इतिहास के पन्नों में 16 फरवरी : मिर्जा गालिब की 100वीं पुण्यतिथि पर स्मारक डाक टिकट जारी

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सल 1969 में महान शायर मिर्जा गालिब की 100वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह टिकट उनकी साहित्यिक विरासत और उर्दू-फ़ारसी शायरी में उनके अमूल्य योगदान को श्रद्धांजलि देने के लिए जारी किया गया था।

इंडिया पोस्ट के इस डाक टिकट ने गालिब को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई। गालिब की ग़ज़लें और शेर आज भी भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा माने जाते हैं।

महत्वपूर्ण घटनाक्रम

1914 – लॉस एंजिलिस और सैन फ्रांसिस्को के बीच पहले विमान ने उड़ान भरी।

1918 – लुथियाना ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया।

1937 – अमेरिका के वैज्ञानिक वालेस कैरोदर्स को नायलान का पेटेंट मिला। इसका इस्तेमाल शुरू में टूथब्रश बनाने के लिए किया गया था।

1959 – राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने फुलगेनसियो बतिस्ता को अपदस्थ करने के बाद क्यूबा की सत्ता संभाली।

1969 – मिर्जा गालिब की 100वीं पुण्यतिथि पर डाक टिकट जारी किया गया।

1971 – पश्चिमी पाकिस्तान और चीन के बीच राजमार्ग को औपचारिक तौर पर खोला गया।

1982 – कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में पहली बार जवाहरलाल नेहरू इंटरनेशनल गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया गया।

1986 – मेरिओ सोरेस पुर्तगाल के प्रथम असैनिक राष्ट्रपति निर्वाचित।

1987 – पनडुब्बी से पनडुब्बी पर मार करने की क्षमता वाले मिसाइल को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

1990 – सैम नुजोमा नामीबिया के पहले राष्ट्रपति निर्वाचित।

1994 – इंडोनेशिया के सुमात्रा में 6.5 तीव्रता के भूकंप के भीषण झटकों से 200 लोगों की मौत।

1998 – इंडोनेशिया में बाली से रवाना हुआ चीन एयरलाइंस का विमान ताइवान के ताइपै में उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ। विमान में सवार सभी 197 लोगों के अलावा जमीन पर भी कम से कम 7 लोगों ने दुर्घटना में अपनी जान गंवा दी।

2001 – अमेरिकी व ब्रिटिश विमानों का इराक पर हमला।

2001 – फिलिपीन की राजधानी मनीला में जूतों के अनूठे संग्रहालय का उद्घाटन। यहां तरह तरह के जूतों के हजारों जोड़े रखे गए हैं।

2003 – विश्व की पहली क्लोन भेंड़ डोली को दया मृत्यु दी गई।

2004 – इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच वार्ता प्रारम्भ।

2005 – क्योतो करार लागू किया गया। यह पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से की गई अन्तरराष्ट्रीय संधि है।

2008 – मध्य प्रदेश शासन द्वारा पार्श्व गायक नितिन मुकेश को लता मंगेशकर पुरस्कार प्रदान किया गया।

2008 – टाटा मोटर्स ने सेना के लिए लाइट स्पेशिएस्टि ह्वीकल नाम से एक वाहन उतारा।

2008 – बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार ने राज्य में ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ का शुभारम्भ किया।

2008 – पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में मिराज विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

2009 – कार्यवाहक वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2009-10 का अंतरिम बजट पेश किया।

2010 – हिन्दी के प्रसिद्ध कवि कैलाश वाजपेयी, मैथिली के दिवंगत कथाकार मनमोहन झा तथा अंग्रेजी के लेखक बद्रीनाथ चतुर्वेदी समेत 23 लोगों को वर्ष 2009 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। गुजराती के लेखक शिरीष जे. पंचाल ने यह पुरस्कार लेने से मना कर दिया। राज्यसभा संसद एवं प्रसिद्ध हिन्दी अनुवादक वाई. लक्ष्मीप्रसाद को तेलुगु साहित्य के लिये यह पुरस्कार दिया गया।

शास्त्रीय गायक पंडित जसराज, वरिष्ठ फ़िल्म अभिनेता डॉ. श्रीराम लागू और नृत्यांगना यामिनी कृष्णमूर्ति तथा कर्नाटक संगीत के तीन प्रसिद्ध व्यक्तियों कुल छह व्यक्तियों को उनके संगीत नाटक और नृत्य में योगदान के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी फैलो (अकादमी रत्न) प्रदान करने की घोषणा की गई।

