का निर्देश दिया था।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

बुजुर्गों को संभालो वरना भविष्य में सामाजिक संकट होगा पैदा-हाईकोर्ट

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जयपुर, 09 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन संयुक्त परिवारों के टूटने, शहरीकरण और बदलती जीवन शैली ने वर्तमान में उन्हें असहाय और उपेक्षित बना दिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को कहा है कि वह प्रदेश में संचालित वृद्धाश्रमों का दौरा कर अदालत में 15 फरवरी को रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने कहा कि प्राधिकरण देखे की क्या इन वृद्धाश्रमों की इमारत राज्य सरकार ने बनाई है और इनमें रहने वाले क्या वरिष्ठ नागरिक हैं। इसके साथ ही अदालत ने बताने को कहा है कि इनमें पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं और क्या सरकार इन्हें कोई वित्तीय सहायता दे रही है। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश लोक उत्थान संस्थान की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वृद्धाश्रम केवल कागजों में नहीं हो सकते। यहां रहने वाले बुजुर्गों को पूर्ण सम्मान, बेहतर चिकित्सा और सुरक्षा के साथ मानवीय गरिमा के साथ जीने का हक मिलना चाहिए। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल सिर्फ परिवार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि देश में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ रही है। देश में महिलाओं की जीवन प्रत्याशा पुरुषों के मुकाबले अधिक है। वहीं तीस फीसदी बुजुर्ग महिलाएं और 28 फीसदी बुजुर्ग पुरुष गंभीर बीमारियों से पीडित हैं। इस आबादी का बड़ा हिस्सा गांवों में रहता है, लेकिन वहां तुलनात्मक रूप से सुविधाएं सीमित हैं। अदालत ने यह भी कहा कि साल 2022 में देश में 10.5 फीसदी सीनियर सिटीजन थे, जो 2050 में बढक़र करीब 20.8 फीसदी हो जाएंगे। इसके अलावा साल 2046 तक देश की बुजुर्ग आबादी 14 साल तक के बच्चों की संख्या से अधिक हो जाएगी। ऐसे में बूढी आबादी को सामाजिक संबल की जरूरत है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने अदालत को बताया गया कि जयपुर में 4 वृद्धाश्रम सहित प्रदेश में कुल 31 वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नितिन सोनी ने कहा कि राज्य सरकार कई पुनर्वास केन्द्रों को वृद्धाश्रम बता रही है, जबकि वास्तव में इतने वृद्धाश्रम संचालित नहीं हो रहे हैं। इस पर अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। जनहित याचिका में वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। पूर्व में अदालत ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए इसका निस्तारण कर दिया था, लेकिन बाद में पालना नहीं होने पर अदालत ने मामले में पेश अवमानना याचिका को पुन: जनहित याचिका के तौर पर सुनना तय किया था।

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क्या कोई शिक्षण संस्थान अधिसूचित किये बगैर माॅइनारिटी संस्था हो सकती है या नहीं

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-हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य से मांगा जवाब

प्रयागराज, 09 फरवरी (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सनबीम ओमैंस काॅलेज अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है या नहीं, इस वैधानिक मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार सहित अन्य विपक्षियों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है और याचिका के निस्तारण की तिथि 23 मार्च नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरुपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सनबीम ओमैंस काॅलेज वाराणसी की याचिका पर दिया है।

याची काॅलेज का कहना है कि माॅइनारिटी वेनेफिट एक्ट 1961 किसी शिक्षण संस्थान पर तब तक लागू नहीं होता जब तक कि केंद्र सरकार से अनुमोदन लेकर राज्य सरकार ने गेट में अधिसूचित न कर दिया हो। याची काॅलेज को माॅइनारिटी एक्ट के तहत अधिसूचित नहीं किया गया है। इसलिए अल्पसंख्यक आयोग को हस्तक्षेप करने और विपक्षी संख्या पांच की बहाली करने का आदेश देने का क्षेत्राधिकार नहीं है। आयोग ने अधिकार से बाहर जाकर आदेश दिया है जिसे अवैध होने के कारण रद्द किया जाय।

याची ने चेयरमैन पी एस एम काॅलेज आफ डेंटल एण्ड रिसर्च केस के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार से पूछा कि माॅइनारिटी एक्ट लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। विस्तृत जवाब दाखिल करें। तब तक विपक्षी की नियुक्ति मामले की यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया है।

