बाबरी ढांचे का सपना देखने वालाें काे बता देना चाहता हूं कि वो कयामत का दिन कभी नहीं आएगा : योगी

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बाराबंकी, 10 फ़रवरी (हि.स.)। जो लोग बाबरी ढांचे का सपना देख रहे हैं, उन्हें बता देना चाहता हूं कि वो कयामत का दिन कभी नहीं आएगा। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। यहां का कानून मानो। यहां का कानून मानोगे और कायदे से रहोगे, तो फायदे में रहेगो। जो कानून तोड़ेगा, वो सीधे जहन्नुम में जाएगा।

मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने यह विचार मंगलवार को बाराबंकी में व्यक्त किए। श्री हनुमत विराट महायज्ञ एवं श्री रामाचार्य पूजन कार्यक्रम में शामिल हाेने पहुंचे मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने यज्ञ मंडप में आहुति दी। इस दौरान बाबा बलराम दास ने मखाना लावा की माला पहनाकर योगी का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री याेगी ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा ये डबल इंजन की सरकार है। हम लोगों ने कहा था ना, रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। बन गया न मंदिर। कोई संदेह है। वह राम को भूल जाते हैं, इसलिए भगवान राम भी उनको भूल चुके हैं। अब उनकी नैया कभी पार नहीं होगी। उन्हें कभी आगे नहीं बढ़ना। रामद्रोहियों के लिए अब कोई जगह नहीं। जो रामभक्तों पर गोली चला रहे थे, अब इन लोगों के लिए कोई जगह नहीं। राम सबके हैं, इसमें भेद नहीं। कुछ अवसरवादी राम को भूल जाते हैं।

2017 से पहले प्रदेश में कोई सुरक्षित नहीं था

मुख्यमंत्री योगी ने कहा- हम सब भारतीय एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण करें। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कोई सुरक्षित नहीं था। पहले गरीबों की जमीन पर कब्जा हो जाता था। सरकार बदलते ही सारी अराजकता गायब हो गई। हमारी सरकार में सब सुरक्षित हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्हाेंने कहा कि जब बेटी सुरक्षित होगी, तो समाज अपने आप सुरक्षा का एहसास करेगा। व्यापारी सुरक्षित होगा, तो तरक्की होगी। पहले वेतन देने का पैसा नहीं होता था। आज सभी को वेतन समय पर मिल रहा। सरकार करोड़ों लोगों को पेंशन दे रही है। आज प्रदेश तरक्की कर रहा है। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। जो कानून अपने हाथ में लेगा, तो कानून उसे ऐसा सबक सिखाएगा कि पीढ़ियां याद रखेंगी।

मोदी जी आए तो गरीबों को घर मिले

मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले गरीबों के घर नहीं बन पाए। मोदी जी आए, तो उत्तर प्रदेश के 60 लाख गरीबों को प्रधानमंत्री आवास मिले। पहले गांवों में बिजली नहीं थी, सड़कों पर गंदगी थी। अब घर-घर शौचालय बन गए। साफ पानी मुहैया कराया जा रहा है। पहले बिजली नहीं मिलती थी। कुछ चुनिंदा जिलों को ही बिजली मिलती थी। अब सभी 75 जिलों को बिजली मिल रही है। पहले की सरकारों में शौचालय नहीं थे। लोगों को मुंह बंद करके खेतों में जाना पड़ता था। आज हर घर में शौचालय है। अब बहन-बेटियों को बाहर नहीं पड़ता। बेटियों के जन्म से लेकर शादी का खर्च भी सरकार कर रही है। ये समाज की जिम्मेदारी है।

500 साल की लड़ाई के बाद मंदिर बना

मुख्यमंत्री योगी ने श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का उल्लेख करते हुए कहा 500 साल में कई राजा-महाराजा आए। 1947 में देश आजाद हुआ। सरकारें बनती रहीं। लेकिन किसी के मन में ये बात नहीं आई कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बने। मंदिर भाजपा की सरकार में बना। आज वहां लाखों भक्त दर्शन करने जा रहे।

जनसभा को खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा, पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी, जिलाध्यक्ष रामसिंह वर्मा, विधायक दिनेश रावत, विधायक साकेन्द्र वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, अनुसूचित जाति के आयोग अध्यक्ष बैजनाथ रावत सहित सभी पूर्व जिलाध्यक्षों ने लोगों को संबोधित किया। मंच पर भाजपा के नेताओं के साथ ही अयोध्या के संत – महात्मा भी मौजूद रहे।

लगातार तीसरे दिन मजबूूती के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

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निवेशकों ने कमाये 81 हजार करोड़ रुपये

नई दिल्ली, 10 फ़रवरी (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार आज लगातार तीसरे दिन मजबूती के साथ बंद होने में सफल रहा। आज के कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई थी। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों की चाल में गिरावट आ गई, लेकिन थोड़ी ही देर बाद खरीदारों ने लिवाली का जोर बना कर बाजार को संभाल लिया।

दिन के पहले सत्र के कारोबार में ज्यादातर समय खरीदारी का जोर बना रहा, लेकिन दूसरे सत्र में दोपहर एक बजे के बाद मुनाफा वसूली शुरू हो गई। इस मुनाफा वसूली की वजह से बाजार की बढ़त में कमी आ गई। पूरे दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स 0.25 प्रतिशत और निफ्टी 0.26 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए।

आज दिनभर के कारोबार के दौरान मीडिया और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी होती रही। निफ्टी का मीडिया इंडेक्स दो प्रतिशत की तेजी हासिल करने में सफल रहा। इसी तरह आईटी, एफएमसीजी, हेल्थकेयर, मेटल, ऑयल एंड गैस और पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज इंडेक्स भी मजबूती के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, बैंकिंग, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्युरेबल्स और टेक इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। ब्रॉडर मार्केट में भी आज आमतौर पर तेजी का रुख बना रहा, जिसके कारण बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। इसी तरह स्मॉलकैप इंडेक्स ने 0.40 प्रतिशत की मजबूती के साथ आज के कारोबार का अंत किया।