2013 – पाकिस्तान के हजारा इलाके के एक बाजार में बम धमाके में 84 लोगों की मौत और 190 घायल हुए।

जन्म

1745 – थोरले माधवराव पेशवा – मराठा सामाज्य के चौथे।

1822 – राजेन्द्रलाल मित्रा – भारत विद्या से संबंधित विषयों के प्रख्यात विद्वान।

1896 : हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म।

1931 – विश्वनाथ त्रिपाठी – भारतीय हिंदी लेखक, आलोचक, कवि तथा गद्यकार हैं।

1932 – वी.सी. पाण्डे – अरुणाचल प्रदेश, बिहार और झारखंड के राज्यपाल थे।

1937 – गुलाम मोहम्मद शेख – अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्ध चित्रकार, लेखक एवं कला समालोचक हैं।

1945 – एल. गणेशन – तमिलनाडु से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।

1959 : टेनिस के महान खिलाड़ियों में शुमार जान मैकनरो का जन्म।

1978 – वसीम जाफर – भारतीय क्रिकेटर।

निधन

1938 – प्रख्यात बांग्ला साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का निधन।

1944 – दादा साहब फाल्के – भारत के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं पटकथा लेखक।

1956 – मेघनाथ साहा – गणित व भौतिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य करने वाले भारतीय वैज्ञानिक।

2000 – बी. एस. केसवन – भारत के पहले राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष थे। उन्हें ‘भारतीय राष्ट्रीय ग्रंथ सूची के जनक’ के रूप में जाना जाता है।

2016 – बुतरस घाली – संयुक्त राष्ट्र संघ के छठे महासचिव थे।

2022 – बप्पी लाहिड़ी – प्रसिद्ध भारतीय गायक और संगीतकार थे।

राउरकेला में बेल्जियम ने भारत को 4-2 से हराया, पेनल्टी कॉर्नर बने निर्णायक

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राउरकेला, 14 फरवरी (हि.स.)। एफआईएच प्रो लीग के राउरकेला चरण में भारत को बेल्जियम के खिलाफ रीमैच में 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। मुकाबले में बेल्जियम ने पहले हाफ में आक्रामक खेल दिखाते हुए बढ़त बना ली, जिसे भारत दूसरे हाफ में पूरी तरह पाट नहीं सका।

बेल्जियम की पुरुष हॉकी टीम ने शुरुआत से दबाव बनाया और पेनल्टी कॉर्नर का बेहतरीन उपयोग किया। 11वें मिनट में ह्यूगो लाबुचेरे ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल कर खाता खोला। इसके बाद अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स ने 14वें और 17वें मिनट में दो ड्रैग-फ्लिक गोल कर बढ़त 3-0 कर दी। पहले क्वार्टर के अंत में आर्थर डी स्लोवर ने एक और गोल जोड़कर स्कोर 4-0 कर दिया।

चार गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय हॉकी टीम ने वापसी की कोशिश की। 24वें मिनट में आदित्य लालगे ने रीबाउंड पर गोल कर अंतर कम किया। तीसरे क्वार्टर में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोर 4-2 कर दिया।

भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने कई अहम बचाव किए, जबकि बेल्जियम के गोलकीपरलोइक वैन डोरेन ने भी बढ़त को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई। अंतिम क्वार्टर में भारत ने तेज खेल दिखाया, लेकिन बेल्जियम की सुदृढ़ रक्षा पंक्ति ने कोई और मौका नहीं दिया।

यह मुकाबला एफआईएच पुरुष प्रो लीग के तहत बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम में खेला गया। इस जीत के साथ बेल्जियम ने राउरकेला चरण में भारत पर लगातार दूसरी जीत दर्ज की।

पाकिस्तान में सड़क हादसा, कम से कम 11 लोगों की मौत

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कराची, 15 फरवरी (हि.स.)। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खैरपुर जिले में टंडो मस्ती के पास एक और बालू ले जा रहे ट्रेलर की टक्कर में कम से कम 11 लोग मारे गए। मृतकों में नौ यात्री और बस के ड्राइवर और कंडक्टर शामिल हैं। यह बस पंजाब से कराची जा रही थी। आज सुबह यह जानकारी बचाव अधिकारियों ने दी।

जियो न्यूज चैनल की रिपोर्ट में ईधी फाउंडेशन के हवाले से कहा गया है कि इस हादसे में 10 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सभी का खैरपुर सिविल हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। हादसे के बाद सिंध के पुलिस महानिरीक्षक ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खैरपुर को तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंचने और बचाव कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया।