फिल्म ‘एक दिन’ में आमिर खान के लिए गाना गाएंगे अरिजीत सिंह

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प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने के ऐलान के बाद सुर्खियों में आए गायक अरिजीत सिंह को लेकर एक नई और दिलचस्प जानकारी सामने आई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिनमें आमिर खान को पश्चिम बंगाल के जियागंज स्थित अरिजीत के घर पर देखा गया था। इन तस्वीरों ने फैंस के बीच हलचल मचा दी थी और तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अब खुद आमिर खान की पोस्ट ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

आमिर खान प्रोडक्शंस ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें आमिर और अरिजीत साथ बैठे नजर आ रहे हैं। अरिजीत के हाथ में गिटार है और दोनों किसी चर्चा में डूबे दिख रहे हैं। पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, “हमारी फिल्म ‘एक दिन’ में अपनी आवाज देने के लिए अरिजीत आपका आभार। आपके, आपके परिवार और आपकी टीम के साथ बिताए 4 दिन जादुई थे। खूब सारा प्यार।” इस पोस्ट से साफ हो गया है कि अरिजीत ने संन्यास के ऐलान के बावजूद इस खास प्रोजेक्ट के लिए गाना रिकॉर्ड किया है।

फिल्म ‘एक दिन’ में आमिर खान के बेटे जुनैद खान और दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म की घोषणा 16 जनवरी को की गई थी। सुनील पांडे के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अरिजीत की वापसी की खबर से उनके फैंस में एक बार फिर उत्साह की लहर दौड़ गई है।

#फिल्मएकदिन’ #आमिरखान #अरिजीतसिंह

सन्यास की घोषणा के बाद गायक अरिजीत सिंह ने कोलकाता में मंच पर की वापसी

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बॉलीवुड के लोकप्रिय गायक अरिजीत सिंह इन दिनों फिर से सुर्खियों में हैं। जनवरी की शुरुआत में उन्होंने अचानक प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का ऐलान किया था, जिसने संगीत प्रेमियों को निराश किया था। अब कुछ ही दिनों बाद अरिजीत ने कोलकाता में एक सार्वजनिक मंच पर परफॉर्म कर दर्शकों को चौंका दिया है।

अरिजीत की यह पहली सार्वजनिक प्रस्तुति संन्यास की घोषणा के बाद बहुत खास रही। नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने सितार वादक अनुष्का शंकर और तालवादक बिक्रम घोष के साथ मिलकर मंच शेयर किया। इस मौके पर अरिजीत ने बंगाली क्लासिक गीत ‘माया भोरा राती’ अपनी आवाज़ में पेश किया, जो मूल रूप से लक्ष्मी शंकर द्वारा गाया गया था। उनके सुर और मंचीय उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम को एक भावनात्मक अनुभव में बदल दिया।

इस कार्यक्रम में दर्शकों की भागीदारी भी अभूतपूर्व रही। कोलकाता के संगीत प्रेमियों ने अरिजीत के साथ बैठकर गीतों का आनंद लिया और उन्हें जोरदार तालियों से सराहा। सोशल मीडिया पर भी उनकी इस प्रस्तुति को लेकर प्रशंसकों की प्रतिक्रियाए उत्साह और प्यार से भरी हुई हैं। अरिजीत की गायकी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि उनका संगीत लोगों के दिलों को छू जाता है, भले ही वह प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कह चुके हों।

इस प्रस्तुति ने न केवल उनके फैंस को खुशी दी, बल्कि यह संकेत भी दिया कि अरिजीत सिंह संगीत के प्रति अपने जज्बे को जीवंत रखने के लिए नए मंचों की तलाश में हैं। उनके फैंस अब आगे क्या सुनने को मिलेगा, इस इंतज़ार में हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट रूम में वकील पर हमले को बताया ‘गुंडाराज’

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नई दिल्ली, 09 फरवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय में साेमवार काे एक वकील ने तीस हजारी कोर्ट के कोर्ट रुम में अपने ऊपर हमले की शिकायत की। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे गुंडाराज को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब है कि कानून का राज खत्म हो गया है। चीफ जस्टिस ने वकील को दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से इसकी शिकायत करने को कहा।

दरअसल, दिल्ली के एक वकील ने चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष कहा कि 7 फरवरी को वे एक केस में तीस हजारी कोर्ट के जज हरजीत सिंह पाल की कोर्ट में आरोपितों की ओर से पेश हुए थे। इसी दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने कई गुंडों के साथ हमला कर दिया। उस समय जज अपने सभी स्टाफ के साथ कोर्ट रुम में मौजूद थे। घटना का विवरण बताने के बाद चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या इस मामले की शिकायत दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय से की गई है, तब वकील ने कहा कि नहीं। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आप दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से इस संबंध में शिकायत कीजिए। इस शिकायत पर वे प्रशासनिक स्तर पर फैसला करेंगे।