प्रतिस्पर्धा आयोग ने अमेरिकी कंपनी इंटेल पर 27.38 करोड़ रुपये का लगाया जुर्माना

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नई दिल्‍ली, 12 फरवरी (हि.स)। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने अमेरिकी कंपनी इंटेल कॉर्प पर 27.38 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर यह जुर्माना डेस्कटॉप कंप्यूटर के लिए ‘बॉक्स्ड माइक्रो प्रोसेसर’ (बीएमपी) के संबंध में भारत के लिए एक अलग वारंटी नीति अपनाने को लेकर लगाया गया है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि सीसीआई ने 12 फरवरी को प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (अधिनियम) की धारा 27 के तहत इंटेल कॉर्पोरेशन (इंटेल) पर अधिनियम की धारा 4 के उल्लंघन के लिए 27.38 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने इंटेल कॉर्पोरेशन पर उसके भारत-विशिष्ट वारंटी नीति के उल्लंघन के लिए यह जुर्माना लगाया है। ये आदेश केस संख्या 05/2019 में पारित किया गया था और इसकी एक प्रति सीसीआई की वेबसाइट www.cci.gov.in पर उपलब्ध है।

आयोग ने बयान में कहा कि इंटेल ने भारत में बॉक्स्ड माइक्रो प्रोसेसर के बाजार में अपनी दबदबे की स्थिति का दुरुपयोग किया है। प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में पाया गया कि भारत के लिए इंटेल की अलग वारंटी नीति चीन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में लागू उसकी वारंटी नीतियों की तुलना में भेदभावपूर्ण थी। आयोग ने इंटेल को यह निर्देश दिया है कि वह भारत-केंद्रित इस विवादित वारंटी नीति को वापस लिए जाने का व्यापक प्रचार-प्रसार करे और इस पर अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करे।

सीसीआई के मुताबिक अमेरिकी कंपनी इंटेल की इस नीति ने उपभोक्ताओं और समानांतर आयातकों के विकल्प सीमित करने का काम किया!इससे भारतीय उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। समानांतर आयात का मतलब ऐसे वैध उत्पादों के आयात से है, जो किसी कंपनी के आधिकारिक वितरण चैनल के बाहर से खरीदे जाते हैं।

आयोग ने कहा कि डेस्कटॉप कंप्यूटर के बीएमपी पर वारंटी संबंधी इंटेल की यह नीति आठ वर्षों तक लागू रही। इस अवधि को ध्यान में रखते हुए नियामक ने इंटेल के औसत प्रासंगिक कारोबार के आठ फीसदी के बराबर जुर्माना निर्धारित किया। हालांकि, एक अप्रैल, 2024 से इस नीति को वापस ले लिए जाने को ध्यान में रखते हुए आयोग ने जुर्माने की राशि को घटाकर 27.38 करोड़ रुपये कर दिया।

खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आमदनी बढ़ाने के ठोस प्रयास कर रही सरकार: केशव प्रसाद मौर्य

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लखनऊ, 12 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में किसानो व उद्यमियों की आमदनी बढ़ाने तथा युवाओं के लिए रोजगार की अपार सम्भावनाएं हैं। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के तहत दी जा रही सुविधाओं तथा प्रदत्त व प्राविधानित अनुदान आदि के बारे में लोगाें को जागरूक व प्रेरित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक उद्यम स्थापित हो सकें। इस दिशा मे खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा बहुत तेजी से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने निर्देश दिये हैं कि खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों के उत्पादों का अधिक से अधिक दाम दिलायें। उप मुख्यमन्त्री केशव प्रसाद मौर्य ने गुरूवार को जारी बयान में बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना हेतु 478 करोड़ रुपए की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित की गई है तथा उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति- 2023 के क्रियान्वयन हेतु 300 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के तहत उद्यमियों को ससमय सब्सिडी मिलती रहे, इसके लिए अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी एल मीणा द्वारा लगातार अनुश्रवण व समीक्षा की जा रही है।

इस संबंध में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एडीजी फायर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसियों एवं निवेशकों को समन्वय स्थापित कर समस्या के शीघ्र समाधान हेतु उच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

