सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा-वांगचुक को हिरासत में लेने के बाद लद्दाख में थमी हिंसा

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नई दिल्ली, 12 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार ने लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के बाद लद्दाख में हिंसा थम गई। इस मामले पर गुरुवार काे केंद्र सरकार की ओर से दलीलें पूरी कर ली गयी। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने अब इस मामले पर सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से दलीलें सुनने के लिए 16 फरवरी की तिथि नियत करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को सही बताया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में हिंसा खत्म हो गई। हिंसा का खत्म होना ही बताता है कि उनकी गिरफ्तारी सही थी। एएसजी ने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के समय सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस कोर्ट में आने से पहले अपने कर्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए।

इसके पहले 11 फरवरी को केंद्र ने कहा था कि लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य के आधार पर रिहा करना मुमकिन नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि सोनम वांगचुक की अबतक कुल 24 बार स्वास्थ्य की जांच की गई है। वह फिट और तंदुरुस्त हैं। हेल्थ के आधार पर उन्हें रिहा करना मुमकिन नहीं होगा, सरकार ने इस पर बहुत सोच-विचार किया है।

इसके पहले 4 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा था कि उसे सोनम वांगचुक की खराब होती जा रही तबीयत को ध्यान में रखते हुए उनकी हिरासत जारी रखने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को इस संबंध में निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को एनबीडब्ल्यू के बार-बार निष्पादन में विफलता पर लगाई फटकार

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–कोर्ट ने कहा, जनता का भरोसा कैसे बहाल किया जाय

प्रयागराज, 12 फरवरी (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गौतमबुद्ध नगर और हापुड़ ज़िलों में कार्यरत उत्तर प्रदेश पुलिस पर कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के बार-बार निष्पादन न किए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई। जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ 2019 की आपराधिक अपील से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हत्या के दोषी के विरुद्ध जारी एनबीडब्ल्यू लंबे समय से निष्पादित नहीं किया गया था। कोर्ट ने पुलिस के अधीनस्थ अधिकारियों और आरोपित के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई।

खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “पुलिस बल को बता दीजिए कि यह कानून का न्यायालय है। हमें कानून और अदालत की कार्यप्रणाली की पूरी समझ है। हो सकता है कि हमें पुलिस की कार्यशैली का पूरा ज्ञान न हो लेकिन हम इतना समझदार ज़रूर हैं कि यह पहचान सकें कि कब पुलिस अदालत को हल्के में ले रही है हमसे खेल मत खेलिए और जनता का भरोसा मत तोड़िए।”

अपील की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट और आरोपित के हलफनामे के बीच गंभीर विरोधाभास नोट किया था। जहां पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपित का पता सत्यापित नहीं हो सका, वहीं आरोपित ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि पुलिस उसके घर आई थी और उसे वारंट की जानकारी दी गई।

इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने 4 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और हापुड़ के सीनियर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया और एनबीडब्ल्यू निष्पादित न करने वाले अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था। कोर्ट ने यह भी कहा कि सम्बंधित पुलिसकर्मियों का आचरण न केवल सेवा में कदाचार दर्शाता है बल्कि अवमानना की कार्रवाई को भी आमंत्रित कर सकता है। केस की सुनवाई में एसएसपी हापुड़ और डीसीपी गौतम बुद्ध नगर व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। जबकि गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। पीठ ने आयुक्त की ओर से प्रतिनिधि भेजे जाने पर आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि कोर्ट किसी प्रतिनिधि को नहीं सुनेगा।

मामले के गुण-दोष पर पीठ ने एनबीडब्ल्यू के चार महीने तक निष्पादित न होने पर कड़ा एतराज़ जताया और कहा, “यह पुलिस का काम है कि वह आरोपित को तलाश करें। यह वारंट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा नहीं बल्कि इस न्यायालय द्वारा जारी किया गया। यह एक स्थायी वारंट है, जिसे लौटाया नहीं जा सकता था। इसे हर हाल में निष्पादित किया जाना चाहिए अदालत द्वारा वारंट जारी किया जाना अब पुलिस के लिए कमाई का ज़रिया बन गया।”

