भावुक जोनाथन ट्रॉट ने अफगानिस्तान के साथ अपने सफर को कहा अलविदा

भावुक जोनाथन ट्रॉट ने कहा अलविदा, ‘संयोग’ से शुरू हुई थी कोचिंग यात्रा



चेन्नई, 20 फ़रवरी (हि.स.)।अफगानिस्तान के मुख्य कोच जोनाथन ट्रॉट ने 2026 टी20 विश्व कप में टीम के अंतिम ग्रुप मुकाबले के बाद अपने कार्यकाल को भावुक अंदाज़ में अलविदा कहा। कनाडा के खिलाफ जीत के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में 44 वर्षीय ट्रॉट अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने स्वीकार किया कि अफगानिस्तान के साथ उनकी यात्रा ‘संयोग से शुरू हुई’, लेकिन यह अनुभव उनके जीवन के सबसे संतोषजनक अध्यायों में से एक रहा।

अफगानिस्तान ने अपने अंतिम ग्रुप मैच में कनाडा को हराया। इस मुकाबले में इब्राहिम ज़दरान 95 रन की नाबाद पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच बने। उन्होंने अपना पुरस्कार कोच ट्रॉट को समर्पित किया और विदाई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने बैठकर अपने कोच को भावुक होते देखा।

2022 में संभाली थी कमान

जोनाथन ट्रॉट ने 2022 में अफगानिस्तान टीम की कमान संभाली थी। उन्होंने खुलासा किया कि मूल रूप से यह पद ग्राहम थॉर्प को संभालना था, लेकिन परिस्थितियों के चलते वह यह जिम्मेदारी नहीं ले सके। इसके बाद ट्रॉट को यह अवसर मिला।

उन्होंने कहा, “मुझे यह मौका संयोग से मिला। ग्राहम थॉर्प ने मेरे कोचिंग करियर के विकास में बड़ी भूमिका निभाई थी। जब यह जिम्मेदारी मिली तो मैंने इसे दोनों हाथों से स्वीकार किया और पूरी निष्ठा से काम किया।”

उपलब्धियों से भरा रहा कार्यकाल

ट्रॉट ने अपने कार्यकाल की कई यादगार उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान ने विश्व कप में पहली बार पाकिस्तान को हराया, इंग्लैंड को मात दी और पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ विदेशी सरजमीं पर द्विपक्षीय सीरीज जीती।

हालांकि 2026 टी20 विश्व कप में टीम 2024 जैसी सफलता दोहराने में सफल नहीं रही, लेकिन ट्रॉट ने परिणामों से अधिक टीम के मानवीय विकास को अहम बताया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार इब्राहिम ज़दरान, अजमतुल्लाह उमरज़ई और रहमानुल्लाह गुरबाज़ जैसे खिलाड़ियों को देखा, तो उनकी प्रतिभा ने प्रभावित किया।

‘व्यक्तियों से टीम’ बनने का सफर

ट्रॉट ने बताया कि अफगानिस्तान की असली ताकत केवल उनके स्पिन गेंदबाज नहीं, बल्कि टीम के रूप में उनका विकास है। उन्होंने कहा कि जब वह पहली बार टीम के साथ आयरलैंड दौरे पर गए थे, तब उन्हें महसूस हुआ कि खिलाड़ियों में अपार प्रतिभा है, लेकिन उन्हें केवल संरचना और पेशेवर रवैये की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “थोड़ी-सी संरचना, पेशेवर मानसिकता और उच्च मानक जोड़ने से बड़ा बदलाव आया। आज की टीम और पहले की टीम में जमीन-आसमान का अंतर है,” ।

सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा प्रदर्शन

ट्रॉट ने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान के खिलाड़ी सीमित संसाधनों में खेलते हैं। उनके पास स्थायी घरेलू मैदान, आधुनिक अकादमियां और बुनियादी ढांचे की वैसी सुविधाएं नहीं हैं जैसी अन्य बड़ी टीमों के पास हैं।

उन्होंने कहा, “इन खिलाड़ियों को जो सुविधाएं मिलती हैं, उसकी तुलना में उनका प्रदर्शन अविश्वसनीय है। कई खिलाड़ियों को वह शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं मिला जो मुझे मिला था, फिर भी वे 20 हजार दर्शकों के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव संभालते हैं। मैं हर खिलाड़ी को सलाम करता हूं।”

