दिल्ली मेट्रो के तीन नए कॉरिडोर को मिली मंजूरी

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नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने दिल्ली मेट्रो के फेज-5(ए) के तहत तीन नए कॉरिडोर को बुधवार को मंजूरी प्रदान की। इस परियोजना में कुल 16 किलोमीटर की लंबाई वाले तीन नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिनमें 13 मेट्रो स्टेशन होंगे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इससे जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। सरकार बयान के मुताबिक राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 16 किलोमीटर की लंबाई वाले तीन नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिनमें 13 मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 12,014.91 करोड़ रुपये है, जिसमें दिल्ली सरकार का बजटीय हिस्सा 2,940.46 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। परियोजना को वर्ष 2028 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करना अनिवार्य है और यह विस्तार इसी दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली सरकार राजधानी को विश्वस्तरीय और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उनके ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए परिवहन प्रणाली को एकीकृत और जनकेंद्रित बनाने के लिए केंद्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने इस निर्णय को दिल्ली के भविष्य के लिए निवेश बताते हुए कहा कि इन नए कॉरिडोर के बनने से न केवल यातायात पर दबाव कम होगा, बल्कि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में भी मदद मिलेगी। स्वीकृत किए गए तीन कॉरिडोर में आरके आश्रम से इंद्रप्रस्थ (सेंट्रल विस्टा के रास्ते), तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज और एरोसिटी से इंदिरा गांधी डोमेस्टिक टर्मिनल-1 (आईजीडी टी-1) शामिल हैं। बनाए जाने वाले कुल 13 स्टेशनों में 10 स्टेशन भूमिगत और 3 स्टेशन एलिवेटेड होंगे। यह विस्तार मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के साथ निर्बाध इंटरचेंज की सुविधा प्रदान करेगा और हवाई अड्डे, वाणिज्यिक केंद्रों एवं आवासीय क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगा। सरकार का लक्ष्य निजी वाहनों पर निर्भरता कम कर नागरिकों को स्वच्छ, कुशल और एकीकृत परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली मेट्रो का विस्तार राजधानी के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान नेटवर्क और फेज-5(ए) के तहत प्रस्तावित नए कॉरिडोर दिल्ली और एनसीआर के परिवहन तंत्र को और अधिक सक्षम, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाएंगे। मेट्रो के विस्तार से यात्रियों को सुगम और समयबद्ध यात्रा सुविधा मिलेगी, सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

आरके आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर : फेज-5(ए) का सबसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर आरके आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक प्रस्तावित है, जिसकी कुल लंबाई 9.913 किलोमीटर है। इस लाइन पर 9 स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह कॉरिडोर सेंट्रल विस्टा क्षेत्र से होकर गुजरेगा और दिल्ली के प्रशासनिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक क्षेत्रों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा। सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर सभी कर्तव्य भवनों को आपस में जोड़ने का भी काम करेगा। इससे इस इलाके में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों और आने वाले लोगों को सीधे अपने कार्यालय तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस कॉरिडोर पर कुल 9,570.40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से 2,337.24 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार खर्च करेगी।

एयरोसिटी से इंदिरा गांधी एयरपोर्ट टर्मिनल-1 कॉरिडोर : फेज-5(ए) का दूसरा महत्वपूर्ण कॉरिडोर एयरोसिटी से इंदिरा गांधी घरेलू हवाई अड्डा टर्मिनल-1 (आईजीडी टी-1) तक प्रस्तावित है। इस कॉरिडोर की लंबाई 2.26 किलोमीटर है और इस पर एक स्टेशन प्रस्तावित है। इस परियोजना की लागत 1,419.64 करोड़ रुपये होगी, जिसमें 351.86 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार देगी।

तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज कॉरिडोर : फेज-5(ए) का तीसरा कॉरिडोर तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक प्रस्तावित है। इसकी कुल लंबाई 3.9 किलोमीटर है और इस पर 3 स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह कॉरिडोर दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के क्षेत्रों को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और स्थानीय यात्रियों के लिए आवागमन को अधिक सहज बनाएगा। इस कॉरिडोर की लागत 1,024.87 करोड़ रुपये होगी, जिसमें 251.36 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार वहन करेगी।

