विमानन वैज्ञानिक 6वीं पीढ़ी की इंजन तकनीक विकसित करें

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आह्वान

– लड़ाकू विमानों की तकनीक से सिविल एविएशन की दुनिया में भी आ सकती है क्रांति

नई दिल्ली, 16 फरवरी , भारत में अभी तक फाइटर जेट के इंजन बनने की योजना परवान नहीं चढ़ने के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि हमें भविष्य की तरफ भी देखना होगा। अब हम सिर्फ 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रह सकते, क्योंकि यह समय की मांग है। हमें 6वीं पीढ़ी की उन्नत तकनीकों का विकास भी जल्द से जल्द शुरू करना होगा। दुनिया में टेक्नोलॉजी बदल रही है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई सामग्रियों का प्रयोग बढ़ रहा है, हमें उनमें आगे रहना होगा।

रक्षा मंत्री सोमवार को बेंगलुरु में गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नागरिक उड्डयन का विस्तार और भी तेजी से होगा। भारत तो वैसे भी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले विमानन बाजारों में से एक है। ऐसे में भविष्य में नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयोग सीधे उपयोगी साबित होंगे। जब हम डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और इंजन डेवलपमेंट की बात करते हैं, तो उसका महत्व सिर्फ सैन्य इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहता। किसी भी कॉम्प्लेक्स टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी अहमियत उसके दूर तक फैलने वाले नतीजों में होती है।

रक्षा मंत्री ने विमानन क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों से कहा कि अब आप जो तकनीक लड़ाकू विमानों के लिए विकसित कर रहे हैं, वही तकनीक कल सिविल एविएशन की दुनिया में क्रांति ला सकती है। आप जो हाई टेम्परेचर सहने वाले कम्पोजिट मटीरियल बना रहे हैं, वे पावर प्लांट में या स्पेसशिप में भी काम आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी इंजन को विकसित करने में 25 साल लग रहे हैं, तो भारत की मौजूदा स्थिति हमारी रणनीतिक जरूरतें और हमारी महत्वाकांक्षाएं ऐसी हैं कि आप मान कर चलिए कि आपके 20 साल पहले ही खत्म हो चुके हैं और अब सिर्फ 5 साल ही आपके पास बचे हैं। यह कोई शॉक होने वाली या अचानक वाली बात नहीं है, यह एक चुनौती है। हमें इसी 5 साल में वो कर दिखाना है, जो दूसरे देश 20 साल में करते हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि फिलहाल ब्रिटेन के साथ एयरो इंजन विकास के लिए संयुक्त अध्ययन किया जा रहा है, जो अच्छी पहल है। इसके अलावा फ्रांस के साथ भी एयरो इंजन के लिए हम राष्ट्रीय एयरो इंजन मिशन के तहत कार्य शुरू कर चुके हैं। फ्रांस और यूके दोनों ही देश एयरो इंजन तकनीक में बहुत आगे रहे हैं। उनके साथ यह सहयोग हमें न सिर्फ नई तकनीक सीखने का मौका देगा, बल्कि उन चुनौतियों को भी समझने में मदद करेगा, जिनमें उन्होंने पिछले दशकों में सामना किया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हम उस ऐतिहासिक दौर से गुजर रहे हैं, जब पूरी दुनिया की नजर भारत की तरफ है। सभी देश हमारी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल में साझेदारी करना चाहते हैं। ऐसे में हमारे पास बहुत सारे विकल्प हैं, इसलिए हमें इन अवसरों का पूरा लाभ लेकर अपनी तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत करना है।

फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर फायरिंग के चार आरोपी झज्जर से गिरफ्तार

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झज्जर, 16 फ़रवरी (हि.स.)। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बहादुरगढ़ की पुलिस टीम ने मुंबई में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करके लॉरेंस गैंग से जुड़े उत्तर प्रदेश निवासी तीन शूटरों सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