इस बीच, शुक्रवार को एम-9 मोटर-वे पर कथोरे के पास कई गाड़ियों की टक्कर में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह हादसा एक तेल टैंकर, एक बस और कई अन्य गाड़ियों के टकराने के बाद हुआ। बचाव अधिकारियों ने पुष्टि की कि मरने वालों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। टक्कर की वजह से कई यात्री पुल से गिर गए।

ढाका में बदलाव की हवा, भारत के सामने नई कसौटी

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(सत्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी बीएनपी ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदली है; भारत के सामने अब अवसरों के साथ नई अनिश्चितताएँ भी खड़ी हैं।)

— डॉ. प्रियंका सौरभ

बांग्लादेश के हालिया आम चुनावों में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने तारिक रहमान के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। सत्रह वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद राजनीति में लौटे तारिक रहमान ने अपनी माँ और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए पार्टी को दो-तिहाई से अधिक सीटें दिलाईं। यह जीत न केवल एक चुनावी सफलता है, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता संतुलन के व्यापक पुनर्संयोजन और एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत का संकेत भी देती है। भारत के लिए यह परिणाम अवसरों के साथ-साथ कई रणनीतिक अनिश्चितताएँ भी लेकर आया है, जिनका प्रबंधन आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेगा।

पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय तक बांग्लादेश की राजनीति पर अवामी लीग और शेख हसीना का वर्चस्व रहा। इस अवधि में स्थिरता, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग के साथ-साथ सत्ता के केंद्रीकरण, विपक्ष के दमन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने के आरोप भी लगातार लगते रहे। लंबे समय तक एक ही राजनीतिक धारा के प्रभुत्व ने मतदाताओं में प्रशासनिक थकान और परिवर्तन की आकांक्षा को जन्म दिया। बीएनपी की जीत को इसी व्यापक जन-असंतोष और राजनीतिक विकल्प की तलाश के परिणाम के रूप में देखा जा सकता। 

तारिक रहमान लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रभावशाली, किंतु विवादास्पद चेहरा रहे हैं। निर्वासन काल के दौरान उन पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और कट्टरपंथी तत्वों से संबंधों जैसे आरोप लगे, जिनके कारण उनकी छवि धूमिल हुई। हालांकि दिसंबर 2025 में लंदन से स्वदेश वापसी के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने पार्टी संगठन का पुनर्गठन किया, युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया और जमीनी स्तर पर जन आंदोलन को पुनर्जीवित किया। निर्वासन काल के अनुभवों को उन्होंने राजनीतिक पूंजी में बदला और बीएनपी को चुनावी रूप से पुनर्स्थापित किया। इस संदर्भ में यह जीत केवल पारिवारिक विरासत का विस्तार नहीं, बल्कि रणनीतिक पुनर्संयोजन, संगठनात्मक अनुशासन और बदलते राजनीतिक यथार्थ को समझने की क्षमता की सफलता भी मानी जा रही है।

बीएनपी ने 13वें आम चुनावों में आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार उन्मूलन और अल्पसंख्यक सुरक्षा को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में प्रस्तुत किया। बेरोज़गारी, महँगाई और शासन में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को गहराई से प्रभावित किया। पार्टी ने अपनी पारंपरिक कट्टरपंथी छवि से दूरी बनाने का प्रयास किया और हिंदू समुदाय सहित सभी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का आश्वासन दिया। यह जनादेश इस बात को रेखांकित करता है कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व और प्रशासनिक थकान के बाद मतदाताओं ने परिवर्तन को प्राथमिकता दी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता परिवर्तन ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेशी समाज स्थिरता के साथ-साथ उत्तरदायी शासन की अपेक्षा रखता है।

भारत के दृष्टिकोण से बीएनपी की यह जीत मिश्रित संकेत देती है। ऐतिहासिक रूप से भारत के संबंध अवामी लीग सरकार के साथ अधिक सहज और स्थिर रहे हैं। सीमा प्रबंधन, आतंकवाद-रोधी सहयोग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में शेख हसीना सरकार ने भारत के साथ घनिष्ठ तालमेल रखा। इसके विपरीत, बीएनपी को लेकर नई दिल्ली में हमेशा संदेह बना रहा है, विशेषकर 2001–06 के शासनकाल के अनुभवों के कारण। हालांकि हाल के वर्षों में तारिक रहमान ने भारत के प्रति अपेक्षाकृत संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। चुनावों से पहले भारत द्वारा बीएनपी को अनौपचारिक रूप से “ग्रीन सिग्नल” देना इसी बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह संकेत करता है कि भारत अब बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में किसी एक दल पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी संवाद की नीति अपनाने को तैयार है।