सरकार के अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि संबंधित कांस्टेबल, उप निरीक्षक सहित अन्य पुलिसकर्मियों को निलम्बित कर दिया गया और पुलिस आयुक्त द्वारा विभागीय जांच शुरू कर दी गई। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आगे से अदालत द्वारा जारी कोई भी एनबीडब्ल्यू समय पर निष्पादित न होने की स्थिति नहीं होगी।

हालांकि, खंडपीठ इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुई और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “हम किस तरह की पुलिस व्यवस्था में जी रहे हैं? पद हमेशा के लिए नहीं रहता। अदालत या पुलिस से वारंट मिलने के बाद लोग डर के साए में जीते हैं। जनता का भरोसा कैसे बहाल किया जाए? हमें मालूम है कि विभागीय जांच किस तरह और किन आधारों पर पूरी की जाती है, वर्दीधारी सेवा अब केवल जनता को परेशान करने का माध्यम बनकर रह गई।” जस्टिस सत्यवीर सिंह ने यह भी पूछा कि इस मामले में न्यायिक जांच क्यों नहीं कराई गई और पुलिस आयुक्त द्वारा जारी परिपत्र में मौजूद खामियों की ओर भी इशारा किया।

कोर्ट ने राज्य से यह स्पष्ट आश्वासन मांगा कि उसके द्वारा जारी कोई भी वारंट बिना निष्पादन के नहीं रहेगा। यदि ऐसा होता है तो सम्बंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस पर अपर महाधिवक्ता ने सहमति जताई। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए इसे 23 मार्च को सूचीबद्ध किया है।

अवैध बालू खनन रोकने के लिए चार चेक पोस्ट पर सीसीटीवी लगाने का निर्देश

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देवघर, 12 फ़रवरी (हि.स.)। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और पुलिस अधीक्षक सौरभ की संयुक्त अध्यक्षता में गुरूवार को अवैध बालू खनन और ढुलाई की रोकथाम को लेकर समाहरणालय में बैठक की गई।

बैठक में उपायुक्त ने रात्रि में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिया। उन्‍होंने अवैध खनन में संलिप्त वाहनों को जब्त कर वाहन मालिकों पर एफआईआर दर्ज करने को कहा। इसके साथ ही उपायुक्त ने शहरी क्षेत्र के प्रवेश स्थलों पर रात्रि में चार चेक पोस्ट निर्माण और वहां सीसीटीवी कैमरा का निर्देश दिया। उन्होंने जिला पंचायती राज पदाधिकारी को पंचायत स्तर पर अवैध बालू उठाव में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही अवैध स्टॉक और फर्जी चालान पर भी कार्रवाई के निर्देश दिया।

मौके पर पुलिस अधीक्षक ने चिन्हित बालू माफियाओं पर ऑन-द-स्पॉट वाहन जब्ती और कठोर कार्रवाई करने और सभी विभागों को समन्वय बनाकर कार्य करने का निर्देश दिया।

बैठक में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, अपर समाहर्ता हीरा कुमार, एसडीओ रवि कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

श्री काशी विश्वनाथ धाम में सुप्रिया शाह ने सितार वादन से लगाई हाजिरी

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महाशिवरात्रि महोत्सव : श्री काशी विश्वनाथ धाम में सुप्रिया शाह ने सितार वादन से लगाई हाजिरी

——तृतीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या में झूमे शिवभक्त,कथक नृत्य की सजीव एवं प्रभावशाली प्रस्तुति

वाराणसी, 12 फरवरी ( हि.स.)। महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित चार दिवसीय “महाशिवरात्रि महोत्सव” के तीसरी सांस्कृतिक निशा में गुरूवार को शिवमय माहौल में जानी मानी कलाकार सुप्रिया शाह ने सितार वादन से हाजिरी लगाई।

