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पौने नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को मिला अवसर

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लखनऊ, 08 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई रफ्तार देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अप्रेंटिसशिप के क्षेत्र में मजबूत पहल की है। राज्य में संचालित अप्रेंटिसशिप योजनाओं के माध्यम से वर्ष 2025-26 में 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया है। इससे युवाओं को उत्पादन इकाइयों, सेवा क्षेत्र और लघु–मध्यम उद्योगों में काम सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला है।

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का हब बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से युवाओं को सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि काम का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। हमारे लिए लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। नेशनल और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रतिपूर्ति से अधिष्ठानों की रुचि बढ़ी है और इससे रोजगार परक अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

–उपलब्ध कराई जा रही प्रतिपूर्ति की सुविधाउत्तर प्रदेश में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना तथा मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सम्बंधित अधिष्ठानों और अभ्यर्थियों को प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान आर्थिक सहयोग मिलता है, वहीं अधिष्ठानों को भी प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है।

–नियुक्ति की संभावनाएं कई गुना बढ़ींअप्रेंटिसशिप के दायरे को बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 795 नवीन अधिष्ठानों को पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया है। नए पंजीकरण से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण के अवसरों का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर युवाओं को उद्योगों तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही सीएमएपीएस योजनान्तर्गत 6,164 नए अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया है।

–विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को बनाया गया सरलराज्य में कौशल विकास की इस सतत प्रक्रिया का बड़ा परिणाम यह रहा कि बीते लगभग नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में सेवायोजित कराया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

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