आर्थिक दृष्टि से बीएनपी सरकार भारत के लिए नए अवसर खोल सकती है। बांग्लादेश भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दक्षिण एशिया में भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का अहम स्तंभ भी है। नई सरकार के कार्यकाल में द्विपक्षीय व्यापार के 20 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना जताई जा रही है। कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जलविद्युत सहयोग, सीमा व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है। बांग्लादेश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारतीय निवेश के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत करती है। अल्पसंख्यक हितों की रक्षा को लेकर बीएनपी की सार्वजनिक प्रतिबद्धता भारत की सामाजिक और राजनीतिक चिंताओं को कुछ हद तक कम करती है।

इसके बावजूद, अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। बीएनपी पर कट्टरपंथी तत्वों के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की भूमिका को लेकर सतर्कता आवश्यक है। तारिक रहमान पर लगे पुराने भ्रष्टाचार आरोप, पाकिस्तान के साथ कथित संबंध और हालिया सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाती हैं। भारत–बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ, तस्करी, मानव तस्करी और आतंकवाद से जुड़े जोखिम भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। यदि इन मुद्दों पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो द्विपक्षीय विश्वास प्रभावित हो सकता है।

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का असर केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव व्यापक दक्षिण एशियाई भू-राजनीति पर भी पड़ेगा। चीन और पाकिस्तान क्षेत्र में अपने प्रभाव को लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए आवश्यक होगा कि वह बांग्लादेश के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत रखे, ताकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भारत के प्रतिकूल न जाए। बहुपक्षीय मंचों और उप-क्षेत्रीय सहयोग पहलों के माध्यम से संवाद और सहयोग को सुदृढ़ किया जा सकता है।

ऐसे परिदृश्य में भारत के लिए संतुलित और सक्रिय कूटनीति अपनाना अनिवार्य होगा। अवामी लीग के साथ पुराने संबंधों को बनाए रखते हुए बीएनपी सरकार के साथ संवाद स्थापित करना भारत के दीर्घकालिक हित में है। एकतरफा झुकाव के बजाय संस्थागत और बहुदलीय संपर्क भारत को अधिक रणनीतिक लचीलापन प्रदान करेगा।

मानवाधिकार, अल्पसंख्यक सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के मुद्दों पर भारत को न तो उपेक्षा करनी चाहिए और न ही अत्यधिक हस्तक्षेप करना चाहिए। विवेकपूर्ण संतुलन ही भारत की प्रभावशीलता को बनाए रख सकता है।

तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी की यह जीत भारत के लिए न तो पूरी तरह जोखिमपूर्ण है और न ही पूर्णतः अवसर-प्रधान। यह एक संक्रमणकालीन दौर है, जिसमें सतर्कता, संवाद और व्यावहारिक कूटनीति के माध्यम से भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर सकता है, बल्कि भारत–बांग्लादेश संबंधों को एक नई और अधिक परिपक्व दिशा भी दे सकता है। यदि अनिश्चितताओं का प्रभावी प्रबंधन किया गया और सहयोग के क्षेत्रों को सुदृढ़ किया गया, तो यह राजनीतिक परिवर्तन न केवल द्विपक्षीय संबंधों को, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग की संभावनाओं को भी सशक्त कर सकता है।

  (डॉ. प्रियंका सौरभ, ,कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)

‘सोलर पावर’ से रोशन होगा कानपुर, सोलर सिटी बनने की राह पर बढ़ा शहर

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– 2,104 करोड़ रुपये के प्रावधान से हरित ऊर्जा को बढ़ावा- 20,756 सोलर रूफटॉप के साथ यूपी में तीसरे स्थान पर है कानपुर

कानपुर, 14 फरवरी (हि.स.)। औद्योगिक शहर कानपुर अब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पेश हुए उत्तर प्रदेश बजट 2026–27 में हरित ऊर्जा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने सौर, जैव ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए 2,104 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी के तहत कानपुर समेत प्रदेश के कई नगर निगमों को “सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने की योजना को गति दी गई है।

सोलर सिटी परियोजना के लिए सीधे तौर पर अलग से बड़ी रकम नहीं बताई गई, लेकिन कुल 750 करोड़ के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रावधान में कानपुर और अन्य शहरों को सोलर सिटी के रूप में विकसित करना शामिल है। ये बजट की धनराशि कानपुर जैसे शहरों में सोलर ऊर्जा के नेटवर्क, इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा पहलों को मजबूत करेगी।

यूपी में तीसरे स्थान पर है कानपुर

सोलर रूफटॉप के मामले में कानपुर प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। शहर में अब तक 20,756 सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए जा चुके हैं। घरों में सोलर पैनल लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी का लाभ भी मिल रहा है। नेट-मीटरिंग व्यवस्था के तहत उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच सकते हैं, जिससे आम लोगों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

कितना बदलेगा शहर?