बाबर एक आक्रांता था,लुटेरा था,यह तथ्य कोई झुठला नहीं सकता :ब्रजेश पाठक

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लखनऊ , 12 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आज कहा कि देश – प्रदेश में बाबर और उसके स​मर्थकों को काेई जगह नहीं मिलनी चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के समय कारसेवक भी ऐसा ही नारे लगाते थे,यह एक ऐतिहासिक सच है​ कि बाबर लुटेरा और आक्रांता था और इसके बावजूद जो बाबर का महिमा मंडन करते हैं तो वह सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं और कुछ नहीं।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक आज विधानभवन स्थि​त अपने कक्ष में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पश्चिम बंगाल में बन रही बाबरी मस्जिद से जुडे सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में बाबर की विचारधारा के लिए कोई जगह नहीं है और न ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में साफ साफ लिखा है कि बाबर एक आक्रांता था,लुटेरा था। जिसने देश के मंदिरों को लूटा और यहां की संस्कृति को नष्ट किया । इन तथ्यों को कोई नहीं झुठला सकता है।

उन्होंने कहा कि इतना सब जानने के बाद भी अगर अगर कोई आक्रांता बाबर का महिमामंडन करता है तो निंदनीय है और बाबर का महिमामंडन करने वालों का उत्तर प्रदेश प्रदेश में कोई स्थान नहीं है इसलिए जब बाबरी मस्जिद की घटना हुई थी तो एक नारा दिया था । आप सब लोगों ने सुना था और बाबर का नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में लुटेरे की संज्ञा है। उन्होंने कहा कि इस आक्रांता ने देश को लूटने के अलावा कुछ नहीं किया। उसका ऐसा कोई ऐसा योगदान नहीं जिसे याद किया जाए। उन्हाेंने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कहा कि इतना जानने के बाद भी अगर काेई बाबर का महिमामंडन करता है तो वह सिर्फ तुष्टीकरण की पॉलिटिक्स के अलावा कुछ नहीं।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति के घर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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नोएडा, 2 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को नोएडा पहुंचे। यहां सेक्टर-29 में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेंद्र सिंह के घर पर आयोजित एक एक निजी कार्यक्रम में वह शामिल हुए। शाम के समय सीएम योगी सेक्टर-38 जीआईपी स्थित हेलीपैड पर उतरे।

वहां से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को नोएडा पहुंचे। यहां सेक्टर-29 में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में वह शामिल हुए। शाम के समय सीएम योगी सेक्टर-38 जीआईपी स्थित हेलीपैड पर उतरे। वहां से उनका काफिला हेलीपैड से निकला। वह सेक्टर-29 में आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए। उसके बाद मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की। इस मौके पर पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह, नोएडा- ग्रेटर नोएडा के अधिकारी ,भाजपा के नेता मौजूद रहे।

वहीं दूसरी ओर सेक्टर-37 बोटैनिकल से लेकर सेक्टर-18 मार्केट तक पूरी तरह से यातायात को रोक दिया गया। सीएम की एक झलक के लिए स्थानीय लोग टकटकी लगाए उनके आने और कार्यक्रम स्थल से निकलने का इंतजार करते हुए नजर आए।

मीडिया पर राहुल गांधी के बयान को लेकर रिजिजू का पलटवार

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पत्रकारों को रोकना गलत

नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। पत्रकारों पर पक्षपात के कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोप पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया है। रिजिजू ने कहा कि पत्रकारों को इस तरह रोकना-टोकना गलत है और यह लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है।

राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि `आप जिम्मेदार लोग हैं, मीडिया के लोग हैं। आपकी जिम्मेदारी है कि आप निष्पक्ष रहें। आप हर दिन भाजपा से मिले शब्दों को लेकर पूरा शो नहीं चला सकते। आप देश के साथ अन्याय कर रहे हैं।’

राहुल के इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पत्रकारों को इस तरह रोकना-टोकना गलत है। अगर मीडिया के सवाल पूछने पर रोक लग जाएगी तो सवाल कौन करेगा?

उन्होंने कहा कि `हमारी पार्टी ने कभी मीडिया कर्मियों को सवाल करने से नहीं रोका। मैं इतने सालों से राजनीति में हूं, विपक्ष में रहते हुए भी कभी कांग्रेस का नाम लेकर पत्रकारों को नहीं डांटा। गाली-गलौज तो दूर, हमने मीडिया पर तंज भी नहीं कसा। हमने हमेशा मीडिया को स्वतंत्रता दी है। राहुल गांधी शायद मीडिया को जवाब नहीं देना चाहते थे इसलिए तिलमिलाकर ऐसा कहा होगा। लेकिन यह ठीक नहीं है।’

फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के निर्माताओं को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

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नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के निर्माता को फटकार लगाई है। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आप अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी समुदाय को नीचा नहीं दिखा सकते हैं। सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता ने कहा कि फिल्म का नाम बदला जाएगा। तब कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में आप हलफनामा दाखिल कीजिए। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

