हमलावरों तक पहुंचाए गए अवैध हथियार, दो गिरफ्तार

दंगे में चली गोलियों का खुलासा…

बरेली, 19 फरवरी (हि.स.) । 26 सितम्बर को हुए बरेली दंगों में चली गोलियों के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। बहेड़ी पुलिस ने दो ऐसे आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जो दंगाइयों तक अवैध पिस्टल और कारतूस पहुंचाने का काम कर रहे थे। कार्रवाई के बाद हिंसा के पीछे सक्रिय असलहा सप्लाई नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

एसपी उत्तरी मुकेश चंद मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान तसलीम निवासी जोखनपुर (थाना बहेड़ी) और सोमू खान उर्फ औशाफ निवासी बरीपुरा (थाना शेरगढ़) के रूप में हुई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शेरगढ़ अड्डे पर घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि दोनों का सम्पर्क कुख्यात हिस्ट्रीशीटर इशरत अली से था और उसी के नेटवर्क के जरिए हथियारों की सप्लाई होती थी। बरामद स्विफ्ट कार का इस्तेमाल भी असलहा ढुलाई में किया जाता था।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से पांच अवैध .32 बोर पिस्टल, 36 जिंदा कारतूस, दो तमंचे (315 व 12 बोर), अन्य कारतूस, एक कार और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मोबाइल फोन की जांच में टेस्ट फायरिंग के वीडियो और फोटो मिले हैं। एक वीडियो में गैंग सरगना इशरत अली अवैध पिस्टल से फायरिंग करता दिख रहा है।

पूछताछ में सोमू खान ने कबूल किया कि दंगों के दिन झुमका तिराहा पर पिस्टल और कारतूस की खेप पहुंचाई गई थी। फिलहाल इशरत अली समेत कई आरोपित फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी है।

यूपी बोर्ड परीक्षा में गुरुवार को सत्ताइस हजार परीक्षार्थियों ने छोड़ी परीक्षा

प्रयागराज, 19 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं बारहवीं में गुरुवार को दूसरे दिन दोनों पालियों में चार लाख इकसठ हजार पांच सौ अट्ठारह परीक्षार्थी अलग-अलग विषयों की परीक्षा में शामिल हुए। जबकि सत्ताइस हजार बावन छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हुए। दोनों पालियों की परीक्षा सकुशल संपन्न हुई। यह जानकारी गुरुवार की शाम बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि प्रथम पाली में छियानवे हजार दो सौ छियानवे परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे। हालांकि इक्यानवे हजार पांच सौ तीस परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। जबकि चार हजार सात सौ छाछठ परीक्षार्थी परीक्षा में अनुपस्थित रहे। द्वितीय पाली की परीक्षा में 392274 पंजीकृत थे, लेकिन 369988 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 22286 परीक्षार्थी परीक्षा में अनुपस्थित रहे।

हाईस्कूल कम्प्यूटर एवं बारहवीं के काष्ठ शिल्प, ग्रन्थ शिल्प, सिलाई शिल्प एवं व्यावसायिक की परीक्षा में तीन हजार पांच परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा सम्पन्न हुई। द्वितीय पाली सायं 2 बजे से 5.15 तक हाईस्कूल सिलाई एवं बारहवीं का नागरिक शास्त्र की परीक्षा सात हजार दो सौ चौदह केंद्रों पर परीक्षा सम्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि गुरुवार को कुल 488570 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, लेकिन परीक्षा में 461518 ही परीक्षार्थी शामिल हुए। जबकि 27052 ने परीक्षा छोड़ दिया। गुरुवार को बारहवीं में एक छात्रा काे आजमगढ़ जिले में अनुचित साधन का प्रयोग करते हुए पकड़ा गया। इस तरह अब तक कुल चार नकलची पकड़े गए। हालांकि अब तक कुल छह प्रथम सूचना रिपोर्ट की गई है।

केंद्र ने पंजाब में छह लेन के सड़क प्रोजेक्ट को दी मंजूरी

0

ब- 1,463.95 करोड़ की लागत से बनेगा 6-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर

नई दिल्ली, 19 फ़रवरी (हि.स.)। पंजाब में बुनियादी ढांचे के विकास और ट्रैफिक समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एनएच-205ए के अंबाला-चंडीगढ़ सेक्शन को ज़ीरकपुर बाइपास से जोड़ने के लिए 6-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर के निर्माण करने की घोषणा की है। इसके लिए 1,463.95 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

नितिन गडकरी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि यह परियोजना ट्राइसिटी रिंग रोड का हिस्सा है। इससे मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख शहरी जंक्शनों पर ट्रैफिक दबाव कम होगा और भारी वाहनों का आवागमन डायवर्ट किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर से एनएच-44, एनएच-205ए और एनएच-152 पर जाम की समस्या कम होगी। साथ ही हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र की ओर तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा समय घटेगा और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी।

जातिवाद से उठकर ‘भारतवासी’ होने पर करें गर्व : आनंदीबेन पटेल

सूरत, 19 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जाति के नाम पर राजनीति करने वालों को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से जाति के दायरों से बाहर निकलकर ‘भारतवासी’ और ‘हिंदुस्तानी’ होने पर गर्व करने की अपील की। उनके अनुसार सच्चा नेतृत्व वही है जो पूरे समाज को साथ लेकर चले, न कि किसी एक उपजाति तक सीमित रहे।

आनंदीबेन पटेल गुरुवार को सूरत में आयोजित ‘क्राफ्ट रूट’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम हर वर्ष उनकी पुत्री अनार पटेल द्वारा आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में पुराने समय को याद करते हुए आनंदीबेन ने कहा कि पहले गांव में यदि केवल दो-तीन पटेल परिवार भी होते थे, तो किसी भी बेटी के विवाह की जिम्मेदारी पूरा गांव, विशेषकर पटेल परिवार मिलकर निभाते थे। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से उस उदारता और सामाजिक नेतृत्व से सीख लेने का आह्वान किया।

हाल ही में अनार पटेल को खोडलधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संदर्भ में आनंदीबेन ने मंच से ही उन्हें संदेश दिया कि संगठन का दायरा केवल एक जाति तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य समाज का जरूरतमंद व्यक्ति भी सहायता के लिए आए, तो उसकी मदद करना ही सच्चा धर्म है।

शिक्षा को सबसे बड़ा दान बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई अनुसूचित जनजाति की छात्रा या गरीब बेटी पढ़ाई के लिए सहायता मांगती है, तो संपन्न पटेल परिवारों को आगे आकर उसकी फीस भरनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि 98 प्रतिशत अंक लाने वाली होनहार बेटी पैसों के अभाव में पढ़ाई न कर सके, तो यह समाज के लिए शर्म की बात है।

उप्र राज्यपाल ने बताया कि वह स्वयं भी कई बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं और ऐसा इस तरह करती हैं कि बच्चों को पता भी नहीं चलता कि उनकी फीस किसने भरी है। उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा वही है जिसमें नाम और प्रसिद्धि की इच्छा न हो।

अपने संबोधन के अंत में आनंदीबेन पटेल ने समाज से संकीर्ण सोच छोड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल अपनी जाति का भला करना नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता की सेवा करना है।

भाजपा सरकार के खिलाफ 20 सूत्री ‘चार्जशीट’ जारी : प्रियंका गांधी

गुवाहाटी, 19 फरवरी, (हि.स.)। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को असम में भाजपा-नीत सरकार के खिलाफ 20 सूत्री “चार्जशीट” जारी करते हुए उस पर भ्रष्टाचार, अधूरे वादों और अल्पसंख्यकों के बीच भय का वातावरण पैदा करने का आरोप लगाया।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गुवाहाटी में इस दस्तावेज का अनावरण किया गया। प्रियंका ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन ने व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया है और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर समाज के कुछ वर्गों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न की है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए प्रमुख वादों को पूरा करने में विफल रही है। पार्टी के अनुसार छह स्वदेशी समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने तथा चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 351 रुपये करने का आश्वासन अब तक पूरा नहीं हुआ है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके करीबी सहयोगियों और मंत्रियों के परिजनों के साथ मिलकर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की गई है। भाजपा ने पूर्व में ऐसे आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।

असम चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन समिति की अध्यक्ष प्रियंका गांधी वाड्रा दो दिवसीय दौरे पर राज्य में हैं और पार्टी के चुनाव अभियान की तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं। कांग्रेस की ओर से जारी यह “चार्जशीट” आगामी चुनावों में भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

सरकार जनजातियों के अधिकारों की रक्षा व विकास को प्रतिबद्धः जुअल ओराम

-केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने “एनसीएसटी हैंडबुक” का विमोचन किया

नई दिल्ली, 19 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम ने कहा कि सरकार अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गुरुवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के 23वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जुअल ओराम ने आयोग की सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों और क्षेत्रीय दौरों से नीतिनिर्माण प्रक्रिया को सशक्त आधार मिला है। मंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वनाधिकार और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में निरंतर एवं समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। सिविल सर्विसेज़ ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइकेय, एनसीएसटी के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, सदस्य निरुपपम चकमा, आशा लकरा सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जुअल ओराम ने “एनसीएसटी हैंडबुक” का विमोचन किया, जिसमें आयोग की कार्यप्रणाली एवं जिम्मेदारियों का विवरण दिया गया है। साथ ही जुलाई से दिसंबर 2025 की अवधि में आयोग की गतिविधियों को दर्शाने वाली एक पत्रिका भी जारी की गई। जनजातीय सशक्तिकरण से संबंधित आयोग की उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। समारोह के अंतर्गत जनजातीय अधिकारों पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर अपने वक्तव्य में दुर्गा दास उइकेय ने जनजातीय समुदायों को कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयोग और मंत्रालय के बीच समन्वय से शिकायत निवारण तंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अत्याचार से संबंधित शिकायतों में कमी आई है और जनजातीय समुदाय अब विकासात्मक मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

आयोग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने कहा कि एनसीएसटी अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में सक्रिय एवं सतर्क है। उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ नियमित संवाद, अनुसूचित क्षेत्रों के दौरे तथा शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ मुख्यधारा के विकास में उनकी सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने विशेष रूप से जनजातीय बालिकाओं की शिक्षा और कौशल विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व को सशक्त करने से विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ती है।

समाज के रक्त में लोकतंत्र है, उसे दबाने की कोशिश करने वाला मिट्टी में मिल जाएगाः भैयाजी जोशी

भोपाल, 20 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि आपातकाल की घटना सिखाती है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा तो ये समाज, ये देश सहन नहीं करेगा। समाज के रक्त में लोकतंत्र है, जनतंत्र है, उसे दबाने को कोशिश कने वाला मिट्टी में मिल जाएगा।

भैयाजी जोशी गुरुवार को आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘आपातकाल और युवा‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी संवाद समिति और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

भैयाजी जोशी ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए हिन्दुस्थान समाचार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यहां शायद ही कुछ लोग होंगे, जिन्होंने उस आपातकाल का अनुभव किया है और बहुत से लोग हैं, जिन्होंने उस घटना के बारे में सुना है। जिन्होंने अनुभव किया, उनके लिए स्मृति से कई बातों को हटाना असंभव है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र होने के बाद अपने संविधान के आधार पर देश चलेगा, इस नाते एक विशिष्ट अध्ययनशील व्यक्तियों की समिति के द्वारा एक संविधान का निर्माण किया गया। संविधान का उद्देश्य है कि भविष्य में देश किस प्रकार चले, किसके क्या अधिकार होंगे, किसके क्या कर्तव्य होंगे। देश की सुरक्षा के संदर्भ में समय-समय पर क्या करने की आवश्यकता रहेगी, इस प्रकार से देश को सुरक्षित, सुनियोजित संचालित करने के लिए संविधान बनाया गया था। देश की सुरक्षा के लिए कुछ कानून बनाए गए थे। साल 1962, 1965, 1972-73 पर देश पर आक्रमण हुए, उस समय इस प्रकार के कानून बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, लेकिन जब हम देखते हैं कि 1975 में इस प्रकार के शासन से प्राप्त अधिकारों का कैसे दुरुपयोग किया गया। उस समय देश में कोई संकट की घड़ी नहीं थी, विदेशी शक्तियां भी यहां सक्रिय नहीं थी। देश के स्वाभिमान, सम्मान और सुरक्षा को कोई चुनौती नहीं थी, जिसके आधार पर इस देश के समाज को सुरक्षा की गारंटी दी जाए और समाज-राष्ट्रविरोधी तत्वों को नियंत्रित किया जाए। फिर प्रश्न आता है कि इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?

भैयाजी जोशी ने कहा कि देश का दुर्भाग्यपूर्ण काला इतिहास 26 जून 1975 को शुरू हुआ और मार्च 1977 को वह कालखंड समाप्त हुआ। क्या हुआ था उस समय, सत्ता में बैठी हुई व्यक्ति निरंकुश सत्ता चलाना चाहती थीं। हम कुछ भी करेंगे, उसके विरोध में कोई स्वर उठा न सके, हमें कोई रोक न सके, इस प्रकार का व्यक्ति केन्द्रित विचार करते हुए इस कानून का सहारा लेते हुए 25 जून की मध्य रात्रि को ये आपातकाल घोषित किया गया। सब हक्के-बक्के थे। अगले दिन के समाचार पत्र खाली थे, कोई कुछ लिख नहीं पाया था। जब लोगों ने समाचार पत्र देखा तो समझ में नहीं आया कि क्या हुआ?

उन्होंने कहा कि सब प्रकार के जनतंत्र द्वारा प्राप्त अधिकारों का हनन करते हुए केवल और केवल एक व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए उसने यह सब कानून बनाया। उस समय के प्रधानमंत्री के निर्वाचन को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राजनारायण थे। उन्होंने उस निर्णय को चुनौती दी। न्यायालय में मामला चला, फैसला आ गया कि निर्वाचन अनुचित है, लेकिन इंदिरा गांधी ने हटने का मार्ग चयन नहीं किया, सारे देश को जेल बनाने का निर्णय लिया। अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर इस देश के लोकतंत्र को समाप्त करने का एक वेदनादायक कदम उठाया। जो कानून लाया गया, उसे मीसा के नाम से जाना जाता है।

भैयाजी जोशी ने कहा कि उस समय कोई आतंरिक सुरक्षा के प्रश्न नहीं थे। कोई बड़ा विद्रोह नहीं था, पर इस एक कानून का आधार लेते हुए सब देश में अशांति है, देश में असंतोष, कई प्रकार की दुर्घटनाएं हो सकती हैं, ऐसा प्रकट करते हुए इस एक कानून के आधार पर अपने विरोधियों को सब प्रकार से प्रतिबंधित किया गया, जेल में डाला गया। क्या कोई कह सकता है कि अटल बिहारी वाजपेयी देशद्रोही थे, क्या कोई कल्पना कर सकता है कि लालकृष्ण आडवाणी देश के विरोध में कुछ कर सकते हैं, क्या कोई सोच सकता है कि जार्ज फर्नांडिज इस देश के खिलाफ विदेशियों की सहायता लेकर देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस कानून का भयानक सूत्र था कि इसके खिलाफ न्यायालय में भी नहीं जा सकते, इसके खिलाफ कुछ लिख नहीं सकते, जनसभाएं नहीं ले सकते, कोई आंदोलन खड़ा नहीं कर सकते। जो करेगा उसे देशद्रोही-समाजद्रोही माना जाएगा और उसे जेल के अंदर जाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि क्या सतापक्ष को चुनौती देना कोई अपराध है। क्या सत्ता के सामने प्रश्न खड़े करना देशद्रोह है। ये तो देश की आत्मा का स्वर था, जो गूंज उठा और उस स्वर के परिणामस्वरूप सत्ता में बैठे एकाधिकार निरंकुश सत्ता को लगा कि हम नहीं कुछ करेंगे तो हम नहीं रहेंगे और फिर आगे आने वाले महीनों में जिस प्रकार दमनचक्र चला, हम सब जानते हैं। सत्ता के सामने जो आवाज कर सकते थे, ऐसी सारी संस्थाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद, विद्यार्थी परिषद भी शामिल रहे। कई प्रकार के 20 सूत्री कार्यक्रम लाए गए, ताकि हम जो चाहे कर सकें। तानाशाह अपने अहम में रहता है, उसे लगता है कि अब ऐसी स्थिति में कोई कुछ नहीं कर सकता, लेकिन वे न भारत की आत्मा को जानते हैं, न भारत के मन को जानते हैं, न भारत के आंतरिक ताने-बाने को जानते हैं।

भैयाजी जोशी ने कहा कि इसी बीच किसी ने सलाह दी कि अब चुनाव घोषित कर दीजिए। अब कौन रहेगा आपके सामने। इसके बाद निर्वाचन घोषित कर दिया गया। चुनाव में 20-25 दिन बचे हैं। उन्हें लगा कि अलग-अलग दलों के जो नेता जेलों में हैं, उनकी आवाज दबी हुई है, वे क्या कर लेंगे। इस प्रकार के विचार करते हुए बड़े-बडे राजनेताओं को बाहर निकाला। आश्चर्य की बात है कि सोया हुआ समाज नहीं था, जागृत समाज था। इसलिए जैसे ही अवसर प्राप्त हुआ समाज की शक्ति खुलकर सामने आ गई थी। 1977 का निर्वाचन इन नेताओं का निर्वाचन नहीं था, ये तो जनता का निर्वाचन था। उस डर के वातावरण में भी नेता बिना किसी भय के साहस के साथ जनता के बीच गए। नियोजित समय पर निर्वाचन हुआ और जनता ने उन्हें दिखा दिया कि तुम्हारा स्थान क्या है। इस देश का युवा वर्ग अपनी सूझ-बूझ के साथ खड़ा हुआ और काले कानून से मुक्त होते हुए मूल परम्पराओं के साथ चलना प्रारंभ किया। ये घटना दो बातें सिखाती हैं। एक बात है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा ये भारत यहां का समाज कभी भी इसका सहन करने वाला नहीं। दूसरी बात आती है समाज के रक्त में लोकतंत्र-जनतंत्र है, ये भारत की हजारों वर्षों की परम्परा है, यहां सभी को मत रखने का अधिकार है। इस अधिकार को जो भी समाप्त करने की कोशिश करेगा, वह मिट्टी में मिलेगा, यही उसकी नियति है।

‘भारत रंग महोत्सव’ के तहत सात महाद्वीपों में कई नाटकों की प्रस्तुति

नई दिल्ली, 19 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की ओर से आयोजित 25वें ‘भारत रंग महोत्सव 2026’ के तहत अबतक 7 महाद्वीपों और 15 से अधिक देशों में सफलतापूर्वक कई नाटकों को प्रस्तुत किया गया। अंटार्कटिका की धरती पर ‘वंदे मातरम’ और ‘भगवद गीता’ की गूंज ने इस महोत्सव को दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव बना दिया है।

इस दौरान 13 फरवरी को अंटार्कटिका के मैत्री स्टेशन पर तैनात भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने थिएटर को अपना समर्थन दिया। इंडियन अंटार्कटिक कार्यक्रम के तहत काम कर रहे इन वैज्ञानिकों ने अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवादों के माध्यम से भगवद गीता के सार को जीवंत किया। साथ ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150 साल की यात्रा का जश्न मनाते हुए कोरस प्रस्तुति दी, जिसने बर्फीले रेगिस्तान में देशभक्ति का जज्बा भर दिया।

उत्सव का आगाज 27 जनवरी को नई दिल्ली में निशांत भारती के लिखे और डॉ. रेखा मेहरा द्वारा निर्देशित नाटक ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम’ से हुआ था। 31 जनवरी को कनाडा के मिसिसॉगा में रेडियो ढिशुम के सहयोग से सात नाटकों के मंचन के साथ इसका अंतरराष्ट्रीय सफर शुरू हुआ। कनाडा, जर्मनी, कतर, यूएई, सूरीनाम, नीदरलैंड, तंजानिया और मॉरीशस जैसे देशों में भारतीय कला का प्रदर्शन किया गया।

एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने कहा, “25वां भारत रंग महोत्सव अब केवल एक संस्थान का आयोजन नहीं बल्कि एक भारतीय महोत्सव’ बन गया है। यह सबको साथ लेकर चलने वाले थिएटर का प्रतीक है, जिसमें आदिवासी समुदायों, बच्चों और समाज के हर तबके की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।”

इस महोत्सव में कनाडा के ‘डॉक्टर वांट्स टू टॉक टू यू’, ‘पुत्र का प्रश्न’ और ‘फ्रीबीज़’ जैसे नाटकों को प्रस्तुत किया गया। दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम में आज ‘नरसिंह’ नाटक का सफल मंचन हुआ। कतर में ‘सपनों की उड़ान’ और दुबई में मराठी नाटक ‘कामाची’ का मंचन हुआ। 20 फरवरी को अबू धाबी में ‘भारतीय भोजनालय’ पेश किया जाएगा। विदेशों में होने वाले दूसरे शो में नीदरलैंड और तंजानिया शामिल हैं।

थिएटर को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एनएसडी ने आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है। हाल ही में इंटरनेट रेडियो ‘रंग आकाश’ और विशेष ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘नाट्यम’ लॉन्च किया गया है, ताकि दुनिया भर के थिएटर प्रेमी अपने पसंदीदा प्रोडक्शन घर बैठे देख सकें।

जल्द ही मिलेगा कम सोडियम वाला नमक व प्रोटीन युक्त चावल

सीएसआईआर ने विकसित की तकनीक

नई दिल्ली, 19 फ़रवरी (हि.स.)। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तिरुवनंतपुरम स्थित प्रयोगशाल राष्ट्रीय अंतर्विषयी विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईआईएसटी) ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे चावल को उच्च प्रोटीन एवं निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स युक्त बनाया जा सकता है।

इस नई तकनीक से उत्पन्न धान आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 से समृद्ध होगा, जिससे एनीमिया और मधुमेह जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक होगा। इस तकनीक को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने टाटा कंपनी को हस्तांतरित की है, जो इसे बाजार में जल्दी ही लॉन्च करेंगे। इसके साथ आईसीएमआर ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे नमक में सोडियम की मात्रा को आधे से भी कम किया जा सकेगा। इससे उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को लाभ मिल सकेगा। इसके सीएसआईआर ने कई तकनीक को उद्योग जगत को सौंपा है।

तकनीकी हस्तांतरण कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक एन. कलाईसेलवी ने बताया कि इस अनुसंधान की शुरुआत बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है जिससे विकसित तकनीक सीधे समाज और उद्योग के लिए उपयोगी बन सकेगी। आज अधिकांश लोगों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या देखी जा रही है। आधुनिक जीवनशैली और गलत खानपान के चलते लोग इस तरह की बीमारियों के गिरफ्त में आ रहे हैं। कलाईसेलवी के मुताबिक नमक में मौजूद सोडियम की मात्रा 5 मिली ग्राम से भी कम होनी चाहिए, लेकिन भारत में यह औसतन 10 मिली ग्राम से ज्यादा है। इस मात्रा को कम करने के लिए ऐसी तकनीक तैयार की गई है जिससे नमक में सोडियम की मात्रा को घटाकर 30 प्रतिशत तक कम कर दी डाए। इसी तरह की तकनीक को आज टाटा कंपनी को हस्तांतरित की गई है।

(सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और उद्योगों के बीच सहयोग अब एक केंद्रीय लक्ष्य बन चुका है, जो आत्मनिर्भरता, सतत विकास और पोषण सुरक्षा जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ा है। राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (रि.) अमित रस्तोगी ने कहा कि एनआरडीसी अब केवल लाइसेंसिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इनक्यूबेशन, टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल आकलन, डिजाइन क्लीनिक, वित्तीय सहायता और आईपी सुविधा जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

एआई शिखर सम्मेलनः ब्रिटेन एआई क्षेत्र में 1.6 अरब यूरो तक करेगा निवेश

नई दिल्ली, 19 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई शिखर सम्मेलन के दौरान गुरुवार को ब्रिटेन ने अपनी पहली ऐतिहासिक एआई रणनीति की घोषणा की। इस पहल के तहत स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करने का लक्ष्य रखा गया है।

ब्रिटेन इस क्षेत्र के लिए 1.6 अरब यूरो (लगभग 16,500 करोड़ रुपये) तक का निवेश करेगा, जो 2026-2030 की अवधि के लिए देश का सबसे बड़ा एकल निवेश क्षेत्र बन गया है।

हालिया ‘स्पेंडिंग रिव्यू सेटलमेंट’ के अनुसार ब्रिटेन की सबसे बड़ी सार्वजनिक अनुसंधान फंडर, ब्रिटेन अनुसंधान एवं नवाचार और विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसआईटी) ने संयुक्त रूप से एआई को अगले 4 वर्षों के लिए अपना प्राथमिक निवेश क्षेत्र घोषित किया है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य कैंसर की जांच से लेकर स्वच्छ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ाना है, जिससे आम जनता के जीवन व सार्वजनिक सेवाओं में सुधार हो सके।

नई रणनीति के तहत छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनमें प्रौद्योगिकी विकास, एआई कौशल और हुनर, और अनुसंधान परिवर्तन शामिल हैं।

इस सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने कहा, “हम संभावना को विकास में बदल रहे हैं। कैंसर का जल्द पता लगाने से लेकर सार्वजनिक सेवाओं के लंबित कार्य को कम करने तक, एआई रिसर्च एक गेम-चेंजर साबित होगी।”

एआई प्रोग्राम की सीनियर रिस्पॉन्सिबल ओनर और इंजीनियरिंग एंड फिजिकल साइंसेज रिसर्च काउंसिल की एग्जीक्यूटिव चेयर प्रोफेसर शार्लेट डीन ने कहा, “एलन ट्यूरिंग और एडा लवलेस के देश के रूप में हमारी गणित और कंप्यूटर साइंस में गहरी जड़ें हैं। यह रणनीति हमारे अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय लाभ और आर्थिक विकास में बदल देगी। इस विशाल निवेश के साथ, ब्रिटेन का लक्ष्य खुद को एक ‘एआई सुपरपावर’ के रूप में स्थापित करना है, जहां नवाचार का लाभ केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर सीधे नागरिकों की सेहत, संपत्ति और भलाई तक पहुंचे।

इस सम्मेलन में ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री डेविड लैमी अपने ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘एआई फॉर गुड’ है, जो भारत और ब्रिटेन के बीच तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोलती है।

यह रणनीति न केवल तकनीक बल्कि करियर पर भी केंद्रित है। ब्रिटेन अनुसंधान और नवाचार ने अन्य क्षेत्रों में उच्च-भुगतान वाली नौकरियों और करियर फ्रेमवर्क का वादा किया है। इनमें रिसर्च सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और एथिक्स स्पेशलिस्ट शामिल है।

————–