सुप्रिया शाह ने अपने साधना और अभ्यास को महादेव को समर्पित कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। धाम परिसर में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति, संगीत और नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को सराहते रहे। सुप्रिया शाह के साथ तबले पर विभाष महाराज ने संगत की। तत्पश्चात रंजना राय ने लोक गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी। उनके साथ सत्यम (पैड), अवनीश (कीबोर्ड), विनय दुबे (ढोलक) एवं सुलेखा सिन्हा (मंजीरा) ने सराहनीय संगत दी। इसके उपरांत सौरभ मिश्र एवं गौरव मिश्र ने कथक नृत्य की सजीव एवं प्रभावशाली प्रस्तुति देकर दर्शकों को अपना कायल बना लिया। चतुर्थ प्रस्तुति में शनि मिश्र ने भगवान शिव पर आधारित भक्तिमय गायन प्रस्तुत किया। उनके साथ कीबोर्ड पर मनीष मिश्र, ढोलक पर दिवाकर मिश्र, ऑक्टोपैड पर अनीश, तबले पर शिवांश तिवारी, पर्कशन पर शिवम् सिंह तथा सह-गायन में मुस्कान सिंह एवं राही सिंह ने समवेत रूप से संगीतमय वातावरण को शिवमय बना दिया।

इसके पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार एवं अन्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के. वेंकट रमण घनपाठी तथा डिविजनल कमांडेंट, सिविल डिफेन्स जे. डी. सिंह की उपस्थिति रही। संचालन मीनाक्षी दीक्षित ने किया।

पिछली सरकारों ने जनता को लूटा, हमने गुणवत्तापूर्ण इलाज दिया : ब्रजेश पाठक

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लखनऊ, 12 फ़रवरी (हि.स.)। स्वथ्य नागरिक ही विकसित देश और प्रदेश की नींव हैं। जब तक नागरिक स्वस्थ नहीं होंगे, कोई भी देश या प्रदेश तरक्की नहीं कर सकता। पिछली सरकारों ने प्रदेश को लूटने का काम किया है। प्रदेश की जनता की गुमराह कर अपनों को फायदा दिया है। हमारी सरकार विकासित उत्तर प्रदेश के सपने को साकार करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।

यह कहना है प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का। गुरुवार को विधान परिषद में बजट सत्र में प्रस्तुत प्रश्नों का उत्तर देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता के साथ रोगियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने प्रदेश को सिर्फ लूटने का काम किया। मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग तो बना दीं लेकिन न चिकित्सक रखे और न ही पैरा मेडिकल या अन्य स्टाफ की तैनाती हुई। जनता को गुमराह कर अपने कथित विकास कार्यों का ढोल पीटा।

हमने धरातल पर कार्य किया

हमारी सरकार ने धरातल पर कार्य किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में आज का नया उत्तर प्रदेश विकास पथ पर तेजी से दौड़ रहा है। हमारी सरकार गंभीर रोगों से ग्रसित रोगियों के लिए लगातार काम कर रही है। हर जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा है। हमारे पास गोरखपुर और रायबरेली में दो एम्स हैं, जो रोगियों का गुणवत्तापूर्ण इलाज कर रहे हैं।

मानक विहीन चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई

हमारी सरकार संवेदनशीलता के साथ मेडिकल ही नहीं, हर क्षेत्र में कार्य कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हमने काफी काम किया है।

उन्होंने कहा कि मानक विहीन चिकित्सालयों के विरुद्ध विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जाती रहती है। वर्तमान में प्रदेश में 16520 चिकित्सक तैनात हैं। नए चिकित्सकों की तैनाती भी की जा रही है। डिप्टी सीएम ने कहा कि कैंसर के नए मरीजों की संख्या बढ़ी है। हमारी सरकार उनके इलाज के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि हम सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खानपान और रहन-सहन पर उचित ध्यान रखना चाहिए। आजकल लोगों ने, खासतौर पर युवाओं ने प्राकृतिक चीजों से दूरी बना ली है। जंग फूड का सेवन कर रहे हैं। दैनिक दिनचर्या में व्यायाम बहुत आवश्यक है।

पॉलिटेक्निक छात्रों को मिलेगी जॉब-ओरिएंटेड स्किल

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प्रदेश में खुलेंगे 45 नए टाटा एक्सीलेंस सेंटर

कानपुर, 12 फरवरी। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अब पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए बड़ा कदम उठा रही है। मकसद साफ है—बच्चों को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि नौकरी लायक स्किल भी देना।

इसी प्लान के तहत पॉलीटेक्निक के छात्रों के लिए इस साल 45 नए टाटा एक्सीलेंस सेंटर खोले जाएंगे। अब हर जिले में अच्छी स्किल ट्रेनिंग मिलेगी। फिलहाल, पहले से 45 टाटा एक्सीलेंस सेंटर चल रहे हैं, और कुल मिलाकर 121 सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

–ये सेंटर क्या करेंगे?