एसटीएफ बहादुरगढ़ के प्रभारी राकेश कुमार ने सोमवार को बताया कि चारों आराेपित हरियाणा के झज्जर जिले के अमादलपुर गांव में स्थित एक कंस्ट्रक्शन साइट पर छिपे हुए थे। आरोपिताें से एक पिस्तौल व बाइक बरामद की गई है। सभी को गिरफ्तारी के बाद मुंबई एक्सटॉर्शन सेल के हवाले कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि गत 31 जनवरी की रात को मुंबई के जुहू स्थित रोहित शेट्टी के मकान पर रंगदारी के उद्देश्य से फायरिंग की गई थी। मामले में लॉरेंस गैंग का नाम सामने आया था। मुंबई पुलिस इस मामले में शूटरों की तलाश कर रही थी। इसी बीच पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि शूटर झज्जर जिले में कहीं छिपे हुए हैं। इसके बाद इंस्पेक्टर राकेश कुमार की अगुवाई वाली एसटीएफ बहादुरगढ़ ने मुंबई पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई शुरू की। सूचनाओं के आधार पर संयुक्त टीम ने माछरौली थाना क्षेत्र के गांव अमादलपुर स्थित एक कंस्ट्रक्शन साइट पर रेड की। जहां से तीनों शूटर अपने एक साथी संग काबू कर लिए गए।

आरोपिताें की पहचान रितिक, दीपक, सन्नी व सोनू के रूप में हुई है। रितिक, सन्नी और सोनू यूपी की जिला आगरा के गांव बहाबीजोली के रहने वाले हैं और दोस्त हैं। जबकि दीपक यूपी के सादरपुर गांव का रहने वाला है। इनके खिलाफ मुंबई में केस दर्ज हैं। प्रारंभिक तौर पर इसके अलावा इन पर कोई अन्य केस नहीं मिला है।फिलहाल मामले में सामने आया है कि रितिक यहां अमादलपुर स्थित साइट पर काम करता था। उसने ही यहां तीनों शूटरों को छिपा रखा था। आरोपिताें से पूछताछ में कई अहम खुलासों की संभावना है। उन्हाेंने बताया कि मामले में जांच जारी है। जांच के दौरान जो सामने आता है, उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वयंसेवकों की गुरूदक्षिणा दान नहीं, उनकी भक्ति है- संघ

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बेंगलुरु, 16 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह एक सार्वजनिक सांस्कृतिक संगठन है।

संघ कार्य में होने वाला खर्च उसके स्वयंसेवकों द्वारा वर्ष भर में एक बार स्वेच्छा से अर्पित की गई गुरूदक्षिणा के माध्यम से चलता है। संघ न तो किसी दल विशेष का समर्थन करता है और न ही सार्वजनिक तौर पर चंदा संग्रह करता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (कर्नाटक) के अधिकृत पत्रकार समूह और समविचारी संगठनों के व्हाट्स अप समूहों में इस आशय का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, इसमें संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए संघ के कार्य संचालन की जानकारी साझा कर रहे हैं। इसमें संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि ‘‘स्वयंसेवकों द्वारा दी गई गुरुदक्षिणा दान नहीं बल्कि उनकी भक्ति है। ’’

संघ प्रमुख के वायरल हो रहे इस वीडियो को कर्नाटक के सूचना और यातायात मंत्री प्रियांग खरगे के विवादित बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रियांक खरगे की ओर कल (रविवार) को ही गांधी मैदान में आयोजित एक समारहो में संघ के आय के स्रोतों के बारे में सवाल उठाए थे।खरगे ने कहा था कि, “संघ कहता है कि वह चंदा नहीं लेता। लेकिन 2,500 से अधिक संगठनों के नेटवर्क वाले इस संगठन के लिए पैसा आता कहां से है?’’ खरगे ने आरोप लगा कि संघ के लिए पैसा विदेशों से आ रहा है, जिनमें अमेरिका और इंग्लैंड भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से अनेक बार सार्वजनिक मंचों से स्पष्ट किया जा चुका है कि वह केवल और केवल स्वयंसेवकों द्वारा स्वेच्छा से की गई गुरूदक्षिणा से अपने नियमित कार्य संचालित करता है, विशेष आयोजनों और अभियान के लिए भी संघ के स्वयंसेवक और समाज के लोग सहयोग देते हैं। समाज से प्राप्त होने वाली सहयोग राशि के एक एक पैसे का स्वयंसेवक हिसाब रखते हैं और उसके केवल उसी कार्य में लगाते हैं। यही हमारे स्वयंसेवकों की प्रामाणिकता है, जिस पर समाज के लोगों का अटूट विश्वास है। इसके बावजूद कुछ लोग राजनीति से प्रेरित होकर अनर्गल प्रलाप करते हैं और आरोप लगाते रहते हैं। संघ की ओर से इन सब पर सफाई या स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता। संघ प्रमुख के वक्तव्य उसी कड़ी में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि, “गुरु दक्षिणा स्वयंसेवकों द्वारा दिया जाने वाला स्वैच्छिक योगदान है। संघ का कार्य पारदर्शी है।”