स्टॉक मार्केट में बैंडमैन रिटेल की प्रीमियम एंट्री

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स्टॉक मार्केट में बैंडमैन रिटेल की प्रीमियम एंट्री, लिस्टिंग के बाद लगा अपर सर्किट

नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। इंटरनेशनल स्पोर्ट्स और लाइफस्टाइल ब्रांड्स की मार्केटिंग करने वाली कंपनी ब्रैंडमैन रिटेल के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में प्रीमियम एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। कंपनी के शेयर 176 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी एंट्री 3.98 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 183 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के तुरंत बाद खरीदारी के सपोर्ट से ये शेयर उछल कर 192.15 रुपये के अपर सर्किट लेवल पर पहुंच गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को करीब 9.18 प्रतिशत का मुनाफा हो गया।

ब्रैंडमैन रिटेल का 86 करोड़ रुपये का आईपीओ 4 से 6 फरवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से जोरदार रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 114.48 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 85.24 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 202.98 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 93.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 48,91,200 नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉर्पोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो प्रॉस्पेक्टस में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का शुद्ध लाभ 153.33 प्रतिशत उछल कर 20.95 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह कंपनी की कुल आय 10.37 प्रतिशत बढ़ कर 136.30 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई।

मौजूदा वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल से दिसंबर 2025 तक कंपनी को 19.67 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है। इसी तरह इस अवधि में कंपनी 97.21 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर चुकी है। दिसंबर 2025 के अंत तक कंपनी पर 15.68 करोड़ रुपये का कर्ज था, जबकि रिजर्व और सरप्लस में 46.70 करोड़ रुपये पड़े हुए थे।

ग्रोवर ज्वेल्स की स्टॉक मार्केट में जोरदार शुुरुआत

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मजबूत लिस्टिंग के बाद लगा अपर सर्किट

नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। गोल्ड ज्वेलरी बनाकर इसकी मार्केटिंग करने वाली कंपनी ग्रोवर ज्वेल्स के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में प्रीमियम एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। कंपनी के शेयर 88 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी एंट्री 9.09 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 96 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद खरीदारी के सपोर्ट इस शेयर की चाल में तेजी आ गई। लगातार हो रही खरीदारी के कारण थोड़ी देर बाद कंपनी के शेयर उछल कर 100.80 रुपये के अपर सर्किट लेवल तक पहुंच गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को 12.80 प्रतिशत का मुनाफा हो गया।

ग्रोवर ज्वेल्स का 34 करोड़ रुपये का आईपीओ 4 से 6 फरवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 19.16 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 11.32 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 37.57 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 15.74 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 38,44,800 नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉर्पोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो प्रॉस्पेक्टस में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 2.71 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में उछल कर 2.78 करोड़ रुपये और 2024-25 में बढ़ कर 7.62 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में कंपनी की कुल आय 34 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ कर 460.95 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई।

मौजूदा वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल से लेकर अक्टूबर 2025 तक कंपनी को 10.45 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है। इसी तरह इस अवधि में कंपनी 473.22 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर चुकी है। अक्टूबर 2025 के अंत तक कंपनी पर 28.30 करोड़ रुपये का कर्ज था, जबकि रिजर्व और सरप्लस अकाउंट में कंपनी के 16.48 करोड़ रुपये पड़े हुए थे।

बेसिक शिक्षा के लिए बजट में 77,622 करोड़ का प्रस्ताव, हर जिले में बनेंगे मॉडल स्कूल

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-हर जिले में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय की योजना-

नए आवासीय केजीबीवी के लिए 580 करोड़ की व्यवस्था-

शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना पर 358 करोड़ प्रस्तावित

प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ की योजना

लखनऊ, , 11 फरवरी (हि.स.)। विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष फोकस किया गया है। बजट प्रस्तावों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट में सरकार ने बेसिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके मुताबिक यह बजट केवल धनराशि का प्रावधान नहीं, बल्कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समान और संस्कारयुक्त शिक्षा पहुंचाने का स्पष्ट संकल्प है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता है और प्रस्तुत बजट उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है।

उन्हाेंने बताया कि बजट में बेसिक शिक्षा के लिए 77,622 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व व्यवस्था प्रस्तुत की गई है। यह राशि परिषदीय विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित रहेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन प्रावधानों से प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को नई गति मिलेगी। सबसे अहम प्रावधान कक्षा 1 से 8 तक परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं के लिए है। निःशुल्क यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा और स्टेशनरी उपलब्ध कराने की योजना के लिए 650 करोड़ रुपये प्रस्तुत किए गए हैं। उद्देश्य है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।