इन सेंटर्स में पढ़ाई का तरीका अलग होगा। यहां बच्चों को सिर्फ क्लास में बैठाकर पढ़ाया नहीं जाएगा, बल्कि स्किल डेवलपमेंट के तहत सीधे काम सिखाया जाएगा। छात्रों को मशीनों और उपकरणों पर काम करना सिखाया जाएगा, ताकि उन्हें इंडस्ट्री में जाकर दिक्कत न हो।

–ये सेंटर्स क्यों खास हैं?

छात्रों को किताब से ज्यादा हाथों-हाथ काम सिखाया जाएगा–असली मशीनों पर प्रैक्टिस, आज की सबसे ज्यादा डिमांड वाली स्किल्स –जैसे एआई, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, फैक्ट्री टेक्नोलॉजी, पढ़ाई पूरी होते ही कंपनी में काम शुरू करने लायक बनेंगे।

–नौकरी के लिए लायक बनें छात्र

सरकार का प्लान है कि पॉलिटेक्निक पढ़ाई पूरी होते ही छात्र सीधे नौकरी करने लायक बन जाएं, उन्हें बाहर अलग से ट्रेनिंग के लिए न भटकना पड़े। इसके लिए स्मार्ट क्लासेस चल रही हैं, इस साल इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी।

–कानपुर जैसे शहरों को बड़ा फायदा

कानपुर जैसे शहर में पहले से फैक्ट्रियां और इंडस्ट्री ज्यादा हैं। ऐसे में अगर स्थानीय युवाओं को सही स्किल मिल गई, तो उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लोकल लेवल पर जॉब के मौके बढ़ेंगे।

–स्मार्ट क्लासेज और नई लैब भी होंगी पॉलिटेक्निक कानपुर पॉलिटेक्निक का छायाचित्र

इन एक्सीलेंस सेंटर्स में पढ़ाई सिर्फ पुराने तरीके से नहीं होगी। यहां स्मार्ट क्लासरूम, नई लैब और डिजिटल ट्रेनिंग पर भी खास ध्यान रहेगा।

प्राविधिक शिक्षा निदेशालय निदेशक अजीज अहमद ने गुरुवार को बताया ये सेंटर्स छात्रों को नई स्किल्स देंगे, उद्योग की जरूरत के मुताबिक तैयार करेंगे और रोजगार के रास्ते खोलेंगे।

बांग्लादेश में मतदान के दौरान कई जगह बम विस्फोट

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मीरपुर में बीएनपी और जमात समर्थकों में झड़प

ढाका, 12 फरवरी (हि.स.)। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव और ऐतिहासिक राष्ट्रीय जनमत संग्रह के लिए गुरवार को मतदान के दौरान देश के कई हिस्सों में हुए बम विस्फोट में अनेक लोग घायल हो गए। यह धमाके मुंशीगंज और गोपालगंज में हुए हैं। इसके अलावा मीरपुर में दो पार्टियों के सदस्यों के बीच झड़प की सूचना है।

द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार आज सुबह मतदान के दौरान मुंशीगंज सदर उपजिला के मखाती गुरुचरण हाईस्कूल में एक देसी बम से धमाका किया गया। सदर थाना प्रभारी मोहम्मद मोमिनुल इस्लाम ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 10 बजे दो उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच किसी बात को लेकर झड़प हुई। इसी दौरान बम से धमाका किया गया।

राजधानी ढाका में मीरपुर-10 संसदीय क्षेत्र में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात समर्थकों के बीच भिड़ंत की खबर है। इसी सीट से जमात के मुखिया शफिकुर रहमान चुनाव लड़ रहे हैं।

प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के अनुसार गोपालगंज सदर में एक मतदान केंद्र पर वोटिंग के दौरान एक देसी बम फेंका गया। इस धमाके में अंसार के दो सदस्यों समेत तीन लोग घायल हो गए। यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे रेशमा इंटरनेशनल स्कूल मतदान केंद्र पर हुई।

केंद्र पर पर मौजूद सब इंस्पेक्टर जहीदुल इस्लाम ने कहा कि हमलावरों ने पास की नहर के पार से देसी बम फेंका। इस धमाके में अंसार के सदस्य सुकोंथा मजूमदार और जमाल हुसैन, साथ ही आरामबाग इलाके के एक मतदाता की 14 साल की बेटी अमीना खानम घायल हो गईं। धमाके से केंद्र का मेन गेट थोड़ा क्षतिग्रस्त हो गया।