मैदान के बाहर भी बदली जिंदगी

ट्रॉट ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि यह देखना रहा कि खिलाड़ियों की जिंदगी मैदान के बाहर भी बदली है।

उन्होंने कहा, “इन खिलाड़ियों ने न केवल अपने खेल से, बल्कि अपने परिवारों की तकदीर बदलने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। युवा लड़कों को जिम्मेदार युवाओं में बदलते देखना मेरे लिए बेहद संतोषजनक रहा,”।

भविष्य पर नजर

अफगानिस्तान की बल्लेबाजी को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रॉट ने टीम में गहराई बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भविष्य में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए विविध विकल्प तैयार करना जरूरी है, जैसे बाएं-दाएं हाथ के संयोजन और अतिरिक्त बल्लेबाजी विकल्प।

अपने अगले कदम पर ट्रॉट ने फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। हालांकि इंग्लैंड टीम के कोच बनने की संभावना पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा इंग्लैंड में बिताया है। किसी दिन उस टीम को कोच करने का मौका मिले तो अच्छा लगेगा, लेकिन अभी मैं कुछ दिन आराम करना चाहता हूं।”

जोनाथन ट्रॉट का कार्यकाल उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने गर्व के साथ कहा कि अफगानिस्तान के साथ बिताए गए ये साल उनकी जिंदगी की अमूल्य यादें बनकर रहेंगे।

बरेली में होली से पहले बड़ा खुलासा : पास्ता मसाला में फंगस, मिर्च में जहरीला रंग, दीपक स्वीट्स समेत कई के घी-तेल भी फेल

बरेली, 20 फरवरी (हि.स.) । रंगों के त्योहार से ठीक पहले शहर में खाने-पीने की चीजों को लेकर चौंकाने वाला सच सामने आया है। खाद्य सुरक्षा टीम की जांच में पास्ता मसाला से लेकर मिर्च पाउडर, चायपत्ती, भुना चना, रिफाइंड तेल और घी तक में गंभीर खामियां मिलीं। कई नमूने अधोमानक तो कुछ सीधे असुरक्षित पाए गए। रिपोर्ट ने बाजार की सच्चाई उजागर कर दी है और अब सवाल यह है कि त्योहार पर लोगों की थाली में आखिर क्या परोसा जा रहा था।

परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित मै० एच.एन. फूड प्रोडक्ट्स से लिया गया ‘चटपटा पास्ता मसाला’ का नमूना लैब में अधोमानक और असुरक्षित घोषित किया गया। जांच में उसमें लम्प्स और फंगल ग्रोथ पाई गई, यानी साफ तौर पर खाने लायक नहीं। इसी तरह श्यामगंज स्थित मै० मूर्ति इंटरप्राइजेज से लिए गए भुने चने के नमूने में औरामाइन रंग मिला, जो खाद्य पदार्थों में पूरी तरह प्रतिबंधित है। लैब ने इसे असुरक्षित करार दिया है। त्योहार के मौसम में इस तरह का जहर खुलेआम बिकता रहा।

इज्जतनगर स्थित मै० मुल्ला जी चावल वाले की दुकान से लिए गए सप्तऋषि ब्रांड के धनिया और हल्दी पाउडर के नमूने अधोमानक पाए गए। वहीं इसी प्रतिष्ठान से लिया गया तीखा मिर्च पाउडर (सप्तऋषि ब्रांड) असुरक्षित घोषित हुआ, जिसमें सूडान-2 और सूडान-3 जैसे खतरनाक रंग मिले। ये रंग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े माने जाते हैं। चाय के शौकीनों के लिए भी झटका कम नहीं है। शहदाना श्यामगंज स्थित मै० रिच इंडिया टी प्रा.लि. की एटीसी ब्रांड चायपत्ती में सनसेट यलो रंग पाया गया, जिसे लैब ने अधोमानक और असुरक्षित घोषित किया है।

