इतिहास में 15 फरवरी :2017 में अंतरिक्ष इतिहास में दर्ज भारत की बड़ी उपलब्धि

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2017 में आज ही के दिन ISRO ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इतिहास रच दिया था। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया, जो उस समय विश्व रिकॉर्ड था। इससे पहले किसी भी देश ने एक साथ इतने अधिक सैटेलाइट लॉन्च नहीं किए थे।इन उपग्रहों में भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों के छोटे उपग्रह भी शामिल थे। इस उपलब्धि ने कम लागत और विश्वसनीय प्रक्षेपण क्षमता के मामले में भारत की मजबूत पहचान बनाई और वैश्विक स्पेस मार्केट में उसकी साख को नई ऊंचाई दी।

महत्वपूर्ण घटनाक्रम

1677 – इंग्लैंड नरेश चार्ल्स द्वितीय ने फ़्रांस के ख़िलाफ़ डचों से गठबंधन किया।

1763 – प्रसिया और आस्ट्रेलिया के बीच शांति संधि हुई।

1764 – अमेरिका में सेंट लुईस शहर की स्थापना हुई।

1798 – फ़्रांस ने रोम पर कब्ज़ा कर उसे गणराज्य घोषित किया।

1806 – फ़्रैंको, प्रसियन संधि के बाद प्रसिया ने ब्रिटिश जहाज़ों के लिए अपने बंदरगाह बंद किये।

1890 – अमेरिकी युद्धपोत मेने हवाना बंदरगाह पर विस्फोट से उड़ा दिया गया।

1906 – ब्रिटेन की लेबर पार्टी का गठन।

1909 – एकापुल्को मैक्सिको में फ़्लोरेंस सिनेमागृह में आग से 250 लोगों की मृत्यु।

1926 – अमेरिका में अनुबंध एयर मेल सेवा की शुरूआत।

1942 – द्वितीय विश्व युद्ध में सिंगापुर का पतन हुआ व जापानी बलों द्वारा एक हमले के बाद, ब्रिटिश जनरल आर्थर पेरसिवल ने समर्पण कर दिया। लगभग 80,000 भारतीय, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलियाई सैनिक युद्ध-बंदी हो गये।

1944 – ब्रिटेन के सैकड़ों विमानों ने बर्लिन पर बमबारी की।

1961 – बेल्जियम में बोइंग 707 विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से 73 लोगों की मौत।

1962 – अमेरिका ने नेवादा परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया।

1965 – मैपल (एक प्रकार का छायादार वृक्ष) के पत्ते को कनाडा के आधिकारिक ध्वज में स्थान मिला।

1967 – भारत में चौथी लोकसभा के लिए चुनाव हुए।

1976 – मध्य प्रदेश के भोपाल में केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई।

1970 – इजराइली पाइप लाइन का उद्घाटन हुआ।

1982 – श्रीलंका द्वारा राजधानी का कोलम्बो से जनवर्धनपुर को स्थानांतरण।

1988 – आस्ट्रिया के प्रधानमंत्री कुर्त बाल्दीहीम ने नाजी अतीत का आरोप ठुकराते हुए इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया।

1989 – सोवियत संघ की आख़िरी सैनिक टुकड़ी अफ़ग़ानिस्तान से वापस।

1991 – ईराक ने कुवैत से हटने की घोषणा की।

1995 – ताइवान के रात्रि क्लब में आग लगने से 67 लोग मारे गए।

1999 – परमाणु अस्त्र पर रोक लगाने के उद्देश्य से मिस्र में निगरानी केंद्र की स्थापना करने की घोषणा।

2000 – प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक बी.आर चोपड़ा को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया।

2001 – अल सल्वाडोर में भूकम्प से मरने वाले लोगों की संख्या 300 तक पहुंची

-इजराइल ने पश्चिमी तट पर गाजा पट्टी सील की

– भारत का रूस से टी-90 टैंकों की खरीद का समझौता।

2002 – मुशर्रफ ने पैंतरा बदला, भारतीय संसद पर हमले को आतंकवादी हमला मानने से इन्कार।