आज शेयर बाजार में आई मजबूती के कारण स्टॉक मार्केट के निवेशकों की संपत्ति में 80 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की बढ़ोतरी हो गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन आज के कारोबार के बाद बढ़ कर 474.15 लाख करोड़ रुपये (अनंतिम) हो गया। जबकि पिछले कारोबारी दिन यानी सोमवार को इनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 473.34 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह निवेशकों को आज के कारोबार से करीब 81 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा हो गया।

आज दिनभर के कारोबार में बीएसई में 4,407 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हुई। इनमें 2,598 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,647 शेयरों में गिरावट का रुख रहा, वहीं 162 शेयर बिना किसी उतार चढ़ाव के बंद हुए। एनएसई में आज 2,926 शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग हुई। इनमें से 1,826 शेयर मुनाफा कमा कर हरे निशान में और 1,100 शेयर नुकसान उठा कर लाल निशान में बंद हुए। इसी तरह सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में से 15 शेयर बढ़त के साथ और 15 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। जबकि निफ्टी में शामिल 50 शेयरों में से 29 शेयर हरे निशान में और 21 शेयर लाल निशान में बंद हुए।

बीएसई का सेंसेक्स आज 144.25 अंक की मजबूती के साथ 84,210 अंक के स्तर पर खुला। कारोबार की शुरुआत होने के थोड़ी देर बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण ये सूचकांक गिर कर लाल निशान में 84,063.47 अंक के स्तर तक आ गया। पहले 10 मिनट तक दबाव का सामना करने के बाद बाजार में खरीदारों ने लिवाली का जोर बना दिया, जिससे इस सूचकांक की चाल में तेजी आ गई।

लगातार हो रही खरीदारी के सपोर्ट से दोपहर एक बजे से थोड़ी देर पहले सेंसेक्स 417.20 अंक की तेजी के साथ 84,482.95 अंक तक पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद बाजार में मुनाफा वसूली शुरू हो गई, जिसके कारण इस सूचकांक की चाल में एक बार फिर गिरावट आ गई। पूरे दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स ऊपरी स्तर से 200 अंक से अधिक फिसल कर 208.17 की बढ़त के साथ 84,273.92 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की तरह एनएसई के निफ्टी ने आज 55.35 अंक उछल कर 25,922.65 अंक के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव बनने के कारण ये सूचकांक फिसल कर 25,870.45 अंक तक गिर गया। इसके बाद खरीदारों ने लिवाली का जोर बना दिया, जिससे इस सूचकांक ने रफ्तार पकड़ ली। लगातार हो रही खरीदारी के सपोर्ट से दोपहर एक बजे से थोड़ी देर पहले निफ्टी 122.15 अंक की तेजी के साथ 25,989.45 अंक के स्तर तक आ गया।

इसके बाद मुनाफा वसूली के चक्कर में बाजार में बिकवाली शुरू हो गई, जिसकी वजह से इस सूचकांक की चाल पर भी दबाव बन गया। बिकवाली शुरू होने के बावजूद ये सूचकांक लगातार हरे निशान में ही कारोबार करता रहा। दिन भर हुई खरीद बिक्री के बाद निफ्टी ऊपरी स्तर से 50 अंक से अधिक लुढ़क कर 67.85 अंक की मजबूती के साथ 25,935.15 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

पूरे दिन के कारोबार के बाद स्टॉक मार्केट के दिग्गज शेयरों में से एटरनल 5.18 प्रतिशत, टाटा स्टील 2.98 प्रतिशत, ओएनजीसी 2.08 प्रतिशत, बजाज ऑटो 1.92 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.83 प्रतिशत की मजबूती के साथ आज के टॉप 5 गेनर्स की सूची में शामिल हुए। दूसरी ओर, एचसीएल टेक्नोलॉजी 1.80 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस 1.79 प्रतिशत, डॉ रेड्डीज लेबोरेट्रीज 1.53 प्रतिशत, श्रीराम फाइनेंस 1.33 प्रतिशत और भारती एयरटेल 1.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ आज के टॉप 5 लूजर्स की सूची में शामिल हुए।

एआई का गलत इस्तेमाल पड़ा भारी, माध्यमिक के 39 छात्रों की परीक्षा रद्द

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बांकुड़ा, 10 फ़रवरी (हि. स.)। कार्यालय के काम से लेकर पढ़ाई तक हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। लेकिन एआई टूल के गलत इस्तेमाल के चलते इस बार पश्चिम बंगाल में माध्यमिक परीक्षा दे रहे कई छात्रों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गांगुली ने बताया कि मोबाइल फोन के जरिए एआई टूल का उपयोग करने की कोशिश करते हुए अब तक राज्य में 38 से 39 परीक्षार्थियों की माध्यमिक परीक्षा रद्द कर दी गई है।

रामानुज गांगुली ने यह जानकारी मंगलवार को बांकुड़ा के विष्णुपुर में विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने के दौरान दी। उन्होंने बताया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मोबाइल फोन के जरिए एआई का उपयोग कर परीक्षा देने की घटनाएं सामने आई हैं। पहले से घोषित नियमों के अनुसार, पकड़े गए सभी परीक्षार्थियों की परीक्षा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है।साथ ही बोर्ड अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि इस बार राज्य में प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोह पर पूरी तरह लगाम लगा दी गई है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।

वहीं माध्यमिक की गणित परीक्षा के प्रश्नपत्र में गलत सवाल होने को लेकर जो भ्रम फैला था, उसे भी बोर्ड अध्यक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र में गलती होने को लेकर बेवजह अफवाहें फैलाई जा रही हैं। अब तक विशेषज्ञों की ओर से इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इस मुद्दे पर अनावश्यक चर्चा से बचना चाहिए।