इसके साथ ही सरकार प्रत्येक जिले में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है। प्रदेश के 75 जिलों में कुल 150 ऐसे विद्यालय प्रस्तावित हैं, जिन्हें आधुनिक सुविधाओं, डिजिटल कक्षाओं और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों से लैस किया जाएगा। प्रत्येक जनपद में एक मुख्यमंत्री अभ्युदय विद्यालय विकसित करने की भी योजना है, ताकि ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके।

बालिका शिक्षा को ध्यान में रखते हुए जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए आवासीय विद्यालय स्थापित करने के लिए 580 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तुत की गई है। इससे दूरदराज क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।

शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी तथा संविदा व मानदेय आधारित कार्मिकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू करने की योजना है। इसके लिए 358 करोड़ रुपये प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे शिक्षा कर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सके।

समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। डिजिटल बोर्ड, आईसीटी उपकरण और आधुनिक शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों को नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। वहीं, सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में सुरक्षा ऑडिट के बाद अधोमानक पाए जाने वाले संस्थानों के अनुरक्षण और सुदृढ़ीकरण के लिए भी 300 करोड़ रुपये प्रस्तुत किए गए हैं।

उप्र का बजट : याेगी सरकार ने राज्य को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में बढ़ाया निर्णायक कदम

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– 2025-26 की तुलना में आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के आवंटन में 76 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी

-आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए 2059 करोड़ के प्रावधान के साथ एआई मिशन, साइबर सुरक्षा केंद्र और एआई लैब की बड़ी पहल

लखनऊ, 11 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर बड़ा भरोसा जताया है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने बजट में इस क्षेत्र के लिए दो हजार 59 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की है। यह वर्ष 2025-26 की तुलना में 76 प्रतिशत अधिक है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत तकनीक का अग्रणी केंद्र बनाया जाएगा।

बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश में उत्तर प्रदेश एआई मिशन की शुरुआत की जा रही है, जिसके लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही इंडिया एआई मिशन के तहत प्रदेश की 49 आईटीआई में एआई लैब स्थापित की जाएंगी। प्रदेश में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंडिया एआई डाटा लैब्स की स्थापना के लिए 32 करोड़ 82 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को भविष्य की तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

साइबर सुरक्षा को भी बजट में अहम स्थान मिला है। साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र की स्थापना के लिए 95 करोड़ 16 लाख रुपये की नई योजना प्रस्तावित की गई है। डिजिटल विस्तार के साथ बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए इसे रणनीतिक कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एआई प्रज्ञा कार्यक्रम पहले ही शुरू किया जा चुका है। इस पहल में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, इंटेल, आईबीएम और वन एम वन बी जैसी वैश्विक कंपनियां प्रदेश सरकार के साथ मिलकर एआई प्रशिक्षण दे रही हैं। किसानों, स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों, डॉक्टरों तथा राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य एआई तकनीक को जमीनी स्तर तक उतरना है।

डाटा सेंटर के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 30 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से आठ डाटा सेंटर पार्क स्थापित करने और 900 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक आठ परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जा चुका है, जिनमें छह डाटा सेंटर पार्क और दो डाटा सेंटर इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 21 हजार 342 करोड़ रुपये का निवेश और 644 मेगावाट क्षमता अर्जित की जा चुकी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भी प्रदेश की स्थिति मजबूत बनी हुई है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्र बन चुका है। देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन प्रदेश में होता है। भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स इकाइयां भी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़कर 44 हजार 744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उद्योग और तकनीक में बढ़ते निवेश तथा नवाचार को प्रोत्साहन देने की नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर का दर्जा प्राप्त हुआ है। बजट में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पर 76 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी को प्रदेश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित विकास मॉडल की ओर तेजी से अग्रसर करेगा।