2002 – अफगानिस्तान में हज यात्रियों की भीड़ ने पर्यटन मंत्री अब्दुल रहमान को पीट-पीटकर मार डाला।

2003 – एरियन 4 राकेट से दूरसंचार उपग्रह ‘इंटलसैट’ अंतरिक्ष में छोड़ा गया।

2003 – इराक युद्ध के खिलाफ विश्व के 600 शहरों में लाखों लोग सड़कों पर लामबद्ध हुए।

2005 – ईरान की राजधानी तेहरान में नमाजियों से खचाखच भरी एक मस्जिद में आग लगने से 59 लोगों की मृत्यु।

2005 – गुजरात के जूनागढ़ स्थित स्वामीनारायण मन्दिर के पुजारी सहित चार लोगों को सेक्स स्कैंडल में गिरफ्तार किया गया।

2005 – लोकप्रिय इंटरनेट साइट यूट्यूब, जिस पर वीडियो देखा और साझा किया जा सकता है, संयुक्त राज्य अमेरिका में लांच किया गया।

2006 – पाकिस्तान की कैबिनेट ने दक्षिण एशिया मुक्त क्षेत्र समझौता (साफ़्टा) स्वीकार किया।

2007 – बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भ्रष्ट व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया।

2007 – इटली के प्रधानमंत्री रोमानो प्रोदी भारत यात्रा पर आए।

2008 – हिन्द महासागर के तटीय देशों के नौसेना प्रमुखों का पहला सम्मेलन नई दिल्ली में सम्पन्न।

2008 – खगोलविदों ने सौरमंडल की तरह एक दूसरे सौरमंडल की खोज की।

2009 – सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कम्पनियों ने विमान ईधन (एटीएफ) की कीमतों में 3.7% की कमी की।

2010 – केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम के ऑपरेशन ग्रीनहंट शुरू करने के छह दिन के अंदर ही सशस्त्र माओवादियों ने पश्चिम बंगाल में पश्चिम मिदनापुर जिला स्थित सिल्दा शिविर पर हमला कर राज्य में माओवादी निरोधक अभियान में शामिल ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स (ईएफआर) के 24 जवानों की हत्या कर दी।

2010 – जयपुर घराने की कथक नृत्यागंना प्रेरणा श्रीमाली को 2009 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया।

2012 – मध्य अमेरिकी देश होंडुरास स्थित कोमायागुआ जेल में भीषण आग में 358 लोगों की मौत।

2017 – इसरो ने एक साथ रिकार्ड 104 सैटेलाइट लॉन्च करके इतिहास रचा।

जन्म

1872 – विलियम मैल्कम हेली -उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल थे।

1905 – भगवान सहाय – भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के दूसरे राज्यपाल थे।

1921 – राधा कृष्ण चौधरी – बिहार के प्रसिद्ध लेखकों में से एक थे।

1922 – नरेश मेहता- ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी के यशस्वी कवि।

1924 – के.जी. सुब्रह्मण्यम – भारतीय मूर्तिकार और भित्ति चित्रकार थे।

1939 – सी. राधाकृष्णन – भारतीय फिल्म निर्देशक तथा मलयालम भाषा के लेखक हैं।

1946 – हरीश भिमानी – एक लेखक, प्रस्तोता, आवाज के कलाकार व समाचार वाचक हैं।

1947 – रणधीर कपूर – हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक हैं।

1949 – नामदेव ढसाल – मराठी कवि, लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे।

1949 – राधावल्लभ त्रिपाठी – संस्कृत भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं।

1952 – हरदीप सिंह पुरी – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ हैं।

1984 – मीरा जेस्मिन – भारतीय अभिनेत्री

निधन

1869 – मिर्जा गालिब – भारतीय शायर

1948 – सुभद्रा कुमारी चौहान – प्रसिद्ध कवयित्री।

1983 – उज्जवल सिंह – पंजाब के प्रमुख सिक्ख कार्यकर्ता थे।

1989 – सीता देवी (महारानी) – बड़ौदा की महारानी थीं।

2015 – मृणालिनी मुखर्जी – भारतीय मूर्तिकार थीं।

2022 – संध्या मुखर्जी – हिंदी और बांग्ला की पार्श्वगायिका थीं।

2024 – कविता चौधरी – जानी-मानी टीवी अभिनेत्री, लेखिका और निर्माता-निर्देशक थीं।

महत्वपूर्ण दिवस

उत्पादकता सप्ताह।

छत्तीसगढ़ में ट्रक−कार हादसे में तीन सीआरपीएफ जवान समेत चार की मौत

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धमतरी, 14 फ़रवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के धमतरी-खपरी बाइपास मार्ग पर शनिवार सुबह तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच हुई टक्कर में तीनसीआरपीएफ जवान और एक चालक सहित चार लोगों की मौत हो गई।

