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जीवन को संयम, सेवा, सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है सनातन

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हाथरस, 25 जनवरी (हि.स.)। श्री वासुदेव विद्या मंदिर में रविवार दोपहर विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन का शुभारंभ काष्णि संत गोविंदाचार्य, मेरठ विश्वविद्यालय की संस्कृत प्रवक्ता प्रोफेसर अर्चना प्रिय आर्य और ब्रह्माकुमारी भावना बहन ने भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में काष्णि संत गोविंदाचार्य ने सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन को संयम, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि समाज और राष्ट्र सशक्त बन सकें।

मेरठ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना प्रिय आर्य ने सनातन धर्म और आर्य पद्धति के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि हमारी परंपराएं प्रकृति, परिवार और समाज के साथ संतुलन बनाकर जीना सिखाती हैं।

प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख भावना बहन ने कहा कि परमात्मा सभी में समान रूप से विद्यमान हैं। उन्होंने मानव जीवन का उद्देश्य आत्मिक शुद्धता के साथ सेवा भाव विकसित करना बताया। भावना बहन ने युवाओं से नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनकी दर्शकों ने सराहना की। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और सहभागियों का पटका पहनाकर और प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया।

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