अमेरिका में सड़क हादसे में जान गंवाने वाली भारत की जाह्नवी कंडुला के परिवार को मिलेगा 262 करोड़ रुपये का मुआवजा

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सिएटल (अमेरिका), 12 फरवरी (हि.स.)। अमेरिकी शहर सिएटल के अधिकारी भारत की 23 साल की स्नातक छात्रा जाह्नवी कंडुला की लापरवाही से मौत के मुकदमे को निपटाने के लिए उसके परिवार को 29 मिलियन डॉलर (262 करोड़ रुपये) देने पर सहमत हो गए हैं।

दरअसल, जाह्नवी कंडुला को जनवरी, 2023 में पुलिस अधिकारी केविन डेव ने तेज रफ्तार कार से टक्कर मार दी थी। इस घटना में जाह्नवी की मौत हो गई थी। केविन डेव को पिछले साल नौकरी से निकाल दिया गया था। डेव के खिलाफ 2024 में 110 मिलियन डॉलर के हर्जाने का मुकदमा दायर किया गया था। समझौते का लगभग 20 मिलियन डॉलर सिएटल के इंश्योरेंस से कवर होने की उम्मीद है।

द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट ने आज अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि सिटी अटॉर्नी एरिका इवांस ने बुधवार को बयान में कहा, ”जाह्नवी कंडुला की मौत दिल तोड़ने वाली थी। उम्मीद है कि यह निपटारा कंडुला परिवार को कुछ राहत देगा। जाह्नवी कंडुला की जिंदगी मायने रखती थी।”

इस घटना के बाद एक दूसरे पुलिस अधिकारी के बॉडी कैमरे की रिकॉर्डिंग सामने आने से लोगों में गुस्सा भड़क गया था। रिकार्डिंग में यह अधिकारी हंसते हुए कह रहा था कि कंडुला की जिंदगी की लिमिटेड वैल्यू है और शहर को बस एक चेक लिख देना चाहिए। इसके बाद सिएटल में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। जाह्नवी कंडुला नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के सिएटल कैंपस की छात्रा थी। भारत ने दखल देते हुए अमेरिका से जाह्नवी को न्याय दिलाने की मांग की थी।

सिएटल के सिविलियन वॉचडॉग ने पाया कि पुलिस अधिकारी डेनियल ऑडरर की इस टिप्पणी से विभाग की साख को धक्का लगा और जनता का भरोसा कम हुआ। इस अधिकारी को बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। इस अधिकारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। पुलिस विभाग ने केविन डेव को नौकरी से निकालते हुए लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप लगाया और 5,000 डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश दिया था।

जाह्नवी कंडुला के परिवार के वकीलों ने इस सेटलमेंट पर प्रतिक्रिया के लिए ई-मेल या फोन कॉल्स का तुरंत जवाब नहीं दिया। दोनों पक्षों ने पिछले शुक्रवार को किंग काउंटी सुपीरियर कोर्ट में सेटलमेंट का नोटिस फाइल किया है। सिएटल की न्यूज वेबसाइट पब्लिकोला ने सबसे पहले इस सेटलमेंट के बारे में रिपोर्ट किया।

बांग्लादेश में मतदान खत्म,देर रात तक सभी सीटों के नतीजे आने की उम्मीद

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ढाका, 12 फरवरी (हि.स.)। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव और राष्ट्रीय जनमत संग्रह के लिए सुबह साढ़े सात बजे से शुरू मतदान शाम 4:30 बजे शांतिपूर्वक खत्म हो गया। चुनाव आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने कहा कि दोपहर दो बजे तक पूरे देश में करीब 48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि आज देर रात तक सभी सीटों के नतीजे आने की उम्मीद है।

बांग्लादेश की आधिकारिक समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संगस्था (बीएसएस) के अनुसार इससे पहले, देशभर के 299 निर्वाचन क्षेत्रों के 42,779 मतदान केंद्रों पर सुबह 7:30 बजे वोटिंग शुरू हुई। इस बार चुनाव में 12,77,11,793 मतदाता पंजीकृत थे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने सुबह करीब 9:30 बजे राजधानी के गुलशन मॉडल हाईस्कूल और कॉलेज में बनाए गए मतदान केंद्र में वोट डाला, जबकि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने मोनिपुर हाईस्कूल और कॉलेज में वोट डाला।