छत्तीसगढ़ में अब चार जिले ही नक्सल प्रभावित, शेष नक्सल मुक्त घोषित

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में अब केवल तीन जिले सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर ही नक्सल प्रभावित

जगदलपुर, 16 फ़रवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के अब चार जिले ही नक्सल प्रभावित हैं, शेष सभी जिले नक्सल मुक्त घाेषित हाे गए हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से केवल तीन जिले सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर ही नक्सल प्रभावित माने गए हैं। इसी के साथ गर‍ियाबंद ज‍िले को भी इस सूची में रखा गया है।

केंद्र सरकार की जारी की गई ताज़ा सूची के अनुसार बस्तर के सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर को छोड़कर शेष जिलों को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। गरियांबंद जिले काे नक्सल प्रभावित सूची में रखा गया है। अब देश भर में केवल छह जिले ही नक्सल प्रभावित बचे हैं। यह फैसला नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने साेमवार काे बताया कि भारत सरकार की नई सूची के अनुसार छत्तीसगढ़ में बस्तर के तीन जिलों सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के अलावा गरियाबंद जिला को भी नक्सल प्रभावित माना गया है। वहीं, दूसरे राज्यों से अन्य दो जिले शामिल किए गए हैं। इस तरह अब देश में कुल छह जिलों को अंतिम और निर्णायक नक्सल विरोधी अभियान के लिए पूरी तरह चिन्हित कर लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने इन क्षेत्रों में नक्सलियों की गतिविधियों पर पूरी तरह शिकंजा कसने की रणनीति तैयार कर ली है।

सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में यहां बड़े स्तर पर संयुक्त ऑपरेशन देखने को मिल सकते हैं। बस्तर संभाग के शेष जिलों को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में उत्साह का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बस्तर में विकास, निवेश और सामान्य जनजीवन की वापसी के लिए मील का पत्थर साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति से अब नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे की उम्मीद और मजबूत हो गई है।

बस्तर आईजी ने बताया कि बस्तर के तीनों नक्सल प्रभावित जिलों को जल्द ही नक्सल मुक्त कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट जारी कर दिया गया है और इन इलाकों में सुरक्षा बलों ने एंटी नक्सल ऑपरेशन को तेज कर दिया है।

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रामगंगा में दिखे ऊदबिलाव, दुर्लभ जलीय जीवों की वापसी

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नैनीताल, 16 फ़रवरी (हि.स.)। ऊदबिलावों का एक दुर्लभ समूह को हाल ही में विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटी रामगंगा नदी में देखा गया। नदी किनारे मस्ती करते इन जलीय जीवों को देखकर पर्यटक और स्थानीय लोग उत्साहित हुए।

कॉर्बेट क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली रामगंगा नदी में सुबह के समय ऊदबिलावों का एक समूह पानी में तैरता और खेलता नजर आया। ये ऊदबिलाव लंबे समय बाद इस क्षेत्र में खुले तौर पर दिखाई दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ऊदबिलावों की मौजूदगी किसी भी नदी के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है। ये जीव स्वच्छ जल और पर्याप्त मछलियों वाले वातावरण में ही पनपते हैं। रामगंगा नदी में इनकी सक्रियता यह दर्शाती है कि नदी का इकोसिस्टम फिलहाल संतुलित स्थिति में है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नदी में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं। पर्यटकों ने भी दूर से इन ऊदबिलावों को अपने कैमरों में कैद किया। पार्क प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।