नारियावल रोड स्थित मै० बाला जी ट्रेडर्स से लिए गए ‘राजहंस हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन ऑयल’ का नमूना अधोमानक निकला। वहीं 87, सिविल लाइंस स्थित मै० दीपक स्वीट्स एंड आइसक्रीम प्रा.लि. से लिए गए घी के नमूने भी मानकों पर खरे नहीं उतरे। त्योहार में मिठास घोलने वाली चीजों में ही मिलावट का खेल उजागर हो गया।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा-46(4) के तहत संबंधित कारोबारियों को 30 दिन में अपील का मौका दिया गया है। तय समय में अपील न होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उधर होली को देखते हुए विशेष अभियान भी जारी है। शिफा डेरी (परसौना रोड), राजेश मिल्क विक्रेता (नारियावल) और गुलाबनगर, प्रेमनगर स्थित प्रतिष्ठान से दूध और पनीर के नमूने लिए गए हैं। इसके अलावा फरीदपुर क्षेत्र के 9 कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण हुआ है। जहां खामियां मिलीं, वहां सुधार नोटिस जारी करने की तैयारी है।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने साफ संदेश दिया है कि त्योहारों के नाम पर आम आदमी की थाली में जहर घोलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अभियान जारी रहेगा और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। फिलहाल होली की खरीदारी करते समय ग्राहकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चमकदार रंग और आकर्षक पैकिंग के पीछे छिपी सच्चाई कहीं सेहत पर भारी न पड़ जाए।

‘द केरल स्टोरी-2’ का पैन-इंडिया प्लान, दो नई भाषाओं में ट्रेलर रिलीज

फिल्म निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड’ अब बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है। मेकर्स ने फिल्म को हिंदी के साथ-साथ तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं में भी रिलीज करने का फैसला लिया है। इसी के साथ इन भाषाओं में फिल्म के ट्रेलर भी जारी कर दिए गए हैं, जिससे फिल्म का दायरा और व्यापक हो गया है।

सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले बनी यह फिल्म अब क्षेत्रीय सीमाओं को पार करते हुए पैन-इंडिया दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाने जा रही है। फिल्म का उद्देश्य केवल हिंदी बेल्ट तक सीमित न रहकर साउथ भारतीय बाजारों में भी मजबूत पकड़ बनाना है।

फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कामाख्या नारायण सिंह ने किया है, जो अपनी संवेदनशील और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उनकी फिल्म ‘भोर’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी, जबकि उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘जस्टिस डिलेड बट डिलीवर्ड’ को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

हाल ही में रिलीज हुए हिंदी ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। फिल्म में उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। उनके किरदारों के पोस्टर पहले ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं, जो कहानी की गंभीरता और भावनात्मक गहराई को दर्शाते हैं।

मेकर्स का मानना है कि पहले भाग की सफलता और देशभर में उठी बहस को देखते हुए फिल्म को कई भाषाओं में रिलीज करना जरूरी था, ताकि इसकी कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। ‘द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड’ 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म से उम्मीद की जा रही है कि यह अपने पहले भाग की तरह एक बार फिर दर्शकों के बीच चर्चा और संवाद को जन्म देगी।

फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर रिलीज

शिवाजी महाराज के अवतार में रितेश देशमुख

छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर गुरुवार को अभिनेता रितेश देशमुख ने अपने प्रशंसकों को खास तोहफा देते हुए अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर जारी किया। इस ऐतिहासिक फिल्म का निर्माण जियो स्टूडियो और मुंबई फिल्म कंपनी ने संयुक्त रूप से किया है, जबकि निर्देशन की कमान स्वयं रितेश देशमुख ने संभाली है। पोस्टर के साथ फिल्म की रिलीज तारीख का भी ऐलान किया गया है।

पोस्टर में रितेश देशमुख मराठा राजा के रूप में बेहद प्रभावशाली और दमदार अंदाज में नजर आ रहे हैं। पोस्टर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “हमारे राजा, हमारा गौरव, हमारी विरासत।” फिल्म एक मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस (मजदूर दिवस) के अवसर पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। यह फिल्म मराठी और हिंदी, दोनों भाषाओं में बनाई जा रही है।

फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, जेनेलिया डिसूजा, विद्या बालन, फरदीन खान और महेश मांजरेकर सहित कई नामचीन कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म को लेकर दर्शकों में अभी से उत्सुकता बढ़ गई है।

ईरान के साथ ‘अर्थपूर्ण समझौते’ पर जोर

ट्रंप बोले— परमाणु हथियार नहीं बना सकता तेहरान

वॉशिंगटन, 19 फरवरी (हि.स.)। डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका को ईरान के साथ एक “अर्थपूर्ण समझौता” करना ही होगा, ताकि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनी रह सके। वॉशिंगटन में अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन सार्थक समझौता करना आसान नहीं रहा है।

ट्रंप ने कहा, “अच्छी बातचीत हो रही है। वर्षों से यह साबित हुआ है कि ईरान के साथ अर्थपूर्ण समझौता करना आसान नहीं है। हमें ऐसा समझौता करना ही होगा, वरना हालात खराब हो सकते हैं।”

उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होगा तो मध्य पूर्व में शांति संभव नहीं है।”

इस बीच, जिनेवा में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच परोक्ष वार्ता का एक दौर संपन्न हुआ। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ और जारेड कुशनर ने किया, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना बताया गया है।

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे, जबकि तेहरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान जिनेवा वार्ता के दौरान अमेरिका की चिंताओं को दूर करने के लिए एक लिखित प्रस्ताव पेश कर सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, लेकिन मतभेद गहरे होने के कारण समझौते का रास्ता अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

बरेली : सिटी बसों में डिजिटल एम-पास लागू करने की तैयारी

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800 रुपये में महीने भर करें सफर

बरेली, 19 फरवरी (हि.स.) । शहर का सार्वजनिक परिवहन तंत्र अब डिजिटल रफ्तार पकड़ने जा रहा है। मार्च 2026 से बरेली सिटी बसों में ऑनलाइन एम-पास (मंथली पास) सुविधा शुरू होने की तैयारी है। शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही यात्रियों को मात्र 800 से 900 रुपये में पूरे महीने असीमित सफर की सुविधा मिल सकेगी। इससे रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सिटी बस प्रबंध संचालक मनीषा दीक्षित ने गुरुवार काे बताया कि योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। अनुमोदन मिलते ही मार्च से डिजिटल एम-पास सेवा लागू कर दी जाएगी। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 5000 से 6000 यात्री सिटी बस सेवा का उपयोग कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है।

अभी तक मासिक पास बनवाने के लिए यात्रियों को दफ्तरों और काउंटरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन नई व्यवस्था में यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। यात्री “E-City Bus UP Online” मोबाइल ऐप के माध्यम से आवेदन करेंगे। केवाईसी सत्यापन के बाद डिजिटल पास सीधे मोबाइल फोन पर जारी कर दिया जाएगा।

बस में चढ़ते समय कंडक्टर ईटीआईएम मशीन से क्यूआर कोड स्कैन कर पास सत्यापित करेगा। इससे टिकट जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। साथ ही नकद लेनदेन घटेगा और फर्जी पास पर भी रोक लगेगी।

नई दरें इस प्रकार होंगी—

• सामान्य 30 दिन का पास : 900 रुपये

• छात्र 30 दिन का पास : 800 रुपये

• वरिष्ठ नागरिक 30 दिन का पास : 800 रुपये

• एक दिन का विशेष पास : 80 रुपये (अधिकतम 10 यात्राएं)

बरेली में वर्तमान में 25 ई-बसें संचालित हैं, जो सुबह 6:40 बजे से रात 9:40 बजे तक शहर के प्रमुख रूट, चौराहों और रेलवे स्टेशन को कवर कर रही हैं। डिजिटल एम-पास लागू होने से सफर और अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब डॉक्टर नहीं, एआई करेगा मरीजों का इलाज…

कैंट का हेल्थ सिस्टम होगा हाई-टेक

बरेली, 19 फरवरी (हि.स.) । कैंट क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं अब पारम्परिक ढर्रे से निकलकर हाई-टेक मॉडल की ओर बढ़ने जा रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से इलाज की प्रक्रिया तेज, सटीक और पारदर्शी बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।

इसी कड़ी में स्वास्थ्य क्षेत्र में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन की पहल पर हुआ।