दूसरी ओर, माध्यमिक परीक्षा शुरू होने के बाद से ही कई जिलों से परीक्षार्थियों के परीक्षा के दौरान अस्वस्थ होने की खबरें भी सामने आई हैं। कई छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उन्हें बिस्तर पर बैठकर ही परीक्षा देने की व्यवस्था की गई।

माध्यमिक बोर्ड की ओर से परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्ती जारी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जा रहा है।

हिमाचल में मनाया जाता है शिवरात्रि का अनूठा पर्व

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हिमाचल प्रदेश के प्रमुख नगर मंडी में 600 वर्ष से महाशिवरात्रि का पर्व बड़े अनूठे ढंग से मनाया जाता है। यह पर्व एक सप्ताह तक जारी रहता है और इसमें 370 से अधिक ग्राम देवता भाग लेकर भगवान महादेव को हाजिरी देते हैं। इस समारोह में भाग लेने वाले ग्राम देवताओं को राज्य सरकार द्वारा नजराना पेश करने की भी पुरानी परम्परा है। इस अवसर पर पूरे नगर में आसपास के हजारों लोग जमा होते हैं और ग्राम देवताओं को जुलूस की शक्ल में उनके श्रद्धालु नाचते-गाते पालकियों में बिठाकर मेला स्थल तक विभिन्न गांवों से लाते हैं रियासत के समय से हर ग्राम देवता का कोटा तय है कि वह आपने कितने श्रद्धा ओ को गुरु, भंडारी ओर परम्परागत वाद तंत्र बजाने वाले साथ ला सकता है। इनसे हर को राज की ओर से नगद्दी नजराने देने की पुरानी परम्परा है। सब से पहले कमरूनाग देवता की पालकी आती है। । यह जुलूस पैदल ही सारा सफर तय करते हैं। इस त्यौहार को महाशिवरात्रि के त्योहार में देशभर के पर्यटक और श्रद्धालु भारी संख्या में मंडी आते हैं।

शिवरात्रि को महापर्व के रूप में मनाने का सिलसिला मंडी रियासत के संस्थापक अजबर सेन 15वीं शताब्दी में शुरू किया था। मंडी नगर छोटी काशी के रूप में विख्यात् है और यहां पर भगवान शिव के कई दर्जन प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से मुख्य मंदिर भूतनाथ का है जिसका निर्माण 1664 में राजा सूरजसेन ने किया था।

परम्परा के अनुसार महाशिवरात्रि के इस पर्व में पुरानी रियासत मंडी के एक गांव से ग्राम देवताओं का आना जुलूसों की शक्ल में शिवरात्रि से एक सप्ताह पूर्व शुरू हो जाता है। यह ग्राम देवता पालकियों में पंडल मैदान तक उनके पुजारियों और अन्य अधिकारियों द्वारा लाए जाते हैं। पुरानी परम्परा के अनुसार इन ग्राम देवताओं के पुजारी जो गुरु कहलाते हैं उन्हें श्रद्धालु भेंट और नजराने पेश करते हैं और इन गुरुओं पर देवता आते हैं जोकि भविष्यवाणियां करते हैं और श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण के उपाय भी सुलझाते हैं। यह ग्राम देवता एक जुलूस की शक्ल में पहले भूतनाथ के मंदिर में हाजिरी देते हैं । समारोह के समापन अवसर पर यह सभी देवता मंडी रियासत के असली शासक माधवराव (विष्णु) की सेवा में राज महल जा हाजिरी भी देते हैं। इस अवसर पर प्रशासन की ओर से उन्हें पुराने रियासत काल से ही नजराना भी पेश किया जाता है। इस तरह का शिवरात्रि का महापर्व देश के किसी अन्य भाग में नहीं मनाया जाता। महा शिव रात्रि यह त्यौहार एक सप्ताह तक जारी रहता है।इस के बाद सरकार से नज़राना लेने के बाद यह ग्राम देवता आपने श्रद्धालुओं के साथ पैदल ही गाते बजाते आपने ठिकानों पर लौट जाते हैं।

मनमोहन शर्मा

−वरिष्ठ पत्रकार

#हिमाचलशिवरात्रिअनूठापर्व

पुस्तक समीक्षा काव्य संग्रह : जिंदगी मुस्कुराती रहे

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सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पूर्व उप निदेशक डॉ लीलाधर दोचानियां गध और पध दोनों के विधाओं के सशक्त हस्तक्षार है। ग्रामीण परिवेश में पले बढे लीलाधर की कविताओं में साफगोई झलकती है। राजस्थान के विभिन्न जिलों में पद स्थापन के दौरान उन्होंने जो देखा, अनुभव किया वही अपनी कविताओं में परोसा। काव्य कृति के रूप में उनकी यह प्रथम पुस्तक है। अपने कविता संग्रह में गागर में सागर भरने का प्रयास किया है। जीवन की सहज अनुभूतियों और संवेदनाओं को प्रकट करता कविता संग्रह समाज और जीवन की विसंगतियों को रेखांकित करता है। विविध बुराइयों को चित्रित करती कविताएं समाज को आईना दिखती है। प्रस्तुत काव्य संग्रह में नए पुराने विषयों को बड़ी सहजता और सरलता से समेटा है।