जयपुर की बेटी तिथी मुंदडा बनीं ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’

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जयपुर। जयपुर के जयश्री पेड़ीवाल इंटरनेशनल स्कूल, महापुरा की अंडर-11 बास्केटबॉल टीम ने फरीदाबाद में आयोजित नॉर्थ रीजन चैंपियनशिप ISSO (International Schools Sports Organization) 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। इस अंतर-राज्यीय टूर्नामेंट में उत्तर भारत के कई प्रतिष्ठित स्कूलों ने हिस्सा लिया, जहाँ जयपुर की इस टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता और टीम वर्क से सबको प्रभावित किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान JPIS की टीम अजेय रही। फाइनल मुकाबले में टीम ने रणनीतिक खेल दिखाते हुए विपक्षी टीम को पछाड़कर खिताब पर कब्जा जमाया। टीम के रक्षात्मक खेल और सटीक बास्केटिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
व्यक्तिगत उपलब्धि: तिथी मुंदडा का जलवा
टीम की कप्तान तिथी मुंदडा को उनके असाधारण व्यक्तिगत प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता के लिए ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ के खिताब से नवाजा गया। तिथी ने पूरे चैंपियनशिप में सबसे अधिक स्कोर करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण मौकों पर टीम को जीत की राह दिखाई। तिथी ने दादा दादी को दिया सफ़लता का श्रेय, बोली दादा मनोज और दादी अनीता मूंदड़ा ही हैं मेरे असली कोच।

एक लाख के मुचलके पर अभिनेता राजपाल यादव को 18 मार्च तक मिली अंतरिम जमानत

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नई दिल्ली, 16 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में जेल में बंद बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को एक लाख के मुचलके पर 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करने का आदेश दिया।

आज सुबह जब सुनवाई शुरु हुई, ताे कोर्ट ने कहा कि जब राजपाल यादव दोपहर तीन बजे तक पैसे जमा करेंगे, तो उनकी जमानत पर विचार किया जाएगा। दोपहर तीन बजे कोर्ट को बताया गया कि इस मामले के शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये जमा कर दिए गए हैं। उसके बाद कोर्ट ने राजपाल यादव को एक लाख के मुचलके पर जमानत पर 18 मार्च तक रिहा करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान 12 फरवरी को कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालयमें भी चुनौती दी गई थी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके पहले 5 फरवरी को उच्च न्यायालय ने राजपाल यादव को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा था जिसके बाद राजपाल यादव ने जेल में सरेंडर कर दिया था।

राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, जून 2024 में उच्च न्यायालय ने सजा को निलंबित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं इसलिए उनकी सजा निलंबित की जाती है। दरअसल, कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में दोषी करार देने के बाद राजपाल यादव पर 1.60 करोड़ का जुर्माना लगाया था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस जुर्माना लगाया था। दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में यह सजा सुनाई गई थी।

शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने अप्रैल, 2010 में फिल्म अता पता लापता पूरी करने के लिए कंपनी से मदद मांगी थी। 30 मई, 2010 में दोनों के बीच करार हुआ और उन्होंने राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ का लोन दे दिया। करार के मुताबिक राजपाल को ब्याज सहित 8 करोड़ लौटाने थे। लेकिन वह पहली बार ये रकम नहीं लौटा सके। उसके बाद दोनों के बीच तीन बार करार का रिनिवल हुआ। 9 अगस्त, 2012 को वह अंतिम करार में आरोपित राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपए लौट आने की सहमति भी थी। राजपाल यादव की कंपनी यह भी पैसा देने में नाकाम रही।

अपने बचाव में राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधार नहीं लिया था। राजपाल यादव के मुताबिक मुरली प्रोजेक्ट की कंपनी में पैसा निवेश किया था, लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया था।

कानपुर में रिटायर्ड फौजी ने पत्नी-बेटे की गोली मारकर हत्या की

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फिर ट्रेन से कटकर दी जान

कानपुर, 16 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद कानपुर के सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र अंतर्गत सोमवार को सेवानिवृत्त फौजी ने अपनी पत्नी और बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस और यूनिट ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित करते हुए तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की पड़ताल में जुट गई है। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