कोर्ट ने कहा कि जब समाज में पहले से इतनी अशांति है तो इस तरह के नाम माहौल को और खराब कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार अपने आप में कोई असीमित अधिकार नहीं है। उस पर भी वाजिब प्रतिबंध लागू होते हैं। आप उसकी आड़ में किसी समुदाय को यूं टारगेट नहीं कर सकते हैं। याचिका अतुल मिश्रा ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि इस फिल्म के जरिये एक समुदाय विशेष को टारगेट करने की कोशिश की जा रही है।

10 फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय में भी सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता ने कहा था कि वो इस फिल्म का नाम बदल रहे हैं।

मेधावी विद्यार्थियों को शांतिकुंज में किया गया सम्मानित

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हरिद्वार, 12 फ़रवरी (हि.स.)। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा (भासंज्ञाप) में प्रावीण्य सूची में शामिल विद्यार्थियों के सम्मान में पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर हरिद्वार, भगवानपुर, रुड़की और लक्सर तहसीलों के 105 मेधावी विद्यार्थियों के साथ-साथ 100 से अधिक विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को भी सम्मानित किया गया।

समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 29 प्रधानाचार्यों को विशिष्ट सम्मान से अलंकृत किया गया। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पंड्या और शैलदीदी ने विद्यार्थियों को बधाई दी। शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि ने कहा कि संस्कारों के माध्यम से ही संस्कृति सुरक्षित रहती है और विद्यार्थी जीवन में संस्कारों पर ध्यान देना आवश्यक है।

भासंज्ञाप विभाग समन्वयक ने बताया कि 105 प्रावीण्य सूची के विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और नगद राशि देकर सम्मानित किया गया। समारोह में बीएसएम इंटर कॉलेज रुड़की, नेशनल इंटर कॉलेज खानपुर, डीपीएस भेल, केन्द्रीय विद्यालय सेक्टर 4 बीएचईल सहित अन्य 29 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को उनके योगदान के लिए विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मानित विद्यार्थियों में जीकरा मलिक, हर्षित बिष्ट, अंश धीमान, यश पवार, अरमान, चंचल, काजल, अपेक्षा गुप्ता, अतुल गिरि, रिया, हिमानी, लविश, तनु, अदिति, उमर, सोफिया, हिमांशु, आरती, वैभव, साहिब, अनन्या, लक्ष्मी कामिनी, ऋषभ, सिमरन, भूमि गुप्ता आदि शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रत्येक राजस्व ब्लाँक में स्थापित होंगे पशुऔषधि केंद्र, आनलाइन करें आवेदन

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प्रयागराज, 12 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पशुपालकों को पशुओं की दवाओं को सस्ते दरों पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक राजस्व ब्लाक में एक पशु औषधि केंद्र स्थापित करने के लिए आनलाइन आवेदन मांगा है। प्रदेश के सभी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारीयों को निर्देश दिया है। इस योजना के लिए प्रयास करें। यह जानकारी प्रयागराज मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ शिवनाथ यादव ने दी।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन पशुपालकों को सस्ती दरों पर पशुओं की औषधियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक राजस्व ब्लाक में एक औषधि केंद्र स्थापित किया जाएगा।जाने इस योजना का कौन हो सकता है लाभार्थी डॉ शिवनाथ यादव ने बताया कि इस योजना का लाभ प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र सहकारी समितियां ही होंगी। इसके साथ ही इसके लिए फार्मासिस्ट का पंजीकरण प्रमाणपत्र और ड्रग लाइसेंस होना अनिवार्य है। इसके साथ ही केन्द्र स्थापित करने के लिए न्यूनतम 120 वर्ग फीट स्थान,(बना हुआ कमरा) भी होना चाहिए।

डॉ शिवनाथ यादव ने बताया कि आवेदन करने के लिए पांच हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन करने के लिए आनलाइन (https://pashuaushadhi.dahd.gov.in) आवेदन करना होगा।

कृत कार्यवाही: योजना के प्रचार-प्रसार के लिए स्मस्त मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एवं अपर निदेशक ग्रेड-2 को निर्देशित किया गया है। पशुपालन विभाग का उत्तरदायित्व, प्रचार प्रसार, उचित स्थान का चयन, आवेदन पत्रों का परीक्षण एवं योजना का मूलरूप देते औषधि केंद्र स्थापित कराना है।

हाईकोर्ट का भागे जोड़ों की सुरक्षा को लेकर आदेश

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-घर से भागे जोड़ों के लिए सेफ़ हाउस समेत सुरक्षा उपायों पर 2019 के शासनादेश को मानना ​​अधिकारियों का कर्तव्य