धमतरी पुलिस के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार कोबरा बटालियन सीआरपीएफ के तीन जवानों सहित एक सिविलियन चालक की मौके पर मौत हो गई। एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल है, जिसे रायपुर रेफर किया गया है। धमतरी पुलिस ने बताया कि सीआरपीएफ की 201 कोबरा बटालियन के चार जवान होली पर्व मनाने के लिए छुट्टी पर 14 फरवरी की सुबह जगदलपुर से रायपुर की ओर कार से रवाना हुए थे। जैसे ही उनकी कार धमतरी-खपरी बाइपास के पास पहुंची तो सामने से आ रहे ट्रक से उसकी जबरदस्त भिड़ंत हो गई।

टक्कर इतनी भीषण थी कि दो जवानों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल एक जवान और कार चालक ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में अंतिम सांस ली। मृतकों में हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार, एएसआई उमेंद्र सिंह, कांस्टेबल राजकुमार गौड़ तथा सिविलियन चालक हीरालाल नागर (निवासी पंडरिया रीवा) शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सभी जवान 201 कोबरा बटालियन से थे। हादसे में घायल जवान अभिमान राय को प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर स्थित नारायणा अस्पताल भेजा गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। जवानों के शव व घायल वाहन में फंसे रह गए। उन्हें बाहर निकालने के लिए क्रेन और राहत दल की मदद लेनी पड़ी। घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और कुछ देर के लिए यातायात बाधित रहा। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल किया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल धमतरी लाया गया है। इस हादसे ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार सहित सीआरपीएफ व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली। प्रशासन ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

चुनाव के बाद चुप्पी: क्या राइट टू रिकॉल समय की मांग है?

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–डॉo सत्यवान सौरभ

लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि सत्ता जनता के हाथों में निहित होती है और निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं। चुनाव इसी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं, जिनके द्वारा जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। किंतु व्यवहार में यह आदर्श अक्सर कमजोर पड़ता दिखाई देता है। चुनाव से पहले नेता जनता के बीच सक्रिय रहते हैं, जनसभाएँ करते हैं, समस्याएँ सुनते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जैसे ही चुनाव संपन्न होता है और सत्ता मिलती है, वही नेता जनता से दूर होते चले जाते हैं। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी बन जाती है कि जनता अपने ही प्रतिनिधियों से मिलने और अपनी बात रखने के लिए संघर्ष करती नजर आती है। यही वह विरोधाभास है जिसने “राइट टू रिकॉल” जैसे विचार को जन्म दिया है।

वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के पास प्रतिनिधियों को नियंत्रित करने का एकमात्र प्रभावी साधन अगला चुनाव होता है, जो प्रायः पाँच वर्ष बाद आता है। यदि इस अवधि के दौरान कोई प्रतिनिधि भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाए, जनता की समस्याओं की अनदेखी करे या अपने चुनावी वादों से पूरी तरह मुकर जाए, तो जनता असहाय बनी रहती है। यह असहायता लोकतंत्र में निराशा और अविश्वास को जन्म देती है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जिस जनता को प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है, क्या उसे प्रतिनिधि को हटाने का अधिकार नहीं होना चाहिए?