कवि की गहन सोच शब्दों के माध्यम से प्रकट होती है। ऐसा लगता है कविताएं उनके मन की अकुलाहट और चिंतन का साक्षात परिणाम है। निश्चय ही रचनाओं में कवि के मन और भावनाओं को सुंदर शब्दों में आकार लिया है। कविताओं में विविध विषयों को सरल शब्दों के माध्यम से संप्रेषित कर एक अनूठा प्रयोग किया है। जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से सजीव रूप में परोसा गया है। कविताएं अपने व्यक्तिगत अनुभवों की श्रंखला के रूप में आकार लेती हैं साथ ही सामाजिक सच्चाइयों का संचार भी करती हैं।
113 पृष्ठ के इस कविता संग्रह में 96 काव्य रचनाएं है। पुस्तक केवल कविताओं का ही नहीं बल्कि भावनाओं, संवेदनाओं और अभिव्यक्ति का भी सशक्त संग्रह है। सभी कविताएं ह्रदय को छूने वाली है। आशा है कि यह कविता संग्रह पाठकों को पसंद आएगा।
समीक्षक कृति : जिंदगी मुस्कुराती रहे।
कवि : डॉ लीलाधर दोचानियां ।
समीक्षक : बालमुकुंद ओझा
प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर ।
पृष्ठ : 113 , मूल्य 199 रूपये ।

लोकतंत्र के मंदिर में सियासी बवंडर

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बाल मुकुन्द ओझा

संसद का बजट सत्र भारत के लोकतंत्र के लिए काफी शर्मनाक साबित हो रहा है। लोकतंत्र के इस पावन पवित्र मंदिर में जनता के मुद्दे उठाने की बजाय कार्यवाही ठप्प करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। संसद का बजट सत्र भी पिछले सत्रों की तरह लगता है हंगामे की भेंट चढ़ने जा रहा है। सत्ता और विपक्ष दोनों अपनी अपनी बात पर अड़े हुए है। दूसरी तरफ कुछ राजनैतिक दलों ने स्पीकर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी की है जिस पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा है। संसद में गतिरोध कोई नयी बात नहीं है मगर अब इंतिहा हो गयी है। जड़ता टूटनी ही चाहिए। नेताओं को अपने लाभ हानि की बजाय जनता के कल्याण की सोचनी चाहिए। संसद के पिछले कुछ सत्रों की कार्यवाही पर एक नज़र डालें तो लगेगा संसद में काम कम और हंगामा ज्यादा होता है। जनता के खून पसीने की कमाई हंगामे की भेंट चढ़ जाती है जो किसी भी स्थिति में लोकतंत्र के लिए हितकारी नहीं है। देश की संसद आजकल कामकाज की जगह हंगामे की ज्यादा शिकार हो रही है। संसद आम आदमी की समस्याओं को दूर करेगा। मगर हो रहा है ठीक इसके उल्टा।  संसद के पिछले कुछ सत्रों में ऐसा ही कुछ हो रहा है। संसदीय लोकतंत्र में संसद ही सर्वोच्च है। हमारे माननीय संसद सदस्य इस सर्वोच्चता का अहसास कराने का कोई मौका भी नहीं चूकते, पर खुद इस सर्वोच्चता से जुड़ी जिम्मेदारी-जवाबदेही का अहसास करने को तैयार नहीं। बेशक विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की ऐसी तस्वीर बेहद निराशाजनक ही नहीं, चिंताजनक भी है । संसद ठप रहने की बढ़ती प्रवृत्ति भी कम खतरनाक नहीं है। संसद सत्र अपने कामकाज के बजाय हंगामे के लिए ही समाचार माध्यमों में सुर्खियां बनता जा रहा है। अगर हम संसद की घटती बैठकों के मद्देनजर देखें तो सत्र के दौरान बढ़ता हंगामा और बाधित कार्यवाही हमारे माननीय सांसदों और उनके राजनीतिक दलों के नेतृत्व की लोकतंत्र में आस्था पर ही सवालिया निशान लगा देती है। संसद की सर्वोच्चता का स्पष्ट अर्थ यह भी है कि वह देश हित-जनहित में कानून बनाने के अलावा सरकार के कामकाज की कड़ी निगरानी और समीक्षा भी करे, लेकिन हमारे देश में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर का हाल यह है कि देश का बजट तक बिना चर्चा के पारित हो गया।

संसदीय लोकतंत्र में संसद ही सर्वोच्च है। हमारे माननीय संसद सदस्य इस सर्वोच्चता का अहसास कराने का कोई मौका भी नहीं चूकते, पर खुद इस सर्वोच्चता से जुड़ी जिम्मेदारी-जवाबदेही का अहसास करने को तैयार नहीं। संसद में हंगामा आम बात हो गई है। लोकतंत्र की मूल भावना को इससे बढ़ते खतरे की चर्चा और चिंता मीडिया से लेकर सर्वोच्च अदालत तक मुखर होती रही है। जाहिर है, इस गहराते खतरे के लिए राजनीतिक दलों का नेतृत्व ही जिम्मेदार है, जो अक्सर ऐसी जवाबदेही से मुंह ही चुराने के लिए जाना जाता है। बेशक विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की ऐसी तस्वीर बेहद निराशाजनक ही नहीं, चिंताजनक भी है, लेकिन संसद ठप रहने की बढ़ती प्रवृत्ति भी कम खतरनाक नहीं है। संसद का वर्तमान बजट सत्र अपने कामकाज के बजाय हंगामे के लिए ही समाचार माध्यमों में सुर्खियां बनता रहा है। अगर हम संसद की घटती बैठकों के मद्देनजर देखें तो सत्र के दौरान बढ़ता हंगामा और बाधित कार्यवाही हमारे माननीय सांसदों और उनके राजनीतिक दलों के नेतृत्व की लोकतंत्र में आस्था पर ही सवालिया निशान लगा देती है। संसद की सर्वोच्चता का स्पष्ट अर्थ यह भी है कि वह देश हित-जनहित में कानून बनाने के अलावा सरकार के कामकाज की कड़ी निगरानी और समीक्षा भी करे, लेकिन हमारे देश में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर का हाल यह है कि देश का बजट तक बिना चर्चा के पारित हो गया।