– कानपुर जैसे बड़े औद्योगिक नगर अब हरित ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

– बजट के प्रावधान सौर ऊर्जा के विस्तार को मजबूती देंगे, जिससे बिजली पर निर्भरता पारंपरिक स्रोतों पर कम होगी।

– सोलर रूफटॉप से बिजली बचत, पर्यावरण में सुधार, और जनता को सीधा फायदा मिलेगा।

बजट में क्या है खास?

– नगर निगम भवनों, स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों की छतों पर बड़े पैमाने पर सोलर रूफटॉप प्लांट लगाने के लिए विशेष फंड।

– रिहायशी उपभोक्ताओं को सब्सिडी के साथ सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहन।

– इंडस्ट्रियल एरिया में कैप्टिव सोलर प्लांट को बढ़ावा, ताकि फैक्ट्रियों की बिजली लागत घटे।

– स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण (बैटरी स्टोरेज) पर निवेश, जिससे दिन में बनी सौर ऊर्जा का उपयोग रात में भी हो सके।

आम लोगों को क्या फायदा?

– बिजली बिल में 30–50% तक की संभावित बचत (रूफटॉप क्षमता पर निर्भर)।

– नेट-मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचने का विकल्प खुलेगा।

– रोजगार के नए अवसर—इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और मैन्युफैक्चरिंग में स्थानीय युवाओं को काम।

– औद्योगिक शहर से अब ग्रीन सिटी की भी मिलेगी पहचान।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सोलर सिटी योजना के तहत सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट लगाने का काम तेज किया जा रहा है। सोलर रूफटॉप के लिए जागरूक किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि कानपुर स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा मॉडल के रुप में प्रदेश में मिसाल बने।

फिल्म अस्सी की समीक्षा: जब हर 20 मिनट पर झकझोरती है स्क्रीन और आईना बन जाता है सिनेमा

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फिल्म: अस्सी (2026)

निर्देशक: अनुभव सिन्हा

कलाकार: तापसी पन्नू, कानि कुश्रुति, रेवती, मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब, नसीरुद्दीन शाह, सुप्रिया पाठक, सीमा पाहवा, अद्विक जायसवाल

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐/5

हम अक्सर खबरों को स्क्रोल करके आगे बढ़ जाते हैं। एक और अपराध, एक और हेडलाइन, एक और बहस। लेकिन क्या होता है उस एक ‘हेडलाइन’ के बाद? अस्सी उसी अनकहे हिस्से को सामने लाती है, जहां आंकड़े इंसान बनते हैं और इंसान जख्म। भारत में यौन अपराधों के आंकड़े सिर्फ सरकारी फाइलों में दर्ज संख्या नहीं हैं, वे उन घरों की चुप्पी हैं जहां हंसी अचानक गायब हो जाती है। निर्देशक अनुभव सिन्हा एक बार फिर वही करते हैं, जिसके लिए वे जाने जाते हैं, सुविधाजनक सिनेमा नहीं, असुविधाजनक सच। ‘मुल्क’ और ‘थप्पड़’ के बाद इस बार उनके साथ हैं तापसी पन्नू, और नतीजा है एक ऐसी फिल्म जो आपको देखती भी है और परखती भी। टी-सीरीज द्वारा निर्मित ‘अस्सी’ 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। लेकिन सवाल रिलीज डेट का नहीं है। सवाल यह है कि क्या हम उस सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार हैं, जिसे यह फिल्म हमारे सामने रखती है?

कहानी

कहानी परिमा (कानी कुस्रुति) की है, एक साधारण टीचर, जो अपने पति विनय (मोहम्मद जीशान अय्यूब) और बेटे ध्रुव (अद्विक में जायसवाल) के साथ दिल्ली में एक सादा और खुशहाल जीवन जी रही है। एक रात, घर लौटते वक्त उसकी दुनिया बिखर जाती है। पांच लोग उसे अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म करते हैं और अधमरी हालत में छोड़ देते हैं। इसके बाद फिल्म सिर्फ अपराध की कहानी नहीं रहती, यह न्याय की तलाश, आत्मसम्मान की लड़ाई और समाज की मानसिकता का आईना बन जाती है। वकील रावी (तापसी पन्नू) अदालत में परिमा का पक्ष संभालती हैं। लेकिन कोर्टरूम के भीतर की बहस से ज्यादा मुश्किल है कोर्टरूम के बाहर की निगाहें। ‘अस्सी’ नाम का अर्थ क्या है, यह फिल्म के अंत में एक प्रतीक की तरह खुलता है।

कैसी है फिल्म?