“राइट टू रिकॉल” इसी प्रश्न का उत्तर प्रस्तुत करता है। इसका तात्पर्य है कि यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करता, जनता के विश्वास को तोड़ता है या लगातार जनविरोधी कार्य करता है, तो जनता एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से उसे कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही पद से हटा सके। यह अवधारणा लोकतंत्र को केवल प्रतिनिधिक नहीं रहने देती, बल्कि उसे वास्तविक अर्थों में जवाबदेह बनाती है। इससे प्रतिनिधियों को यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि उनकी जिम्मेदारी चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कार्यकाल में जनता के प्रति बनी रहती है।

दुनिया के कई हिस्सों में इस विचार को व्यवहार में लाया गया है। उदाहरणस्वरूप, स्विट्ज़रलैंड में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की परंपरा मजबूत मानी जाती है, जहाँ नागरिकों की भूमिका केवल प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं रहती। इसी तरह संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ राज्यों में स्थानीय स्तर पर रिकॉल चुनावों के माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधियों को हटाने की व्यवस्था मौजूद है। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि “राइट टू रिकॉल” कोई अव्यावहारिक कल्पना नहीं, बल्कि एक कार्यशील लोकतांत्रिक उपाय है।

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में जवाबदेही का प्रश्न और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। यहाँ पंचायत स्तर पर कुछ राज्यों में सरपंच या स्थानीय प्रतिनिधियों को हटाने की सीमित व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, किंतु विधायक और सांसद जैसे उच्च पदों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। परिणामस्वरूप, कई बार जनता को पाँच वर्षों तक ऐसे प्रतिनिधियों को झेलना पड़ता है, जो न तो सदन में सक्रिय रहते हैं और न ही अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होते हैं।

भारत में “राइट टू रिकॉल” की मांग समय-समय पर उठती रही है। इसके समर्थकों का मानना है कि यह व्यवस्था नेताओं में निरंतर जवाबदेही का भाव पैदा करेगी। जब प्रतिनिधि को यह ज्ञात होगा कि जनता चाहे तो उसे पद से हटा सकती है, तब वह जनहित के मुद्दों को गंभीरता से लेगा। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, सत्ता के दुरुपयोग की प्रवृत्ति कम होगी और लोकतंत्र केवल औपचारिक न रहकर जीवंत बनेगा। इसके अतिरिक्त, यह अधिकार जनता को केवल मतदाता नहीं, बल्कि सक्रिय लोकतांत्रिक भागीदार के रूप में स्थापित करेगा।

हालाँकि इस अवधारणा के आलोचक भी कम नहीं हैं। उनका तर्क है कि “राइट टू रिकॉल” से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। बार-बार रिकॉल की कोशिशें सरकारों को अस्थिर कर सकती हैं और विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही यह आशंका भी व्यक्त की जाती है कि विपक्षी दल या प्रभावशाली हित समूह इस अधिकार का दुरुपयोग कर सकते हैं और जनभावनाओं को भड़काकर निर्वाचित सरकारों को गिराने का प्रयास कर सकते हैं। तात्कालिक असंतोष या अफवाहों के आधार पर लिया गया निर्णय दीर्घकालिक नीतियों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

इन आशंकाओं को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इन्हें आधार बनाकर “राइट टू रिकॉल” की अवधारणा को पूरी तरह खारिज कर देना भी उचित नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि इसे संतुलित और विवेकपूर्ण ढंग से लागू किया जाए। यदि रिकॉल प्रक्रिया शुरू करने के लिए मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन अनिवार्य किया जाए, कार्यकाल के शुरुआती और अंतिम चरणों में इस पर रोक लगाई जाए और पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र तथा पारदर्शी संस्थाओं द्वारा संचालित हो, तो दुरुपयोग की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।

लोकतंत्र कोई स्थिर व्यवस्था नहीं है; यह समय और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित होता रहता है। जिस प्रकार सार्वभौमिक मताधिकार, सूचना का अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े सुधारों ने लोकतंत्र को अधिक मजबूत बनाया, उसी प्रकार “राइट टू रिकॉल” भी लोकतांत्रिक विकास की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। आज जब जनता पहले से अधिक जागरूक है, सूचना तक उसकी पहुँच व्यापक है और वह अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही है, तब लोकतंत्र में जवाबदेही के नए औजारों की मांग स्वाभाविक है।