 ऐसे में यह सवाल उठना भी बेहद स्वाभाविक है कि फिर पूरे बजट सत्र के दौरान संसद ने किया क्या है? बार-बार हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित होने से साफ है कि काम तो नहीं ही किया, पर दलगत स्वार्थों से प्रेरित आरोप-प्रत्यारोप लगाने में न सत्तापक्ष पीछे रहा और न ही विपक्ष। सत्ता का खेल बनकर रह गयी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोपों की कीचड़ उछाल स्पर्धा अप्रत्याशित नहीं है, लेकिन उसके लिए संसद की कार्यवाही को ही बंधक बना लेना तो लोकतंत्र और जनमत की अवमानना ही है। तर्क दिया जा सकता है कि बिना बहस राष्ट्रपति का अभिभाषण पहली बार तो पारित नहीं किया गया? बेशक काम से ज्यादा हंगामे के लिए पहचानी जाने वाली हमारी राजनीति अतीत में भी बिना चर्चा अभिभाषण पारित करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली कारगुजारियों की पुनरावृत्ति करने के बजाय उनसे सबक सीखना ही श्रेयस्कर होता है।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी .32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

प्रकृति, पैसा और स्वास्थ्य: एक संतुलित दृष्टि

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– डॉ० प्रियंका सौरभ

आज के दौर में स्वास्थ्य को लेकर हमारी सोच तेजी से बदली है। आधुनिक जीवनशैली, तकनीक, महंगी चिकित्सा सुविधाएँ और बढ़ती आय ने यह विश्वास पैदा कर दिया है कि पैसा ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है। बड़े शहरों में रहने वाला व्यक्ति मानता है कि यदि उसके पास अच्छे अस्पताल, नामी डॉक्टर, निजी बीमा और आधुनिक उपकरण हैं, तो बीमारी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। लेकिन जब हम देखते हैं कि देश-दुनिया की नामचीन हस्तियाँ—जिनके पास धन, संसाधन और सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध थीं—गंभीर बीमारियों का शिकार हुईं, तो यह विश्वास डगमगाने लगता है।

यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर इतनी देखभाल, इतनी सावधानी और इतने संसाधनों के बावजूद भी लोग कैंसर, हृदय रोग और अन्य जटिल बीमारियों से क्यों नहीं बच पाए। क्या आधुनिक जीवनशैली वास्तव में हमें स्वस्थ बना रही है, या हम अनजाने में अपने शरीर की प्राकृतिक शक्ति को कमजोर कर रहे हैं? यह सवाल केवल अमीर और मशहूर लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति से जुड़ा है जो तेज़ रफ्तार, कृत्रिम और तनावपूर्ण जीवन जी रहा है।

मानव शरीर प्रकृति की देन है और लाखों वर्षों के विकास का परिणाम है। हमारा शरीर प्राकृतिक भोजन, शुद्ध हवा, स्वच्छ पानी, धूप और शारीरिक श्रम के साथ तालमेल बैठाकर विकसित हुआ है। जब हम इस प्राकृतिक संतुलन से दूर होते जाते हैं—अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन खाते हैं, घंटों बंद कमरों में रहते हैं, मोबाइल और स्क्रीन के सामने जीवन बिताते हैं—तो शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। बीमारियाँ अचानक नहीं आतीं, वे वर्षों की गलत आदतों, तनाव और असंतुलन का परिणाम होती हैं।

आज का भोजन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पैकेट में बंद, लंबे समय तक टिकने वाला और स्वाद बढ़ाने वाले रसायनों से भरपूर भोजन हमारी थाली में जगह बना चुका है। फल के नाम पर जूस, सब्ज़ियों के नाम पर फ्रोजन पैक और दूध के नाम पर प्रोसेस्ड उत्पाद हमारे दैनिक आहार का हिस्सा बन गए हैं। यह सुविधाजनक ज़रूर है, लेकिन शरीर के लिए हमेशा हितकारी नहीं। प्रकृति हमें भोजन उसके संपूर्ण रूप में देती है—जिसमें फाइबर, विटामिन और पोषक तत्व संतुलित होते हैं। जब हम उस रूप को बदल देते हैं, तो उसका प्रभाव भी बदल जाता है।

स्वच्छता और सुरक्षा के नाम पर हमने अपने आसपास का वातावरण भी अत्यधिक कृत्रिम बना लिया है। हर चीज़ को कीटाणुरहित करने की होड़ लगी है। साबुन, सैनिटाइज़र और केमिकल क्लीनर के बिना जीवन अधूरा सा लगने लगा है। इसमें संदेह नहीं कि स्वच्छता आवश्यक है, लेकिन अति हमेशा हानिकारक होती है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि सीमित मात्रा में प्राकृतिक बैक्टीरिया से संपर्क हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। जो शरीर हर छोटी चुनौती से बचा लिया जाता है, वह बड़ी चुनौती आने पर कमजोर पड़ सकता है।

ग्रामीण जीवन और शहरी जीवन की तुलना इस संदर्भ में अक्सर की जाती है। गाँवों में रहने वाले बुज़ुर्ग अपेक्षाकृत सादा भोजन करते हैं, शारीरिक श्रम अधिक होता है और जीवन की गति धीमी होती है। मानसिक तनाव भी अपेक्षाकृत कम होता है। यही कारण है कि छोटी-मोटी बीमारियाँ वे बिना दवा के भी झेल लेते हैं। वहीं शहरों में रहने वाला व्यक्ति आरामदायक जीवन जीता है, लेकिन एक साधारण बुखार भी उसे बिस्तर से बाँध देता है। यह अंतर केवल चिकित्सा सुविधाओं का नहीं, बल्कि जीवनशैली और मानसिक स्थिति का भी है।