‘अस्सी’ मनोरंजन के लिए नहीं बनी। यह आपको असहज करती है, झकझोरती है और कई बार चुप कर देती है। फिल्म का ट्रीटमेंट बेहद रॉ है। अनुभव सिन्हा किसी भी सीन को ग्लैमरस या सिनेमाई प्रभाव के लिए मुलायम नहीं बनाते। हर 20 मिनट में स्क्रीन पर उभरती स्लेट एक सख्त याद दिलाती है कि अपराध सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं, वह आज की सच्चाई है। बीच-बीच में फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी होती है और ‘छतरी मैन’ जैसा सब-प्लॉट हल्का भटकाव देता है, लेकिन मूल कथा की ताकत बनी रहती है।

निर्देशन और लेखन

फिल्म के लेखक गौरव सोलंकी ने संवादों में आक्रोश को शोर नहीं बनने दिया। शब्द शांत हैं, लेकिन असर गहरा है। कोर्टरूम को यहां नाटकीय तमाशा नहीं बनाया गया। बहसें वास्तविक हैं, जज की सख्ती असली लगती है और प्रक्रिया का बोझ महसूस होता है। यही फिल्म की विश्वसनीयता है। अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी की जोड़ी ने बिना किसी लाग-लपेट के सच्चाई को सामने रखा है, और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

अभिनय

कानी कुस्रुति इस फिल्म की धड़कन हैं। उनके चेहरे की खामोशी और आंखों का खालीपन शब्दों से कहीं ज्यादा बोलता है। वे परिमा को निभाती नहीं जीती हैं। तापसी पन्नू एक सधे हुए, दृढ़ और आत्मविश्वासी वकील के रूप में नजर आती हैं। उनका प्रदर्शन संयमित है, लेकिन प्रभावशाली। अद्विक जायसवाल ने मासूमियत के साथ उस बच्चे की उलझन को दिखाया है, जो अचानक बड़ी दुनिया के क्रूर सच से टकरा जाता है। सपोर्टिंग कास्ट में नसीरुद्दीन शाह, मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, रेवती और सीमा पाहवा जैसे कलाकार फिल्म को गंभीरता और वजन देते हैं।

संगीत

फिल्म में गानों की जगह खामोशी ज्यादा बोलती है। रंजीत बरोट का बैकग्राउंड स्कोर दृश्यों की बेचैनी को बढ़ाता है। यह संगीत मनोरंजन नहीं, बल्कि माहौल की तीव्रता को गहरा करने का माध्यम बनता है।

देखें या नहीं?

अगर आप सिनेमा को सिर्फ टाइमपास नहीं, बल्कि सामाजिक हस्तक्षेप मानते हैं, तो ‘अस्सी’ जरूर देखें। लेकिन अगर आप हल्का-फुल्का मनोरंजन चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको असहज कर सकती है। यह फिल्म सवाल पूछती है, जवाब नहीं देती।

‘अस्सी’ एक फिल्म कम, एक अनुभव ज्यादा है। यह आपको सोचने पर मजबूर करती है कि प्रगति और विकास के दावों के बीच महिला सुरक्षा आज भी सबसे बड़ा सवाल क्यों है। सिनेमाघर की लाइट जलने के बाद भी यह फिल्म आपके भीतर चलती रहती है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी कामयाबी है।

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 तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ी सड़क परियोनाओं को मंजूरी

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नई दिल्ली, 14 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 11 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी और इससे संबंधित राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने शुक्रवार को सड़क परिवहन से जुड़ी तीन परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी। इस फैसले की जानकारी शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में पत्रकार वार्ता में दी।

पहली परियोजना तेलंगाना में हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर गुडेबेलूर से महबूबनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-167 को 4 लेन तक चौड़ा करने से जुड़ी है। परियोजना की कुल लंबाई 80.01 किलोमीटर है और इसपर 3175.08 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के धमासिया-बिटाडा/मोवी और नासरपुर-मालोथा खंडों को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा। परियोजना की लंबाई 107.67 किमी है और इसपर कुल पूंजी लागत 4583.64 करोड़ रुपये खर्च आएगा।