व्याख्यान में प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. मधु रैकवार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य नहीं बल्कि वर्तमान बन चुकी है। एआई तकनीक के माध्यम से गंभीर बीमारियों की समय रहते सटीक पहचान संभव हो रही है। डिजिटल डायग्नोस्टिक्स से जांच रिपोर्ट तेजी से तैयार हो रही है, जबकि रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन का जोखिम कम हो रहा है। मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर उन्हें अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है।

कार्यक्रम में टेलीमेडिसिन की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि एआई आधारित टेलीमेडिसिन सिस्टम से दूर-दराज के मरीज घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी, साथ ही इलाज में पारदर्शिता बढ़ेगी। मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से उपचार में त्रुटियों की सम्भावना भी कम होगी।

डॉ. तनु जैन ने कहा कि कैंट क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। व्याख्यान का उद्देश्य अस्पताल और कार्यालय स्टाफ को डिजिटल बदलाव के लिए तैयार करना है, ताकि भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली को सुचारु रूप से लागू किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें कर्मचारियों ने एआई के लाभ, चुनौतियों और व्यवहारिक उपयोग को लेकर सवाल पूछे। अंत में आरएमओ डॉ. वंदना ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया। व्याख्यान ने साफ संकेत दिया कि बरेली कैंट में इलाज की तस्वीर अब तेजी से बदलने वाली है।

मेडिकल कॉलेज की जांच रिपोर्ट से मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर संदेह नहीं

-तीसरी बार जांच की मांग में याचिका खारिज

प्रयागराज, 19 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि अपनी मर्जी से मेडिकल जांच कराकर अनुकूल रिपोर्ट पेश करने से यह नहीं कहा जा सकता कि मेडिकल बोर्ड की जांच व पुनर्जांच रिपोर्ट अविश्वसनीय है।

याची द्वारा मेडिकल बोर्ड की दो बार जांच में अनफिट करार देने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज व अस्पताल की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुनः तीसरी बार जांच कराने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकलपीठ ने प्रवीण कुमार की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अदितेंद्र सिंह व भारत सरकार के अधिवक्ता दीपक सिंह ने बहस की।

याची पैरा मिलिट्री फोर्स में कांस्टेबल भर्ती में बैठा। मेडिकल जांच में दोनों आंखों में खामी पाई गई और अनफिट करार दिया गया। दुबारा जांच में भी खामी बनी रही तो याची ने खुद मेडिकल कॉलेज में जांच कराई और कहा उसकी दाईं आंख सही है। इसलिए फिर से मेडिकल का आदेश दिया जाय। कोर्ट ने विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को अविश्वसनीय न मानते हुए याचिका खारिज कर दी।

यमुना एक्सप्रेसवे पर बनेगा हाइपरस्केल डेटा सेंटर

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यीडा क्षेत्र में 400 करोड़ का होगा निवेश

7000 सर्वर रैक की होगी क्षमता, पांच एकड़ भूमि आवंटन के लिए प्रदेश सरकार ने बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन को सौंपा पत्र

18 माह में संचालन का लक्ष्य, एआई सेगमेंट को विशेष समर्थन

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता और विकसित फाइबर नेटवर्क का मिलेगा लाभ

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा, 19 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश को डिजिटल और टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने के प्रदेश सरकार के संकल्प को एक और बड़ी सफलता मिली है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन लगभग 400 करोड़ रुपये के निवेश से एक अत्याधुनिक हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित करेगा। गुरुवार को यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बी.के. सेल्स कॉर्पोरेशन को डेटा सेंटर स्थापना हेतु पांच एकड़ भूमि आवंटन के लिए पत्र सौंपा। इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र कुमार भाटिया भी उपस्थित रहे।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

– उत्तर भारत में डिजिटल अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में यह परियोजना मील का पत्थर सिद्ध होगी।

– इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नेतृत्व कैलटेक (कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के पूर्व छात्र करण गुप्ता करेंगे।

– यीडा सेक्टर में पांच एकड़ के प्राइम भूखंड पर स्थापित की जा रही यह हाइपरस्केल डेटा सेंटर परियोजना दो अत्याधुनिक डेटा सेंटर भवनों के रूप में विकसित होगी।

– इसकी कुल नियोजित क्षमता लगभग 7000 सर्वर रैक की होगी।

– परियोजना में दो चरणों में करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा तथा पूर्ण संचालन के बाद लगभग 100 योग्य पेशेवरों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

– भूमि हस्तांतरण के 18 माह के भीतर व्यावसायिक संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

– यह डेटा सेंटर उच्च घनत्व डिजिटल संचालन और तेजी से बढ़ते एआई सेगमेंट को विशेष समर्थन प्रदान करेगा।

– साथ ही, यह व्यवसायियों, सरकारी संस्थाओं और डिजिटल स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक डिजिटल अवसंरचना उपलब्ध कराते हुए क्षेत्र में डेटा स्टोरेज, क्लाउड सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विकास को नई गति देगा।

योगी सरकार की नीतियों से मिला प्रोत्साहन

राज्य सरकार की डेटा सेंटर नीति, निवेश-अनुकूल वातावरण और सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली के कारण प्रदेश में बड़े निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ विजन के अनुरूप यह निवेश प्रदेश को डिजिटल नवाचार के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है।

हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीक पर जोर

परियोजना में नवीकरणीय ऊर्जा समाधान, अत्याधुनिक कूलिंग तकनीक और ऊर्जा-कुशल पावर सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इससे बिजली खपत में कमी और कार्बन फुटप्रिंट घटाने में सहायता मिलेगी। साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की निकटता के कारण परियोजना को अबाधित विद्युत आपूर्ति और विकसित फाइबर नेटवर्क का लाभ प्राप्त होगा।

सिम्प्लास्ट ग्रुप करेगा 70 करोड़ रुपये का निवेश, यमुना क्षेत्र में लगेगी वैश्विक विनिर्माण इकाई

इटली आधारित वैश्विक कंपनी सिम्प्लास्ट ग्रुप ने उत्तर प्रदेश के यीडा क्षेत्र में 70 करोड़ रुपये के कुल निवेश से ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उन्नत प्लास्टिक एवं रोटेशनल मोल्डिंग उत्पादों की नई विनिर्माण इकाई स्थापित करने की घोषणा की है, जिसमें 50 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) शामिल है। गुरुवार को यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने कंपनी को तीन एकड़ भूमि आवंटन हेतु एलओआई पत्र सौंपा।

यह परियोजना भारत-इटली औद्योगिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करते हुए यमुना क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कुल 70 करोड़ रुपये के निवेश से प्रदेश में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा तथा कुशल, अर्द्ध-कुशल एवं अकुशल श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं आपूर्तिकर्ताओं, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों के माध्यम से बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होगा। परियोजना के तहत उन्नत यूरोपीय तकनीक का हस्तांतरण, आधुनिक उत्पादन प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का अनुपालन और स्थानीय कार्यबल को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी तथा सहायक उद्योगों, एमएसएमई इकाइयों और सप्लाई चेन नेटवर्क को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल मेक इन इंडिया के अनुरूप है और घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पादन कर उत्तर प्रदेश से निर्यात वृद्धि, विदेशी मुद्रा अर्जन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सशक्त बनाएगी।

इग्नू में अब 28 फरवरी तक करें आवेदन

मुरादाबाद, 19 फरवरी (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने जनवरी 2026 सत्र के अंतर्गत संचालित ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग तथा ऑनलाइन कार्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब इच्छुक अभ्यर्थी 28 फरवरी तक विभिन्न पाठ्यक्रमों में आवेदन कर सकते हैं।

हिंदू कॉलेज मुरादाबाद में इग्नू अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रोफेसर एके सिंह ने गुरुवार को बताया कि इग्नू क्षेत्रीय केंद्र नोएडा के अंतर्गत संचालित स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र स्तर के कार्यक्रमों में यह अवसर उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो किसी कारणवश पूर्व निर्धारित तिथि तक आवेदन नहीं कर सके थे। ओडीएल कार्यक्रमों के लिए आवेदन पोर्टल https://ignouadmission.s amarth.edu.in तथा https://ignouadmission.s amarth.edu.in है।