हालाँकि यह मान लेना भी गलत होगा कि प्रकृति से जुड़ाव ही हर बीमारी का इलाज है। कई बीमारियाँ आनुवंशिक होती हैं, कई संक्रमण के कारण होती हैं और कई उम्र के साथ स्वाभाविक रूप से आती हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इन क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। टीके, एंटीबायोटिक, सर्जरी और आधुनिक जांच तकनीकों ने करोड़ों लोगों की जान बचाई है। यदि हम केवल “प्राकृतिक” के नाम पर विज्ञान को नकार दें, तो यह भी एक खतरनाक सोच होगी।

असल समस्या तब पैदा होती है जब हम किसी एक छोर पर चले जाते हैं। या तो हम पूरी तरह मशीनों, दवाओं और सुविधाओं पर निर्भर हो जाते हैं, या फिर विज्ञान को नकारकर हर समस्या का समाधान केवल घरेलू नुस्खों में खोजने लगते हैं। दोनों ही दृष्टिकोण अधूरे हैं। स्वास्थ्य एक संतुलन का नाम है—जहाँ प्रकृति और विज्ञान दोनों की अपनी-अपनी भूमिका है।

मानसिक स्वास्थ्य इस संतुलन का एक और महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। आज का इंसान शारीरिक रूप से भले ही सुविधाओं से घिरा हो, लेकिन मानसिक रूप से असुरक्षित, चिंतित और तनावग्रस्त है। प्रतिस्पर्धा, असफलता का डर, सामाजिक दबाव और भविष्य की चिंता हमारे मन को लगातार व्यस्त रखते हैं। यह मानसिक तनाव धीरे-धीरे शरीर पर असर डालता है और गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। पैसा इस तनाव को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता।

यह भी समझना ज़रूरी है कि अमीर लोगों की बीमारियाँ हमें ज़्यादा इसलिए दिखती हैं क्योंकि वे सार्वजनिक जीवन में होते हैं। आम लोगों में भी वही बीमारियाँ होती हैं, लेकिन वे चर्चा में नहीं आतीं। इसका अर्थ यह नहीं कि धन अपने आप बीमारी लाता है, बल्कि यह कि धन बीमारी से पूर्ण सुरक्षा नहीं दे सकता।

आज ज़रूरत इस बात की है कि हम स्वास्थ्य को केवल इलाज की दृष्टि से न देखें, बल्कि जीवनशैली की दृष्टि से समझें। सादा और संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, प्रकृति के साथ समय और मानसिक शांति—ये सब किसी भी दवा से कम प्रभावी नहीं हैं। इसके साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और आधुनिक चिकित्सा का लाभ उठाना भी उतना ही ज़रूरी है।

अंततः यह स्वीकार करना होगा कि न तो पैसा हमें अमर बना सकता है और न ही केवल प्राकृतिक जीवनशैली सभी बीमारियों से बचा सकती है। असली समाधान संतुलन में है। जब हम प्रकृति की समझ के साथ विज्ञान को अपनाते हैं, तब ही स्वस्थ और सार्थक जीवन संभव है। शायद यही वह रास्ता है, जिस पर चलकर हम न केवल लंबा, बल्कि बेहतर जीवन भी जी सकते हैं।

  -डॉ. प्रियंका सौरभ,, कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।

मणिपुर में तीन उग्रवादी गिरफ्तार, भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद

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इंफाल, 10 फरवरी (हि.स.)। हिंसाग्रस्त मणिपुर में पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियां उग्रवादियों, अवैध हथियार एवं मादक पदार्थ के विरूद्ध लगातार अभियान जारी रखे हुए हैं। अलग-अलग अभियानों में तीन उग्रवादियों को जहां गिरफ्तार किया गया, वहीं भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद करने के साथ ही हिंसा प्रभावित क्षेत्र में फंसे दो लोगों को बताया गया।

मणिपुर पुलिस मुख्यालय द्वारा आज जारी जानकारी के अनुसार सोमवार को सुरक्षा बलों ने इंफाल पूर्व जिले के लमलाई थानांतर्गत नोंगदम गांव, न्गारू चेंगजेल पहाड़ी क्षेत्र से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया। बरामद सामग्रियों में मुख्य रूप से मैगज़ीन के साथ एक .303 राइफल, दो 12 बोर सिंगल बैरल रायफल, एक मैगज़ीन के साथ 9 मिमी की चार पिस्तौल और तीन 36 नंबर हैंड ग्रेनेड शामिल हैं। इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

वहीं, अन्य एक अभियान में इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई थानांतर्गत लिलोंग चाजिंग क्षेत्र में बम विस्फोट के एक मामले की जांच के बाद मणिपुर पुलिस ने इंफाल पश्चिम और इंफाल पूर्व जिलों के विभिन्न स्थानों से अपराध में शामिल केसीपी (अपुनबा) के तीन सक्रिय कैडरों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान लैशराम बुलु सिंह (39), पुयामाचा डेविड (22) और निंगथौजम चलम्बा सिंह (29) के रूप में की गयी है। उनके कब्जे से एक चार पहिया वाहन मारुति जिप्सी (एमएन-01एके-3615), एक .45 पिस्तौल मैगज़ीन के साथ और 17 राउंड, तीन मोबाइल फोन, एक बटुआ जिसमें 220 रुपये और आधार कार्ड समेत अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया।

पुलिस सूत्रों ने बताया है कि बीते सोमवार को सुरक्षा बलों ने दो ड्राइवरों को बचाया, जो उखरुल जिले के लिटन थानांतर्गत लामलाई चिंगफेई कुकी गांव में एक ट्रक के खराब होने के बाद फंसे हुए थे। बचाए गए लोगों की पहचान चिहांसो कीशिंग (26) और कनम्बुआन गोलमेई (17) के तौर पर हुई, जिन्हें सुरक्षा बलों के सफल रेस्क्यू मिशन के बाद सुरक्षित रूप से यिंगांगपोकपी थाना लाया गया और इलाके में हिंसा को और बढ़ने से रोका गया।