महाराष्ट्र में एनएच-160ए के घोटी – त्रिमबक (मोखाड़ा) – जव्हर – मनोर – पालघर खंड का पुनर्वास और उन्नयन किया जाएगा। इस खंड को 2 लेन और 4 लेन का बनाया जाएगा और इसमें पक्की शोल्डर सुविधा भी होगी। इसकी कुल लंबाई 154.635 किमी और कुल पूंजी लागत 3320.38 करोड़ रुपये है।

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से रोजगार सृजन होगा, यात्रा समय में कमी आएगी और राज्यों में आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

मोहन बागान ने जीत से किया आगाज, केरल ब्लास्टर्स पर 2-0 से हराया

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कोलकाता, 14 फरवरी (हि.स.)। डिफेंडिंग चैंपियन मोहन बागान सुपर जायंट्स ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के नए सत्र में विजयी शुरुआत करते हुए केरला ब्लास्टर्स एफसी को 2-0 से पराजित किया। आईएसएल के इस मुकाबले का आयोजन कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रिडांगन में हुआ, जहां घरेलू टीम ने ज्यादातर समय खेल पर नियंत्रण बनाए रखा।

पहले हाफ में मोहन बागान ने आक्रामक रुख अपनाया और विपक्षी रक्षा पंक्ति को दबाव में रखा। इसका फायदा उन्हें 36वें मिनट में मिला, जब स्ट्राइकर जेमी मेकलारेन ने मौका भुनाते हुए टीम को बढ़त दिलाई।

दूसरे हाफ में केरल ने वापसी की कोशिश की और विंग से कुछ तेज हमले भी किए, लेकिन उन्हें बराबरी का गोल नहीं मिला। मोहन बागान के गोलकीपर विशाल कैथ ने सतर्क प्रदर्शन करते हुए बढ़त कायम रखी।

मैच के अंतिम क्षणों में मोहन बागान ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। इंजरी टाइम में डिफेंडर टॉम एलड्रेड ने सेट-पीस पर सटीक हेडर लगाकर जीत पक्की कर दी। इस मौके की शुरुआत मिडफील्डर अनिरुद्ध थापा की सटीक गेंद से हुई।

कोच सर्जियो लोबेरा के नेतृत्व में मोहन बागान संतुलित और आत्मविश्वासी नजर आई, जबकि केरल की युवा टीम, जिसे डेविड कैटला

मार्गदर्शन दे रहे हैं, ने संघर्ष तो किया लेकिन निर्णायक मौके नहीं बना सकी।

इस जीत के साथ मोहन बागान ने सीजन के शुरुआती मुकाबले से ही खिताब बचाने के अपने इरादे जता दिए हैं।

अश्लील वीडियो बनाकर बैंकाक के व्यापारी से 25 लाख बिटक्वाइन की मांग,मास्टरमाइंड गिरफ्तार

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तीन अन्य साथियों की तलाश में जुटी पुलिस

झांसी, 14 फ़रवरी (हि.स.)। 25 लाख के बिटक्वाइन वसूली की साइबर क्रिमिनल की धमकियों से बैंकाक का एनआरआई व्यवसायी इतना परेशान हो गया कि वह रकम देने झांसी आ गया। लेकिन, उसने सतर्कता दिखाते हुए पहले पुलिस को इसकी जानकारी दी तो पुलिस ने सुराग लगाकर मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उसके अन्य तीन साथियों की पुलिस तलाश कर रही है।

दरअसल, बैंकाक निवासी एनआरआई कारोबारी हरीश चंद्र लाखी के कम्प्यूटर को हैक करके उसका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रहे साइबर जालसाज बबीना कैंट निवासी नितिन कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपित ने डेटा वापस करने के लिए कारोबारी से 25 लाख रुपये कीमत के बिटक्वाइन की फिरौती मांगी थी। कारोबारी फिरौती देने झांसी भी आया। लेकिन, वह पहले पुलिस के पास जा पहुंचा।

इस सम्बंध में सीओ क्राइम पीयूष कुमार पांडेय ने बताया कि मूल रूप से जयपुर निवासी हरीश चंद्र लाखी पिछले तीस साल से परिवार के साथ बैंकाक में रह कर कारोबार करते हैं। 21 अगस्त 2025 को बबीना निवासी नितिन कुमार ने हरीश से संपर्क उनके परिजनों के अश्लील वीडियो वाट्स एप पर भेजे। यह देखकर हरीश घबरा उठे। नितिन ने वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए आठ लाख रुपये की मांग की। इसके बाद से लगातार रुपयों की मांग करने लगा। पैसा न देने पर परिवार के सदस्यों को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देने लगा। अपने दोस्तों की मदद से अंतरराष्ट्रीय नंबर से फोन करके भी धमकाता था।