तुलसियापुर गांव नई बस्ती में रहने वाले रिटायर्ड फौजी चेतराम कुमार (52) पत्नी सुनीता (40) और बेटे दीप (16) के साथ रहते थे। इसके अलावा वह रिटायर्ड होने के बाद सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी करते थे। तीन महीने पहले ही उन्होंने नया घर बनवाया था, जिसमें सभी लोग रह रहे थे।

आज सुबह बखरिया गांव के पास रेलवे ट्रैक पर एक प्राैढ़ व्यक्ति का शव पड़ा मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कुछ ही देर में शव की शिनाख्त मृतक रिटायर्ड फौजी चेतराम कुमार (52) के रूप में की और उसके घर पहुंची। जहां घर के गेट पर बाहर से ताला बंद था। दरवाजा तोड़कर पुलिस जब अंदर दाखिल हुए तो नजारा देख सभी के होश उड़ गए। जहां रिटायर्ड फौजी की पत्नी सुनीता और बेटे दीप का शव पड़ा था। एक साथ तीन मौतों की सूचना पर पुलिस के आला अधिकारियों समेत फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची।

संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था विपिन ताडा ने बताया कि शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत रात्रि में पति-पत्नी के बीच आपस में झगड़ा हुआ होगा। इसके बाद फौजी ने पहले तो पत्नी और बेटे की हत्या करी। इसके बाद खुद भी रेलवे ट्रैक ट्रेन कटकर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल से दो नाली बंदूक बरामद हुई है। जिसे जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा परिवार में कुछ आर्थिक कारणों को लेकर तनाव की बात भी सामने आ रही है। आसपास के लोगों के बयान सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्योंके आधार पर घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक ने एसओजी की पूरी टीम को किया निलंबित

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संभल, 16 फ़रवरी (हि.स.)। उप्र के जनपद संभल में पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने शिकायत मिलने के बाद एसओजी की पूरी टीम को निलंबित कर दिया है। इसमें प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं। कबाड़ी से 30 हजार रुपये वसूलने और उसका कबाड़ा रोकने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने शिकायत के आधार पर संभल के सीओ आलोक कुमार भाटी से जांच कराई। इसमें मामला सही पाया गया। एसओजी का नया प्रभारी एसपी ने बोबिंद्र शर्मा को बनाया है।

जनपद मुरादाबाद के बिलारी निवासी कबाड़ी जफरूद्दीन अपने बेटे के साथ 2 फरवरी की रात करीब 9 बजे मोबाइल की प्लेट का कबाड़ा लेकर संभल के लाडम सराय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एसओजी की टीम ने कबाड़ी पिता-पुत्र की बाइक को रोक लिया और संभल कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकी चौधरी सराय ले आए।बिचौलियों के माध्यम से मामला निबटाया गया। आरोप है कि कबाड़ी पिता-पुत्र को छोड़ने के एवज में 30 हजार रुपये वसूले गए। साथ ही मोबाइल की प्लेट गलाकर जो धातु निकलती है उसको टीम ने अपने पास रोक लिया। रात के समय कबाड़ी पिता-पुत्र चले गए लेकिन 3 फरवरी को टीम से संपर्क किया और धातु लौटाने की बात कही।

आरोप है कि टीम ने धातु से भरा कट्टा लौटाने की एवज में भी 40 हजार रुपये मांगे, जबकि कट्टे में 40 हजार रुपये की ही धातु थी। इसके बाद ही शिकायत एसपी तक पहुंची। जांच कराने पर मामला सही पाया गया और कार्रवाई की गई है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि प्राथमिक जांच पड़ताल में शिकायत सही पाई गई है। इसके चलते प्रभारी एसआई मोहित चौधरी, हेड कांस्टेबल कुलवंत, अरशद, कांस्टेबल अजनबी, आयुष, विवेक, बृजेश और हिरेश को निलंबित कर दिया है। एसपी ने एसओजी का नया प्रभारी बोबिंद्र शर्मा को बनाया है।

