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वैश्विक चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भर भारत का बजट

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-विक्रम उपाध्याय

भारत मुश्किलों से निकलना जानता है। यह बात वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-2027 के बजट भाषण में सिद्ध करने की सफल कोशिश की। इस समय जो वैश्विक स्थिति है, उसके नकारात्मक असर से खुद बचाए रखने के साथ आगे बढ़ने का रास्ता बनाने की बड़ी चुनौती भारत के सामने थी। बजट में मोदी सरकार ने यह प्रयास किया है कि दोनों मोर्चों पर भारत को अपनी स्थिति मजबूत करने की नीतियाँ बन जाए। इसलिए इस बजट को आत्मनिर्भर भारत का बजट कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

वित्तमंत्री ने बजट भाषण की शुरुआत ही इससे की कि विशेष संसाधनों की उपलब्धता इस समय काफी मुश्किल है। रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध का जारी रहना, अमेरिका द्वारा दुनिया के एनर्जी संसाधनों को अपने कब्जे में रखने के लिए साम्राज्यवादी तरीकों को अपनाना और चीन द्वारा रेयर अर्थ के नाम पर दुनिया को ब्लैकमेल करना सामान्य घटनाएं नहीं हैं। उस पर भारत के खिलाफ अमेरिका का हाई टैरिफ़ भी मुसीबत के समान है। जाहिर है भारत एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रहा है। अब बजट में इन चुनौतियों से लड़ने का क्या अस्त्र मौजूद है, उस पर निगाह डालते हैं।

भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता पेट्रोलियम पदार्थों के आयात को न्यूनतम करने की थी। क्योंकि अमेरिका भारत पर दवाब ही पेट्रोलियम खरीद को लेकर डाल रहा था। ट्रम्प प्रशासन भारत को किसी भी कीमत पर रूस से सस्ते तेल खरीदने से रोकना चाहता है। 50 प्रतिशत की टैरिफ़ भी इसी के नाम पर लगाया। अब बेनेजुअला से तेल खरीदने का दवाब आ रहा है, जाहिर है भारत को वह रियायत नहीं मिलेगी, जो रूस दे रहा था। ऐसे में भारत के पास यही रास्ता बचता है कि पेट्रोलियम आयात की निर्भरता जितनी कम हो सके किया जाए। इसी को ध्यान में रखकर केंद्रीय बजट 2026-27 में पेट्रोल-एथेनॉल के बाद सीनजी में बायो-गैस ब्लेंडिंग की बड़ी योजना लाई गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब सीनजी में कंप्रेस्ड बायो-गैस यानि सीबीजी की ब्लेंडिंग की घोषणा की है। साथ में घरेलू बायो-एनर्जी के उत्पादन को बढ़ावा देने का भी ऐलान किया है। अब कृषि-अपशिष्ट का इस्तेमाल भी बढ़ेगा और गैस एवं अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का आयात भी कम होगा।

हमारे देश में सबसे ज्यादा पेट्रोल एवं डीजल का उपयोग ट्रांसपोर्ट के लिए होता है और अब जमाना ई एनर्जी का आ रहा है। इस बजट में सरकार ने पेट्रोलियम पर निर्भरता और कम करने के लिए ई-व्हीकल इकोसिस्टम में बड़े विस्तार की घोषणा की है। केंद्र सरकार मैन्युफैक्चरिंग और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने वाले कई प्रावधानों की घोषणा की है। बजट में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए भी ज्यादा से ज्यादा ई-बसों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। बजट में ई बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए 35 अतिरिक्त कैपिटल गुड्स और मोबाइल फोन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए 28 अतिरिक्त कैपिटल गुड्स को छूट वाली कैपिटल गुड्स की लिस्ट में जोड़ दिया गया है। इससे मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक वाहनों दोनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी के घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलना शुरू हो जाएगा। इसके अलावा कोबाल्ट पाउडर, लिथियम-आयन बैटरी के स्क्रैप, लेड, जिंक और 12 अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर से बेसिक कस्टम ड्यूटी को हटाने का भी ऐलान किया गया है। जाहिर है भारत में मैन्युफैक्चरिंग में इससे मदद मिलेगी और रोज़गार के अवसर भी पैदा होंगे।

टेक्नॉलजी क्षेत्र में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती रेयर अर्थ और मैग्नेटिक धातुओं की उपलब्धता को लेकर है। भारत के पास रेयर अर्थ का पर्याप्त भंडार होने के बावजूद इसका उत्पादन बहुत कम है। इस कारण आपूर्ति लगभग नगण्य है। चीन इस मामले में काफी आगे है और वह इस समय दुनिया को ब्लैकमेल कर रहा है। चीन लगभग 270,000 टन का इस समय उत्पादन कर रहा है। इस कारण उसका प्रभुत्व स्थापित हो चुका है। अब चूंकि भारत का उत्पादन वैश्विक उत्पादन के 1 प्रतिशत से भी कम है इसलिए औद्योगिक क्षेत्र में कई कमजोरियाँ सामने आ रही हैं। वित्तमंत्री ने बजट में इसकी कमी दूर करने के लिए बड़े कदम की घोषणा की है। दुर्लभ खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के लिए चार राज्यों- तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में रेयर खनिजों के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर स्थापित करने का ऐलान किया गया है। यदि पर्याप्त मात्रा में रेयर अर्थ का उत्पादन शुरू हो जाता है तो भारत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और यहाँ तक कि फाइटर जेट के उत्पादन में भी आगे हो जाएगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए युद्ध ने भारत के लिए रक्षा उत्पादन में भी आत्मनिर्भर होने का संदेश दिया। हम युद्ध अपनी तकनीक और अपने अस्त्र से ज्यादा कारगर तरीके से लड़ सकते हैं। इस बजट में मोदी सरकार ने इस पर बहुत जोर दिया है। 2026-27 का रक्षा बजट पहली बार जीडीपी के 2 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले रक्षा बजट में 15.19 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई है। बढ़ा हुआ यह आवंटन न केवल नए तकनीक वाले शस्त्रों के निर्माण को बढ़ावा देगा बल्कि आर्म्ड फोर्स के आधुनिकीकरण में भी तेज़ी आएगी। किसी भी आपात स्थिति के लिए देश में ही हथियारों और गोला-बारूदों की आपूर्ति होगी। लगभग 2.19 लाख करोड़ के रक्षा बजट में 1.85 लाख करोड़ तो पूंजीगत अधिग्रहण के लिए रखा गया है। यानि हमारी सभी रक्षा जरूरतों के लिए भरपूर संसाधन उपलब्ध रहेगा। आने वाले समय में हम देखेंगे कि देश में अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी आएंगे, नई उन्नत किस्म की पनडुब्बियां भी होंगी, घातक ड्रोन का उत्पादन भी हमारे यहाँ शुरू हो जाएगा और स्मार्ट हथियार भी यहीं बनेंगे। भारत दुनिया का रक्षा उत्पादन हब बन सकता है।

(लेखक, आर्थिक विषयों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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