अंततः “राइट टू रिकॉल” कोई चमत्कारी समाधान नहीं है, लेकिन यह उस समस्या को अवश्य संबोधित करता है जिसमें चुनाव के बाद जनता और नेता के बीच दूरी बढ़ जाती है। यह अवधारणा नेताओं को यह स्मरण कराती है कि सत्ता स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि जनता की अमानत है। यदि इसे संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर, चरणबद्ध और संतुलित रूप में लागू किया जाए, तो यह लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बना सकती है। एक सशक्त लोकतंत्र वही होता है जहाँ जनता केवल वोट डालने तक सीमित न रहे, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर सत्ता को नियंत्रित करने की वास्तविक क्षमता भी रखे।

–डॉo सत्यवासौरभ ,कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

हाईवे से एयरस्ट्रिप

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असम का मोरन ईएलएफ युद्ध और आपदा से निपटने के लिए तैयार

-ईएलएफ पर सी-130जे परिवहन विमान से मोरान में उतरे प्रधानमंत्री मोदी

डिब्रूगढ़ (असम), 14 फरवरी (हि.स.)। असम में राष्ट्रीय राजमार्ग का 4.2 किमी का हिस्सा, जो युद्ध या आपदा के समय मिलिट्री एयरस्ट्रिप में बदल सकता है, शनिवार को आधिकारिक रूप से आपरेशनल किया गया। यह पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) के रूप में तैयार हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को डिब्रूगढ़ जिले में मोरन बाईपास पर इस फैसिलिटी का उद्घाटन किया। यह भारत की पूर्वी सीमाओं के पास एक स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आज सुबह नई दिल्ली से चबुआ एयरफोर्स स्टेशन उतरे। वहां से वे मोरन ईएलएफ पर उतरने के लिए एक एयरक्राफ्ट में सवार होकर पहुंचे, जहां वह एक बड़ा एयर शो आयोजित किया गया, लगभग 30 मिनट के अंदर लगभग 16 इंडियन एयर फोर्स (आईएएफ) एयरक्राफ्ट उतरने के साथ ही ऊपर से उड़ान भरे। जिसमें सुखोई एमकेआई 30, राफेल, हेलीकाप्टर एवं परिवहन विमान शामिल थे।

चबुआ पूर्वोत्तर के खास एयर फोर्स स्टेशनों में से एक है, और नई हाईवे एयरस्ट्रिप इस इलाके के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी की एक ज़रूरी लेयर के रूप में स्थापित हो गया है। प्रधानमंत्री मोरान में राष्ट्रीय राजमार्ग से वायु सेना के सी-130जे हरकुलिस विमान के जरिए गुवाहाटी के लिए रवाना हो गये।

युद्ध जैसे हालात में स्ट्रेटेजिक महत्वमोरन ईएलएफ का स्ट्रेटेजिक महत्व बहुत ज़्यादा है। चीन बॉर्डर लगभग 300 किमी दूर है। म्यांमार बॉर्डर इस जगह से लगभग 200 किमी दूर है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि अगर लड़ाई के दौरान पारंपरिक एयरबेस पर असर पड़ता है, तो यह सुविधा एक दूसरे रनवे के तौर पर काम करेगी।

एक अधिकारी ने कहा, “इमरजेंसी या किसी भी युद्ध जैसे हालात में यह 4.2 किमी का ईएलएफ बहुत ज़रूरी भूमिका निभाएगा। अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होने की वजह से यह पूर्वोत्तर में तेज़ी से डिप्लॉयमेंट की क्षमता को बढ़ाता है।”

खास तौर पर तैयार किया गया यह हिस्सा डिफेंस की आपात स्थितियों के दौरान फाइटर एयरक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट प्लेन और हेलीकॉप्टर को संभाल सकता है।

प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यह बहुत ज़रूरी भूमिका निभाएगा। मिलिट्री इस्तेमाल के अलावा, ईएलएफ से आपदाओं के दौरान लाइफलाइन के काम करने की उम्मीद है- बाढ़ वाले असम में यह एक बार-बार आने वाली चुनौती है।

बड़ी बाढ़, भूकंप या इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान होने पर हाईवे एयरस्ट्रिप के रूप में काम करेगा। यह राहत सामग्री को तेज़ी से एयरलिफ्ट करने में मदद कर सकती है। इवैक्युएशन ऑपरेशन में अगर एयरपोर्ट इस्तेमाल करने लायक न रहें तो दूसरी लैंडिंग साइट के तौर पर यह काम कर सकता है।

हेलीकॉप्टर से बचाव मिशन में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि डुअल-यूज़ कैपेबिलिटी इस इलाके में नेशनल सिक्योरिटी और डिज़ास्टर रिस्पॉन्स की तैयारी, दोनों को मज़बूत करती है।

इस क्षेत्र में बीते बुधवार से ट्रायल रन चल रहे थे, जिससे हाईवे पर फाइटर एयरक्राफ्ट को लैंड करते देखने के लिए बड़ी भीड़ उमड़ती देखी गयी। ट्रायल के दौरान सभी बड़े कॉम्बैट एयरक्राफ्ट सफलतापूर्वक लैंड किए। तैयारियां में ज़िला प्रशासन ने भी सभी तरह के इंतज़ाम किये।

स्थानीय लोगों ने इस विकासात्मक कार्य पर गर्व जताया। लोगों का कहना है कि यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक पल है। हमने कभी नहीं सोचा था कि फाइटर जेट हमारे हाईवे पर लैंड करेंगे। फोर-लेन डेवलपमेंट ने कनेक्टिविटी बदल दी है और अब यह हमें गर्व महसूस कराता है।

इसके उद्घाटन के साथ असम उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिनके पास डिफेंस ऑपरेशन में मदद करने के लिए हाईवे एयरस्ट्रिप हैं- जिससे नॉर्थईस्ट युद्ध, नेशनल इमरजेंसी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान एक मज़बूत स्ट्रेटेजिक स्थिति में आ जाएगा।—

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से गुलाब की नई किस्म लॉन्च, सेना ने दी मंजूरी

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खड़गपुर, 14 फरवरी (हि.स.)। पहलगाम घटना की बरसी से पहले सेना ने वेलेंटाइन वीक के दौरान एक खास लाल गुलाब की किस्म को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया है। यह नाम वीरता और अदम्य साहस के प्रतीक के रूप में रखा गया है।

यह हाइब्रिड किस्म खड़गपुर के जकपुर स्थित पुष्पांजलि रोज गार्डन में विकसित की गई है। इसके सृजनकर्ता प्रनबीर माइती ने इससे पहले भी गुलाब की कई विशेष प्रजातियां विकसित की हैं, जिन्हें देश के महत्वपूर्ण स्थलों पर नामित किया गया है, जिनमें राष्ट्रपति भवन भी शामिल है।

लाल और सुगंधित इस गुलाब में 30 से 35 पंखुड़ियां होती हैं। इसकी ऊंचाई 120 से 150 सेंटीमीटर तक होती है और यह साल भर खिलता है। यह किस्म रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर है और इसे गमले या सीधे मिट्टी दोनों में लगाया जा सकता है।

शुक्रवार को पूर्वी कमान के ब्रिगेडियर सुधीर सोढ़ी समेत सेना के अधिकारियों ने गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद फूल बाजार में इस नई किस्म का अनावरण किया। इसके बाद शनिवार से यह गुलाब बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध है।

बताया गया कि प्रनबीर माइती ने पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन के समीप एक रोज गार्डन परियोजना की पहल की थी और वहां के मुख्यमंत्री कार्यालय से कई दौर की बातचीत भी की थी। हालांकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के चलते यह परियोजना विलंबित हो गई।

बाद में माइती ने सेना से संपर्क किया, जिसके बाद विशेष गुलाब विकसित करने और उसे मिशन के नाम पर समर्पित करने का प्रस्ताव सामने आया। माइती और उनका परिवार तथा स्थानीय समुदाय इस पहल से जुड़े होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

माइती ने कहा, “हमने नई किस्म का गुलाब तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद इसे मिशन के नाम से जोड़ने का प्रस्ताव मिला। सेना की मौजूदगी में इसका अनावरण होना हमारे लिए गर्व की बात है। देशहित में एक फूल को समर्पित करना मेरे लिए सम्मान की बात है।”

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पंजाब, बंगाल और असम की लड़कियों को पुलिस ने आर्केस्ट्रा के नरक से निकाला

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सारण, बिहार 14 फ़रवरी (हि.स.)। पुलिस ने मानव तस्करी और नाबालिगों के शोषण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 15 नाबालिग लड़कियों को आर्केस्ट्रा संचालकों के चंगुल से मुक्त कराया है। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिले के विभिन्न आर्केस्ट्रा केंद्रों पर छापेमारी की गई।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पत्र के आलोक में की गई। एसएसपी के निर्देश पर महिला थाना पुलिस और विशेष टीम ने रिविलगंज एवं कोपा थाना अंतर्गत चिन्हित आर्केस्ट्रा ठिकानों की विधिवत घेराबंदी की।

पुलिस के अनुसार, इन लड़कियों को प्रताड़ित कर जबरन नृत्य और अन्य अनैतिक कार्यों में धकेला गया था। मुक्त कराई गई 15 नाबालिग लड़कियों में पंजाब से चार, पश्चिम बंगाल से चार, बिहार से तीन, ओडिशा से दो, उत्तर प्रदेश से एक और असम से एक लड़की शामिल है। इन सभी को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है और इनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस ने मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में कोपा थाना क्षेत्र के दीपक कुमार यादव, हरिशंकर मांझी, संजीत कुमार मांझी, गोविन्द कुमार यादव और रिविलगंज थाना क्षेत्र के संदीप यादव, विनय ठाकुर व मोहित कुमार शामिल हैं। महिला थाना में मामला दर्ज कर अग्रतर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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आगे चल रहे ट्रेलर में घुसी कार, महिला सहित 5 की मौत

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जयपुर, 14 फ़रवरी (हि.स.)। चाकसू थाना इलाके में शनिवार सुबह सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई। हादसा कोटा–जयपुर नेशनल हाईवे (एनएच-52) पर टिंगरिया मोड़ के पास हुआ। कार चालक को झपकी आने का अंदेशा है, जिससे यह हादसा हुआ। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।

चाकसू थाना अधिकारी मनोहर लाल मेघवाल के मुताबिक कार में सवार सभी लोग मध्य प्रदेश के निवासी थे और जयपुर की ओर आ रहे थे। हादसे में एक महिला समेत 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक युवक को अस्पताल ले जाया जा रहा था। लेकिन उसने रास्ते में दम तोड़ दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर के बाद हाईवे पर अफरातफरी मच गई। दुर्घटना के कारण नेशनल हाईवे पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दुर्घटना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को मोर्चरी में रखवाया और क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की सहायता से हटवाकर यातायात सुचारू कराया।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण चालक को झपकी आना बताया जा रहा है, हालांकि अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मृतकों की शिनाख्त और परिजनों को सूचना देने की कार्रवाई की जा रही है।

खाटू श्याम मंदिर में 19 घंटे बंद रहेंगे दर्शन

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सीकर, 14 फ़रवरी (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध आस्था धाम खाटू श्याम मंदिर में 19 फरवरी को श्याम प्रभु की विशेष सेवा-पूजा एवं तिलक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया है।

मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि 18 फरवरी की रात 10 बजे से 19 फरवरी की शाम पांच बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट पूर्णत: बंद रहेंगे। इस दौरान केवल निर्धारित धार्मिक विधि-विधान और विशेष सेवा-पूजा कार्यक्रम किए जाएंगे।

मंदिर प्रशासन के अनुसार 18 फरवरी रात 10 बजे बाबा श्याम के पट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद 19 फरवरी को शाम पांच बजे तक श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकेंगे। 19 फरवरी शाम पांच बजे पुनः मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर कमेटी ने सभी श्याम भक्तों से अपील की है कि वे निर्धारित समय के बाद ही खाटूधाम पधारें तथा मंदिर परिसर में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