रंगे हाथ घूस लेते पूर्वांचल विद्युत वितरण के उपखण्ड अधिकारी गिरफ्तार

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प्रयागराज, 11 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्थित पुर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के उपखंड अधिकारी संजीव कुमार श्रीवास्तव को एन्टी करप्शन थाना प्रयागराज की टीम ने बुधवार को खुशरूबाग से दस हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपित अधिकारी के खिलाफ खुल्दाबाद थाने में मुकदमा दर्ज करके विधिक कार्रवाई की जा रही है। यह जानकारी एन्टी करप्शन थाना प्रयागराज प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार ने दी।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपित गाजीपुर जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के पीर नगर चंद्रा कालोनी निवासी संजीव कुमार श्रीवास्तव पुत्र स्वर्गीय लल्लन लाल श्रीवास्तव हैं। यह पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड उपखण्ड अधिकारी खुशरूबाग के पद पर कार्यरत है। इनके खिलाफ खुल्दाबाद थाना क्षेत्र के मस्जिद के नीचे निवासी जितेन्द्र कुमार पुत्र स्वर्गीय बृज बिहारी लाल ने 9 फरवरी को अराजपत्रित लोकसेवक विद्युत उपखण्ड अधिकारी संजीव कुमार श्रीवास्तव द्वारा शिकायतकर्ता उपरोक्त के विद्युत कनेक्शन संख्या-5223695000 के मीटर को सही कराने, मुकदमें से बचाने एवं बढ़े हुए जुर्माने से बचाने के एवज में दस हजार, रुपए रिश्वत मांगे जाने का आरोप लगाया है।

जिसके क्रम में शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार द्वारा कार्यालय थाना एवं इकाई भ्रष्टाचार निवारवण संगठन प्रयागराज में दिये गये शिकायती प्रार्थना पत्र पर कार्यवाही करते हुए बुधवार को प्रयागराज इकाई भ्रष्टाचार निवारण संगठन प्रयागराज मण्डल की निरीक्षक अंजली यादव के नेतृत्व में 13 सदस्यीय टीम के साथ घटनास्थल कार्यालय उपखण्ड अधिकारी, पू.वि.वितरण निगम लिमिटेड, खुसरोबाग प्रयागराज से शिकायतकर्ता से दस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए लोकसेवक साक्षीगण व ट्रैप टीम के समक्ष संजीव कुमार श्रीवास्तव को बुधवार दोपहर रंगे हाथ गिरफ्तार किया । संजीव कुमार श्रीवास्तव उपरोक्त के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्यवाही करते हुए थाना खुल्दाबाद कमिश्नरेट प्रयागराज पर अभियोग पंजीकृत कराया जा रहा है।

ईडी ने ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा के अस्थायी आवास पर छापा मारा

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आजमगढ़, 11 फरवरी (हि.स.)। ब्रिटेन की नागरिकता लेने वाले माैलाना शमशुल हुदा के अस्थायी आवास परप्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बुधवार काे छापा मारा। उसका अस्थायी आवास उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर में हैं, जबकि पुराना घर संतकबीर नगर जिले में हैं। टीम ने वहां पर भी कार्रवाई की थी।

आजमगढ़ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि ईडी की टीम ने आज सुबह ईडी की टीम ने मुबारकपुर स्थित अस्थाई आवास पर छापेमारी थी। कुछ घंटों के गहन छानबीन के बाद टीम वापस चली गई। कार्रवाई के दौरान टीम को क्या कुछ मिला, इसकी जानकारी पुलिस को नहीं है।

एसएसपी ने बताया कि मूलरूप से संत कबीरनगर जिले का रहने वाला शमसुल हुदा खान 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ के मदरसा ‘दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम’ में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुआ था। वर्ष 2007 में वह ब्रिटेन चला गया और वर्ष 2013 में वहां की नागरिकता भी प्राप्त कर ली।

आरोप है कि ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी उसने मदरसे से 31 जुलाई 2017 तक वेतन लिया। विभागीय मिलीभगत के चलते उन्हें अनियमित चिकित्सा अवकाश भी स्वीकृत होता रहा। करीब 16 लाख रुपये वेतन के रूप में अवैध रूप से प्राप्त किए। वर्ष 2017 में उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी दे दी गई। इस मामले में शासन ने पहले ही मदरसे की मान्यता रद्द कर दी थी और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडे, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकट सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित किया जा चुका है। इन पर आजमगढ़ में तैनाती के दौरान लाभ पहुंचाने का आरोप है।——————

उप्र बजट : योगी सरकार की प्राथमिकता में किसान

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कृषि योजनाओं के लिए 11 हजार करोड़ रुपये