सुरक्षा बल ज़िलों के अंतिम छोर और सुरक्षा की दृष्टि से कमज़ोर इलाकों में तलाशी अभियान और एरिया डोमिनेशन जारी रखे हुए हैं, जिससे हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं।

पुलिस सूत्रों ने बताया है कि बीते सोमवार को मणिपुर के अलग-अलग ज़िलों में पहाड़ियों और घाटी दोनों में कुल 115 नाके/चेकपॉइंट लगाए गए थे, लेकिन किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर ज़रूरी सामान ले जा रही 306 गाड़ियों की आवाजाही सुनिश्चित की गई है। सभी संवेदनशील स्थानों पर कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं और वाहनों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा काफिला प्रदान किया गया है।

इतिहास के पन्नों में 11 फरवरी : दुनिया की राजनीति में बदलाव का दिन

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11 फरवरी तारीख विश्व इतिहास में बड़े राजनीतिक बदलावों और सत्ता परिवर्तन की प्रतीक रही है। अलग-अलग वर्षों में इसी दिन ऐसे घटनाक्रम हुए जिन्होंने देशों की दिशा बदल दी।

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरोधी संघर्ष के सबसे बड़े चेहरे नेल्सन मंडेला को 27 साल जेल में रहने के बाद 11 फरवरी 1990 को रिहा किया गया। 1964 में उन्हें राजद्रोह और साजिश के आरोप में उम्रकैद हुई थी। उनकी रिहाई ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की समाप्ति और लोकतंत्र की राह को तेज किया।

आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी (अक्सर खामेनी लिखा जाता है, पर ऐतिहासिक रूप से खुमैनी सही है) निर्वासन से लौटने के बाद 11 फरवरी 1979 को ईरान की सत्ता संरचना पर निर्णायक पकड़ बनाने में सफल हुए। इसी दौर में ईरान में इस्लामी क्रांति ने राजशाही का अंत कर दिया और नए शासन की नींव पड़ी।

अरब स्प्रिंग के उभार के बीच 11 फरवरी 2011 को मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने लगभग 30 साल सत्ता में रहने के बाद इस्तीफा दे दिया। काहिरा के तहरीर चौक से उठे जनांदोलन ने मध्य पूर्व की राजनीति को हिला दिया। इन घटनाओं से साफ है कि 11 फरवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जनता की शक्ति, राजनीतिक परिवर्तन और इतिहास के निर्णायक मोड़ों का प्रतीक रही है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1543 – इंग्लैंड और रोम के बीच फ़्रांस के ख़िलाफ़ समझौता हुआ।

1613 – मुग़ल शासक जहांगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में कारखाना लगाने की अनुमति दी।

1720 – स्वीडन तथा ईरान के बीच शांति समझौता।

1793 – ईरान की सेना ने नीदरलैंड के वेनलो पर क़ब्ज़ा किया।

1794 – यूनाइटेड स्टेट्स की सीनेट का सेशन पहलीबार आम जनता के लिए खोला गया।

1798 – फ्रांस ने रोम पर कब्ज़ा किया।

1814 – यूरोपीय देश नॉर्वे ने स्वतंत्रता की घोषणा की।

1826 – लंदन यूनिवर्सिटी की स्थापना ‘यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन’ के नाम से की गई।

1889 – जापान में संविधान लागू हुआ।

1916 – एमा गोल्डमैन को बर्थ कंट्रोल पर भाषण देने के लिए गिरफ़्तार किया गया।

1919 – फ्रेडरिक एबर्ट जर्मनी के राष्ट्रपति चुने गये।

1922 – चीन को स्वतंत्रता दिलाने के लिए नौ देशों ने वाशिंगठन में एक संधि पर हस्ताक्षर किये।

1929 – लैटर्न संधि के तहत स्वतंत्र बेटिकलन सिटी की स्थापना हुई।

1933 – गांधी जी के हरिजन वीकली का प्रकाशन शुरू हुआ था।

1942 – प्रसिद्ध समाजसेवी जमनालाल बजाज का निधन।

1944 – जर्मन सेना ने इटली के अप्रिलिया पर दोबारा क़ब्ज़ा किया।

1953 – सोवियत यूनियन ने इजरायल के साथ राजनीतिक संबंध समाप्त कर लिये।

1959 – भारतीय क्रिकेटर वीनू माकंड ने अपना आखिरी टेस्ट वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ दिल्ली में खेला।

1963 – अमेरिका ने इराक की नयी सरकार को मान्यता दी।

1964 – ग्रीक और तुर्क के बीच जंग की शुरुआत हुई।

1964 – ताइवान ने फ्रांस के साथ अपने राजनीतिक संबंध समाप्त किये।

1968 – दक्षिण वियतनाम में कम्यूनिस्ट सैनिकों ने तीन सौ नागरिकों की हत्या कर सामूहिक रूप से दफना दिया।

1974 – मोहम्मदउल्ल बांग्लादेश के राष्ट्रपति निर्वाचित।

1975 – ब्रिटिश कंजरवेटिव पार्टी की प्रथम महिला नेता के रूप में मागरेट थैचर का निर्वाचन।

1979 – ईरान के प्रधानमंत्री ने इस्तीफ़ा दिया, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खमैनी का सत्ता पर क़ब्ज़ा।

1986 – असंतुष्ट यहूदी अनातोली शरास्की को नौ साल बाद सोवियत जेल से रिहा।

1987 – अमेरिका ने नेवादा परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया।

1990 – दक्षिण अफ्रीका के अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला 28 वर्षों बाद जेल से रिहा किये गए।

1990 – अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के नेता नेल्सन मंडेला को दक्षिण अफ्रीका सरकार ने रिहा किया।

1992 – अल्जीरिया में सुरक्षा बलों ने चार मुस्लिम छापामारों की गिरफ्तारी के साथ भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए।