नितिन के बुलावे पर वह उसे बिटक्वाइन देकर अपने सामने वीडियो मिटाने एवं डिस्क वापस लेने के लिए दो दिन पहले झांसी पहुंचे। उन्होंने साइबर थाना पुलिस झांसी को ब्लैक मेलिंग की कहानी सुनाई। पुलिस ने 11 फरवरी को नितिन कुमार पुत्र जगदीश निवासी न्यू हरिजन कॉलोनी बबीना कैन्ट थाना बबीना जिला झाँसी समेत उसके दोस्त अली, शाकिर एवं इरफान के खिलाफ मु.अ.स. 04/2026 धारा 308 (4), 318 (4), 351(2), 336(3), 61 (2) बीएनएस व 66 (सी), 66 (डी), 66 (ई), 67 (ए) आईटी एक्ट थाना साइबर क्राइम जनपद झाँसी में पंजीकृत किया गया। मामला दर्ज करके तलाश शुरू कर दी।

नंबरों की पड़ताल करने पर साइबर पुलिस को नितिन का सुराग लग गया। शुक्रवार को घर में दबिश देकर नितिन को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से पुलिस ने दो पासपोर्ट, एक मोबाइल फोन (आईफोन कम्पनी 15 प्रो) मय भारत का ई-सिम व फिजिकल सिम थाईलैण्ड आदि बरामद कर लिया। पुलिस टीम में थाना साइबर क्राइम निरीक्षक प्रवीण कुमार, संदीप तोमर, उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार समेत अन्य शामिल रहे।

आदेश से प्रभावित व्यक्ति ही दाखिल कर सकता है याचिका : हाईकोर्ट

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–गैर पीड़ित व्यक्ति के पट्टा निरस्तीकरण की मांग में दाखिल याचिका खारिज

प्रयागराज, 14 फ़रवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जमीन का पट्टा निरस्त किए जाने की मांग में दाखिल याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी है कि कोई व्यक्ति जो किसी आदेश से पीड़ित अथवा प्रभावित नहीं है, तो वह चुनौती नहीं दे सकता,जब तक असाधारण परिस्थिति नहीं हो।

न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने सुघर सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया है। कन्नौज के सुघर सिंह ने याचिका दायर कर सरकारी दस्तावेज में बंजर भूमि के रूप में दर्ज जमीन प्रतिवादी इंद्रपाल तथा ममता देवी को कृषि भूमि बताते हुए किए गए पट्टा संबंधी आदेश रद्द करने की मांग की थी।

ग्राम उम्मेदपुरवा, मौजा अनौगी, परगना तहसील एवं जिला कन्नौज निवासी याची ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 के तहत विभिन्न धाराओं के तहत पट्टा आवंटन को चुनौती दी थी।

याची के अनुसार प्रतिवादियों इंद्रपाल तथा ममता देवी के पास पर्याप्त भूमि है। उसका कहना था कि चार जनवरी 2014 को प्रतिवादियों के पक्ष में किए गए पट्टे के दौरान संबंधी जमीन खाली नहीं थी, इस पर उसका कब्जा था। उसका प्लाट इसके करीब है। उसने घर बनाया है, ट्यूबवेल लगवाया है। साथ ही पेड़ भी उगाए हैं। याची ने इस तर्क के साथ अपर जिलाधिकारी (वित्त राजस्व) कन्नौज अदालत में धारा 198 (4) के तहत मुकदमा दायर किया कि आवंटन के समय प्लॉट खाली नहीं था, इसलिए इसे आवंटित नहीं किया जाना चाहिए। यह मुकदमा आठ अक्टूबर 2024 को खारिज कर दिया गया।

इस आदेश को अपर आयुक्त कानपुर (प्रथम) की कोर्ट में चुनौती दी गई, यहां भी छह अक्टूबर 2025 को इसे खारिज कर दिया गया। दोनों ही आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। पीठ ने पाया कि याची प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं है। कोर्ट ने कहा, जसभाई मोतीभाई देसाई बनाम रोशन कुमार केस (1976) में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अज्ञात व्यक्ति को तब तक अदालत में आने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो। याची ‘पीड़ित व्यक्ति’ की परिभाषा में नहीं आता है, इसलिए उसकी याचिका खारिज किए जाने लायक है। मामले में अपर न्यायिक आयुक्त-प्रथम कानपुर, अपर जिला मजिस्ट्रेट, वित्त एवं राजस्व, कन्नौज मौजा अनौगी परगना की भूमि प्रबंधन समिति भी प्रतिवादी बनाए गए थे।