लखनऊ, 11 फरवरी(हि.स.)। योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को उप्र विधान सभा में 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और श्रमिकों का सशक्तिकरण, रोजगार के अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार ने अपनी बात को सार्थक करते हुए बजट में कृषि योजनाओं पर जोर दिया। इस बजट में कृषि योजनाओं के लिये 10 हजार 888 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। बजट में पशुधन, मत्स्य, खाद्य-रसद, उद्यान विभाग के लिए भी बजट में बड़ी धनराशि की व्यवस्था की है।

यूपीएग्रीज परियोजना के अन्तर्गत एग्रीएक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये

सदन में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए लगभग 10 हजार 888 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। यह वर्ष 2025-2026 के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। खन्ना ने बताया कि वर्ष 2026-2027 में 753.55 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन एवं 48.18 लाख मीट्रिक टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य है। एक्वाब्रिज द्वारा प्रस्तावित यूपी एग्रीज परियोजना में एक्वा कल्चर आधारभूत संरचना के तहत विश्वस्तरीय हैचरी तथा विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की बाह्य सहायतित परियोजना के लिये 155 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। यूपीएग्रीज परियोजना के अन्तर्गत एग्रीएक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये तथा किसान उत्पादक संगठनों हेतु रिवाल्विंग फण्ड योजना के लिये 75 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है।

डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने की योजना के लिए 673 करोड़ 84 लाख

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कृषकों के डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने की योजना के लिए 637 करोड़ 84 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना सभी जनपदों के 94 हजार 300 हेक्टेयर में संचालित है। इस योजना के लिए बजट में 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 2400 करोड़ प्रस्तावित

सुरेश खन्ना ने सदन में बताया कि किसानों के निजी नलकूपों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए बजट में दो हजार 400 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश बीज स्वावलंबन नीति 2024 के तहत प्रदेश में सीड पार्क विकास परियोजना के लिए 251 करोड़ रुपये और पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण के लिए 2832 करोड़

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि बजट में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए दो हजार 832 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह वर्ष 2025-2026 के सापेक्ष सात प्रतिशत से अधिक है। राष्ट्रीय औद्यानिक मिशन योजना के लिए 715 करोड़ तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के लिए 478 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2022 के क्रियान्वयन के लिए 300 करोड़ रुपये तो मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

दुग्ध विकासः मथुरा में 30 हजार से बढ़कर अब एक लाख लीटर प्रतिदिन वाली क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना

दुग्ध विकास के अंतर्गत वित्त मंत्री ने बताया कि सहकारी क्षेत्र के तहत प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में पहले 30 हजार लीटर क्षमता की नवीन डेयरी परियोजना प्रस्तावित की गयी थी, लेकिन इसे संशोधित करते हुए एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। सरकार ने इसके लिए बजट में 23 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्जीवित करने की योजना के तहत प्रस्तावित दुग्ध संघों में 220 नई दुग्ध समितियों के गठन तथा 450 दुग्ध समितियों के पुनर्गठन का कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए 107 करोड़ रुपये की व्यवस्था हुई है।

पशुधनः छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़

खन्ना ने बताया कि प्रदेश के सात हजार 497 गो-आश्रय स्थलों में 12 लाख 38 हजार 547 गोवंश संरक्षित है। इसके अतिरिक्त 155 वृहद गो- संरक्षण केंद्र निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना तथा पोषण मिशन के तहत एक लाख 13 हजार 631 पशुपालकों को एक लाख 81 हजार 418 गोवंश सुपुर्द किये गये हैं। इन्हें भरण पोषण के लिए 50 रुपये की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे भुगतान किया जा रहा है। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए दो हजार करोड़ तथा वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। पशु रोग नियंत्रण योजना के लिए 253 करोड़ तथा पशु चिकित्सालयों/पशु संघ केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए 155 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार मोबाइल वेटरेनरी यूनिट की स्थापना भारत सरकार की अम्ब्रेला स्कीम पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना के अंतर्गत सम्मिलित की गयी है।

सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पुरुष व महिला घटक के लिए क्रमशः 195 करोड़ तथा 115 करोड़ की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एकीकृत एक्वा पार्क की स्थापना के लिए बजट में 190 करोड़ रुपये दिए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा अत्याधुनिक मत्स्य थोक बाजार, एकीकृत एक्वा पार्क तथा मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की नई योजना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