बांग्लादेश की नई सरकार को यूनुस के किरदार को समझना होगा

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योगेश कुमार सोनी

बीते दो वर्ष में बांग्लादेश ने राजनीतिक भूचाल देखा है। पहली बार ऐसा हुआ कि किसी एशियाई प्रधानमंत्री को देश से भागना पड़ा। अब बांग्लादेश की नई गाथा के बाद एक नया कूटनीतिक अध्याय शुरू होगा । आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने कड़े स्वर में कहा कि सत्ता संभालते ही उसका पहला बड़ा एजेंडा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण होगा। अब सवाल सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करने वाला भी है चूंकि बीते लंबे समय से हसीना को लेकर भारत-बांग्लादेश के अलावा पूरी दुनिया की निगाह है कि आखिर शेख हसीना को लेकर अगला अध्याय क्या होगा । बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी भारत से औपचारिक रूप से शेख हसीना को ट्रायल के लिए बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने का आग्रह करेगी। उनका कहना है कि यह मामला दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों के बीच तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए।

बीएनपी का तर्क है कि हसीना के कार्यकाल में हुए कथित दमन और भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष सुनवाई जरूरी है। पार्टी ने भारत से सहयोग की उम्मीद जताई है लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया से पीछे हटने का सवाल नहीं उठता। बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की बड़ी जीत के बाद पार्टी नेता तारिक रहमान देश की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही दो दशक बाद बांग्लादेश की सत्ता में बीएनपी की वापसी हो रही है। इसका असर भारत पर भी होगा। बांग्लादेश के 13वें राष्ट्रीय चुनाव में बीएनपी ने 300 में से 212 सीटों पर रिकॉर्ड जीत हासिल कर बहुमत हासिल किया है। जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को मात्र 77 सीटें हासिल हुई हैं।अन्य दलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। र्व सत्ताधारी अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई।

अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार गिर गई थी जिसके बाद से देश राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के दौर से गुजरा। अब बांग्लादेश सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वहां बदहाली व गुंडागर्दी को कैसे नियंत्रित करेगी। दुनिया ने खुली आंखों से देखा कि किस तरह देश के प्रधानमंत्री की भी जान सुरक्षित नही है। गुंडागर्दी का तांडव ऐसा हुआ कि हसीना के निजी अंगवस्त्रों के साथ फोटो सोशल मीडिया पर डाले गए। मोहम्मद यूनुस ब्रांड के रूप में जाने जाते हैं। उनकी वैश्विक पहचान एक सामाजिक उद्यमी और नागरिक समाज के नेता के रूप में रही है। उनकी यह घोषणा कि थी वह चुनाव के बाद सत्ता में नहीं रहेंगे लेकिन आज बांग्लादेश की सरकार को यूनुस की कितनी आवश्यकता है और क्या वह उनके किरदार व अनुभव का इस्तेमाल करके अपने आप को सशक्त करने का प्रयास करेगी। यह अहम सवाल है। सरकार को यूनुस का फायदा यह मिल सकता है कि उनकी साख सभी नेताओं से बहुत मजबूत मानी जाती है।

संभावना जताई जा रही है कि चुनाव के बाद यूनुस फिर से सामाजिक विकास, गरीबी उन्मूलन और फिनटेक आधारित वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इस तरह उनका भविष्य प्रत्यक्ष राजनीति से दूर, लेकिन राष्ट्रीय पुनर्निर्माण से जुड़ा रह सकता है। टाइम मैगजीन ने बुधवार को वर्ष 2025 के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी की थी, जिसमें मोहम्मद यूनुस को जगह मिली है। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पहली बार लिखा था कि यूनुस बांग्लादेश को मुश्किलों से बाहर निकाल रहे हैं और मानवाधिकारों को बहाल कर रहे हैं। बहरहाल, अब बांग्लादेश को स्वयं को लेकर अपनी सकारात्मक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। चूंकि जितना नुकसान बीते कुछ समय में हुआ है उसकी भरपाई करना बेहद मुश्किल है। सरकार का नया स्वरूप ऐसा होना चाहिए कि वह अपनी छवि को सुधारते हुए सभी के साथ चले और देश की जनता में अपना विश्वास बनाए रखे।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)