कांग्रेस ने हरियाणा के छांयसा गांव में दूषित पानी से मौतों पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली, 17 फरवरी (हि.स.)। कांग्रेस ने हरियाणा के पलवल जिले के ग्राम छांयसा में पिछले 15 दिनों में हुईं 12 मौतों के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने कहा कि दूषित पानी और प्रशासनिक लापरवाही ने गांव में गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं।

कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंगलवार को एक्स पोस्ट में कहा कि छांयसा गांव में लिये गए 107 पानी के नमूनों में से 23 फेल पाए गए। कई नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला है, जो मल-मूत्र से दूषित पानी का संकेत है। इलाके में पानी का क्लोरीनेशन नहीं हुआ और बिना शुद्धिकरण के पानी घरों तक पहुंचाया गया। गांव में 1,500 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हुई, 800 से ज्यादा ओपीडी जांचें हुईं और 210 ब्लड सैंपल लिए गए। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी के मामले सामने आए हैं।

सुरजेवाला ने कहा कि यह स्थिति सरकार की अनदेखी और भ्रष्टाचार का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार गांव के केवल एक तिहाई हिस्से को ही पेयजल उपलब्ध करा रही है, जबकि बाकी लोग दूषित पानी या खरीदे गए पानी पर निर्भर हैं।

उन्होंने हरियाणा में बढ़ते नशे के मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ड्रग्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और युवा पीढ़ी इसकी चपेट में है। ड्रग माफिया ने हरियाणा को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और सरकार इस पर रोक लगाने में नाकाम रही है। हरियाणा में ड्रग्स के मामले 81 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। सरसा, फतेहाबाद, रतिया, सोहना समेत पूरे प्रदेश में रोजाना ड्रग्स से बच्चों की मौत हो रही है।

महाशिवरात्रि पर भारत से पशुपतिनाथ मंदिर आए साधु संन्यासियों की हुई विदाई

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काठमांडू, 17 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि पर पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे नागा बाबा और अन्य साधुओं की मंगलवार को भेंट और दान देकर विदाई की गई है। गुठी संस्थान ने विदाई कार्यक्रम के लिए लगभग 30 लाख नेपाली रुपये का बजट आवंटित किया है।

साधु महाशिवरात्रि के लिए फाल्गुन कृष्ण एकादशी के दिन पशुपतिनाथ पहुंचे थे। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष श्रीधर सापकोटा ने बताया कि नेपाल के बाहर से आए 4,000 से अधिक अलग-अलग संप्रदायों के साधुओं को पशुपति क्षेत्र के विभिन्न स्थानों जैसे गोरखनाथ मठ, आर्यघाट के पार रामचंद्र मंदिर, भस्मेश्वर अखाड़ा और निर्मला अखाड़ा में ठहराया गया था। साधुओं के आगमन पर उन्हें लाल, नीले, सफेद, पीले और हरे रंग के कार्ड वितरित किए गए थे और उन्हीं कार्डों की श्रेणी के आधार पर दान दिया जा रहा है। संस्थान के अनुसार नेपाल से बाहर से आए साधुओं को नजदीकी सीमा तक यात्रा में सहायता के लिए दान राशि बढ़ाई गई है।

गुठी संस्थान के पूर्व उप-प्रशासक दीपक बहादुर पाण्डे के अनुसार फाल्गुन कृष्ण औंसी के दिन साधुओं को औपचारिक रूप से विदा करने की परंपरा सन् 1775 से चली आ रही है, जब जंग बहादुर के ज्येष्ठ पुत्र जगत जंग ने जगन्नाथ प्रकाशेश्वर गुठी की स्थापना की थी। इस परंपरा का निर्वहन गुठी संस्थान और पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट की ओर से अब भी किया जाता है। पहले नागा बाबा और अन्य साधुओं को थापाथली के कलमोचन घाट से भोजन कराकर विदा किया जाता था, क्योंकि मान्यता थी कि कोट हत्याकांड में मारे गए लोगों का दाह-संस्कार जिस स्थल पर हुआ, वहां से साधुओं की विदाई करने से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है। अब यह परंपरा बंद कर दी गई है और वर्तमान में साधुओं को पशुपतिनाथ के पश्चिमी मुख्य द्वार से विदा किया जा रहा है।