खाद्य एवं रसदः योजनाओं के लिए 20 हजार 124 करोड़

खाद्य एवं रसद की योजनाओं के लिये बजट में लगभग 20 हजार 124 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। अन्नपूर्ति योजना के लिए 15 हजार 480 करोड़, निःशुल्क एलपीजी सिलिंडर रीफिलिंग योजना के लिए एक हजार 500 करोड़ तथा अन्नपूर्णा भवन के निर्माण के लिये 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था इस बजट में प्रस्तावित की गई है।

सरकार का बजट विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की मजबूत नींव : कपिलदेव

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– व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास बजट में 88 प्रतिशत वृद्धि, युवाओं के कौशल विकास पर बड़ा जोर

– 9.25 लाख युवा प्रशिक्षित, 4.22 लाख को मिला रोजगार

लखनऊ, 11 फ़रवरी (हि.स.)। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के प्रस्तुत 9,12,696.35 करोड़ रुपये का बजट 2026-27 विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के विराट संकल्प को साकार करने का मजबूत आधार है।

सरकार का यह बजट प्रदेश के 25 करोड़ नागरिकों को समर्पित है, जो उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगा।

मंत्री अग्रवाल ने बताया कि योगी सरकार युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के बजट में वर्ष 2025-26 की तुलना में 88 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए लगभग 3,349 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 286 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं, जिनमें विभिन्न व्यवसायों में 1,90,272 सीटें युवाओं के प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि योगी सरकार महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश के 47 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में महिलाओं के लिए विशेष महिला शाखाएं संचालित की जा रही हैं, जबकि महिलाओं के लिए 12 स्वतंत्र राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 2,963 से अधिक निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं, जिनमें 4.58 लाख से अधिक सीटें उपलब्ध हैं।

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सहयोग से फेज-एक के अंतर्गत चयनित 149 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन कर प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा चुका है, जबकि फेज-दो के अंतर्गत 62 संस्थानों के उन्नयन का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के संचालन के लिए प्रशिक्षण व्यय के लिए एक हजार करोड़ रुपये, दस्तकार प्रशिक्षण योजना के लिए लगभग 836 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट प्रवीण के लिए 500 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रशिक्षण योजना के लिए 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा पिछले पांच वर्षों में 9.25 लाख युवाओं को विभिन्न अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रशिक्षित कर प्रमाणित किया गया है, जिनमें से 4.22 लाख युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य युवाओं को कौशलयुक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करना है।

मैन ऑफ द मैच घोषित खिलाड़ी को जब ट्रॉफी की जगह दिया गया देसी मुर्गा

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देवरिया, 11 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में आयोजित एक क्रिकेट प्रतियोगिता में विजेता टीम को ऐसा पुरस्कार मिला, जिसे देखकर खिलाड़ी और दर्शक दोनों ही हैरान रह गए। आमतौर पर खेल प्रतियोगिताओं में शील्ड, ट्रॉफी या नगद पुरस्कार दिए जाते हैं, लेकिन यहां मैन ऑफ द मैच बने खिलाड़ी को देसी मुर्गा थमा दिया गया।

यह मामला पथरदेवा कस्बे के जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैदान का है, जहां महुआरी प्रीमियर लीग का आयोजन किया गया था। एक सप्ताह तक चली इस क्रिकेट प्रतियोगिता में 16 नामी-गिरामी टीमों ने हिस्सा लिया। मैचों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक भी मैदान पर जुटे।

प्रतियोगिता के समापन पर विधिवत समारोह आयोजित कर विजेता टीम को सम्मानित किया गया। इसी दौरान मैन ऑफ द मैच घोषित खिलाड़ी को जब ट्रॉफी की जगह देसी मुर्गा दिया गया तो पहले तो सभी लोग भौंचक रह गए। कुछ क्षणों की हैरानी के बाद मैदान में ठहाके गूंज उठे। विजेता टीम ने भी इस इनाम को खुशी-खुशी स्वीकार किया।

इस अनोखे पुरस्कार की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। समारोह का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रतियोगिता के आयोजक प्रद्युम्न पांडेय ने बताया आपस में विचार विमर्श करने के बाद पारंपरिक ट्रॉफी की बजाय देसी मुर्गा देने का निर्णय लिया गया।