प्रयागराज, 12 फ़रवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी करने वाले जोड़ों की जान और आज़ादी की रक्षा करने की राज्य की ज़िम्मेदारी को एक बार फिर दोहराया है। कोर्ट ने यूपी सरकार के 2019 के ऑर्डर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है, जिसमें ऐसे जोड़ों के लिए ज़रूरी बचाव और सुधार के उपाय बताए गए हैं।

सामिया व अन्य की याचिका पर एक जोड़े की सुरक्षा का निपटारा करते हुए जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी हर मामले में खतरे का अंदाज़ा लगाने और स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षित रहने की जगह और सुरक्षा सहित ज़रूरी सुरक्षा देने के लिए ज़िम्मेदार हैं।

मामले के अनुसार एक बालिग जोड़े ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और राज्य सरकार को महिला के पिता द्वारा पैदा की गई “गैर-कानूनी रुकावट” से उनकी जान और आज़ादी की रक्षा करने के निर्देश देने की मांग की। उनका कहना था कि उम्र के अंतर और इस डर की वजह से कि इस आदमी की पहली शादी नहीं है, महिला का पिता उन्हें लगातार परेशान कर रहा था और धमका रहा था, जिससे उनकी शांतिपूर्ण शादीशुदा ज़िंदगी में खलल पड़ा और उनकी जान और आज़ादी को खतरा पैदा हो गया। हालांकि, बेंच ने कहा कि पिछले साल नवंबर में हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा के बाद महिला के पिता से याचीगण की जान को अब कोई खतरा नहीं है। हालांकि, पति की शादीशुदा स्थिति के बारे में असल विवाद को सुलझाते हुए राज्य सरकार की तरफ़ से कोर्ट को बताया गया कि यह याचीगण की पहली शादी है।

इसे देखते हुए रिट याचिका का निपटारा कर दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं की जान और आज़ादी को कोई असली और गंभीर खतरा महसूस होता है तो वे पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे ऐसे खतरे का अंदाज़ा लगाएं और सही सुरक्षा दें। यह पक्का करते हुए कि याचिकाकर्ताओं को कोई परेशानी न हो, 2019 के शासनादेश और शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ (सुप्रा) में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक आगे कार्यवाही की जाय।

कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा जोड़े अपनी जान और आज़ादी की सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं, इसे देखते हुए कोर्ट ने शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ध्यान देने के बाद राज्य के अधिकारियों को एक असरदार सिस्टम बनाने और ज़िला लेवल पर ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया। इन निर्देशों के मुताबिक, राज्य सरकार ने 31 अगस्त, 2019 को एक शासनादेश जारी किया, जिसमें शादी या किसी भी सहमति से बने रिश्ते से पैदा होने वाले खतरों का सामना कर रहे जोड़ों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी रोकथाम, सुधार और सज़ा के उपाय बताए गए।

शासनादेश में कहा गया है कि खाप पंचायतों या इज़्ज़त से जुड़ी धमकियों से जुड़े मामलों को गंभीर मामला माना जाएगा। परिवार के विरोध के दूसरे मामलों में, अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है कि वे जोखिम का अंदाज़ा लगाएँ और सही राहत दें। इन निर्देशों का पालन न करने पर हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही कर सज़ा दी जाएगी। कोर्ट ने कहा 2019 के शासनादेश में दिए गए निर्देश सभी सम्बंधित अधिकारियों के लिए ज़रूरी है और उनका सख्ती से पालन किया जाएगा।

परमाणु ऊर्जा कारोबार के लिए ‘अडाणी एटॉमिक एनर्जी’ का गठन

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नई दिल्‍ली, 12 फरवरी (हि.स)। आडानी समूह ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रख दिया है। समूह की कंपनी अडाणी पावर लिमिटेड ने परमाणु एवं नाभिकीय ऊर्जा से प्राप्त बिजली के उत्पादन, पारेषण एवं वितरण के लिए पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी ‘अडाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड’ (एएईएल) का गठन किया है।

कंपनी ने गुरुवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि एएईएल को 5 लाख रुपये की अधिकृत पूंजी के साथ गठित किया गया है। इसे 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 50,000 शेयर में विभाजित किया गया है। अडाणी पावर की एएईएल में 100 फीसदी हिस्सेदारी है।

अडाणी पावर ने बताया कि ‘अडाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड’ का भारत में 11 फरवरी, 2026 को गठन किया गया। कंपनी को उसी दिन इसे केंद्रीय पंजीकरण केंद्र, कंपनी रजिस्ट्रार से निगमण प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। अडाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई है। इसलिए यह कंपनी की संबंधित पक्ष इकाई भी है। इसके जरिए एटॉमिक और न्यूक्लियर एनर्जी से प्राप्त बिजली के उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन का काम होगा।