शिवजी को अत्यंत प्रिय है बेलपत्र

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बाल मुकुन्द ओझा

महाशिवरात्रि हिन्दुओं के सबसे बड़े पर्वों में से एक है। महाशिवरात्रि का दिन मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी  को पड़ रही है। मान्‍यता है कि इसी दिन शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। हमारा देश मंदिरों का देश भी कहा जाता है। यहाँ लगभग सभी मंदिरों में शिव दरबार जरूर मिल जाएंगे। शिव मंदिर वैसे देश के हर गली और कौने में स्थापित है। घरों और मंदिरों में इसे लेकर व्यापक तैयारियां चल रही है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की महापूजा और व्रत-उपवास करने की पौराणिक परंपरा है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है। लोगों की मान्यता है भोलेनाथ को एक लोटा जल और बेलपत्र अर्पित कर के प्रसन्न किया जा सकता है। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में बच्चे से बुजुर्ग तक विशेषकर महिलायें बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, चंदन, फूल, मौसमी फल, गंगाजल, गाय का दूध अर्पित कर भगवान शिव की आराधना करते है। सनातन धर्म  में ऐसा माना गया है  बरगद और बेल के वृक्ष में भगवान शिव का वास है। बिल्व पत्र बेल नामक वृक्ष के पत्तों को कहा जाता है। भगवान शिव को  बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय है। इसके वृक्ष के नीचे पूजा-पाठ करना पुण्यदायक माना जाता है। यह कहा जाता है यदि श्रद्धा से बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दिया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन के कष्टों को दूर करते हैं। बिल्व के वृक्ष के नीचे शिवलिंग रखकर पूजन करने से शिव जी की कृपा प्राप्त होती है। पर्यावरण की दृष्टि से वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए बि‍ल्वपत्र के वृक्ष का महत्व है। बिल्व वृक्ष एक बहु उपयोगी औषधीय वनस्पति है। इसके उत्पाद पाचन क्रिया के दोषों से पैदा बीमारियों से रक्षा करता है। यह त्वचा रोग और डायबिटीज से हमारी रक्षा करते है।  यह अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाए रखता है। घर के आसपास बिल्वपत्र का पेड़ होने पर वहां सांप या विषैले जीवजंतु भी नहीं आते हैं।   इस पेड़ की पत्तियां एक साथ तीन की संख्या में जुड़ी होती हैं और इसे केवल एक ही पत्ती माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि बिना बेलपत्र के शिव जी की आराधना पूरी नहीं होती है। धर्मशास्त्रों में भगवान शिव को बेलपत्र आर्पित करने की एक विधि होती है। शिवलिंग पूजा में किस विधि से बेलपत्र चढ़ाया जाना चाहिए। बेल पत्र के तीनो पत्ते त्रिनेत्रस्वरूप् भगवान शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं। अगर आप शिवलिंग पूजा के दौरान बेलपत्र चढ़ाती हैं तो इससे भगवान शिव खुश होंगे और आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। बिल्वपत्र के वृक्ष में मां लक्ष्मी का वास होता है. कहते हैं कि इसकी पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है।

धार्मिक मान्यता है बिल्व वृक्ष पर जल चढ़ाने से हर मुसीबत दूर हो सकती है। बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव का मस्तक शीतल रहता है।  यह भी कहा जाता है बिल्व वृक्ष को सींचने से सभी तीर्थों का फल मिल जाता है। बिल्व पत्र का पूजन पाप व दरिद्रता का अंत कर वैभवशाली बनाने वाला माना गया है। इससे हनुमान जी भी प्रसन्न होते हैं क्योंकि वे भगवान शिव के ही अवतार हैं।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

D.32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

लोकसभा की कार्यवाही नौ मार्च तक स्थगित

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नई दिल्ली, 13 फ़रवरी (हि.स.)। लोकसभा में बजट सत्र का पहला चरण शुक्रवार को संपन्न हो गया। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। अब बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा।

लोकसभा की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल के सदस्यों ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। इसके चलते कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। जब 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने बताया कि कई सदस्यों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है, जिसे नामंजूर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम पुकारा। प्रधान ने अपने मंत्रालय से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे। इसके बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल, आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने अपने-अपने मंत्रालयों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे।

लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को 12 फरवरी को राज्यसभा ने भी बिना किसी संशोधन के पारित कर दिया है। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है। ।

इसके बाद पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।

उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ और 01 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया गया था।