दीपक बहादुर पाण्डे के अनुसार महाशिवरात्रि के लिए मंदिर परिसर के भीतर पांच दिन और बाहर चार दिन तक धूनी जलाए रखने के लिए 50 हजार किलोग्राम लकड़ी खरीदी गई, जिसकी लागत 7 लाख रुपये रही। पाण्डे के अनुसार कलमोचन घाट स्थित बैरागी, उदासी, संन्यासी और नाथ अखाड़ों में ठहरे नागा बाबा और साधुओं को भी आज दान देकर विदाई दी जा रही है। ट्रस्ट की कार्यकारी सदस्य शीला पंत ने बताया कि श्रेणी के अनुसार 101 से 5,001 नेपाली रुपये तक दान वितरित करने की तैयारी की गई है। इसके लिए ट्रस्ट ने 8 लाख रुपये आवंटित किए हैं। साधुओं को वर्ष भर मंदिर में अर्पित की गई रुद्राक्ष मालाएं भी प्रदान की जाएंगी।

अधिकारियों पर आरटीआई का दो करोड़ 94 लाख जुर्माना बकाया

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चंडीगढ़, 17 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, हरियाणा सूचना का अधिकार आयोग द्वारा लगाए गए दंड की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा मंगलवार को सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों एवं निगमों के मुख्य प्रशासकों एवं प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों तथा उपायुक्तों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार के अंतर्गत सूचना उपलब्ध कराने में विलंब के मामलों में दोषी राज्य जन सूचना अधिकारियों (एसपीआईओ) पर प्रति मामले 250 रुपये प्रतिदिन की दर से, अधिकतम 25,000 रुपये तक दंड लगाया जाता है। वर्तमान में विभिन्न विभागों से संबंधित एसपीआईओ पर लगाए गए दंड में से कुल दो करोड़ 94 लाख 87 हजार रुपये से अधिक की राशि लंबित है।

सुव्यवस्थित अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एकमुश्त वसूली के स्थान पर मासिक किस्तों में वसूली की स्वीकृति दी है, ताकि संबंधित अधिकारियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े। संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) द्वारा संबंधित अधिकारियों के वेतन या पेंशन से मासिक कटौती की जाएगी। क्लास-ए अधिकारियों से सेवा के दौरान 10,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने की स्थिति में 5,000 रुपये प्रतिमाह वसूले जाएंगे। क्लास-बी अधिकारियों से सेवा के दौरान 7,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने पर 3,500 रुपये प्रतिमाह की दर से वसूली की जाएगी। इसी प्रकार क्लास-सी कर्मचारियों से सेवा के दौरान 4,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने पर 2,000 रुपये प्रतिमाह की दर से राशि वसूल की जाएगी। यह प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू होगी और संपूर्ण बकाया राशि की वसूली तक जारी रहेगी।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर संबंधित राज्य जन सूचना अधिकारी का निधन हो चुका है, तो अधिनियम के अंतर्गत लगाया गया दंड माफ कर दिया जाएगा तथा किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी।

ग्राम पंचायतों के कार्यरत सरपंचों के मामलों में दंड राशि की वसूली उनके मानदेय से 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से की जाएगी। सभी प्रशासनिक सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों में इन आदेशों के अनुपालन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के लिए कहा गया है।

किशोरियों में बढ़ता फ्रेंड विद बेनिफिट कल्चर

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-कैलाश चन्‍द्र

भारत के सामाजिक परिदृश्य में एक बेचैन कर देने वाला बदलाव तेजी से उभर रहा है और उसकी सबसे मार्मिक झलक उस घटना में दिखाई देती है जिसमें 15 वर्ष की एक छात्रा गर्भवती पाई गई। डॉक्टर ने जब उससे पूछा कि बच्चा किससे हुआ है, तो उसका उत्तर था, “पता नहीं… कई थे।” यह घटना कोई सनसनीखेज अपवाद नहीं, बल्कि हमारे समय की एक गहरी और अनदेखी सामाजिक सच्चाई का संकेत है। उस किशोरी ने स्वीकार किया कि महंगे फोन, रिचार्ज, आउटिंग और कूल लाइफस्टाइल की चाह में वह कई लड़कों के साथ फ्रेंड विद बेनिफिट जैसे संबंधों में रही। उसके शब्द सिर्फ एक लड़की की व्यक्तिगत त्रासदी न होकर उस परिघटना का रूपक हैं जो भारत के 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग में तेजी से आकार ले रही है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2023 के आंकड़ों के अनुसार नाबालिगों पर होने वाले यौन अपराधों में अधिकांश अपराधी परिचित होते हैं। इनमें मित्र, पड़ोसी, रिश्तेदार, ऑनलाइन साथी और स्कूल-कॉलेज के परिचित शामिल रहते हैं। यह एक असहज सत्य की ओर संकेत करता है कि खतरा किसी बाहरी व्यक्ति से नहीं, बल्कि बच्चों की उसी दुनिया से आता है जिसे हम सुरक्षित मानते हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्षों में भी यह संकेत मिलता है कि शहरी भारत में किशोरियों के शारीरिक संबंधों की प्रथम आयु 13 से 15 वर्ष के बीच खिसक रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण एशिया अध्ययन के अनुसार 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग की बड़ी संख्या में लड़कियां इंटरनेट आधारित यौन सामग्री देखती हैं और वेब सीरीज तथा सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर संबंध बनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ये तथ्य बताते हैं कि यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संरचनात्मक और बहुस्तरीय है। आज का किशोर भौतिक संसार से कम और वर्चुअल संसार से अधिक प्रभावित है। इंस्टाग्राम, रील्स, ओटीटी और डेटिंग एप्स अब मनोरंजन के साधन नहीं रहे, बल्कि किशोर मन की संरचना को प्रभावित करने वाले प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अध्ययन बताते हैं कि 13 से 17 वर्ष की आयु में मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसी कारण आवेग नियंत्रण कम रहता है और जोखिम लेने की प्रवृत्ति अधिक होती है। जब ऐसे मस्तिष्क पर रोज़ डिजिटल उत्तेजना की बाढ़ पड़ती है, तो परिणाम सीमाओं के टूटने, नैतिकता के धुंधलाने और जोखिमपूर्ण संबंधों के सामान्यीकरण के रूप में सामने आते हैं। लगातार मिल रहे लाइक्स, व्यूज और मैसेज किशोरों के मन में त्वरित संतुष्टि की आदत पैदा करते हैं और धीरे-धीरे रिश्ते अनुभव, शरीर वस्तु और सीमाएँ पुरानी अवधारणाएँ बनती जाती हैं। यही वह डिजिटल सबवर्शन है जो पहले मन को प्रभावित करता है और फिर व्यवहार को अपने वश में कर लेता है।

परिवार की भूमिका भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण हो गई है। शहरों में कई माता-पिता यह मान बैठे हैं कि बच्चों को महंगी सुविधाएँ देना ही पालन-पोषण का अंतिम रूप है, जबकि सुविधा देना और उपस्थित रहना दोनों अलग बातें हैं। जब संवाद कम हो जाता है तो उसके स्थान पर पीयर ग्रुप, इन्फ्लुएंसर संस्कृति, ओटीटी की कहानियां और सोशल मीडिया की छवियां बच्चों के मूल्य तय करने लगती हैं। जब 15 वर्ष का बच्चा महंगा फोन लिए घूमता है और माता-पिता उसकी पृष्ठभूमि या स्रोत पर सवाल नहीं करते, तो यह अनदेखी आगे चलकर गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है। आज का परिवार प्रोवाइडिंग पेरेंटिंग की ओर झुक गया है, जहाँ धन उपलब्ध है लेकिन भावनात्मक उपस्थिति, मार्गदर्शन और मूल्य निर्माण का अभाव है। यही अनुपस्थिति बच्चों को डिजिटल जंगल में अकेला छोड़ देती है।

इस प्रवृत्ति का सबसे गहरा असर किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अनेक अध्ययनों में यह सामने आया है कि इस प्रकार की संबंध संस्कृति आत्मसम्मान में गिरावट, अवसाद, चिंता, इमोशनल नंबनेस, सेल्फ वर्थ के टूटने और आइडेंटिटी क्राइसिस जैसी स्थितियाँ पैदा करती है। धीरे-धीरे संबंधों का एक लेन-देन मॉडल विकसित होने लगता है, जहाँ किशोरियां स्वयं को वस्तु की तरह देखने लगती हैं। किसी किशोरी का यह न जान पाना कि गर्भ किससे है, ये सिर्फ असावधानी नहीं बल्कि भावनात्मक विखंडन की चरम अवस्था को दर्शाता है, जहाँ शरीर, भावनाएँ और पहचान एक-दूसरे से कटने लगते हैं।

उपभोक्तावाद ने भी इस स्थिति को गहराई दी है। बाजार ने किशोरों को अपना सबसे बड़ा उपभोक्ता वर्ग बना लिया है। उनकी असुरक्षाओं को लक्ष्य बनाकर उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनकी कीमत महंगे फोन, फैशनेबल कपड़ों और सोशल मीडिया लाइक्स में छिपी है। जब पहचान वस्तुओं के सहारे बनने लगती है, तब शरीर, संबंध और नैतिकता भी बाज़ार की मुद्रा में बदल जाते हैं। यह उपभोक्तावाद का वह चेहरा है जो आधुनिक किशोरावस्था को भीतर तक प्रभावित कर रहा है।

फ्रेंड विद बेनिफिट जैसी अवधारणाएँ पश्चिमी समाज में भी विवादित रही हैं और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी गई हैं, लेकिन भारत में यह प्रवृत्ति बिना किसी सांस्कृतिक फिल्टर, पारिवारिक संवाद या स्कूल आधारित मार्गदर्शन के प्रवेश कर गई। इसका टकराव भारतीय सामाजिक संरचना से होकर रिश्तों के विघटन, सामूहिकता के क्षरण और मूल्य संक्रमण के रूप में सामने आ रहा है।

यदि 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग में भावनात्मक टूटन, डिजिटल लत, यौनिक प्रयोगशीलता और नैतिक भ्रम इसी तरह बढ़ते रहे, तो इसका असर भविष्य के कार्यबल, सामाजिक स्थिरता, मानव संसाधन और सामूहिक मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा। यह तो सभी स्‍वीकारेंगे ही कि राष्ट्र की शक्ति उसकी संख्या में न होकर उसकी युवा पीढ़ी की मानसिकता, अनुशासन और मूल्य संरचना में निहित होती है। यदि वही पीढ़ी दिशाहीन हो जाए, तब राष्ट्र की ऊर्जा भी दिशाहीन हो जाती है।

समाधान किसी एक संस्था के पास नहीं है, बल्कि यह चार स्तंभों के संयुक्त प्रयास से ही संभव है। परिवार में डिजिटल पेरेंटिंग को आवश्यक बनाना होगा, जहाँ फोन देना और निगरानी दोनों साथ हों। संवाद की पुनर्स्थापना हो और प्रतिदिन कुछ समय परिवार एक साथ बैठकर बातचीत करे। किशोरियों को सेल्फ वर्थ, सीमाएँ और स्वस्थ संबंधों के मूल्य सिखाए जाएँ। विद्यालयों में डिजिटल नैतिक शिक्षा और आयु-उपयुक्त सुरक्षा संबंधी वार्ता हो, साथ ही प्रशिक्षित काउंसलर्स की नियुक्ति भी की जाए। सरकार को एडल्ट प्लेटफॉर्म्स और डेटिंग एप्स पर कड़े आयु सत्यापन लागू करने चाहिए और ओटीटी पर किशोर संवेदनशील रेटिंग को प्रभावी बनाना चाहिए।

इसके साथ ही समाज स्तर पर जागरूकता अभियान, संवाद मंच और माता-पिता–किशोर कार्यशालाएँ आयोजित की जानी चाहिए, ताकि मूल्य निर्माण की प्रक्रिया फिर से मजबूत हो सके। आज यह स्थिति एक चेतावनी है। बच्चे भारत की वर्तमान नींव हैं। उन्हें सुरक्षित रखना, मानसिक रूप से सशक्त बनाना और मूल्य संपन्न बनाना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है।

(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ स्तंभकार हैं)

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काठमांडू इस समय वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे प्रदूषित शहर

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काठमांडू, 17 फ़रवरी (हि.स.)। काठमांडू में वायु प्रदूषण में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। काठमांडू इस समय वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है। भारत की दिल्ली 229 एक्यूआई के साथ पहले स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान का लाहौर 203 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर है।

काठमांडू में मंगलवार दोपहर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 191 पहुंच गया, जो सोमवार को 178 था। यह स्तर सभी के लिए अस्वस्थ श्रेणी में आता है, जिससे विशेष रूप से बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा श्वसन या हृदय संबंधी रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए हैं। एक्यूआई मानकों के अनुसार 0–50 अच्छा (हरा), 51–100 सतर्कता आवश्यक (पीला), 101–150 संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ, 151–200 सभी के लिए अस्वस्थ, 201–300 अत्यंत अस्वस्थ और 300 से ऊपर खतरनाक माना जाता है।

पर्यावरण विभाग के महानिदेशक ज्ञानराज सुवेदी ने चेतावनी दी कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा नहीं हुई तो प्रदूषण और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि बारिश हवा में मौजूद धूल और कणों को बैठाने में मदद करती है, इसलिए लंबे समय तक शुष्क मौसम रहने से प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। सुवेदी ने संबंधित निकायों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की सलाह भी दी। उन्होंने वाहनों की तेज़ वृद्धि, डीज़ल और पेट्रोल से निकलने वाला धुआं, सड़क व अवसंरचना परियोजनाओं से उठने वाली धूल, वनाग्नि तथा लंबे समय तक शुष्क मौसम को वायु प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

काठमांडू वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्ययोजना–2076 के तहत नेपाल सरकार एक्यूआई 300 से अधिक होने पर इसे आपदा की स्थिति मानती है। इसके अंतर्गत खुले में कचरा जलाने पर रोक, झाड़ू और वैक्यूम क्लीनर जैसी सड़क सफाई मशीनों के उपयोग में वृद्धि तथा बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और रोगियों के लिए सार्वजनिक चेतावनी जारी करने जैसे उपाय शामिल हैं।

राष्ट्रीय पर्यावरण नीति के अनुसार वायु, जल, मृदा, ध्वनि, विद्युतचुंबकीय तरंगों, रेडियोधर्मी उत्सर्जन और खतरनाक रसायनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय मानकों का निर्माण और क्रियान्वयन अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और उच्च-जोखिम वाले इलाकों में निगरानी केंद्र स्थापित कर वायु, जल और ध्वनि की गुणवत्ता का मानचित्रण करने का प्रावधान भी किया गया है।

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शैक्षणिक नवाचारों के लिए देवेंद्र जोशी सम्मानित

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जयपुर। शिक्षाविद और नेशनल करियर काउंसलर डॉ. देवेंद्र जोशी को राजधानी जयपुर के होटल ललित में आयोजित शिक्षाविद सम्मेलन में स्पार्क अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस राष्ट्रीय शैक्षिक सम्मेलन में विभिन्न स्कूलों और कॉलेज के शिक्षकों ने सहभागिता की | सम्मेलन में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक और भविष्य में शिक्षा का प्रारूप क्या हो इस पर विभिन्न टॉक शो और संवाद सत्र आयोजित किए गए ।
उल्लेखनीय है कि जोशी को इससे पहले भी राजस्थान सरकार और अनेक विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा शैक्षणिक नवाचारों के लिए समय-समय पर सम्मानित किया गया है। जोशी राजस्थान सरकार की अनेक शैक्षणिक समितियों के सदस्य भी रहे हैं ।

मदन लाल ढींगरा ने फांसी के फंदे को चूम जगाई क्रांति की ज्वाला

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बाल मुकुन्द ओझा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में मदनलाल ढींगरा का नाम बहुत आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों में उनका नाम अव्वल था। 25 वर्ष के अपने अल्प जीवन में उन्होंने देशप्रेम की ऐसी अलख जगायी कि इतिहास में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया। ढींगरा ने हस्ते हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। ढींगरा ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने परिवार की इच्छाओं के विपरीत देश के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया था।

आजादी को प्राप्त करने के लिए कितनी ही माताओं ने अपने नौनिहालों को देश पर कुर्बान किया यह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। आज जरुरत इस बात की है की इतिहास की यह धरोहर किताबों से बाहर आकर हमें बलिदान की गाथा बताएं। भारत की आजादी के लिए अनेक क्रांतिवीर हँसते हँसते फांसी के फंदे पर झूल गए। इनमें एक मदन लाल ढींगरा की 18 फरवरी को 144 वीं जयंती है।

मदन लाल ढींगरा का जन्म 18 फरवरी 1883 को पंजाब के एक हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता सिविल सर्जन थे। मदनलाल में अपने स्कूली जीवन से ही देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी थी। मदन लाल को क्रन्तिकारी गतिविधियों के कारण लाहौर के एक विद्यालय से निकाल दिया गया, तो परिवार ने भी उनसे अपना नाता तोड़ लिया। उनका परिवार अंग्रेजों का विश्वासपात्र था। ढींगरा ने रोजी रोटी के लिए अनेक स्थानों पर काम किया। उन्होंने एक यूनियन बनाने का प्रयास किया परंतु वहां से भी उन्हें निकाल दिया गया। कुछ दिन उन्होंने मुम्बई में भी काम किया।

 मदन लाल ने सन् 1900 में एमबी इंटरमीडिएट कॉलेज अमृतसर में स्कूली शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद वह लाहौर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त करने चले गए। अपनी बड़े भाई से विचार विमर्श कर वे 1906 में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैड गये। जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज’ लंदन में यांत्रिक प्रौद्योगिकी में प्रवेश लिया। इसके लिए उनके बड़े भाई एवं इंग्लैंड के कुछ राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं से आर्थिक सहायता भी मिली। लन्दन में पढ़ाई के दौरान ढींगरा भारत भवन के संपर्क में आए जहाँ उनकी मुलाकात वीर सावरकर एवं श्यामजी कृष्ण वर्मा से हुई। भारत भवन या इंडिया हाउस 1905 में श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा स्थापित किया गया क्रांतिकारी संगठन था। सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा ढींगरा की प्रखर देशभक्ति से बहुत प्रभावित हुए। भारत भवन का एक महत्वपूर्ण सदस्य बनकर उन्होंने  मन ही मन यह संकल्प ले लिया कि भारत मां के लिए अपने जीवन की आहुति देनी है। उन्होंने सन 1857 की भारत की क्रांति की 50वीं वर्षगांठ वहां धूमधाम से मनाई। 

लंदन में रह रहे प्रवासी क्रांतिकारी भारत के खुदीराम बोस, कन्हाई लाल दत्त, सतिन्दर पाल और काशी राम जैसे क्रान्तिकारियों को मृत्युदण्ड दिये जाने से बहुत क्रोधित थे। ब्रिटिश सरकार का एक भारतीय सेना का अवकाश प्राप्त अधिकारी कर्नल विलियम वायली लंदन में रहता था। वायली लंदन में रह रहे भारतीय छात्रों की जासूसी करता था। वायली उसके पिता के दोस्त थे और उसने मदनलाल के पिता को सलाह दी थी कि वह अपने पुत्र को इंडिया हाउस से दूर रहने की सलाह दे। लंदन में रह रहे क्रान्तिकारियो ने अंग्रेजों के जासूस वायली की हत्या करने का निश्चय किया। इस काम का जिम्मा ढींगरा को सौंपा गया। उन्होंने इंडिया हाउस में रहकर बंदूक चलाने का प्रशिक्षण लिया था। मदन लाल ने अंग्रेज अधिकारी विलियम हट कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी। ढींगरा ने अपने पिस्तौल से स्वयं को भी गोली मारनी चाही किन्तु उन्हें पकड़ लिया गया। कर्जन वायली की हत्या के आरोप में अदालत ने उन्हें मृत्युदण्ड का आदेश दिया और 17 अगस्त सन 1909 को लन्दन की पेंटविले जेल में फाँसी पर लटका कर उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी गयी।  मदनलाल मर कर भी अमर हो गये। मदन लाल ढींगरा ने अदालत में खुले शब्दों में कहा कि “मुझे गर्व है कि मैं अपना जीवन समर्पित कर रहा हूं।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी-32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

बड़वा की जूती की गूँज देशभर में

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स्वयं सहायता समूह से सशक्तिकरण तक

(स्वरोजगार अपनाकर गाँव की चौखट से डिजिटल मंच तक पहुँची सफलता की कहानी।) 

खंड कार्यक्रम प्रबंधक, सिवानी, जगबीर सिंह वर्मा ने बताया कि भारत सरकार एवं हरियाणा सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं, को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। सिवानी खंड में 402 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इनसे लगभग 4000 महिलाएँ जुड़ी हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता तथा सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। पिछले आठ वर्षों में अनेक महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अपना व्यक्तिगत ब्रांड “अर्बनिकइंडिया” नाम से तैयार किया है, जिसके उत्पाद अब ऑनलाइन माध्यम से भी खरीदे जा सकते हैं।

– डॉ. प्रियंका सौरभ

हरियाणा की धरती परंपरा, परिश्रम और हुनर की अनमोल विरासत से समृद्ध रही है। यहाँ के गाँव केवल कृषि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हस्तकला और पारंपरिक कौशल की जीवंत पहचान भी हैं। भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र के बड़वा गाँव की कारीगर कांता देवी ने इसी परंपरा को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। आज उनकी बनाई हुई जूतियाँ गुरुग्राम में आयोजित सरस आजीविका मेले में ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह सफलता केवल एक महिला की उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक कला के पुनर्जागरण की प्रेरक कहानी है।

कांता देवी का जीवन संघर्ष, समर्पण और संकल्प का उदाहरण है। उनका विवाह ऐसे परिवार में हुआ, जहाँ जूती निर्माण की कला पीढ़ियों से चली आ रही थी। उनके ससुर भाना राम इस पारंपरिक कार्य से जुड़े हुए थे और उनके पति भी इस काम में सक्रिय भूमिका निभाते थे। विवाह के बाद कांता देवी ने इस कला को केवल परंपरा के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे अपनी पहचान और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया। उन्होंने इस कार्य को आगे बढ़ाने का निश्चय किया और पूरी लगन से इसमें जुट गईं।

शुरुआत में कांता देवी गाँव में ही जूतियाँ बनाकर बेचती थीं। सीमित संसाधन, छोटा बाजार और कम आय जैसी कई चुनौतियाँ उनके सामने थीं। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके पति ने उनका पूरा सहयोग किया और गाँव में दुकान संभालकर इस व्यवसाय को मजबूत आधार दिया। यह पारिवारिक सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना। धीरे-धीरे उन्होंने अपने कौशल को निखारा और पारंपरिक डिजाइनों के साथ आधुनिक डिजाइनों को भी शामिल करना शुरू किया।

लगभग दस वर्ष पहले कांता देवी ने लक्ष्मीबाई महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इस समूह के माध्यम से उन्होंने गाँव की अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा। यह पहल केवल रोजगार का माध्यम नहीं बनी, बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत उदाहरण भी बनी। इस समूह से जुड़कर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया। आज यह समूह कई महिलाओं के लिए स्थायी आय का स्रोत बन चुका है।

समय के साथ कांता देवी ने अपने उत्पादों को एक नई पहचान देने के लिए “अभिनिक इंडिया” नाम से अपना ब्रांड स्थापित किया। यह कदम उनके व्यवसाय के विस्तार में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस ब्रांड के माध्यम से उनकी जूतियाँ स्थानीय बाजार से निकलकर बड़े शहरों और राष्ट्रीय स्तर के मेलों तक पहुँचने लगीं। उनके बेटे ने ऑनलाइन बिक्री की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उनके उत्पाद डिजिटल प्लेटफॉर्म तक भी पहुँच गए। आज उनके पास 100 से अधिक डिजाइनों का संग्रह है, जो पारंपरिक कला और आधुनिक फैशन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।

उनकी जूतियों की कीमत 350 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक है और उनका मासिक कारोबार लगभग तीन लाख रुपये तक पहुँच चुका है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि ग्रामीण उत्पादों को सही मंच और अवसर मिले, तो वे आर्थिक रूप से अत्यंत सफल हो सकते हैं। यह सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान की भी कहानी है।

इस उपलब्धि में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराया जाता है। इसी मंच के माध्यम से कांता देवी को सरस मेले में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला। सरस मेला ग्रामीण कारीगरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहाँ उन्हें अपने हुनर को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

भिवानी जिले के एक छोटे से गाँव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचना आसान नहीं था। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास की शक्ति थी। उनके ससुर भाना राम द्वारा शुरू की गई इस पारंपरिक कला को कांता देवी और उनके पति ने मिलकर आगे बढ़ाया और इसे आधुनिक पहचान दिलाई। यह परंपरा और नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस सफलता का सामाजिक प्रभाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में उनका सम्मान भी बढ़ता है। वे परिवार के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगती हैं और अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान देती हैं। कांता देवी की सफलता ने गाँव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है कि वे अपने कौशल का उपयोग कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब गाँव में ही रोजगार उपलब्ध होता है, तो लोगों को शहरों की ओर पलायन करने की आवश्यकता कम हो जाती है। इससे ग्रामीण समाज में स्थिरता और समृद्धि आती है। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हरियाणा जैसे राज्यों में पारंपरिक हस्तकला की अपार संभावनाएँ हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि इन कारीगरों को उचित प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए। यदि सरकार और सामाजिक संस्थाएँ मिलकर इस दिशा में कार्य करें, तो ग्रामीण हस्तकला न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती है।

कांता देवी की यात्रा हमें यह सिखाती है कि सफलता के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत संकल्प और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि व्यक्ति अपने कौशल पर विश्वास रखे और मेहनत करे, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है।

आज कांता देवी केवल एक कारीगर नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह दिखाया है कि पारंपरिक कला केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का आधार भी है। उनके पति और ससुर के सहयोग से शुरू हुई यह यात्रा आज राष्ट्रीय पहचान बन चुकी है।

अंततः, बड़वा गाँव की जूतियों की यह सफलता केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की उपलब्धि है। यह कहानी हमें यह विश्वास दिलाती है कि यदि ग्रामीण हुनर को सही मंच और सम्मान मिले, तो वह न केवल आर्थिक समृद्धि ला सकता है, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत कर सकता है। कांता देवी की यह यात्रा आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपने हुनर पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

 (डॉ. प्रियंका सौरभ,कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)

केंद्रीय बजट में उप्र को 4.26 लाख करोड़ रुपए मिलेंगे : हरिओम शर्मा

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मुरादाबाद, 16 फरवरी (हि.स.)। केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश को 4.26 लाख करोड़ रुपए मिलेंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास और ग्रामीण योजनाओं को नई गति मिलेगी। विशेष रूप से एक्सप्रेस वे, मेट्रो परियोजनाएं, औद्योगिक कारीडोर और स्मार्ट सिटी के लिए यह फंड अहम साबित होगा। यह बातें भाजपा पश्चिम क्षेत्र के क्षेत्रीय महामंत्री हरिओम शर्मा ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी मुरादाबाद नगर विधानसभा की ओर से केंद्रीय बजट 2026-27 पर परिचर्चा में कही।

भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार का यह बजट समावेशी विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जिससे ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी। यह बजट विकास, आत्मनिर्भरता और आमजन के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला एवं संचालन महानगर उपाध्यक्ष राहुल शर्मा ने किया।

बजट चौपाल में पूर्व राज्यसभा सदस्य वीर सिंह, पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ मिश्रा, प्रांतीय परिषद सदस्य निमित जयसवाल, महानगर मीडिया प्रभारी राजीव गुप्ता, दिनेश शीर्षवाल, नवदीप टंडन, विशाल त्यागी, राहुल शर्मा, चंद्र प्रजापति आदि उपस्थित रहे।

हवाला के 77.80 लाख रुपए जब्त, चार युवक डिटेन

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जोधपुर, 16 फरवरी (हि.स.)। जोधपुर कमिश्नरेट की पश्चिम जिला डीएसटी टीम और सरदारपुरा थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हवाला के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सोमवार दोपहर टीम ने सरदारपुरा सी रोड स्थित एक फ्लैट में छापा मारकर 77.80 लाख रुपए से ज्यादा की नकद राशि जब्त की और अहमदाबाद निवासी एक कारोबारी सहित तीन अन्य युवकों को डिटेन किया है। मामले की सूचना आयकर विभाग को भी दे दी गई है।

डीएसटी इंचार्ज महेंद्र ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि सरदारपुरा थाना क्षेत्र के सी रोड स्थित एक फ्लैट में हवाला के जरिए बड़ी रकम का लेनदेन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फ्लैट पर दबिश दी। जांच में सामने आया कि यह फ्लैट पंचवटी रेजिडेंसी नरोडा पुलिस थाना कृष्णा नगर अहमदाबाद निवासी दिनेश जायसवाल ने किराए पर ले रखा था। पिछले करीब साढ़े तीन महीनों से वह यहां रहकर हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन कर रहा था।

पुलिस टीम ने मौके से 77 लाख 80 हजार 100 रुपए नकद बरामद किए, जिन्हें जब्त कर लिया गया। दिनेश के साथ ही पुलिस ने सिंधीपुरा पीपाड़ शहर निवासी अब्दुल रहमान, मोगडा विवेक विहार दीपक और 3/एल16 कुड़ी भगतासनी निवासी शिवम को भी डिटेन किया है। पुलिस इस नेटवर्क की कडिय़ों को खंगाल रही है और यह भी जांच कर रही है कि यह रकम कहां से आई और कहां भेजी जानी थी। जप्त राशि की सूचना आयकर विभाग को भी दे दी गई है, ताकि आर्थिक अपराध के एंगल से भी जांच की जा सके। प्रथम दृष्टया रूपया हवाला कारोबार का बताया गया है।