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556 वर्ष पूर्व अकबर ने लगाई थी पंच कोसी परिक्रमा पर रोक, योगी सरकार में हुई पुनर्जीवित

धर्म

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सनातन परंपरा, आस्था एवं सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक है प्रयाग की पंच कोसीय परिक्रमा

प्रयागराज, 06 जनवरी (हि.स.)। सनातन परंपरा, आस्था एवं सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक प्रयाग की पंच कोशी परिक्रमा है। मुगल शासक अकबर ने 556 वर्ष पूर्व इस धार्मिक परिक्रमा पर पाबन्दी लगाते बंद कर दिया था। संतों के कई वर्ष प्रयास के बाद योगी सरकार ने वर्ष 2019 में शुरू करने का अच्छा प्रयास किया। यह जानकारी देते हुए मंगलवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने दी।

उन्होंने बताया कि प्रयाग की सनातन परंपरा, आस्था एवं सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक पंचकोसी परिक्रमा की माघ मेला में शुरुआत हो गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की अगुवाई में संगम में गंगा पूजन से इसकी शुरुआत सोमवार को हुई। यह पंचकोसीय परिक्रमा पांच दिनों तक चलेगी जिसमें आखिरी दिन साधु-संतों के लिए भंडारे का आयोजन होगा। माघ मेला प्रशासन को इस परिक्रमा के आयोजन में यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मिली है। संगम में गंगा पूजन के बाद साधु संतों का समूह अक्षयवट और आदि शंकर विमान मण्डपम मंदिर भी गया। इसके उपरांत पहले दिन की परिक्रमा का समापन हो गया।

क्यों होती है पंच कोसी परिक्रमा

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि का कहना है कि पंच कोशी परिक्रमा प्रयाग की प्राचीन धार्मिक परम्परा है । इस परिक्रमा की परम्परा के पीछे प्रयागराज का वह क्षेत्रीय विस्तार है जिसके अनुसार प्रयाग मंडल पांच योजन और बीस कोस में विस्तृत है। गंगा यमुना और सरस्वती के यहाँ 6 तट है जिन्हें मिलाकर तीन अन्तर्वेदियाँ बनाई गई हैं- अंतर्वेदी , मध्य वेदी और बहिर्वेदी । इन तीनो वेदियो में कई तीर्थ, उप तीर्थ और आश्रम हैं जिनकी परिक्रमा को पंचकोसी परिक्रमा के अन्दर शामिल किया गया है। प्रयाग आने वाले सभी तीर्थ यात्रियों को इसकी परिक्रमा करनी चाहिए क्योंकि इससे इनमे विराजमान सभी देवताओं, आश्रमों, मंदिरों, मठो और जलकुंडो के दर्शन से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है ।

556 साल पहले अकबर ने लगाई थी रोक

दिव्य और भव्य माघ मेले के आयोजन में कई परम्पराएं शामिल हैं जिसमें कल्पवास और पंचकोशी परिक्रमा भी शामिल है। परिक्रमा में शामिल हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी का कहना है कि पंचकोसी परम्परा आज से 556 साल पहले माघ मेले का अटूट हिस्सा थी। 556 साल पहले मुग़ल शासक अकबर ने इसे रोक दिया था। कई वर्षों के बाद साधु-संतों की मांग के बाद योगी सरकार की कोशिशों से पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत 2019 में हुई और अब यह परम्परा सतत चल रही है।

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