1992 – जे.के.एल.एफ़. की कश्मीर घाटी में प्रवेश की योजना असफल।

1997 – भारतीय खगोल भौतिकविद जयंत वी नार्लीकर 1996 के यूनेस्को के ‘कलिंग पुरस्कार’ से सम्मानित।

1998 – आपरेशन बीच के तहत अंडमान के एक द्वीप में अंतरराष्ट्रीय गिरोह के 6 सदस्य मारे गए और 74 गिरफ्तार हुए।

1999 – चीन द्वारा रूस से 20 सुखोई लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा, अमेरिकी सांसद शेरॉड ब्राउन ‘इंडिया कोंकस स्वास्थ कार्यवल’ के अध्यक्ष नियुक्त।

2003 – डोप टेस्ट में पकड़े जाने पर शेन वार्न स्वदेश लौटे।

2003 – हज के दौरान मची भगदड़ में तीन भारतीयों सहित 20 लोग मारे गये।

2005 – पाकिस्तान में भारी वर्षा के कारण बांध ढहा, 100 से अधिक मरे।

2007 – हिंडाल्को द्वारा अमेरिकी ऐल्यूमिनियम फ़र्म नॉवलिस का अधिग्रहण।

2008 – रुस के प्रधानमंत्री विक्टर जुबकोव दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे।

2008 – ईस्ट तिमोर के विद्रोही सैनिकों ने देश के राष्ट्रपति जोस रामोस को गोली मारकर जख्मी किया।

2009 – असमिया के प्रसिद्ध लेखक डॉ लक्ष्मी नन्दन बोरा को सरस्वती सम्मान देने की घोषणा हुई।

2010 – भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष श्रीकुमार बनर्जी और ब्रिटिश उच्चायुक्त रिचर्ड स्टाग ने भारत-ब्रिटेन असैन्य परमाणु करार संबंधी संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

2010 – 60वें बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव में हनी को मिला गोल्डन बीयर पुरस्कार।

2013 – रूस के कोमी क्षेत्र में विस्फोट में 18 मजदूर मारे गये।

2018 – सारातोव एयरलाइन्स का विमान 703 रूस में दुर्घटनाग्रस्त, जिसमें 71 लोगों की मौत।

जन्म

1750 – तिलका माँझी – ‘भारतीय स्वाधीनता संग्राम’ के पहले शहीद।

1901 – दामोदर स्वरूप सेठ- भारतीय क्रांतिकारी

1913 – सुरेन्द्रनाथ द्विवेदी – उड़ीसा के जानमाने राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार थे।

1917 – टी नागि रेड्डी – भारतीय क्रांतिकारी (मृत्यु- 1976)

1929 – आर. वी. एस. पेरी शास्त्री – भारत के भूतपूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे।

1931 – गोपी चंद नारंग – भारतीय सिद्धांतकार, साहित्यिक आलोचक और विद्वान हैं।

1950 – राव इन्द्रजीत सिंह – भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं।

निधन

1942 – जमनालाल बजाज – स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, उद्योगपति और मानवशास्त्री थे।

1945 – हरिकृष्ण ‘जौहर’ – हिन्दी के आरम्भिक उपन्यास लेखकों में से एक।

1968 – दीनदयाल उपाध्याय – राजनीतिज्ञ

1974 – घंटासला वेंकटेश्वर राव – तमिल सिनेमा में उत्कृष्ट संगीतकार थे।

1977 – फखरुद्दीन अली अहमद – भारतवर्ष के पाँचवे राष्ट्रपति।

1989 – पंडित नरेंद्र शर्मा – हिन्दी के प्रसिद्ध कवि, लेखक एवं सम्पादक।

1993 – कमाल अमरोही – प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक

2015 – विष्णु विराट – हिंदी तथा ब्रज के सरस गीता-दोहाकार एवं प्रतिष्ठित विद्वान।

2018 – प्रबाती घोष – महिला फिल्म निर्माता थीं।

2022 – रवि टंडन – जाने-माने भारतीय फिल्म निर्देशक थे।

महत्वपूर्ण दिवस

-जार्ज वाशिंगटन जयंती (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

दालमंडी चौड़ीकरण अभियान के बीच भवन स्वामी ने लगाई आग

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पुलिस ने काबू की स्थिति

वाराणसी, 09 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में सोमवार को दालमंडी चौड़ीकरण अभियान के दौरान एक भवन स्वामी ने नाराजगी में अपने ही मकान में आग लगा दी। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाया। इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रही।

एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के अनुसार, आज दोपहर के समय दालमंडी चौड़ीकरण अभियान के तहत चिन्हित भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई चल रही थी। प्रशासन की टीम मकान संख्या सीके 39/9 को तोड़ने की तैयारी कर रहा था। तभी भवन स्वामी ने अचानक घर के अंदर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद छत के नीचे भी पेट्रोल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने कुछ समय के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी और तत्काल आग बुझाने के उपाय किए। एसीपी ने बताया कि पुलिस बल ने चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाकर स्थिति को नियंत्रित किया। आग पर काबू पाने के बाद उसी भवन से पुनः ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया। घटना की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

एसीपी ने बताया कि दालमंडी चौड़ीकरण अभियान के तहत चिन्हित भवनों का ध्वस्तीकरण नियमानुसार किया जा रहा है तथा दालमंडी के अंदर जाने वाले सभी मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। अभियान के चलते पुलिस बल को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा।

प्रशासन के अनुसार, दालमंडी क्षेत्र में कुल 187 मकानों को ध्वस्त किया जाना है, जिनमें से अब तक 29 मकान तोड़े जा चुके हैं। दो दिन पहले ही 21 भवनों को जर्जर घोषित किया गया था, जिन पर आज कार्रवाई चल रही थी। पिछले डेढ़ महीने से जारी इस अभियान के दौरान यह पहली बार है जब इतना उग्र विरोध सामने आया है।————–