आयोग ने कहा कि देश के 300 में से 299 सीटों के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। एक उम्मीदवार की मौत के बाद शेरपुर-3 सीट पर मतदान रद्द कर दिया था। आयोग के वरिष्ठ सचिव के अनुसार, हिंसा को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 900,000 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया। इसके अलावा 657 न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए। यह मजिस्ट्रेट मंगलवार से पांच दिनों करी ड्यूटी पर हैं।

बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। इस चुनाव से प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का 18 महीने का शासन खत्म होने की उम्मीद है। इस चुनाव और जमनत संग्रह को कवर करने के लिए करीब 200 विदेशी पत्रकार बांग्लादेश पहुंचे। 81 स्थानीय संगठनों के करीब 55,454 पर्यवेक्षकों ने मतदान पर नजर रखी। इस दौरान 394 विदेशी पर्यवेक्षक भी मौजूद रहे।

क्रीमी लेयर को आरक्षण से बाहर रखने के अनुरोध पर क्या हुआ?

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सुप्रीम कोर्ट ने केंइ्र सरकार से मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से उन याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा, जिनमें दाखिले और नौकरियों में आरक्षण के लाभों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखने के लिए मानदंड निर्धारित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

SC ने केंद्र सरकार से पूछा कि अनुसूचित जातियों (SC) के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति देने और ‘क्रीमी लेयर’ सिद्धांत लागू करने संबंधी 1 अगस्त 2024 के संविधान पीठ के फैसले के अनुपालन में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह ‘स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह’ मामले में दिए गए संविधान पीठ के निर्णय के अनुपालन पर एक्शन टेकन रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करें. यह निर्देश उस आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें केंद्र को 1 अगस्त 2024 के फैसले का पालन सुनिश्चित करने का आदेश देने की मांग की गई थी.

उस फैसले में कहा गया था कि आरक्षण के समान वितरण के लिए अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण संवैधानिक रूप से वैध और आवश्यक है. आवेदन राष्ट्रीय समन्वय समिति फॉर रिविजन ऑफ रिजर्वेशन पॉलिसी के अध्यक्ष ओ.पी. शुक्ला ने वकील पुरुषोत्तम शर्मा त्रिपाठी के माध्यम से दायर किया था.

यह याचिका शुक्ला और ‘समता आंदोलन समिति’ द्वारा लंबित याचिकाओं में दायर की गई, जिसमें मांग की गई है कि SC/ST वर्गों में संपन्न तबके यानी क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभ से बाहर किया जाए. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 2024 के फैसले के बाद अब केवल सरकार द्वारा उसके कार्यान्वयन की आवश्यकता है. इसके बाद अदालत ने केंद्र से कार्रवाई रिपोर्ट तलब करने का निर्णय लिया.

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 6:1 बहुमत से 1 अगस्त 2025 को 2004 के ई.वी. चिन्नैय्या बनाम आंध्र प्रदेश राज्य फैसले को पलट दिया था, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जातियां एक समान वर्ग हैं और उनका उप-वर्गीकरण नहीं किया जा सकता.

बहुमत के फैसले में कहा गया कि अनुभवजन्य आंकड़े दर्शाते हैं कि अनुसूचित जातियों के भीतर भी असमानता मौजूद है और वे एक समरूप वर्ग नहीं हैं. वहीं, जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने असहमति जताते हुए कहा था कि अनुसूचित जातियां एक समरूप वर्ग हैं और राज्यों द्वारा उनमें छेड़छाड़ नहीं की जा सकती.

संविधान पीठ के बहुमत ने SC/ST में क्रीमी लेयर को बाहर करने के सिद्धांत का भी समर्थन किया. जस्टिस बी.आर. गवई ने अपने सहमति मत में कहा था कि वास्तविक समानता सुनिश्चित करने के लिए राज्य को SC/ST के भीतर क्रीमी लेयर की पहचान कर उन्हें आरक्षण के लाभ से बाहर करने की नीति बनानी चाहिए. बाद में 24 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं.